“अनकही इजाज़त की एक रात | मोहब्बत, ख़ामोशी और एहसास की दास्तान”
1 मिनट कंदील मुझे कुछ याद आ गया।
डॉक्टर बख्श कंदील को बैड पर छोड़कर अलमारी की जानिब जाने लगे।
तब तक कन्दील भी उठ कर बैठ चुकी थी।
डॉक्टर बख्श ने अलमारी खोलकर एक बॉक्स निकाला जो पैक था।
वो बॉक्स हाथ में लेकर वह कंदील के पास आने लगे।
ओन्ली फॉर यू कंदील।
उन्होंने वह गिफ्ट कंदील की तरफ बढ़ते हुए कहा।
मगर इसमें क्या है सैफ?
कंदील ने वह गिफ्ट डॉक्टर बख्श के हाथ से लेकर सवालिया नजरों से डॉक्टर बख्श की तरफ देखते हुए पूछा।
तुम्हारे लिए गिफ्ट है तो खुद ही खोल कर देख लो क्या है इसमें?
डॉक्टर बख्श शरारती लहजे में मुस्कुरा रहे थे।
कंदील ने गिफ्ट की पैकिंग हटाकर उसे डिब्बे को खोलकर देखा।
तो शॉक्ड हो गई।
उसमें ब्लैक कलर की शॉर्ट नाइटी थी।
जो कंदील के घुटनों तक ही आती।
कंदील ने उस नाइटी खोलकर उसको ऊपर से नीचे तक देखा।
और बिना देर किया वह नाइटी वापस बॉक्स में रख दी।
और उस डिब्बे का ढक्कन भी बिना देर किए से बंद कर दिया।
बहुत बेशर्म है आप मुझे नहीं चाहिए आपका गिफ्ट यह लीजिए।
उसने वह बॉक्स डॉक्टर बख्श के हाथ में थमाते हुए कहा।
डॉक्टर बख्श को कंदील की हरकत पर हंसी दबाना मुश्किल हो गई थी।
क्यों यार क्या दिक्कत है इसमें कितनी प्यारी ड्रेस तो है यह?
और तुम पर तो बहुत जचेगी ये ड्रेस।
डॉक्टर बख्श उसे छेड़ते हुए बोले।
मै नही पहनती इस तरह के कपड़े मुझे नहीं चाहिए।
कंदील ने सीने पर हाथ बांध के मुंह दूसरी तरफ घुमा लिया।
कंदील को डॉक्टर बख्श से इस बोडनेस की उम्मीद नहीं थी। उसे नहीं पता था कि वह उसको इस तरह का कोई गिफ्ट दे सकते हैं।
अपने लिए ना सही मेरे लिए तो पहन सकती हो ना कंदील।
डॉ बख्श ने थोड़ी से पकड़ कर कंदील के मुंह पर अपनी तरफ घुमाते हुए कहा।
क्यों मैं आपके लिए क्यों पहनू ये ड्रेस?
कंदील ने अपनी बड़ी-बड़ी काली आंखों से डॉक्टर बख्श की तरफ देखता हुए कहा।
क्योंकि मेरा दिल कर रहा है तुम्हें इस ड्रेस में देखने के लिए?
डॉ बख्श बहुत ही इत्मीनान से बोले।
लेकिन मैं नहीं पहनती ऐसे कपड़े।
कन्दील ने कहा।
नहीं पहनती तो पहन लो यार मेरे लिए प्लीज।
डॉक्टर बख्श उस रिक्वेस्ट करने लगे।
डॉक्टर बख्श आप बच्चों की तरह जिद कर रहे हैं।
कहा ना मैं यह नहीं पहन सकती हूं।
कंदील की समझ में नहीं आ रहा था डॉक्टर बख्श उसे इतनी जिद क्यों कर रहे थे इस नाइटी को पहनने के लिए?
कंदील वो नाइटी उठाकर वॉशरूम की जानिब जाने लगी। अब वो क्या करती थी डॉक्टर बख्श की बात मानना जरूरी थी ।
क्योंकि वह उससे बहुत ज्यादा रिक्वेस्ट कर रहे थे?
कंदील ने वह नाइटी तो पहन ली थी ।
लेकिन उसे बाहर आने मे बहुत अनकंफरटेबल फील हो रहा था।
उसे बहुत शर्म लग रही थी डॉक्टर बख्श के सामने इस नाइटी को पहनकर आने में।
आर यू ओके कंदील।
जब 15 मिनट में कंदील बाहर नहीं आई।
तो डॉक्टर बख्श ने उसे आवाज लगाकर कहा।
हा, जी डॉक्टर बख्श मै ठीक हू।
कंदील ने वॉशरूम से आवाज लगाते हुए कहा।
ठीक है तो बाहर आ जाओ काफी वक्त हो गया तुम्हें अंदर गए हुए।
डॉ बख्श ने कहां?
ऊफफफफ डॉक्टर बख्श ना जाने क्या-क्या करवाएंगे मुझसे?
कंदील बड़बड़ाते हुए वॉशरूम के दरवाजे से बाहर निकली।
डॉ बख्श ने जैसे ही वॉशरूम के दरवाजे की आवाज सुनी उन्होंने पलट कर वॉशरूम की तरफ देखा।
वो कंदील को देखकर ठिठक गए थे।
कंदील शॉर्ट ब्लैक नाइटी में बहुत क्यूट लग रही थी।
उसकी संगमरमर जैसी रंगत उस नाइटी मे दिख रही थी।
खुले हुए काले खूबसूरत बाल और ज्यादा हसीन लग रहे थे।
डॉ बख्श बिना पलके झपकाए बस कंदील एकटुक देखे जा रहे थे।
कंदील ने जब महसूस किया के डॉक्टर बख्श उसे ही तके जा रहे है?
कंदील अपने हाथों को अपने घुटनों को
ढकने की कोशिश कर ने लगी।
डॉक्टर बख्श चलते हुए कंदील के
नजदीक आए।
कंदील मुझसे शर्माने की जरूरत नहीं है मै शौहर हू तुम्हारा।
डॉ बख्श कंदील के कंधों पर अपने हाथों को रखते हुए बोले।
यू लुकिंग सो ब्यूटीफुल कंदील।
डॉ बक्श ने कहा।
कंदील ने शरमाते हुए अपने मुंह को नीचे कर
लिया।
आज फिर तुम मुझे मेरे कंट्रोल से बाहर कर रही हो।
डॉ बख्श ने कहा।
कंदील ने आंखों को बड़ा करते हुए डॉक्टर बख्श की तरफ देखा।
ऊफफफफफ कंदील
तुम्हारा इस तरह देखना बस मुझे मार डालता है।
डॉक्टर बख्श ने कहा।
डॉक्टर बख्श का एक हाथ पहले ही कंदील के कन्धे पर था।
डॉक्टर बख्श का दूसरा हाथ कन्दील की कमर पर रखा।
कंदील को अपनी बाहों में उठा लिया।
क्या कर रहे हैं आप सैफ?
कंदील जो इस नई आने वाली आपत से बिल्कुल अनजान थी।
डॉक्टर बख्श की इस हरकत पर हैरान हो गई।
कंदील इन लम्हो को जीना चाहता हू मै तो प्लीज कुछ मत बोलो।
डॉक्टर बख्श की निगाह कंदील पर थी।
कंदील भी डॉक्टर बख्श को ही देख रही थी।
कंदील इस वक्त डॉक्टर बख्श की बाहो मे बच्ची लग रही थी।
डॉक्टर बख्श आहिस्ता चल रहे थे।
कंदील के दोनो हाथ डॉक्टर बख्श के गले मे डले हुए थे।
दोनो की नजरे एक दूसरे से सवाल जवाब कर रही थी।
डॉक्टर बख्श ने कंदील को बैड पर लाकर लिटा दिया।
कंदील ये रात और हसीन हो सकती है अगर तुम चाहो तो
डॉक्टर बख्श ने कंदील के हाथ पर बोसा देते हुए कहा
कंदील का दिल बहुत तेज धड़क रहा था।
कंदील करवट बदलकर तेज तेज सासे लेने लगी।
डॉक्टर बख्श ने देखा कंदील ने करवट बदल ली है।
तो डॉक्टर बख्श वहा से हट कर सोफे पर जाकर बैठ गए।
वो सोफे पर बैठकर कंदील को देखने लगे।
डॉक्टर बख्श ऐसा कुछ नही करना चाहते थे।
जिसमे कंदील की मर्ज़ी शामिल नही हो।
कंदील को जब महसूस हुआ के डॉक्टर बख्श उसके नजदीक नही है।
तो उसने करवट बदलकर देखा सामने सोफे पर डॉक्टर बख्श बैठे थे और कंदील की तरफ ही देख रहे थे।
कंदील ने कुछ सोचती हुई बैड से नीचे कदम रखा।
और डॉक्टर बख्श के नजदीक आ गई।
क्या हुआ सैफ आप यहा क्यो आ गए।
कंदील बोली।
क्योकी मुझसे कुछ गुस्ताखी हो जाती कंदील जो तुम बर्दाश्त नही कर पाती।
डॉक्टर बख्श ने कंदील को हाथ से पकड़कर अपनी थाईस पर बैठाते हुए कहा।
कंदील खामोश नजरो से डॉक्टर बख्श की तरफ देखने लगी।
🔹 इस कहानी में आगे क्या हो सकता है?
भरोसा गहराने की कड़ी (Trust Deepening Arc)
सैफ का पीछे हटना कंदील के दिल में एक गहरा भरोसा पैदा करेगा —
उसे एहसास होगा कि यह सिर्फ़ जज़्बात नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी भी है।
कंदील का जज़्बाती बदलाव (Emotional Shift)
जब उसे समझ आएगा कि सैफ उसकी मर्ज़ी के बिना कुछ भी नहीं चाहता,
तब उसके दिल का डर धीरे-धीरे मोहब्बत में बदलने लगेगा।
आपसी समझ का पल (Mutual Understanding Moment)
आगे चलकर एक ख़ामोश बातचीत होगी,
जहाँ दोनों बिना शोर, बिना किसी मजबूरी के
अपनी हदें और उम्मीदें एक-दूसरे को समझेंगे।
🔹 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
मोहब्बत सिर्फ़ चाहने का नाम नहीं, समझने का नाम भी है
शादी के रिश्ते में रज़ामंदी सबसे अहम होती है
जो शख़्स वक़्त पर रुकना जानता है, वही सच्ची मोहब्बत करता है
ख़ामोशी भी कभी-कभी सब कुछ कह जाती है
🔹 अगला छोटा हिस्सा (Mini Continuation)
शॉर्ट पार्ट: “ख़ामोश फ़ैसला”
कंदील कुछ पल सैफ को देखती रही।
उसकी आँखों में अब डर कम था,
और सोच ज़्यादा।
सैफ ने कुछ नहीं कहा —
बस वहीं बैठा रहा,
जैसे फ़ैसला उसका नहीं,
उसका हो।
कंदील ने धीरे से हाथ बढ़ाया।
सैफ ने उसकी तरफ़ देखा,
सवाल भरी निगाहों से।
कंदील ने बस इतना कहा,
“आज… बस बैठिए।”
सैफ मुस्कुरा दिया।
कभी-कभी
सबसे गहरी मोहब्बत
इंतज़ार होती है।
🔹 रिडर्स के लिए शुक्रिया sms (End Note)
“इस कहानी को पढ़ने के लिए दिल से शुक्रिया।
अगर आपको किरदारों के जज़्बात, उनकी उलझनें
और एक-दूसरे के लिए उनका एहतराम महसूस हुआ,
तो समझिए कहानी ने अपना मक़सद पूरा कर लिया।
आपका पढ़ना ही लिखने का सबसे बड़ा हौसला है।”
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