खामोश सच: एक्सीडेंट के बाद कंदील और डॉक्टर बख्श के दिल में छुपा डर

 


कंदील की जब आंख खुली तो वह अस्पताल के बैड पर लेटी हुई थी। 

उसका सर अभी भी चकरा रहा था।

पहले तो कंदील की यही समझ में नहीं आया कि वह अस्पताल के बैड पर क्यों है?

लेकिन आहिस्ता आहिस्ता करके उसे याद आ गया के वो डॉक्टर बख्श के साथ गाड़ी में घूमने जा रही थी? 

तो गाड़ी की टक्कर ट्रक से हो गई जिससे उन दोनों का एक्सीडेंट हो गया था।

उसके बाद कंदील को कुछ भी याद नहीं था। 

अब उसकी आंख खुली तो उसने खुद को अस्पताल के बैड पर मौजूद पाया।

डॉक्टर बख्श कहां है?

सबसे पहले  होठो पर आने वाला लफ्ज कंदील के मुंह पर डॉक्टर बख्श का नाम था।

नर्स ,नर्स। 

कंदील ने नर्स को आवाज लगाने की कोशिश की।

नर्स कंदील की आवाज सुनकर उसके पास भागती हुई आ गई। 

क्या बात है मैडम एनी प्रॉब्लम? 

नर्स ने कंदील की हालत को देखा तो उससे सवाल किया। नर्स डॉक्टर बख्श कहां है?

कंदील ने नर्स से पूछो। 

उसके सवाल पर नर्स खामोश हो कर अपनी नजरो झुकाने लगी थी । 

तुम कुछ बोलती क्यों नहीं जवाब दो डॉक्टर बख्श कहां है? 

कंदील ने जब उस नर्स को खामोश देखा तो उससे सवाल किया।

वो, वो मैम सर अभी बाहर है, मैं  बुला कर लाती हूं उन्हें कंदील के कहने पर नर्स डॉक्टर बख्श को बुलाने के लिए बाहर की तरफ भागी।

कंदील को अजीब तरह की फीलिंग हो रही थी ।

उसको महसूस हो रहा था कि कुछ गलत होने वाला है

या कुछ गलत हो चुका है।

कही डॉक्टर बख्श को कुछ कंदील के जहन मे ख्याल आया। 

नही, नही ऐसा कुछ नही हुआ है डॉक्टर बख्श को कुछ नही होगा।

कंदील ने बुरे बसबसो से अपने जहन को झटका।

तभी दरवाजे में उसे डॉक्टर बख्श दिखाई पड़े। 

डॉक्टर बख्श को देखकर उसके फेस पर हल्की सी स्माइल आ गई थी। 

अल्लाह तेरा लाख-लाख शुक्र है  डॉक्टर बख्श बिल्कुल सही सलामत है।

डॉक्टर बख्श के माथे पर पट्टी बंधी हुई थी।

डॉक्टर बख्श चलते हुए कंदील के नजदीक आ गए। 

उन्होंने साइड में पड़ी बेंच को खींचा और उस पर बैठ गए।

कंदील कैसी हो तुम ,अब कैसा महसूस कर रही हो? 

डॉ बख्श ने कंदील का हाथ अपने हाथों में लेते हुए दूसरे हाथ से कंदील के सर पर हाथ फिराते हुए कंदील से कहा।

अल्हम्दुलिल्लाह डॉक्टर बख्श ठीक हूं मैं अब। 

कंदील  मुस्कुराइ।

आपको ज्यादा चोट तो नहीं लगी डॉक्टर बख्श।

कंदील ने डॉक्टर बख्श से पूछा। 

नहीं कंदील अल्हम्दुलिल्लाह मै ठीक हूं।

  बस  माथे पर थोड़ी सी चोट लगी है। 

डॉ बख्श मुस्कुराते हुए बोले।

डॉक्टर बख्श को डर लग रहा था के कही कंदील  उनसे वह सवाल ना पूछ ले।

जिसकी डर से डॉक्टर बख्श कंदील को छोड़कर बाहर चले गए थे।

चलिए डॉक्टर बख्श अब घर चलते हैं मैं भी अल्हम्दुलिल्लाह ठीक हूं ।

और आप भी ठीक है। 

कंदील ने बैड से उठने  की कोशिश की। 

लेकिन तभी कंदील को चक्कर आए और वह बैड पर वापस लेट गई।

अरे कंदील उठो मत आराम करो तुम। 

एक दिन रेस्ट कर लो हम सुबह घर चलेंगे।

डॉ बख्श ने कंदील से कहा।

मगर सैफ देखिए ना मैं बिल्कुल ठीक हूं।

कंदील ने अपने सर पर हाथ रखते हुए डॉक्टर  से कहां? उसने डॉक्टर बख्श से यह नहीं कहा कि उसे चक्कर आ रहे हैं।

कंदील छोटे बच्चों जैसी हरकत मत करो।

मैंने कहा ना हम लोग सुबह घर पर चलेंगे।

डॉ बख्श ने उसके बालों को सहलाते हुए कहा।

डॉक्टर बख्श मुझे वीकनेस लग रही। 

कंदील ने अपने सर को पकड़ते हुए कहा। 

और उस वीकनेस की वजह से मुझे चक्कर भी आ रहे हैं।

कंदील डॉक्टर बख्श से बोली।

इसीलिए बोल रहा हूं कंदील के एक दिन रेस्ट कर लो हम कल चलेंगे यहां से। 

डॉक्टर बख्श ने सीरियस होते हुए कहा।

ठीक है डॉक्टर बख्श जैसा आपको ठीक लगे। 

कंदील ने डॉक्टर बख्श की बात को मानते हुए कहा।

कंदील ने डॉक्टर बख्श के फेस को गौर से देखा ।

कंदील को डॉक्टर बख्श बहुत उदास नजर आ रहे थे।

डॉ बक्श आपका चेहरा इतना उदास क्यों हो रहा है? 

कंदील उनके हाथ को कस के पकडते हुए बोली।

नहीं कंदील  में बिल्कुल ठीक हूं।

बस तुम्हें फील हुआ होगा ऐसा कि मेरा चेहरा उदास है। डॉक्टर बख्श ने कंदील को टालते हुए कहा।

डॉक्टर बख्श को लग रहा था कही वो बात कंदील को पता ना चल जाए। 

जिससे कंदील को टेन्शन हो और कंदील डिप्रेशन 

मे आ जाए 

इस वक्त कंदील की कन्डीशन ऐसी नही थी के थोडा भी डिप्रेशन बर्दाश्त ना कर सके।

डॉक्टर बख्श क्या हुआ है आपको, क्या सोचने लग गए?कंदील ने जब डॉक्टर बख्श को इस तरह ख़ामोश,  किसी गहरी सोच में मुब्क्तिला देखा तो उनसे सवाल किया। 

कुछ नहीं कंदील बस थोड़ा तुम्हारी तबीयत की फिक्र हो रही है मुझे। 

डॉ बख्श ने कंदील से कहा।

अरे डॉक्टर बख्श इतना परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप भी जानते हो मैं भी जानती हूं ।

कि थोड़ा वीकनेस की वजह से मुझे चक्कर आ रहे हैं एक-दो दिन में मैं बिल्कुल ठीक हो जाऊंगी। 

कंदील ने मुस्कोराकर डॉक्टर बख्श को समझाते हुए कहा।

वह कंदील की वजह से बहुत टेंशन ले रहे थे।


कंदील सैफ तुम दोनों ठीक होना।

कंदील और डॉक्टर बख्श एक दूसरे से मुखातिब थे। 

जब दरवाजे पर से मॉम की आवाज सुनाई पड़ी। 

दोनों ने मोड़ पर दरवाजे की जानिब  देखा। 

वहां मॉम डैड दोनों ही खड़े थे।

मॉम दौड़ती हुई कंदील की नजदीक आई। 

कंदील बेटा तुम ठीक हो ना। 

मॉम के चेहरे पर इस वक्त हवाइयां उड़ रही थी। 

जी मॉम मैं बिल्कुल ठीक हूं आप घबराइए मत। 

कंदील ने उन्हें समझाते हुए कहा।

सैफ तुम ठीक हो ना।

मॉम ने दोनों हाथों से डॉक्टर बख्श के चेहरे पर हाथ फिरा कर उन्हे प्यार करते हुए पूछा। 

हां मॉम में एकदम ठीक हूं परफेक्ट हूं देखिए आप। 

डॉक्टर बख्श ने अपने दोनों हाथों को फैलाकर अपनी एक टांग को ऊपर नीचे करते हुए कहा।

मेरी तो जान ही निकल गई की थी, यह सुनकर के तुम दोनों का एक्सीडेंट हो गया है। 

मॉम ने कहा। 

हां कंदील बेटा घर से यहां तक तुम्हारी मॉम को बहुत मुश्किल से संभालता हुआ लेकर आया हूं मैं। 

डैड ने मुस्कुराने की कोशिश की ,उनके चेहरे से ऐसा लग रहा था।

जैसे इस वक्त वह भी टेंशन में हो।




कहानी में आगे क्या हो सकता है

आगे कहानी में यह हो सकता है कि डॉक्टर बख्श कंदील से एक बहुत बड़ा सच छुपा रहे हों।

शायद एक्सीडेंट में कंदील को अंदरूनी चोट आई हो, या डॉक्टरों ने कोई ऐसी रिपोर्ट दी हो जो कंदील की जिंदगी बदल सकती हो।

डॉक्टर बख्श इसलिए परेशान हों क्योंकि वह कंदील को सच बताकर उसे दुखी नहीं करना चाहते।

दूसरी तरफ कंदील धीरे-धीरे महसूस करने लगेगी कि डॉक्टर बख्श उससे कुछ छुपा रहे हैं।

फिर कहानी में एक ऐसा मोड़ आएगा जब कंदील को खुद वह सच पता चल जाएगा और उस वक्त दोनों के रिश्ते की असली गहराई सामने आएगी।

इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि:

सच्ची मोहब्बत में इंसान अपने दर्द से ज्यादा अपने चाहने वाले के दर्द की फिक्र करता है।

जिंदगी बहुत नाज़ुक है, इसलिए हमें अपने अपनों की कद्र करनी चाहिए।

मुश्किल वक्त में साथ निभाना ही असली रिश्ते की पहचान होती है।

कभी-कभी हम अपने प्रिय लोगों से सच इसलिए छुपाते हैं ताकि उन्हें तकलीफ न हो।

Next Short Part (अगला छोटा हिस्सा)

डॉक्टर बख्श कंदील के सामने मुस्कुरा तो रहे थे, मगर उनके दिल में तूफान उठ रहा था।

कंदील उनसे बातें कर रही थी, लेकिन डॉक्टर बख्श की नज़रें बार-बार झुक जा रही थीं।

उसी वक्त कमरे के बाहर से एक डॉक्टर अंदर आया और उसने धीरे से डॉक्टर बख्श को बाहर बुला लिया।

डॉक्टर बख्श जब कमरे से बाहर निकले तो डॉक्टर ने गंभीर लहजे में कहा,

“डॉक्टर बख्श… हमें कंदील की रिपोर्ट मिल गई है।”

डॉक्टर बख्श का दिल जोर से धड़कने लगा।

“रिपोर्ट में क्या है?”

डॉक्टर ने गहरी सांस ली और कहा,

“हमें आपसे कुछ बहुत अहम बात करनी है…”

डॉक्टर बख्श के चेहरे का रंग उड़ गया।

उधर कमरे के अंदर कंदील को अजीब सा डर महसूस होने लगा।

उसे लग रहा था कि उसके बारे में कोई ऐसा सच छुपाया जा रहा है जो उसकी पूरी जिंदगी बदल सकता है।

Readers के लिए शुक़्रिया SMS


आपका दिल से शुक्रिया कि आपने मेरी कहानी को अपना कीमती वक्त देकर पढ़ा।

आपकी मोहब्बत और हौसला-अफज़ाई ही मुझे लिखते रहने की ताकत देती है।

अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिए और अपनी राय कमेंट में लिखिए।

आपकी दुआएं और मोहब्बत मेरे लिए बहुत कीमती हैं।

शुक्रिया ❤

– अफसाना वाहिद


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