Kandeel
इधर नवाब साहब गुस्से और परेशानी के मिले जुले तास्सुरात के साथ।
दो रातों से सोए तक नहीं थे।
वहां दूसरी तरफ कोई एक इंसान बहुत ही इत्मीनान। और पुरसुकून भहरे अंदाज में।
सुकून की नींद सो रहा था।
जिस वक्त का मुझे सालों से इंतजार था।
वह वक्त मेरे बहुत नजदीक आ चुका है।
जिसकी वजह से कई सालों से भी मेरी नींद खराब हो चुकी थी। मेरा सुकून गारत हो चुका था।
उस हर एक चीज का बदला मुझे लेना है।
उन रातों का सुकून मुझे हासिल करना है अब।
उसके दिलों दिमाग में यही बातें चल रही थी।
इन बातों को लेकर। और इन बातों से लड़ता हुआ तो वापस यहां इंडिया आया था।
नहीं तो सब कुछ उसका बहुत पहले ही खत्म हो गया था। उसके लिए आने की सिर्फ एक ही वजह थी। और वह उसको हासिल करना थी।😒🤨🤨🤨🤨 हर एक चीज का हिसाब देना होगा तुम लोगों को।
सारे ही स्टाफ को मालूम था कि डॉक्टर बख्श के आने के टाइम पर सब डाक्टर को चेंबर में मौजूद रहना है बहुत जरूरी है।
इसलिए सारे डॉक्टर पहले ही आकर अपनी-अपनी सीट पर बैठ गए थे।
क्योंकि डॉक्टर बख्श के आने का वक्त हो गया था?
डॉ बक्श आ रहे हैं 2 मिनट बाद उनके सेक्रेटरी ने आकर कहा।
तो सारे डॉक्टर अलर्ट होकर बैठ गए।
और सब की निगाह दरवाजे की ही तरफ थी।
चेंबर में एक अजीब तरह छा गया था। सब की नजर सिर्फ दरवाजे की ही तरफ थी।
कुछ ही मिनट बाद डॉक्टर बख्श के बूट की आवाज आने लगी ।
रूम में इतनी खामोशी थी कि उनके बूट की आवाज सारे डॉक्टर को आसानी से सुनाई पड पड़ रही थी।
और कुछ सेकेंड बाद उनका चेहरा भी दरवाजे मे फिट होता हुआ नजर आने लगा।
उनको देखकर सारे डॉक्टर एक साथ उठे।
और उनको गुड मॉर्निंग कहा।
डॉ बख्श ने हल्की सी स्माइल के साथ। सारे डॉक्टर की गुड मॉर्निंग का जवाब दिया।
और सबको ही बैठने का इशारा किया।
वो रूम के अंदर दाखिल हो गए।
रूम के अंदर दाखिल होते ही वह सामने वाली चेयर पर बैठ गए।
डॉक्टर बख्श सारे ही डॉक्टर को गौर से देखकर उनका जाएजा लेने लगे।
कुछ देर आंखों की तफ्तीश करने के बाद। डॉक्टर बख्श के माथे पर शिकन आ गई।
लगता है मेरी पनिशमेंट से अभी तक वाकिफ नहीं है कुछ लोग।
फिर अपनी हरकत को दोहराया गया है।
डॉक्टर बख्श हल्के हल्के बड़बड़ा रहे थे।
डॉक्टर फरहान ।
डॉक्टर बख्श ने अपनी दबी आवाज में अपनी सेक्रेटरी को आवाज़ लगाई।
लेकिन वहां बैठे हुए सारे डॉक्टर ने महसूस किया।
डॉक्टर बख्श गुस्से में है।
क्योंकि उनके चेहरे की तास्सुरात कब बदल जाते थे?
किस वक्त और किस बात पर डॉक्टर बख्श को गुस्सा आ जाए।
पता ही नही लगता था।
सारे ही डॉक्टर एक दूसरे की शक्ल देखने लगे।
जी, जी सर वह उनके नजदीक आकर बोला।
इस वक्त सारे डॉक्टर्स यहां मौजूद नहीं है।
क्या आपने सारे डॉक्टर्स को आगाह नहीं किया था?
कि मैं टाइम का किस तरह पाबंद हूं।
मुझे टाइम की बर्बादी बिल्कुल पसंद नहीं है।
पूरे चेंबर में सिर्फ डॉक्टर बख्श की आवाज सुनाई पड़ रही थी।
सॉरी सर, बट सभी आपके रूल्स को फॉलो कर रहे हैं।
और सब अच्छी तरह से जानते हैं कि आपको 1 मिनट लेट होना बिल्कुल पसंद नहीं है।
डॉ फरहान ने कहा।
जी डॉक्टर आप बिल्कुल सही कह रहे है सब लोगों को यह बात मालूम है।
लेकिन अभी भी यहां पर कोई एक शख्स अबसेन्ट है। डॉक्टर बक्श बोले।
डॉक्टर फरहान ने सब डॉक्टर का जायजा लिया।
सबके चेहरे देखने के बाद डॉक्टर फरहान समझ चुके थे कि डॉक्टर बख्श किसके बारे में बात कर रहे हैं।
और वह जिसके बारे में बात कर रहे थे ।
काफी देर से डॉक्टर फरहान उनको कॉल कर चुके थे।
लेकिन ना तो उनकी कॉल रिसीव हो रही थी। और नहीं मैसेज सीन हो रहे थे।
जी सर, डॉक्टर कंदील यहा मौजूद नहीं है। डॉक्टर फरहान ने छोटा सा जवाब दिया।
अगर डॉक्टर फरहान उनसे यह बोल देता ,कि ना तो कंदील की कॉल रिसीव हो रही है ।
और ना ही उसका एसएमएस सीन हो रहे है।
तो वह जानता था कि डॉक्टर बख्श को और तेज गुस्सा आने लगेगा।
इसलिए इतना बोलकर डॉ फरहान खामोश हो गए थे।
क्या वह जानती नहीं है?
मुझे वक्त की बर्बादी करना बिल्कुल पसंद नहीं है।
आपने बताया नहीं था उनको।
डॉक्टर बख्श की आवाज धीमी लेकिन सख्त हो गई थी। डॉक्टर फरहान खामोश हो गए ।
और अपनी नजरों को नीचे झुका लिया।
ओके जो नहीं है उसके लिए हम अपना टाइम बर्बाद नहीं करना चाहते ।
मुझे जो कुछ भी कहना है। वो सारे डॉक्टर के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है।
और हमारे हॉस्पिटल के लिए भी।
डॉक्टर बख्श ने कंदील को इग्नोर करते हुए अपनी मीटिंग स्टार्ट की।
हालांकि अंदर से उन्हें बेतहाशा गुस्सा आ रहा था।
कन्दील पर।
लेकिन डॉक्टर बख्श अपने लफ़्ज़ों को किसी के सामने जाहिर नहीं करना चाहते थे।
उन्होंने खुद को नॉर्मल किया।
वह नहीं चाहते थे कि उनके अंदर की कन्दील के लिए जो नफरत है।
वह किसी भी इंसान पर जाहिर हो।
कोई भी यह बात जाने की वह कंदील से कितनी नफरत करते हैं।
डॉ बख्श जो कुछ भी समझ रहे थे।
सारे ही डॉक्टर बहुत ध्यान से उनकी बातों को समझ रहे थे
बावजूद इसके, के डॉक्टर बख्श का माईन्ड इस वक्त बहुत डिस्टर्ब था।
कोई था जो उन्हें बार-बार चैलेंज कर रहा था।
जो उन के रूल्स को अनफॉलो करके उन्हें और गुस्सा दिला रहा था।
वह ना चाहते हुए भी। इस बात को पूरी तरह बर्दाश्त करने की कोशिश कर रहे थे।
इस बात से अनजान और बेखबर थे डॉक्टर बख्श।
के इस वक्त कंदील की क्या हालत थी?
डॉ खान आप मुझे 5 मिनट बाद म मेरे केबिन में मिलिए ।
मीटिंग खत्म होते ही डॉक्टर बख्श ने डॉक्टर फरहान से कहा था।
डॉक्टर फरहान कुछ सेकेंड के लिए डॉक्टर बख्श को देखने लगे।
मीडियम कट काठी और अच्छी पर्सनालिटी।
बड़ा हुआ शेव जो उनके फेस को काफी सूट करता था। उसमें डॉक्टर बख्श काफी स्मार्ट नजर आते थे।
भले ही वह एज में डॉक्टर फरहान से कुछ बडे थे।
बट उनका एक्सपीरियंस डॉक्टर फरहान से ज्यादा था।
उनकी बॉडी लैंग्वेज उनके एज को सूट नहीं करती थी।
ओके सर आई एम कमिंग।
फरहान ने उनकी बात पर अपना कर हिलाते हुए कहा।
वह बिना कुछ कहे।
रूम से बाहर जाने लगे।
कमाल का एटीट्यूड और कॉन्फिडेंस है।
इस बन्दे मे डॉक्टर फरहान ने अपने दिल मे सोचा।
वो अपने सर को झटक कर डॉक्टर के पीछे ही चल दिए।


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