“खौफनाक ख्वाब या हकीकत? कंदील की हवेली में वापसी और एक दर्दनाक सच | Emotional Suspense Story”

 


काफी टाइम बाद आगा जान से मिलने हवेली पर गई थी। 

आगा जान के साथ सारे ही लोग ब्रेक फास्ट की टेबिल पर बैठे ब्रेकफास्ट कर रहे थे। 

कंदील  हमेशा की तरह उनके नजदीक वाली कुर्सी पर ही बैठी थी। 

और आगा जान  को अपने हाथ से एक निवाला खिलाने की कोशिश कर रही थी।

बाबा जान मुझे आपकी बहुत याद आ रही थी। 

मैंने कल आपको कॉल करना चाहिए ,लेकिन डॉक्टर बख्श ने मुझे रोक दिया था। 

आप को कॉल करने से

कंदील आगा जान से डॉक्टर बख्श की शिकायत करने लगी। 

कोई बात नहीं बेटा आज तुम हवेली पर आ गई हो ना। 

मुझे अच्छा लग रहा है तुम्हें सामने देखकर। 

आगा जान कंदील  के सर पर हाथ फिराने लगे थे।

जैसे ही कंदील ने अपने सर को आगा जान  के कंधे के नजदीक किया। 

एक जोरदार  धमाके की आवाज कंदील के कान के पास बहुत तेज आई थी। 

ये आवाज गोली चलने की थी।

दरवाजे के सामने से किसी ने आगा जान के सीने पर गोली मारी थी। 

आगाजान के जहां गोली लगी थी वह वहां पर हाथ रखकर अपनी आंखें बंद करने लगे  थे।

सब लोग हक्का-बक्का होकर यह मंजर देख रहे थे। 

आगा जान क्या हुआ है आपको उठिये आगा जान क्या हुआ है? 

कंदील उनको हिलाने लगी थी। 

लेकिन आगा जान इस वक़्त खामोश हो गए थे। 

उनकी आंखें नहीं खुल रही थी।

आगा जान आगा जान ननननन कंदील एक जोरदार चीख के साथ सोते  सोते जाग गई थी।

कंदील की चीख से डॉक्टर बॉक्स की भी आंख खुल गई थी।

आगा जान नही आगा जान आपको कुछ नही हो सकता आपको कोई गोली नही मार सकता कंदील चीख ते हुए रोने लगी थी। 

डॉक्टर बख्श ने उससे कहे लफ्ज सुन लिए थे।

कंदील,कंदील क्या हुआ तुम्हे डॉक्टर बख्श बैड से ऊठते हुए कंदील को देखकर बोले।

डॉक्टर बख्श आगा जान को आगा जान को कंदील हिचकियो के दरमियान बोलने की कोशिश कर रही थी। 

कंदील रिलैक्स चुप हो जाओ डॉक्टर बख्श ने उसे अपने सीने से लगाकर पूचकारते हुए कहा।

डॉक्टर बख्श मैने बहुत बुरा ख्वाब देखा अभी कन्दील  खुद को सम्भालती हुए बोली। 

कंदील रिलैक्स हो जाओ वो ख्वाब था। 

जो तुम्हारे जागने पर खत्म हो गया इतना घबराने की और खुद को परेशान करने की जरूरत नही है।

डॉक्टर बख्श मुझे आगा जान के पास जाना है।

कंदील  बच्चों की तरह सिसकियां से रोते हुए डॉक्टर बख्श से कह रही थी।

कंदील इस वक्त सुबह के 6:00 बज रहे हैं। 

अभी अगर तुम वहा गई तो सब लोग खुद तुम्हें देखकर घबरा जाएंगे। 

डॉक्टर बख्श ने कहा। 

मैं अभी की नहीं बोल रही हूं डॉक्टर बख्श। 

मैं कुछ देर बाद जाऊंगी लेकिन मैं आज आगा जान के पास जरूर जाऊंगी। 

वो जिद्द करने वाले अंदाज में डॉक्टर बख्श कह रही थी। 

मगर कंदील खुद तुम्हारी भी तबीयत ठीक नहीं है। 

कुछ दिन रुक जाओ फिर चली जाना। 

डॉ बख्श ने फिर बहाना बनाने की कोशिश की।

डॉक्टर बख्श 

आप क्यों ऐसा कर रहे हो? 

क्यों आगा जान के पास नहीं जाने दे रहे हो मुझे ?

उस दिन भी आपने मेरे हाथ से फोन छीन लिया था ।

जब मैं आगा जान को कॉल लग रही थी। 

और आज जब मैंने इतना। खौफनाक ख्वाब देखा है। 

उसके बाद भी आप मुझे वहां जाने से मना कर रहे हो। कंदील उनके सीने से हटकर उनकी तरफ देखती हूं उनसे शिकवा कर रही थी।

कंदील की इस तरह नजर मिलाने पर डॉक्टर बख्श ने अपनी नजरों को झुका लिया था। 

बताइए डॉक्टर बख्श आप मुझसे क्या छुपाने की कोशिश कर रहे हैं? 

बताइए। डॉक्टर बख्श को कंदील की फिक्र  होने लगी थी।

ठीक है तुम जाना चाहती हो तो कुछ देर में मेरे साथ चलना।

डॉ बख्श  कंदील के आगे हार मानते हुए बोले। 

क्योंकि डॉक्टर बख्श समझ चुके थे ।

कि अब कंदील को रोकना नामुमकिन सी बात है?

उन्होंने भी सोच लिया था जो होगा देखा जाएगा। 

कब तक वो उसको वहां जाने के लिए मना करते, या वहां के किसी इंसान से कांटेक्ट के लिए मना करते हैं?

कंदील छोटी बच्ची नही थी डॉक्टर बख्श इससे ज्यादा नही रोक सकते थे कंदील को।

प्रॉमिस आप मुझे साथ में लेकर चलोगे।

कंदील डॉक्टर बख्श के आगे हाथ बढ़ाते हुए बोली। 

हां प्रॉमिस।


प्रॉमिस कंदील मैं तुम्हें अपने साथ हवेली में लेकर चलूंगा। डॉक्टर बख्श ने कंदील के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए कहा।

तो कंदील का हिचकियों से रोना बंद हुआ था।

अब डॉक्टर बख्श कंदील से इस बात को छुपा नहीं सकते थे।

वह इतनी कोशिश कर चुके थे पिछले दो दिन में।

लेकिन अब लगता था कंदील  नहीं रुकेगी।

कुछ घंटे बाद डॉक्टर बख्श कंदील को हवेली में ले जा रहे थे।

डॉ बख्श कार ड्राइव कर रहे थे ,और कंदील उनके बराबर वाली सीट पर बैठी हुई थी। 

डॉक्टर बख्श ने कंदील को देखा अजीब तरह की बेचैनी हो रही थी उसे।

अपने घर जाने की उसके चेहरे से साफ देखा जा सकता था कि कंदील इस वक्त बहुत ज्यादा बेचैन है। 

कंदील प्लीज इतना घबराओ मत रिलैक्स करो खुद को। डॉक्टर बख्श ने कंदील के हाथ पर अपने हाथ को रखते हुए, उसे हौसला दिया। 

पता नहीं डॉक्टर बख्श पर मुझे अजीब तरह की बेचैनी हो रही है।

ऐसा लग रहा है मेरे दिल को के कुछ गलत होने वाला है।कंदील के लहजे मे उदासी थी ।

डॉ बख्श ने देखा कि कंदील की आंखें नम थी।

ऐसी नेगेटिविटी नहीं लाते हैं कंदील।

हौसला रखो सब ठीक हो जाएगा। 

डॉक्टर बख्श ने कहा।

उसने गर्दन को हां में हिला दिया।

हवेली आ चुकी थी।

गाड़ी रुकते ही कंदील गाड़ी का दरवाजा खोल कर गाड़ी से नीचे उतरी।

अरे कंदील रुको तो सही।

डॉक्टर बख्श ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन तब तक वह गाड़ी से बाहर निकल चुकी थी। 

कंदील जैसे ही नीचे उतरी  उसने हवेली के दरवाजे के पास, लोगों की भीड़ को देखा।

ये यहां पर इतनी  ज्यादा लोग कैसे जमा है?

कंदील के दिमाग में खतरे की घंटी बजने लगी।

उसने अपने कदमों को जल्दी-जल्दी आगे बढ़ाया।

इतने में डॉक्टर बख्श भी उसके पीछे आ चुके थे।

सर पर टोपी ओडे हुए लोगो को देखकर कंदील की हालत खराब होने लगी।

डॉक्टर बख्श ये ये क्या हुआ है।

उसने आंखें फाड़ कर पलट का डॉक्टर बख्श की तरफ देखते हुए डॉक्टर बख्श से पूछा।

हिम्मत मत हारो कंदील और आगे बढ़ो। 

डॉक्टर बख्श उसको अपने नजदीक करके  उसे कंधे से लगाते हुए उसको साथ लेकर हवेली के अंदर चलने लगे।

डॉक्टर बख्श क्या हुआ है यहां पर? 

बताइए डॉक्टर बख्श आपको पता होगा कि क्या हुआ है? डॉक्टर बख्श को महसूस हो रहा था कि कंदील की आवाज कहीं दूर से आती हुई लग रही है।

डॉक्टर बख्श खामोश रहे उन्होंने कुछ नहीं कहा ।

वह कंदील को लेकर आगे बढ़ने लगे।

कंदील ने जैसे ही दरवाजे के अंदर हवेली में कदम रखा। 

सब जगह लेडीज ही लेडीज नजर आ रही थी।

डॉक्टर बख्श ये कंदील हैरानी और गम के मिले झुले तास्सुरात के साथ डॉक्टर बख्श की तरफ देखने लगी।

डॉक्टर बख्श ये क्या हो गया ,कंदील की घुटी हुई आवाज निकली,कंदील सामने का मन्जर देखकर डॉक्टर बख्श के कन्धे से टिक कर बेहोश हो चुकी थी




❓ आगे क्या हो सकता है (Story Prediction)

आगे कहानी में ये ट्विस्ट आ सकते हैं:

कंदील को होश आने के बाद पता चलेगा कि आगा जान की मौत एक हादसा नहीं बल्कि प्लान्ड मर्डर थी।

डॉक्टर बख्श पहले से सच्चाई जानते थे, इसलिए वो कंदील को रोक रहे थे।

हवेली के किसी करीबी इंसान (शायद परिवार का सदस्य) पर शक जाएगा।

कंदील इस सच्चाई को जानने के लिए खुद जांच शुरू करेगी।

उसकी और डॉक्टर बख्श की रिश्ते में भी दरार आ सकती है क्योंकि उन्होंने सच छुपाया।

💡 इससे हमें क्या सीख मिलती है

कभी-कभी सच्चाई से भागने की बजाय उसका सामना करना जरूरी होता है।

अपनों से सच छुपाना रिश्तों को कमजोर कर देता है।

इंसान का दिल अक्सर आने वाले खतरे को पहले ही महसूस कर लेता है।

मुश्किल हालात में हिम्मत और सब्र सबसे बड़ी ताकत होती है।

✍️ Next Short Part (आगे का छोटा हिस्सा)

कंदील की आंखें धीरे-धीरे खुलीं तो उसने खुद को एक कमरे में पाया।

उसके आस-पास कुछ औरतें बैठी थीं, जिनकी आंखों में आंसू थे।

“आगा जान…”

उसने कांपती हुई आवाज में कहा।

इतने में डॉक्टर बख्श उसके पास आए, उनके चेहरे पर गहरी उदासी थी।

“कंदील… खुद को संभालो…”

“नहीं! आप झूठ बोल रहे हैं… आगा जान मुझे छोड़कर नहीं जा सकते!”

कंदील जोर-जोर से रोने लगी।

डॉक्टर बख्श ने नजरें झुका लीं।

“ये हादसा नहीं था, कंदील…”

कंदील की सांस जैसे थम गई—

“तो फिर… ये सब किसने किया?”

कमरे में अचानक खामोशी छा गई…

और हर नजर एक ही शख्स की तरफ उठी…

💌 Readers के लिए शुक्रिया मैसेज

“मेरी इस कहानी को पढ़ने और इतना प्यार देने के लिए दिल से शुक्रिया ❤️

आपका हर कमेंट और सपोर्ट मुझे और बेहतर लिखने की हिम्मत देता है।

कहानी का अगला हिस्सा और भी ज्यादा सस्पेंस और इमोशन से भरा होगा—बने रहिए मेरे साथ!”



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