कंदील/kandil part-5

 


कंदील जब रूम में दाखिल हुई। तो उसने देखा डॉक्टर बख्श के हाथ में कोई बुक थी। 

और वह उसे पढ़ रहे थे। 

कंदील की तरफ उनकी पीठ थी। 

कंदील को थोड़ी सी बुक दिखाई पड़ रही थी।

जिससे ये आडिया लगाया जा सकता डॉक्टर बख्श  पीठ मुड़कर कोई बुक पढ़ रहे हैं। 

सर आपने मुझे बुलाया। 

कंदील ने खुद के अंदर बहुत हिम्मत जुटाते हुए डॉक्टर बख्श से यह पूछा था।

सिट डाउन मिस कंदील।  

डॉक्टर बख्श ने बिना मुड़े ही कंदील से कहा। 

ओह ओह सॉरी।  

माय मिस्टेक।

मैंने आपको मिस बोल दिया।

डॉक्टर बख्श  ने कहा। 

उनके यह लफ्ज बोलने पर कंदील चेयर पर बैठते बैठते रुक गई। 

उनकी बात का मतलब कंदील की समझ में नहीं आया।

लेकिन कंदील ने उनसे कुछ कहा नहीं। 

और अपना सर झटक कर  कुर्सी पर बैठ गई।

और डॉक्टर बख्श के बोलने का इंतजार करती रही। 

रूम में खामोशी छाई हुई थी।

सिर्फ घड़ी की सुई की टिक टिक करने की आवाज सुनाई पड़ रही थी।

कंदील अभी भी डॉक्टर बख्श की बात का मतलब समझने की कोशिश कर रही थी।

लेकिन कंदील की समझ में नहीं आ रहा था कि उन्होंने। इस तरह से कंदील से वो बात क्यों कही थी ?

डॉक्टर कंदील आप जानती हैं। आज आपने लेट आकर अपना कितना बड़ा नुकसान किया है। 

अभी वह सोचो कि इसी दौर में घूम  रही थी। 

के डॉक्टर बख्श की आवाज पर उसकी सोचो का दौर थम गया। 

और वह पूरी तरह से। डॉक्टर बख्श की बातों को। सुनाने की कोशिश करने लगी। 

अब डॉक्टर बख्श की पोजीशन चेंज हो चुकी थी।

  कंदील की तरफ उनकी पीठ नहीं उनका मुंह था। 

और वह जो किताब पढ़ रहे थे।

उसको भी उन्होंने मैज पर रख दिया था।

डॉक्टर बख्श अपने सिने पर  हाथ बांधकर। पूरे ध्यान से कंदील की तरफ देख रहे थे। 

कंदील भी उनको देखने लगी। 

कुछ सेकंड कंदील उनका यूं ही देखती रही।

फिर उसने अपनी नजरों को झुका लिया।

लेकिन डॉक्टर बख्श अभी भी पूरे ध्यान से कंदील की तरफ ही देख रहे थे। 

फिर वह वहां से आहिस्ता आहिस्ता चलते हुए। कंदील के नजदीक आ गए। 

और कंदील के जस्ट बराबर में आकर खड़े हो गए।

कंदील को जब यह महसूस हुआ। 

की डॉक्टर बख्श बिल्कुल कंदील के नजदीक ही खड़े हैं।

तो उसका हलक सूखने लगा।

रिमेंबर नाऊ डॉक्टर कंदील आज आपने कितनी बड़ी गलती की है।

मेरी मीटिंग में लेट आने की।

डॉक्टर बक्श झुककर कंदील के कानों में यह लफ्ज़ कह रहे थे ।

वह अपने होठों को कंदील के कानों के बिल्कुल नजदीक ले आए थे।

उनकी गरम-गरम साँसे कंदील के कानों में पढ़ रही थी।

और कंदील को उनकी इस हरकत पर बड़ा ही अजीब सा लग रहा था।

आई एम , आई एम सॉरी सर आइंदा में ध्यान रखूंगी कि कभी लेट ना हो सकू।

कंदील ने हकलाते हुए कहा।

वेरी गुड।

के आगे से आप इस बात का ध्यान रखेंगी। 

बट अभी तो पनिशमेंट देना आपको लाजमी बनता है ना। डॉक्टर बख्श ने कहा।

अभी भी वह अपनी इस पोजीशन में खड़े हुए थे

कंदील को बहुत कोफ्त  महसूस हो रही थी ।उनके इस तरह खड़े होने पर।

कंदील ने हाथ बढ़ाते हुए खड़े होने की कोशिश की। 

मगर उसका सर। डॉक्टर बख्श के सर से टकराया ।

और दोबारा वो अपनी जगह पर गिर गई।

रिलैक्स रहिए ।

डॉक्टर कंदील इतना डरने की जरूरत नहीं है।

डॉक्टर बक्श ने अपने दोनों हाथ कंदील के दोनों कंधों पर रखते हुए कहा।

डॉक्टर  बक्श समझ रहे थे कि कंदील उनसे बहुत ज्यादा डर रही है।

जब डॉक्टर बख्श ने कंदील के कंधों पर हाथ रखा तो कंदील ने मुड़कर डॉक्टर बख्श की तरफ देखा। 

और उसकी नज़रें डॉक्टर बख्श की नजरों से टकराने लगी।

दोनों के ही चेहरे एक दूसरे के बहुत नजदीक थे।

बहुत खूबसूरत थे डॉक्टर बख्श। 

दरमियां क, काले सुन ,बाल काली आंखें। 

और गोरे रंग पर हल्का बड़ा हुआ शेव।

उनकी खूबसूरती को और चार-चान्द लगा रहा था। 

कंदील कुछ लम्हे के लिए उनके चेहरा और उनकी आंखों में  खो सी गई थी।

अभी वह दोनों एक दूसरे में इसी तरह खोए रहते।

अगर कंदील के फोन की रिंग नहीं बजती।

कंदील ने अपने कोर्ट से अपना फोन निकाला। 

स्क्रीन पर आगा जान का नाम शो हो रहा था।

कंदील ने उन्हें मैसेज कर दिया 

मैं अभी थोड़ी देर में आपसे बात करती हूं।

इस वक्त में इमरजेंसी में हूं।

डॉक्टर बख्श भी सीधे खड़े होकर अपना को ठीक करने लगे।

वह ठीक कंदील के पीछे खड़े हुए थे ।

इसलिए आराम से देख सकते थे कि कंदील ने किसी को मैसेज किया है।

कंदील ने भी मैसेज करके फोन  वापस अपने कोर्ट में रख लिया था। 

कंदील को बड़ी घुटन महसूस हो रही थी। 

यहां डॉक्टर बख्श के साथ रुकने में।

कंदील को डॉक्टर बख्श का चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लग रहा था।

सो मिस कंदील।

डॉक्टर बक्श ने कहा और, मिस, के नाम पर फिर उन्होंने 

,ओह, 

कहा।

सॉरी डॉक्टर कंदील।

बट आपको यह पनिशमेंट दी जाती है ।

कल जो वक्त सारे डॉक्टर के आने का है अस्पताल में। आप उसे 2 घंटे पहले अस्पताल में आएंगी।

डॉक्टर बख्श चलते हुए मेज की दूसरी साइड पर गए। 

और वहां से कुछ फाइल्स उठाकर। 

वापस कंदील की तरफ आ गए।

और यह कुछ केसेस है।

इन पर स्टडी करने के बाद। 

आपको मुझे इनकी सिचुएशन बताना  है। 

और यह सब आपको कल ही करना है।

डॉ बख्श ने वार्निंग भरे लहजे में कंदील को वह फाइल देते हुए कहा।

कंदील  ने हैरानी और परेशानी के मिले-जुले तास्सुरात के साथ डॉक्टर बख्श की तरफ देखा। 

ओके सर। 

और डॉक्टर बख्श के हाथों से फाइल को ले लिया।

डॉ बख्श कंदील को देखकर मुस्कुराने लगे।

इस वक्त वह डॉक्टर बख्श के सामने किसी। डरे बच्चों की तरह लग रही थी।

कंदील बाय बोलकर।

डॉक्टर बख्श के रूम से बाहर जाने लगी। 

डॉक्टर बख्श उसे। देखकर ऐसे मुस्कुरा रहे थे। 

जैसे उन्हें अपनी पहली जीत हासिल हो गई हो।

यही तो मैं चाहता हूं कि तुम हर वक्त। इसी तरह से मेरी बात को। आंखें मून्द कर मान लो।

डॉक्टर बख्श ने कहा। 

यह लफ्ज उन्होंने इतने आहिस्ता कहे थे।

कि कंदील इन लफ्जों को सुन नहीं सकती थी। 

और वह रूम से बाहर जा चुकी थी।



बहुत तड़पाया है मुझे तुमने कन्दील जफर


To be continued......


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