Rahe bismill, Part 12: गोलियों की बारिश, अस्पताल की जंग और एक अनजानी मोहब्बत | Emotional Thriller Hindi Novel
पिछले भाग में आपने पढ़ा... रमना पहली बार इख़्तियार साहब से मुलाक़ात करती है। बिज़नेस से जुड़ी बातचीत के दौरान इख़्तियार साहब, रमना की समझदारी, आत्मविश्वास और काम करने के अंदाज़ से काफ़ी प्रभावित होते हैं और उसके साथ काम करने के लिए अपनी रज़ामंदी दे देते हैं। वहीं दूसरी तरफ़, शबे नूर अपने वालिदैन की क़ब्र पर बैठकर घंटों अपने दर्द को आँसुओं में बहाती रहती है। वापस लौटते वक़्त, जैसे ही वह अपनी गाड़ी में बैठने वाली होती है, अचानक एक अजनबी शख़्स उसे अपनी तरफ़ खींचकर अपनी गाड़ी में बैठने का हुक्म देता है। शबे नूर कुछ समझ पाती या उससे कोई सवाल करती, उससे पहले ही चारों तरफ़ गोलियों की तड़तड़ाहट गूँज उठती है। उस अजनबी की जान पर हमला हो चुका था, और अनजाने में शबे नूर भी उस ख़ूनी खेल का हिस्सा बन जाती है। अब आगे... शबे नूर को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। आख़िर कौन था वह शख़्स? और ये गोलियाँ आखिर किसके लिए तबाड़-तोड़ चलाई जा रही थीं? हर तरफ़ अफ़रा-तफ़री मची हुई थी। वह अजनबी शख़्स शबे नूर के इतने क़रीब था, जितना आज तक कोई भी नहीं आया था। उसका सिर बार-बार उसके लंबे, चौड़े सीने से टकरा रहा था, ...






