“एक झूठ, दो रिश्ते और उलझता ज़मीर: कंदील और डॉक्टर बख्श की कहानी”
Kandeel mutmain
कंदील मुतमईन हो गई थी लाएबा की जिंदगी से समीर को निकाल कर।
और लाएबा की जिंदगी के साथ-साथ समीर कंदील की जिंदगी से भी अलविदा कह चुका था।
कंदील को खुशी थी इस बात की लाएबा की जिंदगी तबाह होने से बच गई थी ।
और इस काम में हाशिम ने कंदील की बहुत मदद की थी। और यह सारा प्लान भी हाशिम का ही था।
जिस पर अमल करके कंदील डॉक्टर समीर के पास आई थी।
लाएबा हरगिज कंदील की बातों का भरोसा नहीं करती जब तक वह अपनी आंखों से देखा नहीं लेती ,और सुन नहीं लेती।
कंदील अपनी ड्रेसिंग के सामने खड़े होकर।
अपने हाथों की चूड़ियां बदल रही थी।
उसने रेड कलर का नेट का सूट पहना था।
जिसकी हाफ आस्तीन थी।
और वह रेड कलर की चूड़ी पहन रही थी।
उसे पर उसके खुले हुए बाल जो चारों तरफ फैले हुए थे। वह इस वक्त बेइंतहा हंसी लग रही थी।
उसने अपने हाथों की चूड़ियां पहनने के बाद।
अपने होठों पर लिपस्टिक लगाना शुरू की।
तो उसे सुबह वाली डॉक्टर बख्श की बात याद आ गई। डॉक्टर बख्श के सीने पर जो लिपस्टिक के निशान थे।
कंदील का हाथ लिपस्टिक लगाते लगाते रुक गया।
उसके चेहरे पर एक प्यारी सी स्माइल आ गई।
डॉक्टर बख्श के बारे में सोचकर।
डॉ बक्श आप भी ना बहुत ज्यादा शरारती हो।
आपकी शरारत की आदत होती जा रही है मुझे।
कंदील ने कहा।
बहुत चाहा मैंने डॉक्टर बख्श कि मैं आपसे नफरत कर सकूं।
लेकिन डॉक्टर बख्श मै ऐसा नहीं कर पाई।
मुझे आपसे नफरत नहीं हो सकती।
जिससे प्यार करते हो उससे नफरत कैसे कर सकते हो?
और डॉक्टर बख्श, आपकी तो मोहब्बत भी अनोखी अंदाज की है।
कंदील आहिस्ता आहिस्ता
खुद से बातें कर रही थी।
कंदील अभी ड्रेसिंग के सामने खड़े होकर खुद को निहार रही थी ।
कि तभी दरवाजा खोलने की आवाज सुनाई पड़ी कंदील ने तिरछी निगाह करके दरवाजे की तरफ देखा।
वहां डॉक्टर बक्श थे।
कंदील की नजर जैसे ही डॉक्टर बख्श
पर गई।
वह फूल कॉन्फिडेंट के साथ खुद को ठीक करके सीधी खड़ी हो गई।
डॉ बख्श ने एक निगाह कंदील पर डाली।
कंदील उन्हें देखकर मुस्कुराई।
डॉक्टर बख्श ने अपनी निगाह को कंदील की तरफ से हटा लिया।
कंदील को जब महसूस हुआ के डॉक्टर बख्श ने उसकी स्माइल को इग्नोर कर दिया है।
तो कंदील के चेहरे पर से भी स्माइल गायब हो चुकी थी।
डॉ बख्श बिना कुछ बोले सोफे पर आकर बैठ गए।
और उन्होंने अपने जूते को उतारना शुरू किया।
इस वक्त वह कंदील को पूरी तरह से इग्नोर कर रहे थे।
और कंदील को डॉक्टर बख्श का इस तरह से इग्नोर करना बहुत ही बुरा लग रहा था।
कंदील ने जब देखा के डॉक्टर बख्श उस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
वह मरे मरे कदमों से चलती हुई बैठ के नजदीक आई।
और फिर बैड पर बैठ गई।
क्योंकि इतनी देर से ,वह इतने दिल से डॉक्टर बख्श के लिए ही तैयार हो रही थी?
और आज डॉक्टर बख्श ने उसको इस तरह से इग्नोर कर दिया था।
कंदील की निगाह अभी भी डॉक्टर बख्श पर ही टिकी हुई थी।
डॉ बख्श को देखकर ऐसा लग रहा था, कि इस वक्त वह कुछ ज्यादा ही टेंशन में है।
वह जूते उतार कर सोफे पर टेक लगाकर बैठ गए।
उनकी आंखें इस वक्त बंद थी।
उनको देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि इस वक्त डॉक्टर बख्श काफी थकान महसूस कर रहे हैं।
कंदील कुछ देर उन्हें खामोशी से बैठकर यू ही देखती रही।
फिर अपनी जगह से उठकर।
डॉक्टर बख्श के नजदीक सोफे के पास आ गई।
क्या हुआ डॉक्टर बख्श एवरीथिंग इज ओके?
कंदील ने उनके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
हममममम ,यस एवरीथिंग इस ओके।
डॉ बक्श ने आंखें खोलते हुए कहा।
लेकिन उन्होंने अभी भी कंदील की तरफ नहीं देखा था।
कंदील उनके नजदीक सोफे पर ही बैठ गई।
पर मुझे ऐसा क्यों लग रहा है डॉक्टर बख्श के आप ठीक नहीं हो?
कंदील उनको देखकर, उनके चेहरे पर कुछ तलाश करने की कोशिश कर रही थी।
कंदील मुझे माफ कर दो मुझे बहुत बड़ी गलती हो गई है। अगर मै इस के बारे में तुम्हें बताता हूं।
तो तुम मुझे छोड़ कर चली जाओगी।
लेकिन अगर उसके बारे में नहीं बताता हूं तो मेरा जमीर मुझे चैन से नहीं रहने देगा।
डॉ बख्श अपने दिल में बात कर रहे थे।
उनके अंदर हिम्मत नहीं थी कि वह इस वक्त कंदील से अपनी निगाहें मिलाते ।
कुछ नहीं कन्दील आज हॉस्पिटल में कुछ ज्यादा ही। कॉम्प्लिकेटेड कैसे थे?
जिसकी वजह से दिमाग में टेंशन हो गई।
और कुछ थकान महसूस हो रही है।
डॉक्टर बख्श कंदील से बोले।
ओहो डॉक्टर बख्श हॉस्पिटल के केसेस की वजह से आपको इतनी टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं।
आप रिलैक्स रहिए सारे केसेस ठीक तरह से सॉल्व हो जाएंगे।
कंदील उनके गाल पर हाथ फिराते हुए बोली।
डॉक्टर बख्श ने कंदील का हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचा।
उनके खींचने से कंदील डायरेक्ट उनकी गोद में आकर बैठ गई थी।
कंदील इस बात से अनजान थी, कि डॉक्टर बख्श उसको इस तरह से पकड़ कर खींचेंगे ।
इसलिए वह अपनी आंखें बड़ी करके डॉक्टर बख्श की तरफ देखने लगी।
यू आर लुकिंग सो ब्यूटीफुल कंदील।
कंदील डॉक्टर बख्श की गोद में बैठी हुई थी।
डॉक्टर बख्श ने उसके माथे से अपना माथा जोड़ते हुए कहा।
डॉक्टर बख्श की इस तरह से तारीफ करने पर कंदील शर्मा ने लगी थी।
तुम्हें पता है कंदील की तुम्हारे पास मुझे कत्ल करने के सारे हथियार मौजूद है।
डॉक्टर बख्श अपनी बाहो का घेरा कंदील इधर-उधर करते हुए बोले।
डॉक्टर बख्श मुझे ऐसा लगा था , कि आपने मुझे देखा ही नहीं है ।
इग्नोर कर दिया है आप ने मुझे ,कंदील बच्चों की तरह मुंह फूलते हुए बोली।
ऐसा कभी और नहीं हो सकता कंदील के मैं तुम्हें इग्नोर करूं।
रूम में घुसते ही सबसे पहली नजर मेरी तुम पर पड़ी थी। और तुम्हें देखकर जो मेरे दिल ने हरकत की थी।
डॉक्टर बख्श शरारती मुस्कुराहट के साथ कंदील से बोले।
कंदील ने डॉक्टर बख्श की बातो से शर्माते हुए डॉक्टर बख्श के सीने मे अपने सर को छुपा लिया।
डॉ बख्श आपके फेस पर टेंशन बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती।
आप तो टेंशन फ्री अच्छे लगते हो।
कंदील ने अपने हाथों से डॉक्टर बख्श के बालों को संभालते हुए कहा।
सैफ आज आप कुछ दो घंटे लगभग लेट हो गए हैं ना। कंदील ने डॉक्टर बख्श से पूछा।
तो डॉक्टर बख्श कंदील को देखने लगे।
अब डॉक्टर बख्श कंदील को किस तरह से समझते।
कि वह 2 घंटे किसके साथ थे।
वह कैसे बताते कंदील को कि वह 2 घंटे अपनी बीवी के साथ थे?
मरियम जमाल के साथ उन्होंने 2 घंटे बताए थे।
डॉक्टर बख्श की बाहों की गिरफ्त कंदील पर ढीली पड़ गई थी।
कंदील तुम तो जानती हो कि अस्पताल का नया प्रोजेक्ट शुरू हुआ है।
उसके प्रोजेक्ट को ही चेक करने में टाइम लग गया मुझे।
डॉक्टर बख्श ने झूठ बोलकर बात संभालते हुए कहा।
ठीक है आप फ्रेश हो जाइए।
काफी थक गए हैं ना आप।
कंदील ने खालिस बीवियो वाले लहजे में कहा।
हां कंदील थक तो मैं बहुत गया हूं।
अब चाहता हूं कि मुझे सुकून मिल जाए।
डाक्टर बख्श ने कहा।
फिर कंदील उनकी गोद से हटकर उनके बराबर में बैठ गई।
और डॉक्टर बख्श वॉशरूम की जानिब चल दिए।
इस कहानी में आगे क्या हो सकता है? (Future Plot Hint)
डॉक्टर बख्श का ज़मीर उन्हें चैन से नहीं रहने देगा और वो कंदील से सच छुपा नहीं पाएँगे।
मरियम जमाल की मौजूदगी धीरे-धीरे कंदील की ज़िंदगी तक पहुँच सकती है।
कंदील को डॉक्टर बख्श के व्यवहार में बदलाव महसूस होगा और शक गहराता जाएगा।
हाशिम का प्लान किसी मोड़ पर उल्टा भी पड़ सकता है।
सच सामने आते ही कंदील का भरोसा टूटेगा और कहानी एक बड़े इम्तिहान में बदल जाएगी — जहाँ मोहब्बत, गुनाह और फैसला आमने-सामने होंगे।
📚 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
झूठ चाहे कितना भी खूबसूरत क्यों न हो, एक न एक दिन सच बनकर सामने आता है।
दो ज़िंदगियों के बीच खड़े होकर किसी एक से भी इंसाफ़ नहीं किया जा सकता।
मोहब्बत में अगर ईमानदारी न हो, तो सुकून कभी नहीं मिलता।
ज़मीर की आवाज़ को दबाकर जीने वाला इंसान अंदर से टूट जाता है।
रिश्ते तभी टिकते हैं जब उनमें सच, भरोसा और हिम्मत हो।
✍️ Next Short Part (अगला छोटा हिस्सा)
वॉशरूम का दरवाज़ा बंद होते ही
डॉक्टर बख्श ने शीशे में खुद को देखा।
उन्हें अपना अक्स अजनबी-सा लगा।
“मैं क्या कर रहा हूँ…”
ये सवाल पहली बार उनके होंठों से निकल गया।
उधर कमरे में बैठी कंदील
आईने में अपनी लाल चूड़ियों को देख रही थी,
लेकिन दिल में एक अनजाना-सा डर उतर आया था।
उसे महसूस हो रहा था—
कि आज डॉक्टर बख्श की बाहों में भी
वो सुकून नहीं था
जो पहले हुआ करता था।
दोनों एक ही कमरे में थे…
लेकिन उनके बीच
अब एक बड़ा सच खड़ा था।
(जारी रहेगा…)
💌 Readers
प्यारे रीडर्स,
इस कहानी के साथ जुड़े रहने के लिए
दिल से आपका शुक्रिया।
आपकी पढ़ने की चाह,
आपकी भावनाएँ
और आपका इंतज़ार
ही इस कहानी को ज़िंदा रखता है।
आगे भी ऐसे ही
साथ बने रहिए,
क्योंकि कहानी अभी बाकी है…
और सच का सामना होना बाकी है।
मुहब्बत और एहसास के साथ,
✍️ Afsana Wahid




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