डॉक्टर बख्श और कंदील – मोहब्बत, उम्मीद और आने वाली नई ज़िन्दगी की कहानी




 Doctor Bakhsh or Kandeel 

कंदील की जब आंख खुली तो डॉक्टर बख्श अपनी  शर्ट के कॉलर को मिरर में देखकर ठीक कर रहे थे।

आज मुझे उठने में देर हो गई है।

कंदील वॉल क्लॉक की तरफ नजर डाल कर  बैड पर बैठते हुए सोचने लगी।

क्योंकि रात में देर से सोने की वजह से सुबह जल्दी  नहीं जाग सकते थे ? 

और यही इस वक्त कंदील के साथ भी हुआ था।

गुड मॉर्निंग सैफ।

कंदील ने  ब्लैंकेट को अपने ऊपर से हटा कर दूसरी तरफ रखते हुए कहा। 

गुड मॉर्निंग कंदील।

डॉक्टर बख्श कंदील की तरफ मुड़ते हुए मुस्कुराह कर बोले।

आपने मुझे जगाया नहीं मैं उठने में लेट हो गई। 

कंदील ने डॉक्टर बख्श से कहा। 

रात को भी तुम ठीक से सो नहीं पाई थी। 

और इस हालत में तुम्हें ठीक से आराम नहीं मिल पाएगा। 

तो तुम्हारी सेहत ठीक नहीं रहेगी कंदील। 

डॉ बख्श ने कंदील से कहा।

कंदील बैड से नीचे उतर रही थी।

डॉक्टर बख्श कंदील के नजदीक आए।

इस वक्त कंदील ने  पिंक कलर नाइट सूट पहना था।

और उसकी बॉडी मे ईजाफा हो गया था, वो पहले के मुकाबले अब ऊभरी हुए लग रही थी। 

उस नाइट सूट में उसकी बॉडी और उभरी हुई दिखाई पड़ रही थी।

डॉ बख्श कंदील को गौर से देखते हुए बैड पर बैठ गए। 

फिर उन्होंने कंदील को कमर से पकढ़ते हुए।

खींचकर अपनी थाईस पर बैठा लिया।

कंदील को डॉक्टर बख्श से इस वक्त , इस बात की उम्मीद नहीं थी। 

मगर आज कंदील  उनकी इस हरकत पर चौकी नहीं थी। 

वो मुस्कुरा कर डॉक्टर बख्श की तरफ देखने लगी।

क्या आपको इल्म है मिसेज बख्श के आप और ज्यादा खूबसूरत होती जा रही हो? 

डॉक्टर बख्श ने कंदील के कंधे पर अपनी थोड़ी टिकाते हुए कहा। 

कंदील के गाल गुलाबी हो गए थे यह बात सुनकर।

ओहहहहहहह, मतलब सैफ आप यह कहना चाहते हो कि मैं पहले खूबसूरत नहीं थी।

कंदील ना बनावटी गुस्से मे अपना मुंह फुलाते हुए कहा।

जी नहीं सैफ की जान मेरा कहने का वह मतलब हरगिज नहीं था। 

आप तो हो बहुत खूबसूरत, और उस पर आपके होठ के पास का काला तिल, ये  तो ऊफफफफ सच मे मेरी जान ले लेता है,डॉक्टर बख्श ने पहली बार कंदील को उसके तिल वाली बात कही थी।

जिस से हैरान होकर कंदील डॉक्टर बख्श को देखने लगी।

सैफ आप भी ना, कंदील के मुंह से ये लफ्ज निकले थे।

आप जानती तो हो यह बात अच्छी तरह से। 

एक लेडी जब प्रेग्नेंट होती है।

तो कुदरत उसकी खूबसूरती में इजाफा हो जाता है।

डॉ बख्श ने कहा। 

कंदील के चेहरे पर हल्की सी स्माइल आ गई थी।

तुम्हें पता है हमारे इस बेबी ने हमारी लाइफ को दोबारा स्टार्ट किया है।

डॉक्टर बख्श ने कंदील के पेट पर हाथ रखते हुए कहा।

जी हां डॉक्टर बख्श आप बिल्कुल सही कह रहे हैं।

हमारे बीच में जो दूरियां पैदा हो गई थी। 

हमारे इस बेबी की वजह से वह दूरियां खत्म हो गई है। कंदील  ने कहकर डॉक्टर बख्श के कंधे से सर  टिका लिया था।

कंदील हॉस्पिटल के बाकी लोग तुमसे शादी के बाद मिलने के लिए बहुत एक्साइटेड है। 

उनका कहना है कि डॉक्टर बख्श से शादी करने के बाद।

तुम हॉस्पिटल को और सारे डॉक्टर को भूल गई हो।

डॉ बख्श ने कहा।

हां डॉक्टर बख्श यह बात मेरे जहन में भी आ रही थी।

सारे लोग यही सोच रहे होंगे की शादी के बाद मैंने हॉस्पिटल आना ही बंद कर दिया है।

क्योंकि वह? मेरी हालत से वाकिफ नहीं है।

कंदील ने कहा।

आपको क्या लगता है सैफ मुझे हॉस्पिटल कब से ज्वाइन करना चाहिए? 

कंदील डॉक्टर बख्श के कंधे पर से सर हटाते हुए उनकी तरफ देखकर बोली।

कंदील मेरी सलाह तो यह है कि अभी तुम्हें कुछ टाइम और हॉस्पिटल ज्वाइन नहीं करना चाहिए।

क्योंकि डॉक्टर ने कहा था और तुम भी इस चीज से वाकिफ हो कि अभी तुम्हारे अंदर बहुत वीकनेस है?

तुम्हें फुल रेस्ट की जरूरत है कंदील।

डॉक्टर बख्श उसके बालों के लटो को पीछे करने लगे थे। दुरूस्त फरमाया अपने डॉक्टर बख्श।

कंदील ने कहा।

डॉ बख्श आप भी मेरी वजह से लेट मत हो जाएगा। 

आप जाकर नाश्ता कीजिए मैं फ्रेश होकर आती हूं। 

कंदील डॉक्टर बख्श की थाईस पर से उठकर जाने लगी। तभी डॉक्टर बख्श ने दोबारा उसे कमर से पकड़ लिया? 

और अपनी बाहों के घेरे में भर लिया। 

वैसे कंदील इस वक्त मन नहीं हो रहा तुमसे दूर जाने का। उन्होंने कंदील के कान में सरगोशी की।

जाना तो पड़ेगा आपको डॉक्टर साहब क्योंकि आपकी ड्यूटी है? कंदील बोली।

ओके यार तुम वॉशरूम में जाओ मैं नाश्ते के लिए जाता हूं। 

डॉ बख्श ने कहा। 

तो कंदील उनके थाईस पर से हट गई।

और डॉक्टर बख्श दरवाजे  में जाने लगे।

और हां कंदील ध्यान से नाश्ते की पहले  की दवाई खा कर आना। 

डॉ बख्श ने जाते-जाते मुड़कर कंदील से कहा। 

कंदील  मुस्कुराते हुए अपने गार्दन को हां में हिला दिया।




इस कहानी में आगे क्या हो सकता है

कहानी का अगला हिस्सा बहुत दिलचस्प हो सकता है।

डॉक्टर बख्श हॉस्पिटल पहुँचते हैं, मगर उनके दिल में कंदील और आने वाले बच्चे की फिक्र बनी रहती है। दूसरी तरफ कंदील घर में अकेली होती है और उसे अपने गुज़रे हुए दिनों की कुछ बातें याद आने लगती हैं।

शायद कोई पुरानी सच्चाई सामने आए, या फिर कोई ऐसा शख्स वापस आए जो डॉक्टर बख्श और कंदील की ज़िन्दगी में फिर से हलचल पैदा कर दे।

मुमकिन है कि आने वाला बच्चा उनकी मोहब्बत को और मज़बूत कर दे, मगर साथ ही ज़िन्दगी उन्हें एक नया इम्तिहान भी दे सकती है।

इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है

इस कहानी से यह बात समझ आती है कि असली मोहब्बत वही होती है जो मुश्किल वक्त में साथ दे।

ज़िन्दगी में कभी-कभी गलतफहमियाँ और दूरियाँ आ जाती हैं, मगर अगर दिल साफ़ हों तो रिश्ते दोबारा जुड़ भी सकते हैं।

इसके साथ यह भी सीख मिलती है कि आने वाली नई ज़िन्दगी (बच्चा) कभी-कभी रिश्तों में नई उम्मीद और नई शुरुआत लेकर आती है।

Next Short Part

अगला हिस्सा – एक नई फिक्र

कंदील वॉशरूम में चली गई थी, और डॉक्टर बख्श नाश्ते के लिए नीचे आ गए थे।

मगर आज उनके दिल में अजीब सी बेचैनी थी।

ऐसा लग रहा था जैसे कुछ होने वाला हो।

हॉस्पिटल पहुँचते ही उनके फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आई।

डॉक्टर बख्श ने कॉल रिसीव की।

“हैलो… क्या आप डॉक्टर बख्श बोल रहे हैं?”

सामने से एक घबराई हुई आवाज़ आई।

डॉक्टर बख्श ने जवाब दिया,

“जी हाँ, मैं ही बोल रहा हूँ… आप कौन?”

कुछ पल के लिए खामोशी छा गई।

फिर उस आवाज़ ने कहा —

“आपको शायद नहीं पता… मगर कंदील खतरे में है।”

डॉक्टर बख्श के हाथ से फोन लगभग छूट ही गया।

Readers के लिए शुक्रिया SMS

Message

अस्सलामु अलैकुम प्यारे रीडर्स,

आप सब का दिल से शुक्रिया कि आपने हमारी इस कहानी को पढ़ा और अपना कीमती वक्त दिया।

आपकी मोहब्बत और हौसला अफज़ाई ही हमें और बेहतर लिखने की ताकत देती है।

उम्मीद है कि यह कहानी आपके दिल को छू गई होगी।

इंशाअल्लाह बहुत जल्द इसका अगला हिस्सा भी आप सब के सामने पेश किया जाएगा।

अपनी दुआओं में याद रखिएगा और इसी तरह हमारा साथ देते रहिएगा।

बहुत बहुत शुक्रिया ❤️



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