Rahe Bismill: अंजान शख़्स का सच और Shabe Noor की उलझन | Suspense Hindi Novel
Umar Jamal ग़ुस्से और ग़म के मिले-जुले तास्सुरात के साथ अपने बंगले में दाख़िल हुआ।
उसके पीछे इख़्तियार साहब भी आ रहे थे।
हॉल में बेचैनी से टहलती हुई दादी अम्मी की नज़र जैसे ही Umar पर पड़ी, वह अपने क़दम तेज़ करती हुई उसके पास आ गईं।
“क्या हुआ, Umar? मेरी बच्ची Shabe Noor का कुछ पता चला? कहाँ है वो? सुबह से मैं उसकी सूरत देखने के लिए तड़प गई हूँ।”
दादी अम्मी की आँखों में नमी साफ़ नज़र आ रही थी।
Umar ने उनकी तरफ़ देखते हुए उल्टा सवाल कर दिया—
“दादी अम्मी... जब Noor सुबह घर से गई थी, तो क्या उसने आपको नहीं बताया था कि वो अपने वालिद और वालिदा की क़ब्र पर जा रही है?”
“क्या... Noor अपने वालिदैन की क़ब्र पर गई थी?”
दादी अम्मी ने हैरानी से पहले Umar और फिर इख़्तियार साहब की तरफ़ देखा।
“मगर उसने तो मुझे कुछ नहीं बताया।”
उन्होंने परेशान होकर कहा।
फिर कुछ पल ख़ामोश रहने के बाद बोलीं—
“Umar... शायद Noor को तुम्हारी कोई बात हर्ट कर गई थी। इसलिए वो हमें बताए बग़ैर क़ब्रिस्तान चली गई।”
“दादी अम्मी, मुझे नहीं मालूम कि उसे किस बात ने हर्ट किया...”
Umar की आवाज़ में बेबसी साफ़ झलक रही थी।
“मगर मुझे उसकी बहुत फ़िक्र हो रही है।”
उसके चेहरे से साफ़ ज़ाहिर था कि वह Shabe Noor को लेकर अंदर तक परेशान था।
वह थककर हॉल में पड़े सोफ़े पर जा बैठा और अपना सिर पीछे टिका लिया।
तभी अचानक उसके फ़ोन की घंटी बजने लगी।
Umar ने फ़ोन की स्क्रीन पर नज़र डाली।
अनजान नंबर था।
उसने फ़ौरन कॉल रिसीव की।
“हैलो...”
दूसरी तरफ़ से आवाज़ आई—
“क्या आप Umar Jamal बात कर रहे हैं?”
“जी हाँ, मैं Umar Jamal बात कर रहा हूँ।”
Umar का लहजा अचानक सतर्क हो गया।
दूसरी तरफ़ से आवाज़ आई—
“आपने जो गाड़ी का नंबर बताया था... उसमें आपका ड्राइवर हमें सड़क पर मृत मिला है।”
“क्या...?”
Umar के माथे पर बल पड़ गए।
“ड्राइवर... मृत मिला है?”
अचानक उसके ज़हन में सिर्फ़ एक ही ख़याल आया—
Shabe Noor... वो कैसी होगी?
उसका दिल बुरी तरह धड़कने लगा।
तभी ऑफ़िसर ने कहा—
“आप सुबह दोबारा पुलिस स्टेशन आइएगा। सारी बात हम वहीं करेंगे।”
यह कहकर ऑफ़िसर ने कॉल काट दी।
“क्या हुआ, Umar? सब ठीक है ना?”
इख़्तियार साहब ने फ़ौरन पूछा।
Umar ने उनकी तरफ़ देखा।
“पापा... हमारी गाड़ी का ड्राइवर मरा हुआ मिला है।”
“क्या...?”
दादी अम्मी के चेहरे पर ख़ौफ़ उतर आया।
“ओफ़्फ़... ख़ुदाया! Shabe Noor तो ठीक है ना?”
उनकी आवाज़ काँप रही थी।
Umar ने बेबसी से सिर हिलाया।
“कुछ पता नहीं, दादी अम्मी... वो कहाँ है और कैसी है, हमें कुछ मालूम नहीं।”
उसकी आवाज़ में गहरी फ़िक्र थी।
“अभी पुलिस भी हमें ठीक से कुछ नहीं बता पा रही है।”
हॉल में अचानक ख़ामोशी छा गई।
हर चेहरे पर सिर्फ़ एक ही सवाल था—
Shabe Noor आख़िर कहाँ थी...?
और क्या वह महफ़ूज़ थी?
Shabe Noor के मुँह पर उस शख़्स ने टेप लगा दिया था।
वह हैरत से आँखें फाड़े उसे देख रही थी।
“प्लीज़... प्लीज़ मोहतरमा, मेरी पूरी बात सुन लीजिए। उसके बाद जो फ़ैसला करना चाहें, कीजिएगा।”
उसकी आवाज़ में बेबसी थी।
Shabe Noor पहले ही उस शख़्स से डरी हुई थी और उसकी इस हरकत ने उसके अंदर का ख़ौफ़ और बढ़ा दिया था।
वह बस ख़ामोश होकर उसे देखे जा रही थी।
“देखिए... मैं नहीं जानता कि आप कौन हैं।”
वह कुछ पल रुका, फिर गंभीर लहजे में बोला—
“लेकिन अगर कल मैं आपको अपनी गाड़ी में खींचकर न बैठाता... तो जिन लोगों का निशाना मैं था, उनके निशाने पर आप होतीं।”
Shabe Noor की भौंहों पर बल पड़ गए।
उसे उसकी बातें बिल्कुल समझ नहीं आ रही थीं।
वह दिल ही दिल में सोचने लगी—
कहीं ये शख़्स पागल तो नहीं है? इतनी अजीब-अजीब बातें क्यों कर रहा है?
वह उसकी तरफ़ देखते हुए ख़ामोश रही।
“ग़ौर से सुनिए...”
उस शख़्स ने अपनी बात जारी रखी।
“कुछ गुंडे मेरी जान के पीछे पड़े हुए थे। मैं अपने बॉडीगार्ड के साथ नहीं आया था, इसलिए शायद उन्होंने मुझे आसानी से निशाना बनाने का फ़ैसला किया।”
उसकी आवाज़ में अब गंभीरता थी।
“वो लोग सामने से गोलियाँ चला रहे थे।”
Shabe Noor की आँखों में उस हादसे का मंज़र फिर से ताज़ा हो गया।
ताबड़तोड़ गोलियों की आवाज़...
उसका अचानक गाड़ी में खिंच जाना...
और फिर उसका बेहोश हो जाना।
“तभी आप वहाँ आ गईं।”
उस शख़्स ने कहा—
“अगर मैं आपको अपनी गाड़ी में न खींचता, तो वो गोली सीधे आपको लग सकती थी।”
Shabe Noor अब पहले से ज़्यादा ध्यान से उसकी बातें सुन रही थी।
उसकी आँखों में मौजूद उलझन कुछ कम हुई।
अब उसे उसकी कुछ बातें समझ आने लगी थीं।
“और अगर मैं उन लोगों से ये नहीं कहता कि आप मेरी wife हैं...”
वह कुछ पल के लिए रुका।
“तो मुझे उन्हें पूरी सच्चाई बतानी पड़ती।”
Shabe Noor उसकी तरफ़ देखती रही।
“फिर बात मेरे पापा तक पहुँचती।”
उसने गहरी साँस ली।
“और वो मुझसे बेहद नाराज़ होते... क्योंकि उन्होंने मुझे साफ़ हिदायत दी है कि मैं बिना बॉडीगार्ड के कहीं नहीं जाऊँ।”
अब उसने Shabe Noor की तरफ़ देखा।
“मैंने जो कुछ किया... अपनी जान बचाने के लिए किया था।”
कमरे में कुछ पल ख़ामोशी रही।
फिर उसने Shabe Noor के मुँह पर लगी टेप हटा दी।
“I'm really sorry...”
उसकी आँखों में इस बार सच्चाई साफ़ दिखाई दे रही थी।
Shabe Noor ने धीरे से साँस ली।
वह अब भी डरी हुई थी, मगर उसकी आँखों में पहले जैसा ग़ुस्सा नहीं था।
वह ख़ामोश होकर उस अंजान, ख़ूबसूरत शख़्स को देखती रही।
उसने धीमे लहजे में कहा—
“मिस... आपका जो भी नाम है, प्लीज़ कुछ देर तक मेरा साथ दीजिए।”
Shabe Noor ने हैरत से उसकी तरफ़ देखा।
“और जो कुछ यहाँ हुआ है... उसके बारे में अभी किसी को सच मत बताइए।”
उसने यक़ीन दिलाते हुए कहा—
“मैं आपसे वादा करता हूँ... आपको कोई नुक़सान नहीं पहुँचेगा।”
वह एक पल को रुका।
“और जैसे ही हालात ठीक होंगे, मैं ख़ुद आपको महफ़ूज़ आपके घर तक छोड़कर आऊँगा।”
Shabe Noor अब भी ख़ामोश थी।
उसके सामने खड़ा यह अंजान शख़्स...
कुछ देर पहले तक उसे एक ख़तरा लग रहा था।
लेकिन अब...
उसकी बातों में छुपी मजबूरी और आँखों में दिखाई देती सच्चाई ने Shabe Noor को सोचने पर मजबूर कर दिया था।
आख़िर यह अंजान शख़्स था कौन... और उसके पीछे पड़े लोग कौन थे?
🔮 कहानी में आगे क्या हो सकता है?
Shabe Noor कुछ वक़्त के लिए उस अंजान शख़्स की बात मान सकती है।
उसे धीरे-धीरे महसूस होगा कि उस शख़्स ने सच में उसकी जान बचाई थी।
मगर उसके दिल में अब भी यह सवाल रहेगा कि वह शख़्स आख़िर है कौन?
दूसरी तरफ़ Umar Jamal और पुलिस Shabe Noor को तलाश करते हुए किसी नए सुराग तक पहुँच सकते हैं।
अंजान शख़्स के दुश्मनों का ख़तरा अभी ख़त्म नहीं हुआ है, इसलिए अस्पताल में भी Shabe Noor महफ़ूज़ नहीं होगी।
आगे चलकर Shabe Noor और उस शख़्स का रिश्ता एक ऐसे राज़ से जुड़ सकता है, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं होगी।
🌙 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
किसी इंसान के एक फ़ैसले या एक हरकत को देखकर उसके पूरे किरदार का फ़ैसला नहीं करना चाहिए। कभी-कभी हालात इंसान को ऐसे फ़ैसले लेने पर मजबूर कर देते हैं, जिन्हें वह सामान्य हालात में कभी न करता। इसलिए किसी को समझने से पहले उसकी मजबूरी और हालात को समझना ज़रूरी है।
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Rahe Bismill — अगला हिस्सा
Shabe Noor अब ख़ामोशी से उस अंजान शख़्स को देख रही थी।
उसके ज़हन में अभी भी बहुत से सवाल थे।
“अगर आप सच कह रहे हैं...”
उसने धीमे लहजे में पूछा—
“तो फिर मुझे मेरे घर जाने क्यों नहीं दे रहे?”
वह शख़्स कुछ पल ख़ामोश रहा।
“क्योंकि अभी वहाँ जाना आपके लिए महफ़ूज़ नहीं है।”
“लेकिन मेरे घरवाले...”
Shabe Noor की आवाज़ भर्रा गई।
“वो मेरे लिए परेशान हो रहे होंगे।”
वह उसकी बात समझ रहा था।
“मुझे मालूम है।”
फिर उसने धीरे से कहा—
“लेकिन अगर आपने अभी अपने घर फ़ोन किया और किसी को पता चल गया कि आप यहाँ हैं... तो उन लोगों तक भी ये ख़बर पहुँच सकती है।”
Shabe Noor का चेहरा फिर से फ़िक्र से भर गया।
“तो मैं क्या करूँ?”
उस शख़्स ने उसकी तरफ़ देखा।
“कुछ देर मेरा यक़ीन कीजिए।”
Shabe Noor ने उसकी आँखों में देखा।
इस बार उसे वहाँ कोई ज़बरदस्ती नहीं...
बल्कि एक अजीब-सी सच्चाई नज़र आई।
लेकिन तभी...
अस्पताल के बाहर एक काली गाड़ी आकर रुकी।
गाड़ी से उतरने वाले शख़्स ने चारों तरफ़ नज़र दौड़ाई।
फिर उसकी निगाह अस्पताल की इमारत पर जाकर ठहर गई।
उसने जेब से फ़ोन निकाला और किसी को कॉल किया।
“वो लड़की यहीं है...”
दूसरी तरफ़ से कुछ कहा गया।
उसके होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आई।
“हाँ... मुझे यक़ीन है।”
उधर कमरे में Shabe Noor को अभी तक इस बात का इल्म नहीं था कि...
जिस ख़तरे से उसे बचाकर अस्पताल लाया गया था, वही ख़तरा अब अस्पताल के दरवाज़े तक पहुँच चुका था।
💌 Readers के लिए शुक्रिया
"Readers के लिए शुक्रिया"} मेरे प्यारे पाठकों, ❤️
Rahe Bismill को अपना कीमती वक़्त देने और हर नए हिस्से को इतना प्यार देने के लिए दिल की गहराइयों से शुक्रिया। आपकी मोहब्बत, कमेंट्स और दुआएँ मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं। 🥰
कहानी अब एक नए और ख़तरनाक मोड़ की तरफ़ बढ़ रही है। उम्मीद है आप इसी तरह मेरे साथ बने रहेंगे और Rahe Bismill के आने वाले राज़ों को पढ़ते रहेंगे।
इंशा अल्लाह, इस कहानी का अगला हिस्सा 08/09/2026 को रात 12 बजे ब्लॉग पर प्रकाशित होगा। ❤️
तब तक अपना ख़याल रखिए और दुआओं में याद रखिए।
— Afsana Wahid :



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