“डॉ. बख्श, मरियम और कंदील: मजबूरी, मोहब्बत और अधूरा रिश्ता”
doctor Bakhsh ka gussa देखो मरियम उस वक्त जो कुछ भी मैंने किया वह सिर्फ तुम्हारी जान बचाने के लिए किया। बाकी उसके अलावा मेरे दिल में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है। मुझे तो उस दिन के बाद तुम कभी याद भी नहीं रही थी तुम्हारा फेस तक मुझे याद नहीं था। डॉक्टर बख्श होटल में मरियम के रूम में आकर मरियम से कह रहे थे। मरियम ठीक उनके सामने सोफे पर बैठी हुई थी। अच्छी तरह से जानती हूं डॉक्टर बख्श की आपने उस वक्त मेरी जान बचाने के लिए वह किया था। लेकिन यह बात आप भी अच्छी तरह से जानते हो। कि मैं आपसे पहले से मोहब्बत करती थी। उस दिन तो आपकी पहली बार मुझसे मुलाकात हुई थी। लेकिन मैं जानती आपको पहले से थी। आप भले ही मुझे नहीं जानते थे डॉक्टर बख्श। मरियम की नीली आंखों में आंसू थी। वह ब्लू जींस और वाइट शर्ट पहनी हुई थी। उसकी सुनहरे बाल इस वक्त रबर बैंड की कैद में थे। मुझे इस चीज की खबर नहीं थी और मैं खबर भी नहीं करना चाहता हूं। क्योंकि जब तुम मुझसे मिली थी? उससे पहले मैं अपना दिल किसी को दे चुका था। मैं उस वक्त भी शादीशुदा था। डॉ बक्श अपने कोर्ट को ठीक कर...








