Rahe Bismill Part: झूठी Wife और अंजान लड़की का राज़ | कौन पहुँच गया अस्पताल?

 



पिछले हिस्से में आपने पढ़ा...

एक अंजान शख़्स Shabe Noor को अस्पताल लेकर जाता है। उसने Shabe Noor की जान बचाई थी।

दूसरी तरफ़ Umar Jamal और उसके वालिद इख़्तियार Jamal को पुलिस ने बुलाया था।

पुलिस को Shabe Noor के अगवा होने के कुछ सुबूत मिले थे।

आख़िर वो सुबूत क्या थे?

क्या पुलिस Shabe Noor तक पहुँच पाएगी?

और क्या Umar को अपनी Shabe Noor के बारे में कोई सुराग मिल सकेगा?




अब आगे पढ़िए...


फ़ोन पहचानते ही इख़्तियार साहब ने कहा—


“जी... ये Shabe Noor का ही फ़ोन है।”


Umar का दिल ज़ोर से धड़क उठा।


तो क्या Shabe Noor अपने वालिदैन की क़ब्र पर गई थी...?


यह ख़याल ही उसके दिल को चीर गया।


“जहाँ से ये फ़ोन मिला है, उसके आसपास उस लड़की की तलाश करो।”


ऑफ़िसर ने सिपाहियों को हुक्म दिया।


“जी, सर!”


सिपाही फ़ौरन हरकत में आ गए और क़ब्रिस्तान के आसपास Shabe Noor की तलाश शुरू कर दी।


मगर Umar...


वह वहीं खड़ा रह गया।


उसकी आँखें क़ब्रिस्तान के उस रास्ते पर जमी हुई थीं, जहाँ से Shabe Noor के मिलने की उम्मीद थी।


उसके दिल में इस वक़्त बस एक ही दुआ थी—


“या अल्लाह... मेरी Shabe Noor को सलामत रखना।”


लेकिन शायद Umar ख़ुद भी नहीं जानता था कि उसके दिल से निकली यह दुआ उसके अंदर छुपे उस एहसास को ज़ाहिर कर रही थी, जिसे वह ख़ुद से भी छुपाता आया था।


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कुछ साल पहले...


Shabe Noor, इख़्तियार जमाल के एक बेहद क़रीबी दोस्त की इकलौती बेटी थी।


उसके वालिद शहर के जाने-माने और कामयाब बिज़नेस मैन थे। दौलत और शोहरत की उनके पास कोई कमी नहीं थी, मगर अपनी बेटी के लिए उनके दिल में सबसे ज़्यादा मोहब्बत थी।


Shabe Noor अक्सर अपने वालिदैन के साथ इख़्तियार जमाल के बंगले पर आया करती थी।


और वहीं से उसकी और Umar की दोस्ती की शुरुआत हुई थी।


दोनों बचपन से एक-दूसरे को जानते थे।


कभी साथ खेलना...


कभी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ना...


और फिर कुछ ही देर बाद एक-दूसरे को मना लेना।


उनकी दोस्ती में एक अजीब-सी मासूमियत थी।


Umar, Shabe Noor से उम्र में थोड़ा बड़ा था और हमेशा उसका ख़याल रखता था।


अगर Shabe Noor कहीं गिर जाती, तो सबसे पहले Umar ही उसकी तरफ़ दौड़कर जाता।


अगर कोई उसे परेशान करता, तो Umar उसके सामने दीवार बनकर खड़ा हो जाता।


और शायद...


उसी बचपन की मासूम दोस्ती ने Shabe Noor के दिल में कब मोहब्बत का रूप ले लिया, उसे ख़ुद भी पता नहीं चला।


वक़्त गुज़रता गया।


बचपन पीछे छूट गया...


और दोनों जवानी की दहलीज़ पर आ खड़े हुए।


लेकिन Shabe Noor के दिल में Umar के लिए वह एहसास आज भी वैसा ही था।


बल्कि अब पहले से कहीं ज़्यादा गहरा।


वह Umar को सिर्फ़ अपना सबसे अच्छा दोस्त नहीं मानती थी...


वह उसे अपनी ज़िंदगी का हमसफ़र मान चुकी थी।


मगर Umar...


उसके दिल में क्या था?


क्या वह भी Shabe Noor को उसी नज़र से देखता था?


या फिर Shabe Noor की मोहब्बत सिर्फ़ एकतरफ़ा थी?


आज क़ब्रिस्तान की ख़ामोशी में इन सवालों के जवाब कहीं छिपे हुए थे...


और शायद Shabe Noor का गुम होना सिर्फ़ एक हादसा नहीं था।


क्योंकि जिस जगह उसका फ़ोन मिला था...


वहीं से एक ऐसा राज़ सामने आने वाला था, जो Umar और Shabe Noor के बचपन से जुड़े रिश्ते की पूरी तस्वीर बदल सकता था।




Hospital me wo anjaan shaks,


वह उस अंजान लड़की का दुपट्टा अपने हाथों में थामे हुए था और बार-बार उसी लम्हे को याद कर रहा था, जब उसे बचाने के लिए वह गाड़ी में उसकी तरफ़ झुक गया था।


उस लड़की की बड़ी-बड़ी काली आँखें...


जिनमें न जाने कितने सवाल तैर रहे थे।


वे आँखें अब भी उसके ज़हन में ज़िंदा थीं।


उसके काँपते हुए होंठ...


और वह बेदाग़, गोरा चेहरा।


सफ़ेद रंग के लिबास में वह किसी अफ़सरा से कम नहीं लग रही थी।


कुछ पलों के लिए वह उस अंजान लड़की में ही खो गया था।


और अब भी उसका दुपट्टा हाथ में थामे हुए, वह उसी के बारे में सोच रहा था।


तभी एक नर्स उसके पास आकर रुकी।


“Excuse me, sir... वो लड़की आपकी कौन है?”


“मेरी... कौन है?”


वह अचानक सोच में पड़ गया।


आख़िर क्या जवाब देता?


“जल्दी बताइए प्लीज़, sir,” नर्स ने दोबारा कहा।


अगर वह पूरी बात तफ़सील से बता देता, तो वह ख़ुद मुश्किल में फँस जाता।


फिर पुलिस के सवाल...


उन सवालों के जवाब...


और आख़िरकार बात उसके पापा तक पहुँच जाती।


अगर उन्हें पता चल जाता कि वह बिना अपने बॉडीगार्ड के मर्सिडीज़ लेकर बाहर निकला था और उसके दुश्मनों ने उस पर हमला कर दिया था...


तो वे उसे दोबारा अमेरिका भेज देते।


और यह उसे हरगिज़ मंज़ूर नहीं था।


उसने एक पल के लिए उस बेहोश लड़की की तरफ़ देखा।


फिर जो लफ़्ज़ उसकी ज़ुबान पर आया, उसने वही कह दिया—


“वो... वो मेरी wife है।”


नर्स ने हैरत से उसकी तरफ़ देखा।


“ओह... वो आपकी wife हैं?”


उसने ख़ामोशी से सिर हिला दिया।


“जी।”


“डॉक्टर साहब आपको बुला रहे हैं।”


नर्स के इतना कहते ही वह उसके पीछे-पीछे चल पड़ा।


जैसे ही वह कमरे के अंदर दाख़िल हुआ, वही हसीन चेहरा एक बार फिर उसकी आँखों के सामने आ गया।


वही नाज़ुक-सी सूरत...


वही मासूम चेहरा...


और अब भी उसकी आँखें बंद थीं।


डॉक्टर ने उसकी तरफ़ देखते हुए पूछा—


“ये आपकी wife हैं?”


“जी...”


उसने गर्दन हिलाकर हामी भर दी।


डॉक्टर ने कुछ पल उस लड़की को देखा, फिर गंभीर लहजे में पूछा—


“इनके साथ क्या हुआ था?”


वह ख़ामोश रहा।


डॉक्टर ने आगे कहा—


“क्योंकि इन्हें देखकर ऐसा लग रहा है कि किसी चीज़ के डर की वजह से ये बेहोश हुई हैं।”


वह एक पल के लिए अटक गया।


उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।


उसे बस यही डर सता रहा था कि कहीं यह बात उसके वालिद तक न पहुँच जाए।

“अ… असल में sir, हमारा accident हो गया था,”

उसने वही कहा जो उस वक्त उसके मुँह में आया,

“शायद उसी वजह से ये बेहोश हो गई थीं।”

डॉक्टर ने उसकी बात पर ज़्यादा सवाल नहीं किए।

“ओके, फिक्र की कोई बात नहीं है,”

डॉक्टर ने इत्मीनान से कहा,

“मैंने इन्हें injection दे दिया है। इन्हें जल्दी होश आ जाएगा।”

यह कहकर डॉक्टर कमरे से बाहर चले गए।

वह वहीं खड़ा, उस अंजान लड़की को देखता रह गया—

जो अब उसकी wife कहलाने लगी थी…

सिर्फ़ एक झूठ की वजह से।

और उसे अंदाज़ा भी नहीं था

कि यह झूठ उसकी ज़िंदगी को किस मोड़ पर ले जाने वाला है…


कमरे में हल्की-हल्की रौशनी फैल रही थी।

मशीनों की धीमी-सी आवाज़ उस ख़ामोशी को तोड़ रही थी।

वह कुर्सी पर बैठा, उसी अंजान लड़की को देख रहा था।

उसका दिल बेचैन था—

दुपट्टा अब भी उसकी उँगलियों में क़ैद था।

तभी…

उस लड़की की पलकों में हल्की-सी हरकत हुई।

उसकी उँगलियाँ थरथराईं,

और कुछ पल बाद उसकी आँखें धीरे-धीरे खुल गईं।

वह घबराकर इधर-उधर देखने लगी,

जैसे समझने की कोशिश कर रही हो कि वह कहाँ है।

“पानी…”

उसके होंठ हिले, आवाज़ बहुत धीमी थी।

वह फौरन उठ खड़ा हुआ।

“प्लीज़, घबराइए मत… आप safe हैं,”

उसने नर्मी से कहा।

लड़की की नज़र उस पर ठहर गई।

कुछ सेकंड तक वह उसे देखती रही—

फिर उसकी आँखों में हैरानी उभर आई।

“आप…?”

उसने कमज़ोर आवाज़ में पूछा।

वह एक पल के लिए चुप रह गया।

उसे याद आया—

डॉक्टर, नर्स… और उसका कहा हुआ झूठ।

“मैं…”

उसने साँस गहरी ली,

“मैं ही वो हूँ… जिसने आपको accident के वक्त बचाया था।”

लड़की ने आँखें मूँद लीं,

जैसे उस पल को याद करने की कोशिश कर रही हो।

अचानक उसकी भौंहें सिकुड़ गईं।

उसका जिस्म सिहर उठा।

“वो लोग…”

उसकी आवाज़ काँपने लगी,

“वो लोग मेरा पीछा कर रहे थे…”

उसके हाथ अपने आप मुट्ठी बन गए।

शबे नूर की कुछ समझ नही आ रहा था।


वह उसे देख ही रहा था कि तभी दरवाज़ा हल्के से खुला।

नर्स ने झाँककर अंदर देखा और मुस्कुराई।

“Good… आप होश में आ गई हैं,”

फिर उसकी नज़र उस पर पड़ी,

“और आपकी wife को देख कर अच्छा लगा, sir।”

wife…

यह लफ़्ज़ जैसे कमरे में गूंज गया।

लड़की की आँखें एकदम फैल गईं।

उसने झटके से उसकी तरफ़ देखा—

जैसे उसने कुछ ग़लत सुन लिया हो।

“क… क्या?”

उसकी आवाज़ काँप गई।

वह एक पल के लिए सन्न रह गया।

दिल ज़ोर से धड़का।

“ये… ये आपकी wife ”

होश मे आ गई ना अब 

नर्स ने दोहराया,

“आप दोनों को परेशान करने के लिए सॉरी।”

नर्स बाहर चली गई,

मगर कमरे की हवा भारी हो चुकी थी।

लड़की ने धीरे-धीरे उठने की कोशिश की।

“आपने…?”

उसकी आँखों में हैरानी भी थी, डर भी,

“आपने ऐसा क्यों कहा?”

वह कुर्सी से खड़ा हो गया।

“मैं मजबूर था,”

उसकी आवाज़ में पहली बार सच्चाई झलक रही थी,

“अगर मैं सच बता देता, तो बात पुलिस तक पहुँच जाती… और फिर मेरे वालिद तक।”

लड़की ने उसकी ओर गौर से देखा।

“तो… अब


🔮 इसमें आगे क्या हो सकता है?

अस्पताल के दरवाज़े पर आने वाला शख़्स शायद वही हो सकता है जो उस लड़की का पीछा कर रहा था।

वह अंजान लड़की अपनी असली पहचान बताने से पहले कोई ऐसा राज़ बता सकती है जो Umar की ज़िंदगी से जुड़ा हो।

Umar को एहसास हो सकता है कि उस पर हुआ हमला और लड़की का पीछा किया जाना एक-दूसरे से जुड़े हैं।

सबसे बड़ा ट्विस्ट यह हो सकता है कि लड़की को बचाने वाला यह अंजान शख़्स ख़ुद किसी बड़े ख़तरे से भाग रहा हो।

दूसरी तरफ़ Shabe Noor के गुम होने की गुत्थी भी इसी रहस्य से जुड़ सकती है।

🌙 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

मुश्किल वक़्त में इंसान की असली फ़ितरत सामने आती है। किसी की मदद करना इंसानियत है, लेकिन मुश्किल हालात में सही फ़ैसला लेने के साथ अपनी और दूसरों की हिफ़ाज़त का ख़याल रखना भी ज़रूरी है। और कभी-कभी एक छोटा-सा झूठ बड़े नतीजों का सबब बन सकता है।

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Writing

दरवाज़े का हैंडल धीरे-धीरे घूमने लगा।

लड़की की साँसें थम गईं।

उसने घबराकर उसकी तरफ़ देखा।

वह शख़्स फ़ौरन उठ खड़ा हुआ।

“घबराइए मत...”

उसने धीमी आवाज़ में कहा।

अगले ही पल दरवाज़ा खुला।

सामने खड़ा शख़्स उन्हें देखकर कुछ पल ख़ामोश रहा।

फिर उसकी निगाह सीधे उस लड़की पर जा ठहरी।

लड़की का चेहरा अचानक सफ़ेद पड़ गया।

“ये... यहाँ भी पहुँच गए?”

उसकी काँपती हुई आवाज़ सुनकर वह शख़्स चौकन्ना हो गया।

“आप इसे जानती हैं?”

लड़की ने कोई जवाब नहीं दिया।

बस डर के मारे उसकी तरफ़ देखने लगी।

तभी बाहर खड़े शख़्स ने धीमे लहजे में कहा—

“हमें आपसे कुछ बात करनी है।”

उसने एक क़दम आगे बढ़ाया।

लेकिन लड़की के साथ खड़े शख़्स ने उसके सामने आकर रास्ता रोक दिया।

“पहले मुझे बताइए... आप हैं कौन?”

कमरे की हवा अचानक बोझिल हो गई।

और किसी को भी अंदाज़ा नहीं था कि अगले कुछ लम्हों में खुलने वाला राज़...

सिर्फ़ उस लड़की की ज़िंदगी नहीं, बल्कि Umar की ज़िंदगी भी बदलने वाला था।

💌 Readers के लिए शुक्रिया

Writing

मेरे प्यारे पाठकों, ❤️

Rahe Bismill को अपना कीमती वक़्त देने और हर नए हिस्से के साथ मुझे इतना प्यार देने के लिए आप सभी का दिल की गहराइयों से शुक्रिया।

आपके कमेंट्स, रिएक्शन्स और दुआएँ मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं। इन्हीं की वजह से कहानी लिखने का हौसला और भी बढ़ जाता है।

उम्मीद है आप इसी तरह Rahe Bismill के इस सफ़र में मेरे साथ बने रहेंगे और आने वाले राज़ों और नए मोड़ों को पढ़ते रहेंगे।

इंशा अल्लाह, इस कहानी का अगला हिस्सा 14/08/2026 को रात 11 बजकर 30 मिनट पर ब्लॉग पर प्रकाशित होगा। 🕚

तब तक अपना ख़याल रखिए और अपनी दुआओं में याद रखिए। ❤️

— Afsana Wahid


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