Rahe Bismill: Shabe Noor और अंजान शख़्स का रहस्य | Suspense Hindi Novel
“देखिए मिस... आप मेरी बात समझने की कोशिश कीजिए। मेरी मजबूरी थी आपको अपनी wife बताना।”
उस शख़्स की नज़रें एकटक Shabe Noor के चेहरे पर टिकी हुई थीं।
न जाने क्यों...
उसका दिल चाह रहा था कि वह एक लम्हे के लिए भी Shabe Noor से अपनी नज़रें न हटाए।
मगर Shabe Noor उसकी निगाहों से और भी घबरा रही थी।
“देखिए जनाब... आप जो कोई भी हैं, मेरे रास्ते से हटिए। मुझे अपने घर जाना है।”
उसकी आवाज़ में घबराहट साफ़ थी।
“मेरे घरवाले बहुत परेशान हो रहे होंगे।”
Shabe Noor की बात सुनकर उस शख़्स ने एक क़दम उसकी तरफ़ बढ़ाया।
मगर उसके क़रीब आते ही Shabe Noor पीछे हट गई।
उसके ज़ेहन में कुछ घंटे पहले का वह ख़ौफ़नाक मंज़र फिर से ज़िंदा हो गया—
जब उस शख़्स ने उसका हाथ पकड़कर उसे ज़बरदस्ती गाड़ी में खींच लिया था...
और उसके कुछ ही लम्हों बाद ताबड़तोड़ गोलियों की आवाज़ें गूँजने लगी थीं।
Shabe Noor के दिल में फिर वही डर उतर आया।
उसे लग रहा था जैसे सामने खड़ा यह शख़्स कोई मुजरिम हो।
“आप... आप मेरे क़रीब मत आइए!”
उसने घबराकर कहा।
“वरना मैं चिल्लाऊँगी!”
वह शख़्स वहीं रुक गया।
उसने हैरत से Shabe Noor को देखा।
“क्या कहा? आप चिल्लाएँगी?”
उसके चेहरे पर हैरानी साफ़ थी।
“मगर मैंने क्या किया है आपके साथ?”
Shabe Noor ने उसकी तरफ़ ग़ुस्से और डर से देखा।
“आपकी... आपकी वजह से आज मैं इस अस्पताल के बेड पर हूँ!”
उसकी आवाज़ काँप रही थी।
“अगर आपने मेरा हाथ न खींचा होता... तो ये सब नहीं होता।”
वह कुछ कहने ही वाला था कि Shabe Noor को अचानक कुछ याद आया।
उसकी आँखें फैल गईं।
“मेरा फ़ोन...!”
उसने बेचैनी से इधर-उधर देखा।
“मेरा फ़ोन कहाँ है?”
फिर अचानक उसकी नज़र उस शख़्स पर टिक गई।
“आपने... आपने मेरा फ़ोन कहीं छुपा दिया है ना?”
वह शख़्स कुछ पल उसे देखता रहा।
फिर उसने हैरानी से कहा—
“अरे नहीं, मोहतरमा! मैं ऐसा क्यों करूँगा?”
“आपका फ़ोन मेरे किस काम का?”
Shabe Noor ने उसकी बात पर भरोसा नहीं किया।
“झूठ मत बोलिए!”
वह बोली।
“मेरा फ़ोन मुझे वापस चाहिए।”
उस शख़्स ने एक गहरी साँस ली।
उसका दिल चाह रहा था कि इस लड़की की इन अजीबो-ग़रीब बातों पर अपना सिर पीट ले।
अभी कुछ देर पहले उस पर अपनी ज़िंदगी बर्बाद करने का इल्ज़ाम लगा रही थी...
और अब फ़ोन चोरी करने का भी इल्ज़ाम उसी के सिर मढ़ रही थी।
उसने बेबसी से अपनी आँखें बंद कीं।
“या अल्लाह...”
फिर धीमे से बोला—
“ये लड़की मुझे चैन से जीने भी देगी या नहीं...?”
पुलिस स्टेशन,,,,,,,
“देखिए, ऑफ़िसर... आपने जो कुछ पूछना था, मैं सब बता चुका हूँ। अब आप जल्द से जल्द Shabe Noor को ढूँढिए।”
Umar Jamal की आवाज़ में बेचैनी साफ़ झलक रही थी।
ऑफ़िसर ने उसे यक़ीन दिलाते हुए कहा—
“हम पूरी कोशिश करेंगे आपकी cousin को ढूँढने की।”
“जी... आपसे यही उम्मीद है।”
Umar ने भारी आवाज़ में कहा और अपने वालिद, इख़्तियार Jamal के साथ पुलिस स्टेशन से बाहर निकल आया।
लेकिन पुलिस स्टेशन से बाहर आने के बाद भी उसका ज़हन बिल्कुल सुकून में नहीं था।
उसके दिमाग़ में बार-बार सिर्फ़ एक ही सवाल घूम रहा था—
Shabe Noor अपने वालिदैन की क़ब्र पर क्यों गई थी?
आख़िर ऐसा क्या हुआ था कि उसने किसी को बताए बग़ैर वहाँ जाने का फ़ैसला किया?
Umar को अपने ही लफ़्ज़ याद आने लगे...
वो लफ़्ज़ जो उसने Shabe Noor से कहे थे।
उसे अपने उन लफ़्ज़ों पर ख़ुद से ग़ुस्सा आ रहा था।
शायद उसे उस वक़्त इतना सख़्त नहीं होना चाहिए था।
मगर...
उसने कभी Shabe Noor को उस नज़र से देखा ही नहीं था।
उसके लिए Shabe Noor हमेशा से बस एक मासूम-सी, शरीफ़ और फ़रमाबरदार लड़की थी।
बचपन से उसके सामने बड़ी हुई...
उसकी दोस्त...
उसके घर आने वाली एक अपनी-सी लड़की।
उसने कभी सोचा ही नहीं था कि उसके दिल में Umar के लिए क्या था।
और अब...
जब Shabe Noor अचानक उसकी ज़िंदगी से इस तरह ग़ायब हो गई थी,
तो Umar को पहली बार महसूस हो रहा था कि शायद...
वह उसे जितना समझता था, Shabe Noor के दिल में उससे कहीं ज़्यादा कुछ छुपा हुआ था।
Hospital me,,,,
“प्लीज़... प्लीज़, इतनी तेज़ आवाज़ में बात मत कीजिए।”
उस शख़्स ने बेचैनी से कहा।
“अगर डॉक्टर या नर्स आ गईं, तो बहुत बड़ी मुश्किल हो जाएगी।”
मगर Shabe Noor का डर और ग़ुस्सा दोनों अपनी जगह थे। वह उसकी बात सुनने को तैयार नहीं थी।
वह शख़्स उसके कहने के बावजूद पीछे नहीं हटा।
“देखिए, मैं आपको समझा रही हूँ कि मेरे क़रीब मत आइए!”
Shabe Noor ने सख़्त लहजे में कहा।
वह बेड से उठने लगी।
तभी अचानक उस शख़्स की नज़र कमरे में रखी मेज़ पर पड़े बैंडेज पर गई।
उसने बिना देर किए बैंडेज उठाया और Shabe Noor के पास पहुँचा।
Shabe Noor कुछ समझ पाती, उससे पहले ही उसने बैंडेज उसके होंठों पर रख दिया।
“बस... मोहतरमा।”
उसने धीमी आवाज़ में कहा—
“अब आपकी बक-बक थोड़ी देर के लिए बंद हो जाएगी... और आप मेरी बात ख़ामोशी से सुन सकेंगी।”
Shabe Noor ने हैरत से उसकी तरफ़ देखा।
उसकी आँखों में ग़ुस्सा साफ़ दिखाई दे रहा था।
मगर इस बार वह कुछ कह नहीं सकी।
वह शख़्स कुछ पल उसे देखता रहा, फिर धीमे लहजे में बोला—
“अब अगर आप मेरी बात ध्यान से सुनेंगी... तो शायद आपको समझ आएगा कि मैंने आख़िर ऐसा क्यों किया।”
Shabe Noor की आँखों में अब भी सवाल थे...
और शायद उन सवालों के जवाब उसकी पूरी ज़िंदगी बदलने वाले थे।
🔮 कहानी में आगे क्या हो सकता है?
Shabe Noor उस शख़्स से उसके बारे में सच जानने की कोशिश करेगी।
वह शख़्स अपनी असली पहचान बताने से अभी भी बच सकता है।
Shabe Noor को धीरे-धीरे एहसास हो सकता है कि उसने उसे नुकसान पहुँचाने के बजाय उसकी जान बचाई थी।
दूसरी तरफ़ Umar Jamal लगातार Shabe Noor को तलाश करता रहेगा।
पुलिस को ऐसा सुराग मिल सकता है जिससे Shabe Noor के गुम होने और क़ब्रिस्तान की घटना का राज़ खुलने लगे।
सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि वह अंजान शख़्स आख़िर कौन है और Shabe Noor की ज़िंदगी में उसका क्या रिश्ता बनने वाला है?
🌙 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
मुश्किल हालात में डर और ग़ुस्सा इंसान से ऐसे फ़ैसले करवा सकते हैं, जिनका बाद में पछतावा होता है। इसलिए किसी भी इंसान के बारे में पूरी सच्चाई जाने बिना फ़ैसला नहीं करना चाहिए। साथ ही, किसी की मदद करने के बावजूद उसकी इज़्ज़त, मरज़ी और हदों का ख़याल रखना ज़रूरी है।
📚 Next Short Part
Shabe Noor की आँखें अब भी उस शख़्स पर टिकी थीं।
उसके होंठों पर बैंडेज लगा था और वह ग़ुस्से से उसे घूर रही थी।
उस शख़्स ने गहरी साँस ली।
“अब मेरी बात सुनिए...”
उसने धीमे से कहा।
“मैंने आपको अपनी wife इसलिए नहीं कहा था कि मैं आपकी ज़िंदगी में कोई हक़ जताना चाहता हूँ।”
Shabe Noor की आँखों में सवाल और गहरा हो गया।
उसने धीरे से बैंडेज हटाया।
“तो फिर... सच क्या है?”
उस शख़्स ने कुछ पल उसकी तरफ़ देखा।
फिर कमरे के दरवाज़े की तरफ़ निगाह डाली और बहुत धीमी आवाज़ में बोला—
“क्योंकि अगर उस रात पुलिस को मेरी असली पहचान पता चल जाती...”
वह अचानक रुक गया।
Shabe Noor की धड़कन तेज़ हो गई।
“तो...?”
उसने बेचैनी से पूछा।
वह शख़्स उसकी आँखों में देखते हुए बोला—
“तो शायद आज मैं भी ज़िंदा नहीं होता।”
Shabe Noor के चेहरे से ग़ुस्सा एक पल के लिए ग़ायब हो गया।
आख़िर ऐसा क्या राज़ था उसकी पहचान में...
जिसकी वजह से उसकी जान को ख़तरा था?
💌 Readers के लिए शुक्रिया SMS
मेरे प्यारे पाठकों, ❤️
Rahe Bismill को अपना कीमती वक़्त देने और हर नए हिस्से को इतना प्यार देने के लिए दिल की गहराइयों से शुक्रिया। आपकी मोहब्बत, कमेंट्स और दुआएँ मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं। 🥰
उम्मीद है आप इसी तरह इस कहानी के सफ़र में मेरे साथ बने रहेंगे। आने वाले हिस्सों में कई राज़ खुलने वाले हैं और कहानी एक नए मोड़ पर पहुँचने वाली है।
इंशा अल्लाह, इस कहानी का अगला हिस्सा 31/08/2026 को रात 12 बजे ब्लॉग पर प्रकाशित होगा। ❤️
तब तक अपना ख़याल रखिए और दुआओं में याद रखिए।
— Afsana Wahid
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