“ख़ामोश रात का सच: डॉ बख्श, कंदील और छुपी हुई ज़िंदगी”
Doctor Bakhsh ki preshani
डॉ बख्श की समझ में नहीं आ रहा था कि वह सच्चाई किस तरह से कंदील को बताएं।
उनकी एक बीवी और है मरियम जमाल।
क्योंकि डॉक्टर बख्श को इस बात का डर था कि अगर उन्होंने सब सच कन्दील को बता दिया?
तो कंदील उस वक्त के हालात को नहीं समझेगी।
वो डॉक्टर बख्श को ही गलत समझेंगी।
और यही सोच सोच कर उनका माइन्ड डिस्टर्ब हो रहा था।
उन्होंने एक निगाह अपने बगल में सोती हुई कंदील पर डालीं।
जो इस वक्त बेफिक्र होकर सो रही थी।
उसके चेहरे पर इतना भोलापन और ईत्मीनान था।
के डॉक्टर बख्श उसको देखने लगे।
कंदील तुम्हारा यह भोलापन और तुम्हारे चेहरे की सच्चाई।
मुझे कहीं और नहीं जाने देती है।
तुम्हारे आगे में खुद को बेबस महसूस करता हूं।
डॉ बक्श करवट लेकर कंदील के बालों को सहला रहे थे।
मुझे पता है कंदील अगर तुम्हें इस बात का इल्म हो गया कि मेरी जिंदगी में तुम्हारे अलावा भी कोई दूसरी लड़की शामिल है।
तुम कोई भी लफ्ज बोले बिना मुझे छोड़ कर चली जाओगी।
और यह मैं हारगिज नहीं होने देना चाहता।
उस लड़की मरियम को तलाक देकर अपनी जिंदगी से दोबारा दूर कर दूंगा मै।
कल मैंने उसकी बात मानकर ठीक नहीं किया था।
पता नहीं है वह किस आफत में लाकर मुझे खड़ा कर दे
याफिर तुम से ही जुदा कर दे।
डॉक्टर बख्श अपने दिल में सोच रहे थे।
तभी डॉक्टर बख्श के फोन पर बेल बजने लगी।
डॉक्टर बख्श की नजर पहले वॉल क्लॉक पर गई।
जो 2:00 बजाने का इशारा कर रहे थे।
फिर उन्होंने साइड वाले मेज पर से अपने फोन को उठाया।
उनके फोन पर मरियम जमाल का नंबर शो हो रहा था। डॉक्टर बख्श की त्यौरी में बल पड़ गए थे।
इस वक्त फोन करने का क्या मतलब है मरियम जमाल का?
उन्होंने सोचते हुए कॉल को रिसीव किया।
हेलो।
डॉ बख्श की आवाज बहुत रूड थी इस वक्त।
हेलो डॉक्टर बख्श।
दूसरी तरफ से मरियम जमाल ने कहा।
प्लीज आप इसी वक्त मेरे पास मेरे रूम मे आजाये
मरियम जमाल की आवाज बहुत डरी डरी और हल्की निकल रही थी।
ऐसा लग रहा था कि वह किसी से छुप कर कॉल कर रही हो डॉक्टर बख्श को।
मैं क्यों इस वक्त वहां पर आ जाऊ?
डॉ बख्श ने दबी हुई आवाज में कहा।
क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि इस वक्त उनकी आवाज की वजह से कंदील जाग जाए?
डॉ बख्श प्लीज ट्राय टू अंडरस्टैंड मी।
मरियम जमाल ने कहा।
एक जोरदार चीख के साथ मरियम जमाल की कॉल कट हो चुकी थी।
मरियम जमाल, मरियम जमाल।
डॉक्टर बख्श ने मरियम जमाल के नाम को दौहराया।
लेकिन वहां से किसी तरीके का कोई जवाब नहीं आया था।
डॉक्टर बख्श घबराते हुए अपने बैड से उठे।
और वो अपनी शर्ट पहनकर बाहर जाने लगे।
जाते-जाते उन्होंने एक नजर कंदील पर डाली।
फिर दरवाजे को बहुत आहिस्ता से बंद करके।
रूम से बाहर निकल गए।
डॉक्टर बख्श जल्द से जल्द मरियम जमाल के होटल के रूम में पहुंचाना चाहते थे।
उन्हे महसूस हो रहा था कि मरियम जमाल के साथ कुछ गलत हुआ है।
अचानक से फोन पर बात पर बात करते-करते उसकी कॉल कट हो गई थी?
और उसकी चीख की आवाज को डॉक्टर बख्श ने सुना था।
डॉक्टर बख्श अपनी गाड़ी की स्पीड को बढ़ाते हुए होटल की जानिब जाने लगे।
अचानक से कंदील की आंख खुल गई थी।
उसने देखा के डॉक्टर बख्श इस वक्त बैड पर मौजूद नहीं थे।
कंदील ने सोचा कि शायद वह इस वक्त वॉशरूम में गए होंगे।
कंदील बैड पर सिधी होकर लेट गई।
वो डॉक्टर बख्श के वॉशरूम से निकलने का इंतजार करने लगी।
कंदील को इंतजार करते हुए 15 मिनट गुजर गए थे।
लेकिन डॉक्टर बख्श का अभी तक कुछ पता नहीं था।
कंदील अपने बैड से उठी और वॉशरूम की तरफ गई।
उसने जैसे ही वॉशरूम के दरवाजे पर हाथ रखा।
वॉशरूम का दरवाजा खुल गया।
उसने देखा कि अंदर कोई नहीं था।
कंदील वॉशरूम से निकाल कर वॉशरूम के दरवाजे को बंद करके वापस रूम में आ गई।
डॉक्टर बख्श वॉशरूम में भी नहीं है।
इस वक्त कहां गए होंगे?
कंदील सोचने लगी थी।
कंदील बैड पर बैठ गई और उसकी नजर वॉल क्लॉक पर गई।
जो इस वक्त 2:30 बजाने का इशारा कर रही थी।
रात की इस पहर डॉक्टर बख्श मौजूद नहीं है।
कहां चले गए है वो?
कंदील सोचने लगी।
फिर उसने कुछ सोच कर अपने फोन को उठाया।
डॉक्टर बख्श का नंबर डायल किया ।
डॉक्टर बख्श के फोन पर बेल बज रही थी ।
लेकिन फोन रिसीव नहीं हो रहा था।
काफी देर तक कन्दील ने डॉक्टर बख्श के फोन पर कॉल लगाई।
लेकिन डॉक्टर बख्श का फोन रिसीव ही नहीं हो रहा था।
हार कर कंदील ने फोन को कट करके बैड पर रख दिया।
आखिर कहां चले गए डॉक्टर बख्श और फोन भी रिसीव नहीं कर रहे हैं?
या अल्लाह तू सब ठीक रखना।
कंदील को जाने कैसे बसबसे आने लगे थे?
वो डॉक्टर बख्श की सलामती की दुआ करने लगी।
कंदील को घबराहट होने लगी थी।
वो अपने रूम से बाहर निकाल कर मॉम के रूम की तरफ जाने लगी।
कंदील के रूम से थोड़ी दूरी पर ही था उनका रूम
कंदील उनके रूम के पास आ गई थी।
फिर उसने अपना हाथ दरवाजे पर बाडाया ही था।
नही ,नही कंदील उनको जगाना ठीक नही है।
वो भी परेशान होने लगेन्गी ये सुन कर के इस वक्त डॉक्टर बख्श घर पर मौजूद नही है ।
और वो बिना बताए कही चले गए है।
ये सोच कर कंदील ने अपने उठे हुए हाथ को नीचे कर लिया
फिर वो अपने रूम की तरफ वापस मुड़ गई।
कंदील ने घर के चारो तरफ नजर घुमा कर देखा।
इस वक्त सारे घर मे सन्नाटा पसरा हुआ था।
सारे ही मुलाजिम अपने अपने रूम मे जाकर सो रहे थे।
कंदील अपने कदमो को तेज तेज बडाती हुई अपने रूम तक आई।
फिर रूम मे आकर उसने दरवाजा बंद कर लिया।
डॉक्टर बख्श की गैर मौजूदगी मे कन्दील को बहुत अजीब महसूस हो रहा था।
डॉक्टर बख्श कहा है आप 😔😒😔
मुझे फिक्र हो रही है आपकी
कंदील डॉक्टर बख्श को याद करके अपने दिल मे सोच रही थी।
Is Kahani Mein Aage Kya Ho Sakta Hai?
आगे कहानी कई नाज़ुक मोड़ों की तरफ़ बढ़ सकती है—
मरियम जमाल के साथ होटल में कोई बड़ा हादसा सामने आ सकता है।
डॉ बख्श की ज़िंदगी का छुपा हुआ सच अब ज़्यादा देर छुपा नहीं रह पाएगा।
कंदील का शक धीरे-धीरे यक़ीन में बदल सकता है।
या फिर डॉ बख्श एक और ग़लती कर बैठेंगे, जो रिश्ते की जड़ हिला देगी।
यह कहानी अब सिर्फ़ मोहब्बत की नहीं,
एतबार, डर और फ़ैसलों की कहानी बनती जा रही है।
🌺 Is Kahani Se Hamein Kya Sikh Milti Hai?
इस कहानी से हमें यह सबक़ मिलता है कि—
सच चाहे जितना कड़वा हो, उसे देर से बताना और भी ज़्यादा तबाही लाता है।
मोहब्बत में झूठ का सहारा लिया जाए, तो रिश्ते खोखले हो जाते हैं।
किसी के चेहरे की मासूमियत, उसकी नीयत की ज़िम्मेदारी भी माँगती है।
डर के साये में लिए गए फ़ैसले, अक्सर अपनों को चोट पहुँचा देते हैं।
👉 रिश्ते सच से चलते हैं, खामोशी से नहीं।
✨ Next Short Part (Continuation)
“होटल की वो रात”
डॉ बख्श की गाड़ी तेज़ी से सड़कों को चीरती चली जा रही थी।
शहर सो रहा था,
मगर उनकी ज़िंदगी जाग चुकी थी।
बार-बार वही चीख कानों में गूँज रही थी—
मरियम जमाल की चीख।
उनका दिल बुरी तरह धड़क रहा था।
अगर कंदील को कुछ पता चल गया…
इस ख़याल ने उन्हें अंदर तक हिला दिया।
उधर कंदील,
अपने कमरे में बैठी,
दरवाज़े को ताकती रही।
हर आहट पर उसका दिल काँप उठता।
या अल्लाह…
जिसे मैंने अपना सब कुछ माना,
उसे मेरी दुआओं के हवाले रख।
उस रात
दो अलग-अलग जगहों पर
दो दिल
एक ही डर में डूबे हुए थे।
💌 Readers Ke Liye Shukriya SMS,
अगर इस कहानी के अल्फ़ाज़
आपके दिल में उतर गए हों,
तो समझिए हमारी मेहनत रंग लाई।
आपका पढ़ना,
आपका महसूस करना,
और इस सफ़र में हमारे साथ रहना—
हमारे लिए सबसे बड़ी हिम्मत है।
दिल से शुक्रिया
कि आपने इस खामोश रात की कहानी सुनी।
आगे की कड़ियाँ
और भी राज़ खोलेंगी।



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