“डॉक्टर बख्श, कंदील और एक छुपा हुआ सच”
मरियम का फोन आने पर डॉक्टर बख्श का माइंड खराब हो गया था।
इस बात को तो उन्होंने भूल से भी नही सोचा था।
के मरियम वापस आ सकती है।
या वो कभी फोन भी कर सकती है।
डॉ बक्श सोच रहे थे के उन्हे आगे क्या करना चाहिए?
क्योंकि मरियम उनका ऐसा पास्ट थी?
इसके बारे में अगर कंदील को पता चल जाता।
तो कंदील फिर से डॉक्टर बख्श से दूर हो जाती हैं।
डॉक्टर बख्श हरगिज ऐसा नहीं होने देना चाहते थे।
डॉक्टर बख्श ने किसी को कॉल लगाया।
दूसरी तरफ से दो-तीन बार बैल बजने के बाद ही कॉल रिसीव हो गयी थी।
हेलो, मरियम जमाल को मेरा फोन नंबर मिल गया है।
कैसे,ये जाकर आप उस हॉस्पिटल वालो से पता किजिए ।
दूसरी तरफ वाले शख्स ने कहा तो डॉक्टर बख्श बोले।
उस अस्पताल वालों ने कैसे मरियम को मेरा फोन नंबर दे दिया यह मेरी प्राइवेसी के खिलाफ है।
ऐसे अगर कोई भी उनसे मेरा फोन नंबर मांगेगा ।
तो क्या वह मेरा फोन नंबर उसको दे देंगे?
फोन उठाते ही डॉक्टर बख्श उस शख्स पर भड़क गए थे।
अरे ऐसे तो अगर कोई आपको इमोशनल ब्लैकमेल करेगा ।तो आप उसकी बातों में आकर किसी की भी प्राइवेसी का ख्याल नहीं करेंगे ।
और उसका फोन नंबर किसी दूसरे शख्स को दे देंगे।
डॉक्टर बख्श ने दूसरी तरफ से कुछ कहा गया तो उसके जवाब में कहा।
मैं कुछ नहीं जानता बस आप यह करो मरियम किसी भी तरह इंडिया नहीं आना चाहिए।
मै कभी नहीं मिलना चाहता हूं उससे।
डॉ बख्श गुस्से में उस शख्स से कह रहे थे।
आप कोशिश करें कि वह किसी भी हाल में मेरे पास न पहुंचे।
डॉक्टर बख्श ने कहकर फोन को कट कर दिया।
किसी भी कीमत पर मरियम इंडिया नहीं आना चाहिए। डॉक्टर बख्श अपने बालों में हाथ फेरने लगे थे।
कंदील का माइन्ड बहुत डिस्टर्ब हो चुका था।
जब से उसे समीर और लाएबा के बारे में पता
चला था।
वह सोच रही थी इस बारे में किसको बताएं जो उसकी हेल्प कर सके।
क्योंकि लाएबा को तो उसकी किसी बात पर यकीन ही नहीं हो रहा था
उसको तो ऐसा लग रहा था?
की कन्दील लाएबा की खुशियों से जलती है।
और एक बात का खुलासा हुआ था।
कंदील पर के लाएबा डॉक्टर बख्श को चाहती थी।
लेकिन उसने कभी यह बात कंदील से नहीं
कही थी।
कंदील अपने रूम में इधर-उधर टहलते हुए यही सोच रही थी।
के मुलाजिमा ने आकर उसे बताया?
कंदील बीबी नीचे डॉक्टर साहब आपका इंतजार कर रहे हैं।
आगा जान और बेगम साहिबा ने आपको नीचे बुलाया है।
वह मुलाजिमा सर झुका कर बोली।
ठीक है मैं आती हूं तुम जाओ।
कंदील ने कहा।
तो वह मुलाजिमा बाहर चली गई।
कंदील भी उसके पीछे-पीछे चल दी।
कंदील टेरिस की सीडीओ में उतर रही थी।
तो उसने देखा डी बख्श मुस्कुरा रहे थे किसी बात पर।
हवेली के सारे लोग डॉक्टर बख्श को घेर कर बैठे हुए थे।
आओ कंदील बेटा आओ।
आगा जान की नजर कंदील पर पड़ी तब उन्होंने कहा।
आगा जान के साथ बाकी लोगों ने और डॉक्टर बख्श ने भी कंदील की तरफ देखा।
कंदील सीडियो से उतरकर आगा जान के पास आ चुकी थी।
ठीक है आगा जान हमें इजाजत दीजिए हम काफी लेट हो गए हैं।
डॉक्टर बख्श ने कहा डॉक्टर बख्श सोफे पर से उठ कर खड़े हो गए बाहर जाने के लिए।
ठीक है बेटा संभाल कर जाना दोनों लोग।
आगा जान ने कहा।
और बेगम साहिबा ने कंदील के सर पर हाथ
फेरा।
कंदील डॉक्टर बख्श बाहर जाने के लिए आगे बढ़े।
बाहर आकर डॉक्टर बख्श ने।
कंदील के लिए कर का गेट खोला।
कंदील खामोशी से कार में बैठ गई।
फिर डॉक्टर बख्श दूसरी साइड का गेट खोल कर, खुद भी गाड़ी में बैठ गए ।
और कार को ड्राइव करने लगे।
डॉ बक्श ने तिरछी नजर करके कंदील की तरफ देखा। कंदील का चेहरा उन्हें कुछ उदास उदास लग रहा था।
कंदील सुबह को जिस स्पीड से खुश होती हुई हवेली आई थी।
इस वक्त डॉक्टर बख्श को कुछ उदास नजर आ रही थी।
आर यू ओके कंदील।
डॉक्टर बख्श ने कंदील से पूछा।
जी आई एम फाइन।
कंदील ने बिना डॉक्टर का बख्श की तरफ देखे कहा।
ओके तुम बोलती हो तो मैं मान लेता हूं यू आर फाइन।
बट तुम्हारे मुरझाए हुए चेहरे को देखकर ऐसा लग रहा है कि कोई बात है।
डॉ बक्श ने कहा।
कंदील ने उनकी बात का जवाब नहीं दिया और गाड़ी के बाहर देखने लगी।
फिर सारे ही रास्ते दोनों में कोई बात नहीं हुई।
वह गाड़ी के बाहर देखती रही और डॉक्टर बख्श गाड़ी को ड्राइव करते रहे।
उतरीए मोहतरमा घर आ गया।
डॉ बख्श ने अपने आलीशान बंगले के आगे गाड़ी को रोकते हुए कहा।
कंदील अपनी तरफ का दरवाजा खोलकर।
बाहर निकल गई।
डॉक्टर बख्श भी गाड़ी का दरवाजा खोलकर बाहर आ गए थे।
जब कंदील और डॉक्टर बख्श बंगले के अंदर दाखिल हुए तो कंदील ने देखा कि।
डॉक्टर बख्श की मॉम बहुत बेताबी से उन दोनों का इंतजार कर रही थी।
आ गई मेरी बेटी।
तुम्हें नहीं पता पूरा दिन आज मैंने तुम्हें कितना मिस किया है कंदील।
वह उसे गले लगाते हुए बोले।
मैंने भी आपको मिस किया मॉम।
कंदील मुस्कुरा कर कह रहे थे।
मोम में जाकर चेंज कर लेती हू और फ्रेश हो जाती हू।
मुझे अनकंफरटेबल फील हो रहा है।
कंदील ने कहा।
इस वक्त उसका दिल मचला रहा था ।
ऐसा लग रहा था कि उसे उल्टियां होने वाली है।
हां हां बेटा जरूर जाओ।
उन्होंने कन्दील से कहा।
डॉ बख्श ने नोट किया कि वह तेज तेज चल रही थी।
मैं भी चलता हूं मॉम, सोने आज बहुत थकान हो रही है ।मुझे।
डॉ बख्श ने भी अपनी मॉम से कहा।
ओके बेटा मैं समझ सकती हूं।
उन्होंने मुस्कुराते हुए डॉक्टर बख्श से कहा।
डॉक्टर बख्श भी कंदील के पीछे चल दिए।
रूम में आते ही कंदील डायरेक्ट वॉशरूम में गई।
और उसे उल्टी होना शुरू हो गई।
डॉक्टर बख्श जब रूम में दाखिल हुए तो उन्होंने कंदील की उल्टियां की आवाज सुन ली।
वह समझ गए कि वह इतनी तेज क्यों चल रही थी?
कुछ देर बाद वॉशरूम का दरवाजा खोलने की आवाज आई डॉक्टर बख्श ने वॉशरूम के दरवाजे की तरफ देखा ।
कंदील वहां खड़ी थी।
उसके चेहरे से हवाएं उड़ रही थी।
वह खुद को संभालती ही वॉशरूम से आई।
और बैड पर आकर दह सी गई।
आर यू ओके ना।
डॉक्टर बख्श उसके नजदीक बैठते हुए बोले।
हममम कंदील ने अपनी गर्दन हिला दी।
कैसा महसूस कर रही हो अब तुम कंदील ?
डॉक्टर बख्श ने उसके बालों को ठीक करते हुए कहा।
उल्टी आने के बाद थोड़ा ठीक महसूस हो रहा है।
कंदील ने कहा।
ठीक है कल हॉस्पिटल चलकर अपना चेकअप करवाना और दवाइयां टाइम पर लेना।
डॉक्टर बख्श उसे कंधों से पकड़ कर बैड पर लिटाते हुए बोले।
उल्टियां होने की वजह से एकदम से वह निढाल सी हो गई थी।
कंदील गौर से डॉक्टर बख्श को देखने लगी।
वाकीमें डॉक्टर बख्श की शख्सियत और पर्सनालिटी ऐसी थी के कोई भी उनका दिवाना बन सकता था।
वह हर एंगल से परफेक्ट थे।
अगर लाएबा भी उनकी दीवानी थी तो क्या हुआ।
कंदील तुझे बुरा क्यों लग रहा है।
तू तो नफरत करती है ना डॉक्टर बख्श से?
तो क्या फर्क पड़ता है इस बात का तेरे ऊपर?
के लाएबा लाईक करती है तेरे हस्बैंड को
कंदील के अंदर से आवाज आ रही थी।
कंदील को यह जानकर बहुत बुरा लग रहा था।
कि लाएबा भी डॉक्टर बख्श को पसंद करती थी।
जो नफरत कंदील डॉक्टर बख्श को दिखाने की कोशिश कर रही थी ।
वह नफरत नहीं थी अस्ल में वह सिर्फ डॉक्टर बख्श के लिए गुस्सा था कंदील के दिल में।
आज कंदील को लाएबा के ऊपर बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था।
नही ये मेरे हस्बैंड है इन्हे मेरे आलावा कोई उस नजर से नही देख सकता कंदील अपने दिल मे सोच रही थी।
Continue,,,,,,
🔹 . Is Kahani Me Aage Kya Ho Sakta Hai? (Natural Progress)
Kandeel ko dheere-dheere shak hone lagta hai ke Doctor Bakhsh kuch chhupa rahe hain.
Maryam ka naam dobara kahani me pressure create karega.
Kandeel aur Laiba ke beech emotional confrontation hoga.
Doctor Bakhsh ka past aur present takraayega.
Kandeel samjhegi ke gussa asal me mohabbat aur insecurity ka doosra naam hota hai.
🔹 . Is Kahani Se Hame Kya Sikh Milti Hai
💔 Jo baatein chhupayi jati hain, wahi sabse zyada damage karti hain
🤍 Mohabbat sirf pyaar nahi, bharosa bhi hoti hai
🔥 Possessiveness kabhi-kabhi darr se paida hoti hai
🌑 Past se bhaagne se problem khatam nahi hoti
🌱 Sach chahe dard de, lekin clarity zaroor deta hai
🔹 . Next Short Part (Continuation)
Next Short Part – “Unspoken Fear”
Kandeel ne karwat badli.
Doctor Bakhsh uske bilkul paas so rahe the,
lekin aaj unki saanson ki qurbat bhi
usey sukoon nahi de rahi thi.
Uske dimag me sirf ek hi sawaal ghoom raha tha —
“Aakhir Maryam ka naam unke chehre par itna khauf kyun le aata hai?”
Kandeel ne aankhein band ki,
lekin dil jaagta raha.
Aur kahin door…
ek purana raaz phir se saans lene laga.
🔹 . Readers Ke Liye Shukriya SMS (End Note)
Thank You Message (Urdu-Hindi Touch):
Is kahani ko padhne ke liye dil se shukriya 🤍
Agar is kahani ka koi hissa
aapko apni zindagi ke kareeb laga ho,
to samajhiye ye likhai apna maqsad poora kar gayi.
Aap jaise readers hi
kahaniyon ko zinda rakhte hain.
Shukriya… is safar ka hissa banne ke liye ✨
https://www.indiapulsedaily.com/2026/01/between-snow-and-silence-love-story.html
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