डॉक्टर बख्श की जिंदगी में छुपे राज़ – मरियम जमाल का दर्द और कंदील की खुशखबरी
mreyum jamal ki such
मरियम जमाल की सोच भी उस फैन की तरह ही गोल-गोल घूम रही थी।
जिसको बहुत देर से वह घूर कर देख रही थी।
उसकी जिंदगी ऐसे मोड़ पर आकर खड़ी हो गई थी।
जहां से पलटना नामुमकिन था ।
मरियम जमाल के लिए।
वो डॉक्टर बख्श की मोहब्बत में इतनी आगे बढ़ चुकी थी।
के उसे अपने पीछे कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा था?
सिर्फ डॉक्टर बख्श ही दिखाई पड़ रहे थे।
और डॉक्टर बख्श से उसका एक बहुत खूबसूरत रिश्ता था।
वह उसकी मोहब्बत के साथ-साथ उसके शौहर भी थे।
तो चाहकर भी उन्हे दूर नहीं जाने देना चाह
रही थी।
मरियम जमाल का हाथ उसके पेट पर गया।
जहां जख्म की वजह से दर्द हो रहा था।
उसने उठने की कोशिश की लेकिन दर्द की शिद्दत से।
वह उठ नहीं सकी।
अरे अरे मैडम क्या कर रही हैं आप?
आराम से लेटी रहिए।
नर्स ने देखा जब मरियल जमाल उठने की कोशिश कर रही है।
तो नर्स उसके नजदीक आते हुए बोली।
और उसको आराम से लिटा दिया।
तभी मरियम जमाल की नजर दरवाजे की तरफ गई।
जहां से डॉक्टर बख्श आ रहे थे।
मरियम जमाल की सारी ताबज्जौह डॉक्टर बख्श की तरफ ही चली गई थी।
अब कैसी है तुम्हारी तबीयत मरियम।
डॉक्टर बख्श ने अंदर आते ही मरियम को देखकर उसे सवाल किया।
ठीक हूं डॉक्टर बख्श।
मरियम जमाल ने जवाब दिया।
डॉक्टर बख्श कुर्सी खींचकर मरियम जमाल के नजदीक बैठ गए।
कैसे हुआ यह सब तुम्हारे साथ।
क्या तुम जानती हो किसने किया यह तुम्हारे साथ?
डॉ बख्श मरियम जमाल से पूछ रहे थे।
डॉक्टर बख्श के कहे हुए अल्फाजों की वजह से मरियम जमाल सोच में पड़ गई थी।
वह सोच रही थी कि वह डॉक्टर बख्श को क्या जवाब दे? क्या हुआ मरियम जमाल इतनी गहरी सोच में क्यों हो तुम। क्या तुम उसको जानती थी जिसने तुम पर वार किया था?
डॉक्टर बख्श ने जब यह देखा कि मरियम जमाल बहुत गहरी सोच में है ।
तो डॉक्टर बख्श ने उससे सवाल किया।
जी नहीं डॉक्टर बख्श में उस शख्स को नहीं जानती ।
और उस हमले से पहले मैंने उस शख्स को कहीं देखा भी नहीं था।
मरियम जमाल ने डॉक्टर बख्श की बात का जवाब देते हुए कहा।
उस शख्स ने तुम पर हमला क्यों किया मरियम जमाल?
डॉक्टर डी बख्श ने सवाल किया।
डॉक्टर बख्श यह बात तो मैं नहीं जानती लेकिन उसके रवैया से ऐसा लग रहा था कि वह शायद मेरे कमरे में चोरी करने की इरादे से आया था।
मरियम जमाल ने कहा।
ज्यादा दर्द तो नहीं हो रहा है ना।
डॉक्टर बख्श ने मरियम का जमाल का हाथ पकड़ कर अपनायत भरे लहजे में पूछा।
और डॉक्टर बख्श के इस अपनायत भरे लहजे को देखकर मरियम जमाल की आंखों में आंसू आ गए।
नहीं डॉक्टर बख्श मरियम जमाल ने ना में गर्दन को हिलाया।
डरने और घबराने की जरूरत नहीं है तुम्हें।
मैं हूं ना तुम्हारे साथ।
डॉ बक्श ने उसका हाथ दबाकर अपनी आंखों को बंद करते हुए कहा।
तो जैसे मरियम जमाल को जीने की नई रहा नजर आ गई हो।
मरियम जमाल के होठों पर इस वक्त हंसी आ गई थी ।डॉक्टर बख्श की बात सुनकर।
मरियम जमाल को लगने लगा शायद उसके साथ कोई है जो उसका अपना है।
जबकी डॉक्टर बख्श के दिल में ऐसा कुछ नहीं था ।
उन्होंने नॉर्मल लहजे मै मरियल जमाल से यह बात बोली थी।
कभी-कभी ऐसा होता है कि हम अपनी तरफ से नॉर्मल भी बिहेव करते हैं।
तो सामने वाला शख्स उसको स्पेशल समझने लगता है।
और इस वक्त यही मरियम जमाल के साथ भी हुआ था।
ठीक है तुम आराम करो मैं तुमसे बाद में मिलने आता हूं।
डॉ बख्श कहकर उठकर जाने लगे थे।
तभी डॉक्टर बख्श को महसूस हुआ कि किसी ने उनका हाथ पकड़ लिया है।
डॉ बख्श ने पीछे मुड़कर देखा।
मरियम जमाल अपने हाथ में डॉक्टर बख्श के हाथ को पकड़े हुए थी।
डॉक्टर बख्श आप मुझे छोड़कर नहीं जाएंगे ना।
आप यूं ही हमेशा मेरे साथ रहेंगे।
मरियम जमाल बच्चों वाले लहंजे में डॉक्टर बख्श से बात कर रही थी।
और इस वक्त डॉक्टर बख्श।
चाह कर भी मरियम जमाल से कुछ बोल नहीं पाए थे। मरियम मैं तुमसे बाद में बात करता हूं।
अभी मैं हॉस्पिटल में बाकी पेशेंट का मुआइना कर लू । डॉक्टर बख्श ने अपने हाथ से मरियम जमाल का हाथ छुड़ाते हुए कहा।
और फिर दरवाजे के बाहर निकल गए।
मरियम जमाल उनको जाते हुए देख रही थी।
क्योंकि उनकी जुबान से कहे हुए चंद लफ्ज? मरियम जमाल के लिए बहुत ही इंपॉर्टेंट थे।
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आज कंदील का मन कर रहा था कि वह मॉम के साथ मिलकर डॉक्टर बख्श के लिए उनकी पसंदीदा कोई डिश बनाएं।
और यही बात सोच कर वह अपने रूम से बाहर आई थी।
वैसे तो डॉक्टर बख्श के घर में काफी मुलाजिम मौजूद थे। लेकिन डॉक्टर बख्श को खाना अपनी मॉम के हाथों का ही पसंद था।
कंदील डायरेक्ट किचन के अंदर आ गई।
उसने देखा मॉम किसी काम में बिजी हैं।
अस्सलामो आलेकुम कंदील ने उन को सलाम किया।
वालेकुम अस्सलाम उन्होंने बहुत खुश होकर कंदील के सलाम का जवाब दिया।
क्या बात है बेटा किसी चीज की जरूरत है?
अगर जरूरत थी तो मुलाजिम कैसे कहलवा देती खुद आने की जहमत क्यों उठाई तुमने?
वो बहुत प्यार से कंदील से कह रही थी।
नहीं किसी चीज की जरूरत नहीं है मॉम।
मुझे आपसे यह जानना था कंदील बोलते बोलते खामोश हो गई थी।
बोलो मेरी प्यारी बेटी क्या जानना था तुम्हें?
उन्होंने बहुत प्यार से कंदील की थोड़ी को छूकर कहा।
मुझे डॉक्टर बख्श के लिए कुछ बनाना था।
तो मै यह जानना चाह रही थी कि डॉक्टर बख्श को खाने में क्या पसंद है?
कंदील ने अपनी बात को मुकम्मल करते हुए कहा।
ओहहहह तो यह बात है।
मॉम कंदील को यहा देखकर बहुत खुश हो गई थी।
उन्होंने उसे अपने गले से लगा लिया।
मैं बताती हूं तुम्हें कि उसे खाने में क्या पसंद है?
ठीक है और हम दोनों मिलकर उसके लिए खाना बनाएंगे। उन्होने कन्दील को अपने से अलग करके कंदील के सर पर हाथ फेरते हुए कहा।
मॉम ने कंदील को ठीक से देखा तो उन्हें कंदील में कुछ चेंजिंग नजर आ रही थी।
कंदील की बॉडी में मॉम को काफी तब्दीली नजर आ रही थी।
और उसका फेस भी पहले से और ज्यादा खूबसूरत लग रहा था।
कंदील मॉम के साथ हाथ बटाने लगी।
और डॉक्टर बख्श के लिए कुछ बनाने में उनकी मदद करने लगे।
कंदील मेरी बहुत ख्वाहिश थी कि मेरी एक बेटी हो।
लेकिन खुदा की मर्जी नहीं थी इसलिए मेरे कोई बेटी नहीं हुई।
लेकिन जब से तुम मेरी जिंदगी में शामिल हुई हो ।
तो मुझे ऐसा लगता है वह कमी पूरी हो गई है कंदील।
वो बहुत प्यार से कंदील से कह रही थी।
और कंदील उनकी बातों को सुनकर मुस्कुरा रही थी।
क्योंकि इससे पहले मां जैसी मोहब्बत कंदील को नहीं मिली थी?
हवेली में हर तरह से सब लोगों ने उसका बचपन से ही ख्याल रखा था।
कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होती थी।
लेकिन डॉक्टर बख्श की मॉम उसका जितना ख्याल रखती थी उसे जितनी मोहब्बत करती थी।
उसे अपनी वालिदा याद आने लगी थी ,उनकी मोहब्बत को देखकर।
वो दोनों एक दूसरे से बात कर रही और काम में मसरूफ थी।
अचानक से कंदील को महसूस हुआ।
के उसको उल्टी आने वाली है?
वह अपने मुंह पर हाथ रखकर वॉशरूम की जानिब भागी।
कंदील बेटा क्या हुआ?
उसके पीछे-पीछे मॉम भी भागी।
कंदील वॉशरूम में जाकर उल्टियां करने लगी।
तुम ठीक हो ना कंदील।
मॉम उसे बाहर से आवाज लग रही थी।
उन्हे उल्टियां की आवाज सुनाई पड़ रही थी।
जी ,जी मैं ठीक हूं मॉम।
कंदील ने अपने मुंह पर पानी डालते हुए कहा।
कंदील वॉशरूम में से बाहर आ गई थी।
अभी तो ऐसा कुछ तुमने खाया भी नहीं कंदील जो तुम्हें सुबह सुबह उल्टियां आ गई।
तबीयत तो ठीक है ना बेटा तुम्हारी।
वो उसका हाथ पकड़ते हुए बोली।
मॉम को कंदील की फिक्र होने लगी थी।
मॉम वो आज कल मुझे उल्टियां आने लगी है।
डॉ बक्श ने मुझसे कहा भी था।
सुबह दवाई खाने के लिए।
लेकिन मैं दवाई खाना भूल गई।
कंदील ने उन्हें बताते हुए कहा।
कंदील की ये बात सुनकर मॉम के चेहरे पर चमक आ गई थी।
क्या कहा तुमने आजकल तुम्हें उल्टी आती रहती है?
कंदील तुम प्रेग्नेंट हो।
उन्होंने उसकी थोड़ी ऊपर करते हुए कहा।
कंदील ने हा में सर हिलाते हुए, शर्म से अपनी नजरों को नीचे झुका लिया।
ओहहह कंदील थैंक यू सो मच।
अल्लाह तेरा लाख-लाख शुक्र है।
जो तूने इतनी जल्दी हमें इतनी बड़ी खुशी से नवाजा।
वह अल्लाह का शुक्रिया अदा करने लगी।
छोड़ो इस काम को और इधर आकर मेरे पास बैठो।
वो कंदील का हाथ पकड़ कर उसे अपने
रूम में ले गई।
कंदील तुम नहीं जानती मुझे यह सुनकर कितनी खुशी हो रही है।
कि तुम प्रेग्नेंट हो मॉम सच में बहुत खुश नजर आ रही थी।
कंदील को डर लग रहा था, कि मॉम उससे यह ना पूछने की कितना टाइम हो गया है प्रेगनेंसी को उसकी।
अगर मॉम मुझसे पूछ लेती तो उनको क्या जवाब देती मै?
कंदील सोचने लगी।
आगे कहानी में क्या हो सकता है
कहानी अब एक बहुत दिलचस्प मोड़ पर आ चुकी है।
मरियम जमाल डॉक्टर बख्श की मोहब्बत को सच समझ बैठी है, जबकि डॉक्टर बख्श के दिल में उसके लिए वैसी कोई भावना नहीं है। यह गलतफहमी आगे चलकर बहुत बड़ा तूफान खड़ा कर सकती है।
दूसरी तरफ कंदील के प्रेग्नेंट होने की खबर घर में खुशी लेकर आएगी। लेकिन अगर मरियम जमाल को यह बात पता चल गई तो शायद उसके दिल में जलन और दर्द और ज्यादा बढ़ जाए।
मुमकिन है कि मरियम जमाल डॉक्टर बख्श को पाने के लिए कोई ऐसा कदम उठा ले जो सबकी जिंदगी बदल दे।
आने वाले हिस्से में
मरियम जमाल की सच्चाई सामने आ सकती है
कंदील की प्रेग्नेंसी से कहानी में नया मोड़ आएगा
और डॉक्टर बख्श को एक बहुत मुश्किल फैसला करना पड़ सकता है।
इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है
यह कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी इंसान किसी के छोटे से अपनापन को भी मोहब्बत समझ बैठता है।
रिश्तों में सच्चाई और साफगोई बहुत जरूरी होती है। अगर इंसान अपने जज़्बात और हकीकत को सही वक्त पर बयान न करे तो गलतफहमियां बहुत बड़ा दर्द बन सकती हैं।
इसके अलावा यह भी समझ आता है कि जिंदगी में आने वाली हर खुशी और हर मुश्किल इंसान के सब्र और इम्तिहान का हिस्सा होती है।
Next Short Part (अगला छोटा हिस्सा)
डॉक्टर बख्श अपने केबिन में बैठे फाइल देख रहे थे।
लेकिन उनका ध्यान बार-बार मरियम जमाल की तरफ चला जाता था।
उसी वक्त उनके फोन पर एक कॉल आई।
उन्होंने कॉल उठाई।
दूसरी तरफ से आवाज आई —
“डॉक्टर बख्श… आपको शायद पता नहीं… जिस लड़की को आपने बचाया है… वह आपकी जिंदगी बदलने वाली है।”
डॉक्टर बख्श का माथा सिकुड़ गया।
“तुम कौन हो?”
लेकिन दूसरी तरफ से फोन कट चुका था।
उधर हवेली में कंदील अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में सोच रही थी।
उसे जरा भी अंदाज़ा नहीं था कि आने वाले दिन उसकी जिंदगी में कितने बड़े तूफान लेकर आने वाले हैं।
Readers के लिए शुक़्रिया मैसेज
अज़ीज़ पाठकों,
आप सभी का दिल से शुक्रिया कि आपने इस कहानी को इतना प्यार दिया।
आपकी मोहब्बत, आपके कमेंट्स और आपकी दुआएं ही हमें लिखते रहने की हिम्मत देती हैं।
उम्मीद है कि आपको यह कहानी पसंद आ रही होगी।
आने वाले हिस्सों में कहानी और भी दिलचस्प और जज़्बाती होने वाली है।
अपना प्यार और दुआएं ऐसे ही बनाए रखिए।
बहुत-बहुत शुक्रिया।



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