एक खूबसूरत शाम की शुरुआत: डॉक्टर बख्श और कंदील की मोहब्बत भरी कहानी
डॉक्टर बख्श का बहुत मन हो रहा था कि वह कंदील को कहीं बाहर ले जाकर घूमने जाए।
इसलिए उन्होंने अस्पताल से ही कंदील को कॉल कर दिया था ।
कि वह रेडी रहे हम लोग आज कहीं बाहर घूमने जा रहे हैं। और कंदील को यह सुनकर बहुत अच्छा लगा था।
वह रेडी हो गई थी डॉक्टर बख्श के आने से पहले कंदील आज बहुत ही स्पेशल तरीके से तैयार हो रही थी ।
क्योंकि पहली बार वह डॉक्टर बख्श के साथ कहीं घूमने जा रही थी?
डॉक्टर बख्श को ही कोई भी एक्साइटमेंट हो रहा था। कंदील के साथ में घूमने जाने का।
क्योंकि आज से पहले वह सिर्फ अपने पैरेंट्स के साथ ही कहीं घूमने गए थे ।
उसके बाद आज कंदील के साथ घूमने जा रहे थे?
वह अभी अस्पताल से नहीं निकले थे।
कंदील रेडी होकर बेडरूम में डॉक्टर बख्श का वेट कर रही थी।
तो एक मुलाजिमा ने आकर कहा ,कि आपको बेगम साहिबा नीचे बुला रही है।
कंदील ने जब यह बात सुनी तो कंदील नीचे की तरफ आ गई।
वहां सोफे पर मॉम डैड दोनों साथ में बैठे हुए थे।
मॉम की नजर जैसे ही कंदील पर पड़ी।
वह उसे देखकर बहुत खुश हो गई।
माशाल्लाह बेटा माशाल्लाह।
बहुत प्यारी लग रही हो तुम।
कंदील ने इस वक्त ब्लैक कलर के कपड़े पहने थे।
और लाइट मेकअप किए हुए थे।
जो उसकी खूबसूरती को चार-चान्द लगा रहे थे।
यहां आओ कंदील हमारे पास बैठो।
मॉम ने उसे अपने पास बिठाते हुए कहा।
कंदील उनके बराबर आकर बैठ गई।
मॉम के बराबर मे डैड बैठे हुए थे।
क्या बात है बेटा कहीं जाने की तैयारी है क्या?
इस बार सवाल डैड ने किया था।
जी डैड सैफ ने कहा था रेडी रहने के लिए ।
वह कहीं जा रहे हैं घूमने के लिए।
कंदील ने थोड़ा झिझकते हुए डैड से कहा।
वेरी गुड कंदील।
लगता है सैफ को अब अकल आ ही गई।
कम से कम इस यह तो फिक्र हुई कि उसे अपनी बीवी को बाहर भी लेकर जाना है।
डैड ने मॉम की तरफ देखते हुए कहा।
जी हां आपका बेटा बिल्कुल आप पर ही गया है।
जिस तरह आपको भी ख्याल नहीं रहता था।
मुझे कहीं घूमाने का।
उसी तरह सैफ की की भी वही हालत है।
कंदील ने देखा उसकी मॉम लोंग पैंट प्लाजो सूट पहने हुए थी।
और आंखों पर गॉगल्स लगाकर बड़ी स्मार्ट लग रही थी। उनका आईसाइड का गॅगल्स था।
लेकिन उनके लगाने पर वह एक स्टाइलिश गॅगल्स लगते थे।
मॉम ने डॉक्टर बख्श की जगह डैड की ही क्लास लेनी शुरू कर दी थी।
डैड भी इस उम्र मे भी काफी स्मार्ट लगते थे।
कंदील को दोनों की नोक झोक देखकर हंसी आने लगी थी?
कंदील ने इस तरह की मीठी नोकझोंक पहली मर्तबा देखी थी।
उसको इन दोनों की नोक-झोक करते देखकर अच्छा लग रहा था।
बेगम साहिबा आप हमारी बेटी कंदील की बिल्कुल भी फिक्र नहीं रखती हैं।
जरा देखिए कैसे मुरझा गया इसका चेहरा?
डैड ने मॉम से कंदील के मुताल्लिक कहा।
अरे नहीं मिस्टर बख्श कंदील खाने-पीने में बहुत ज्यादा सुस्त है।
वो अपना बचाव करते हुए बोली।
इसलिए उसकी सेहत ज्यादा अच्छी नहीं है।
कंदील उन दोनों की बातें सुनकर अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थी।
क्योंकि कंदील महसूस कर रही थी, उसकी बॉडी का वेट पहले से बड़ा हुआ महसूस हो रहा था उसे?
और उसके कपड़े भी पहले से टाइट हो गए थे।
बड़ी अजीब सी बात है इन लोगों को मेरा वेट बढ़ता हुआ नजर नहीं आ रहा।
और मैं कमजोर लग रही हूं।
कंदील सोचने लगी थी।
तभी कंदील की नजर दरवाजे की तरफ गई।
जहां से डॉक्टर बख्श ने जस्ट अभी एंट्री ली थी।
पहले नजर डॉक्टर बख्श की कंदील के चेहरे पर ही गई थी।
क्योंकि कंदील भी उन्हें ही देख रही थी?
कंदील को देखकर डॉक्टर बख्श के चेहरे पर बहुत प्यारी स्माइल आ गई थी।
अस्सलामो आलेकुम एवरीवन।
डॉ बख्श ने उन तीनों को सलाम किया।
वालेकुम अस्सलाम बेटा।
मॉम डैड ने बारी-बारी और फिर कंदील ने भी जवाब दिया।
क्या बात है आज पूरी फैमिली एक साथ है?
लगता है कोई खास प्लान बना बनाया जा रहा है।
डॉ बख्श अंदर आते हुए बोले।
हां बेटा प्लान तो बनाया जा रहा है, और प्लान भी ऐसा बनाया जा रहा है।
जिससे तुम्हें पनिशमेंट मिल सके।
बहुत तुम अपनी पनिशमेंट के लिए मशहूर हो ना।
पूरे अस्पताल में डॉक्टर बख्श के डैड ने तिरछी निगाह करके डॉक्टर बख्श से कह रहे थे।
व्हाट डैड मेरे लिए पनिशमेंट मगर मैं क्या किया है?
डॉ बख्श हैरान होने की एक्टिंग करते हुए बोले।
तुम्हारी मॉम और मेरा दोनों का ही ख्याल है।
कि तुम कंदील का ठीक तरह से ख्याल नहीं रखते हो।
डॉक्टर बख्श के डैड ने उनकी मॉम की तरफ देखकर ऑख दबाते हुए कहा।
और आपसे मेरी शिकायत किसने लगाई।
डॉ बख्श ने घूर कंदील की तरफ देखा।
बारखुरदार उसकी तरफ इस तरह देखने की कोई जरूरत नहीं है।
उसने हम लोगों से कुछ नहीं कहा।
डॉक्टर बख्श के डैड ने जब डॉक्टर बख्श को कंदील की तरफ घूरते हुए देखा तो उनसे कहा।
डैड आप खुद पूछिए कंदील से के कितना ख्याल रखता हूं कंदील का ।
डॉक्टर बख्श के प्यार से कंदील की तरफ देखा।
कंदील उनके इस तरह देखने पर शर्मा गई थी।
डॉक्टर बख्श को कंदील इस काले लिबास मे बेइन्तहा प्यारी लग रही थी।
सैफ बेटा अब यहा बैठ कर बाते मत करने बैठ जाना।
क्योकि कंदील काफी देर से रेडी होकर तुम्हारा वेट कर रही है।
मॉम ने डॉक्टर बख्श को सोफे पर बैठे हुए देखा तो कहा।
आई एम अंडरस्टैंड मॉम याद है मुझे।
सिर्फ दो मिनट आपके साथ बैठ जाऊं फिर मैं रेडी होने जा रहा हूं।
डॉक्टर बख्श ने स्माइल करते हुए कहा।
डॉक्टर बख्श कंदील के ठीक सामने वाले सोफे पर बैठ गए
कंदील और मॉम डैड एक ही सोफे पर बैठे थे।
बातें करने के दरमियान डॉक्टर बख्श की नजर बार-बार कंदील पर जा रही थी।
और कंदील इस बात को महसूस भी कर रही थी।
कन्दील भी एक दो बार डॉक्टर बख्श को नजर मिलाकर देखने लग रही थी।
ओ,के मॉम में अभी 10 मिनट में रेडी होकर आता हूं।
डॉक्टर बख्श की नजर कंदील पर थी।
और कहे उन्होंने यह लफ्ज अपनी मॉम से थे।
डॉ बख्श वहां से उठकर अपने रूम में रेडी होने के लिए चले गए थे।
कंदील मॉम डैड से बातों में लग गई थी।
इतनी कम अरसे में कंदील मॉम डैड से काफी घुल मिल गई थी।
कंदील को डॉक्टर बख्श की फैमिली में बहुत अच्छा लगने लगा था।
और सभी कंदील की बहुत केयर करते थे।
मॉम डैड भी उसे बहुत प्यार करते थे।
कन्दील बातों में ही मसरूफ थी।
के डॉक्टर बख्श रेडी होकर अपने रूम से बाहर आ चुके थे?
चले कंदील।
उन्होंने अपने रूम के बाहर आते ही कंदील की तरफ देखकर कहा।
इस वक्त डॉक्टर बख्श रेड कलर की टी शॉर्ट ब्लैक कलर की जिन्स मे बेहद स्मार्ट लग रहे थे।
तो कंदील सोफे पर से उठने लगी।
कंदील बेटा संभाल कर जाना।
मॉम ने कन्दील को उठते हुए देखा तो कंदील से कहा।
जी मॉम। कंदील ने मुस्कुरा कर जवाब दिया।
कंदील चलते हुए डॉक्टर बख्श की तरफ आई।
डॉ बख्श ने कन्दील का हाथ पकड़ लिया।
सैफ हाथ छोड़िए मॉम डैड देख रहे हैं।
कंदील डॉक्टर बख्श के कान में हल्के से बोली।
तो क्या हुआ कंदील हमारे मॉम डैड है देख रहे हैं तो देखने दो कोई बात नहीं?
डॉ बख्श ने बेखौफ होकर कंदील से कहा।
डॉक्टर बख्श आप भी ना।
कंदील हल्के से बोली।
फिर डॉक्टर बख्श कंदील का हाथ पकड़ कर बाहर की तरफ ले गए।
मॉम डैड उन दोनों को इस तरह से देखकर मुस्कुराने लगे।
सैफ आप भी हद करते हो क्या जरूरत थी ।
इस तरह से मॉम डैड के सामने मेरा हाथ पकड़ कर बाहर लाने की?
कंदील उसे नाराज हो गई थी।
अरे यार कोई बात नहीं कंदील वह मेरे मॉम डैड है ।
और नए जमाने के उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता बल्कि वह तो इस बात से खुश होते हैं।
डॉक्टर बख्श ने कंदील को समझाते हुए कहा।
फिर भी सैफ आपको थोड़ा सा तो सोचना चाहिए था ना। कंदील बोली।
इट्स ओके कंदील कोई इशू नहीं है।
डॉक्टर बख्श ने कहकर गाड़ी का दरवाजा खोला।
और कंदील को संभल का गाड़ी में बैठाया ।
कंदील का हाथ तो पहले ही डॉक्टर बख्श ने थाम रखा था।
फिर उस तरफ से दरवाजा बंद करके वह ड्राइवर की सीट की तरफ आ गए।
और गाड़ी का दरवाजा खोलकर गाड़ी के अंदर बैठ गए।
इस कहानी मे आगे क्या हो सकता है
जैसे ही डॉक्टर बख्श ने गाड़ी स्टार्ट की, कंदील खामोशी से खिड़की के बाहर देखने लगी।
शाम का वक्त था और शहर की रोशनियाँ बड़ी दिलकश लग रही थीं।
लेकिन अचानक कंदील को हल्का सा चक्कर महसूस हुआ।
उसके चेहरे की रंगत थोड़ी फीकी पड़ गई।
डॉक्टर बख्श ने उसकी खामोशी महसूस की तो फौरन उसकी तरफ देखा।
“कंदील… तुम ठीक तो हो?”
उन्होंने नरमी से पूछा।
कंदील ने हल्की सी मुस्कुराहट के साथ कहा,
“जी… मैं ठीक हूँ, बस शायद थोड़ी थकान है।”
लेकिन डॉक्टर बख्श सिर्फ एक शौहर ही नहीं बल्कि एक डॉक्टर भी थे।
उन्हें कंदील की हालत में कुछ अजीब सा महसूस हुआ।
उन्होंने गाड़ी की रफ्तार धीमी कर दी और फिक्र भरी नज़रों से कंदील की तरफ देखने लगे।
“नहीं कंदील… मुझे लगता है हमें पहले अस्पताल चलना चाहिए।”
कंदील हैरानी से उनकी तरफ देखने लगी।
“अस्पताल? मगर क्यों सैफ?”
डॉक्टर बख्श ने उसके हाथ को अपने हाथ में लेते हुए कहा,
“बस एहतियात के तौर पर… क्योंकि तुम्हारी सेहत मेरे लिए सबसे ज़्यादा अहम है।”
कंदील उनकी बात सुनकर खामोश हो गई।
उसे एहसास हो रहा था कि डॉक्टर बख्श की मोहब्बत में कितनी सच्चाई और फिक्र छुपी हुई है।
इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची मोहब्बत सिर्फ खूबसूरत लम्हों का नाम नहीं होती, बल्कि एक-दूसरे की फिक्र, जिम्मेदारी और एहसास का नाम होती है।
जब इंसान किसी से सच्ची मोहब्बत करता है तो वह उसकी खुशी, उसकी सेहत और उसकी सलामती को सबसे ज्यादा अहमियत देता है।
Readers ke liye Shukriya Message
प्यारे रीडर्स,
आपका दिल से शुक्रिया कि आपने इस कहानी को पढ़ने के लिए अपना कीमती वक्त दिया।
आपकी मोहब्बत और हौसला अफजाई ही इस कहानी को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी वजह है।
उम्मीद है आपको यह कहानी पसंद आ रही होगी।
इंशाअल्लाह अगले हिस्से में और भी दिलचस्प मोड़ और खूबसूरत लम्हे आपका इंतजार कर रहे होंगे।
आपकी मोहब्बत और सपोर्ट के लिए दिल से शुक्रिया। ❤️



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