Rahe Bismill: एक झूठा रिश्ता और Shabe Noor का टूटा हुआ दिल | Emotional Suspense Novel

 


पिछले हिस्से में आपने पढ़ा...

एक अंजान शख़्स ने ख़तरे के बीच Shabe Noor की जान बचाई और उसे अस्पताल लेकर पहुँचा।

मगर ख़ुद को बचाने के लिए उसने Shabe Noor को अपनी wife बता दिया।

डॉक्टर और नर्स भी Shabe Noor को उसकी wife ही समझ बैठे।

जब Shabe Noor को इस बात का पता चला, तो वह हैरान रह गई।

आख़िर उसने इतना बड़ा झूठ क्यों बोला था?

क्या Shabe Noor उसकी मजबूरी समझ पाएगी...

या फिर इस झूठ की वजह से उनके बीच एक नई मुश्किल खड़ी होने वाली थी?


अब आगे पढ़िए...



उस शख़्स ने आहिस्ता से पूछा—


“आप... ठीक हैं?”


वह ख़ामोश रहा।


क्योंकि उसे ख़ुद नहीं मालूम था कि कुछ देर पहले बोला गया यह झूठ अब Shabe Noor को कहाँ ले जाने वाला था।


जो लड़की कुछ देर पहले तक उसके लिए बिल्कुल अजनबी थी...


अब उसी के नाम के साथ एक ऐसा रिश्ता जोड़ दिया गया था, जो कभी था ही नहीं।


एक नाम...

एक रिश्ता...

और एक झूठ।


Shabe Noor की आँखों में मौजूद हैरानी अब धीरे-धीरे ग़ुस्से में बदल चुकी थी।


उसने झटके से अपना हाथ पीछे खींच लिया।


“आपको ज़रा-सी भी अक़्ल है?”


उसकी आवाज़ कमज़ोर थी, मगर लहजे में ग़ुस्सा साफ़ झलक रहा था।


“बिना मुझसे पूछे आपने मुझे अपनी wife कैसे बना दिया?”


वह कुछ कहने के लिए आगे बढ़ा, मगर Shabe Noor ने उसे बोलने का मौक़ा ही नहीं दिया।


“एक अंजान लड़की की ज़िंदगी से खेलना इतना आसान है?”


उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं।


“आप जानते भी हैं कि इसका मतलब क्या होता है?”


वह ख़ामोशी से उसकी बातें सुनता रहा।


Shabe Noor की आँखों में अब नमी तैरने लगी थी।


“अगर किसी ने ये बात सुन ली तो?”


उसने काँपती उँगलियों से चादर को मज़बूती से मुठ्ठी में भींच लिया।


“मेरी बदनामी... मेरा डर...”


उसकी आवाज़ भर्रा गई।


“आपको इसका ज़रा भी अंदाज़ा है?”


वह लगातार बोले जा रही थी।


अपने ग़ुस्से में उसे इस बात का भी एहसास नहीं था कि वह किससे और किस अंदाज़ में बात कर रही है।


“प्लीज़... ख़ामोश रहिए।”


उस शख़्स ने जल्दी से अपने होंठों पर उँगली रखते हुए धीमे मगर परेशान लहजे में कहा।


“मैं मजबूर था।”


“वो वक़्त ऐसा था कि—”


“हर ग़लत काम के पीछे मजबूरी का बहाना नहीं चलता!”


Shabe Noor लगभग चीख पड़ी।


उसकी आँखों में आँसू थे, मगर आवाज़ में अब भी ग़ुस्सा था।


“आप अमीर होंगे... ताक़तवर होंगे...”


उसने तंज़ भरे अंदाज़ में कहा—


“लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं कि आप किसी की पहचान अपनी मर्ज़ी से बदल दें।”


वह बिना सोचे-समझे लगातार उसे सुनाए जा रही थी।


उसके दिल में जो डर, ग़ुस्सा और बेबसी जमा थी, वह सब उसके लफ़्ज़ों के ज़रिए बाहर निकल रहा था।


मगर वह शख़्स...


अब भी ख़ामोश खड़ा था।


न जाने क्यों उसकी बातों का बुरा मानने के बजाय, वह उसकी आँखों में छुपे डर को समझने की कोशिश कर रहा था।


और शायद...


उसे पहली बार एहसास हो रहा था कि उसने अपनी मजबूरी में जो फ़ैसला लिया था, उसकी क़ीमत Shabe Noor को भी चुकानी पड़ सकती है।




वह पहली बार ख़ुद को शर्मिंदा महसूस कर रहा था।


उसने कुछ पल ख़ामोश रहने के बाद सिर्फ़ इतना कहा—


“मैंने आपको बचाया है...”


लड़की ने नम आँखों से उसकी तरफ़ देखा।


“तो क्या अब आप मेरे मालिक हो गए?”


उसके सवाल ने उसे बिल्कुल ख़ामोश कर दिया।


कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया।


वह समझ चुका था—


यह लड़की कमज़ोर नहीं थी।


और उसका बोला हुआ झूठ अब सिर्फ़ उसकी अपनी परेशानी नहीं रहा था...


बल्कि उसके सामने खड़ी एक ऐसी हक़ीक़त बन चुका था, जिसका सामना करना उसके लिए भी आसान नहीं था।


कुछ पल पहले तक ग़ुस्से में बोलती Shabe Noor अचानक ख़ामोश हो गई।


जैसे उसके अंदर की सारी ताक़त एक ही पल में जवाब दे गई हो।


उसके होंठ काँपे।


आँखों में आँसू भर आए।


उसने नज़रें फेरने की कोशिश की, मगर आँसू अपनी राह ख़ुद बना चुके थे।


“मैं... मैं बहुत डर गई थी...”


उसकी आवाज़ भर्रा गई।


“जब वो लोग मेरे पीछे थे... मुझे लगा था कि आज शायद मैं ज़िंदा नहीं बचूँगी।”


उसने अपना चेहरा दोनों हथेलियों में छुपा लिया।


और फिर उसकी सिसकियाँ कमरे की ख़ामोशी में गूँजने लगीं।


“और अब...”


उसने मुश्किल से ख़ुद को संभालते हुए कहा—


“अब मैं यहाँ हूँ... एक अंजान आदमी के साथ... जिसने सबके सामने मुझे अपनी wife बना दिया।”


उसके कंधे लगातार काँप रहे थे।


वह हर गुज़रते लम्हे के साथ और ज़्यादा टूटती जा रही थी।


वह शख़्स उसकी तरफ़ बढ़ा...


मगर अगले ही पल रुक गया।


उसे उसे छूने तक की हिम्मत नहीं हुई।


शायद उसे डर था कि उसका एक और क़दम Shabe Noor को और डरा देगा।


“मेरा यहाँ कोई नहीं है...”


वह रोते हुए बोली।


“न कोई पहचान है... न कोई अपना... न कोई सहारा...”


कमरे में अब सिर्फ़ उसकी सिसकियों की आवाज़ थी।


वह शख़्स ख़ामोशी से उसे देखता रहा।


पहली बार उसे एहसास हुआ कि उसके सामने सिर्फ़ एक अंजान लड़की नहीं बैठी थी...


बल्कि एक ऐसी इंसान थी, जो ख़ौफ़, बेबसी और अकेलेपन से बुरी तरह टूट चुकी थी।


और उसने अपनी मजबूरी में जो झूठ बोला था...


वह अब उसके ज़ख़्मों पर नमक बन चुका था।


उसने धीमे से कहा—


“मुझे माफ़ कर दीजिए...”


Shabe Noor ने अपना चेहरा हथेलियों से नहीं हटाया।


वह कुछ पल ख़ामोश रहा।


फिर बोला—


“मैं आपसे आपका कोई हक़ छीनना नहीं चाहता।”


Shabe Noor ने धीरे-धीरे अपना चेहरा उठाया।


उनकी नज़रें मिलीं।


“तो फिर...”


उसने काँपती आवाज़ में पूछा—


“मुझे मेरी असली पहचान कब वापस मिलेगी?”


उस सवाल का उसके पास कोई जवाब नहीं था।


और शायद...


यही इस झूठ की सबसे बड़ी मुश्किल थी।


वह शख़्स इस बात से बिल्कुल अंजान था कि इस लड़की के अंदर पहले ही कितनी टूट-फूट हो चुकी थी।

उसके दिल पर पहले से ही न जाने कितने ज़ख़्म थे... और अब, अपनी मजबूरी में उसे अपनी बीवी कहकर उसने अनजाने में उसी के ज़ख़्मों को और गहरा कर दिया था।

वह उसकी आँखों में दिखाई देने वाले दर्द को तो देख रहा था, मगर उस दर्द की असली वजह से बिल्कुल बेख़बर था।

उसे क्या मालूम था कि उसके बोले हुए कुछ लफ़्ज़ Shabe Noor के लिए सिर्फ़ एक झूठ नहीं थे...

बल्कि उसके पहले से टूटे हुए दिल पर लगी एक और चोट थे।







🔮 इस कहानी में आगे क्या हो सकता है?


Shabe Noor उस अंजान शख़्स से अपनी असली पहचान छुपाने की वजह पूछ सकती है।

वह शख़्स धीरे-धीरे Shabe Noor के दर्द और उसके अतीत को समझने लगेगा।

दूसरी तरफ़ Umar और इख़्तियार Jamal को Shabe Noor के अगवा होने के मामले में कोई बड़ा सुराग मिल सकता है।

पुलिस को ऐसा सबूत मिल सकता है जो इस पूरे मामले को किसी पुराने दुश्मन से जोड़ दे।

सबसे बड़ा ट्विस्ट यह हो सकता है कि Shabe Noor को बचाने वाला शख़्स ख़ुद इस साज़िश के बारे में कुछ जानता हो।



🌙 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?


किसी इंसान के हालात जाने बिना उसके बारे में फ़ैसला नहीं करना चाहिए। कभी-कभी कोई इंसान बाहर से मज़बूत दिखाई देता है, लेकिन उसके अंदर बहुत कुछ टूट चुका होता है। हमारे कुछ लफ़्ज़ भी किसी के पुराने ज़ख़्म को फिर से हरा कर सकते हैं, इसलिए मुश्किल वक़्त में हमदर्दी और समझदारी ज़रूरी है।


📚 Next Short Part


अगला हिस्सा...


Shabe Noor की आँखों में अब भी आँसू थे।


वह उस अंजान शख़्स को ख़ामोशी से देख रही थी।


“आपको मेरे बारे में कुछ नहीं मालूम...”


उसने धीमी आवाज़ में कहा।


“फिर भी आपने मेरे लिए इतना बड़ा फ़ैसला कैसे कर लिया?”


वह कुछ पल ख़ामोश रहा।


फिर बोला—


“शायद मैंने ग़लती की।”


Shabe Noor ने नम आँखों से उसकी तरफ़ देखा।


“शायद?”


उसके एक लफ़्ज़ ने उसे फिर ख़ामोश कर दिया।

तभी अचानक उसके फ़ोन की घंटी बज उठी।

उसने स्क्रीन पर नज़र डाली...

और अगले ही पल उसके चेहरे के भाव बदल गए।

कॉल किसी ऐसे शख़्स की थी...

जिससे इस वक़्त बात करना उसके लिए बेहद ख़तरनाक था।

उसने कॉल रिसीव की।

“हैलो...”

दूसरी तरफ़ से जो आवाज़ आई...

उसे सुनते ही उसके चेहरे का रंग उड़ गया।

और Shabe Noor ने पहली बार महसूस किया—

शायद उसकी जान बचाने वाला यह अंजान शख़्स ख़ुद भी किसी बहुत बड़े ख़तरे में था।


💌 Readers के लिए शुक्रिया SMS


मेरे प्यारे पाठकों, ❤️


Rahe Bismill को अपना कीमती वक़्त देने और हर नए हिस्से को इतना प्यार देने के लिए दिल की गहराइयों से शुक्रिया। आपकी मोहब्बत, कमेंट्स और दुआएँ मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं। 🥰


उम्मीद है आप इसी तरह Rahe Bismill के सफ़र में मेरे साथ बने रहेंगे और आने वाले राज़ों और नए मोड़ों को पढ़ते रहेंगे।


इंशा अल्लाह, इस कहानी का अगला हिस्सा 27/08/2026 को रात 11 बजकर 30 मिनट पर ब्लॉग पर प्रकाशित होगा। 🕚❤️


अपना ख़याल रखिए और दुआओं में याद रखिए।


— Afsana Wahid



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