“दो रिश्तों के बीच फँसा दिल – डॉ. बख्श, मरियम जमाल और मोहब्बत की कशमकश”

 



कुछ देर बाद काजी साहब आ गए थे 

डॉक्टर बख्श ने मरियम जमाल से निकाह कर लिया था। सिर्फ मरियम जमाल को बचाने के लिए।

क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं करते? 

तो मरियम जमाल बहुत बुरी तरह फंस जाती।

और वह पुलिस वालों  मरियम जमाल को लॉकअप मे डाल देते है। 

यह भी नहीं पता कि वह कब तक  लॉक अप में रहती वो?

पुलिस ऑफिसर तय   हुए टाइम पर डॉक्टर बख्श के घर आए और अपनी तसल्ली के लिए मरियम जमाल को उसकी बीवी के लिहाज में देखकर निकाह नामे पर डॉक्टर बख्श और मरियम जमाल के साईन देखकर उन लीगो को तसल्ली हो गई थी इसलिए वो वहां चले गए थे।

डॉ बख्श ने देखा की रात काफी हो चुकी थी।

वह लड़की मरियम  जमाल अपने फ्लाइट में जाने के लिए। डॉ बख्श के घर से निकलने वाली थी।

सुनो

डॉक्टर बख्श ने उसे पीछे से आवाज लगाते हुए कहा। मरियम  जमाल ने मुड़कर डॉक्टर बख्श की तरफ सवालिया नजरों से देखा।

आज यही रुक जाओ सुबह चली जाना ,क्योंकि रात बहुत हो गई है और तुम अकेली लड़की हो? 

इस तरह तुम्हारा रात में बाहर जाना ठीक नहीं होगा। 

डॉ बख्श ने कहा।

थैंक यू सो मच सर। 

मरियम जमाल ने कहा। 

क्योंकि इस वक्त उसे खुद ही बाहर जाने में डर लग रहा था? 

लेकिन वह कुछ कह नहीं सकती थी।


डॉ बख्श कहां खो गए आप? 

मरियम जमाल उनके नजदीक आकर उनके हाथों से उनके सर को हटाते हुए बोली। 

तो डॉक्टर बख्श अपनी पुरानी यादों से बाहर निकल आए।

मरियम जमाल में उस रात को याद कर रहा था ।

जिस रात मैंने तुमसे निकाह किया था। 

शायद मैंने बहुत बड़ी गलती की थी तुमसे निकाह करके। अगर मैं उस दिन तुमसे निकाह नहीं करता।

तो आज तुम इस तरह से मेरे पास ना आई होती।

और यह दिन मुझे देखने को नहीं मिलता।

डॉक्टर बख्श बेबस होकर मरियम जमाल की तरफ देखकर कह रहे थे।

डॉक्टर बख्श मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए।

सिर्फ मैं आपका नाम मांग रही हूं आपसे। 

और आई प्रॉमिस की आपको मेरी वजह से कभी कोई तकलीफ नहीं उठानी पड़ेगी।

मैं आपकी फर्स्ट वाइफ को कुछ भी पता नहीं चलने दूंगी कभी उनके सामने नहीं आऊंगी। 

मरियम जमाल अपने घुटनों के बल बैठकर डॉक्टर बख्श के चेहरे  अपने दोनो  हाथ उसके गालो पर फिराती हुई बोली।

डोंट टच मी मरियम जमाल। 

दूर रहो मुझसे। 

डॉ बख्श में मरियम जमाल के हाथों को झटकते हुए कहा।

  खुद को छूने की ईजाजत मैने सिर्फ कंदील जफर को दी है ।

किसी दूसरे शख्स को मैंने खुद को हाथ लगाने के लिए इजाजत नहीं दी है। 

डॉ बख्श ने कहा।

मरियम जमाल का मुंह लटक गया और उसने अपनी निगाहों को नीचे कर लिया।

मरियम जमाल क्या तुम्हें इल्म है कि मैं कंदील जफर से कितनी मोहब्बत करता हूं? 

एकदम से कंदील का प्यारा और खूबसूरत चेहरा डॉक्टर बख्श की आंखों के आगे लहर गया था।

क्या तुम इस बात से वाकिफ हो कि उसको हासिल करने के लिए मैंने क्या कुछ नहीं किया? 

और अब जब शिद्दतों से इंतजार करने के बाद वह मेरे नजदीक आ गई है। 

उसको इस बात का एहसास हो गया है की कितनी मोहब्बत करता हूं मैं उससे।

तो तुम आ कर  कह रही हो कि तुम मेरी वाइफ हो।

तुमने मुझे कशमकश में डाल दिया है मरियम जमाल।

डॉ बख्श बोले।

डॉक्टर बख्श जरा रिलैक्स होकर सोचिए।

मैं कोई ऐसी रिक्वेस्ट नहीं कर रही हूं आपसे ।

कि आप उसके लिए परेशान हो ,मैं सिर्फ आपसे आपका नाम मांग रही हूं। 

जो अगर मेरे साथ रहेगा तो मैं सेफ रहूंगी। 

और यह आप भी नहीं जानते हो डॉक्टर बख्श की मैं आपसे कितनी मोहब्बत करती हूं।

अपने भले उस दिन मुझसे शादी मुझे बचाने के लिए की थी। 

लेकिन उस पल से ही मेरे दिल में आपके लिए मोहब्बत पनप रही है डॉक्टर बख्श। 

और यह मोहब्बत कभी काम नहीं हो सकती।

क्योंकि पिछले 5 साल  से मैं आपकी मोहब्बत को अपने दिल में संभाल के रखे हुए हूं? 

यह कोई वक्ति जज़्बा नहीं डॉक्टर बख्श।

ये तो मोहब्बत है।

जो हम जानबूझकर कर तो नहीं सकते हैं। 

लेकिन इसको निभाना बहुत बड़ी बात होती है। 

वो डॉक्टर बख्श की आंखों में झाकते हुए बोली।

डॉक्टर बख्श भी कुछ देर के लिए मरियम जमाल की आंखों में देखने लगे।

और मरियम जमाल की आंखों में कुछ ऐसा था ।

कि डॉक्टर बख्श अपनी नजरों को हटाने पर मजबूर हो गए थे।

कुछ भी हो मरियम जमाल लेकिन मैं कंदील से धोखा नहीं कर सकता हूं। 

मेरे दिल में जो जज्बात कंदील के लिए है वह जज्बात किसी और के लिए हो ही नहीं सकते।

तुम जैसे आई थी वैसे उल्टे पैर  वापस लौट जाओ मरियम जमाल। 

यहां तुम्हें कुछ हासिल नहीं होगा।

डॉक्टर बख्श  खड़े होते हुए बोले। 

डॉक्टर बख्श प्लीज मैं आपके बिना नहीं रह सकती हूं। 

आज दूसरी बार रिक्वेस्ट कर रही हूं आपको किसी चीज के लिए।

प्लीज मेरी बात को मान जाइए। 

मरियम जमाल उसी तरह घुटनों के बाल बैठी हुई थी। 

उसने डॉक्टर बख्श के हाथ को पकड़ते हुए कहा।

डॉक्टर बक्श ने उसी तरह से मुड़कर मरियम जमाल की तरफ देखा। 

देखकर डॉक्टर बख्श के कदम वहीं रुक गए थे।

मरियम जमाल मेरे पैरों में यह आंसुओं की जंजीर मत डालो। 

मैं किसी भी लेडिस के आंसू देखता हूं तो मुझे अपने आप पर बहुत सख्त कोफ्त महसूस होती है। 

डॉक्टर बख्श ने कहा। 

प्लीज डॉक्टर बख्श मैं आपकी मोहब्बत के लिए आपसे भीख मांगती हूं। 

आप मुझे  डायवोर्स। मत दीजिए।

मरियम जमाल डॉक्टर बख्श के पैरों में झूलते हुए बोली। मरियम जमाल तुम मुझे इस तरह से इमोशनल ब्लैकमेल नहीं कर सकती हो।

तुम जबरदस्ती अपनी तरफ मुझे खींच रही हो।

डॉ बख्श ने अपने दोनों हाथों की मुट्ठियों को कसके बंद करते हुए कहा।

नहीं डॉक्टर बख्श मैं आपको ईमोशनल ब्लैकमेल नहीं कर रही हूं। 

मैं  तो आपसे अपनी मोहब्बत की भीख मांग रही हूं? 

अपना नाम मेरी जिंदगी में शामिल कर दीजिए। 

और मुझे किसी भी चीज की ख्वाहिश नहीं है। 

मरियम जमाल अजीब तरह की जिद कर रही थी ।

डॉक्टर बख्श से।

और वह उसकी जिद के आगे मजबूर से होने लगे थे।

मरियम जमाल तुम क्यों नहीं समझती मैं एक शादीशुदा इंसान हूं?

डॉक्टर बख्श ने फिर उसे अपने शादीशुदा होने का एहसास दिलाया। 

मुझे परवाह नहीं डॉक्टर बख्श की आप शादीशुदा है। आपका नाम मेरे नाम के साथ जुड़ा रहे  मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। 

मरियम  जमाल 1 इंच पीछे हटने का नाम नहीं ले रही थी।

अजीब जबरदस्ती है तुम्हारी मरियम जमाल । 

जब मैंने तुम्हें सब क्लियर बता दिया।

फिर भी तुम मेरे साथ जबरदस्ती कर रही हो।

बख्श बोले। 

डॉक्टर बख्श आप इसे कुछ भी नाम दे सकते हो।

मगर यह मेरी मोहब्बत है आपके लिए। 

जिसका एहसास आपको वक्त आने पर हो जाएगा। मरियम जमाल कि जिद भी लाजवाब थी।



📖 आगे इस कहानी में क्या हो सकता है?

डॉ. बख्श मरियम को सख्ती से मना कर देंगे और उसे तलाक दे देंगे।

मरियम अपनी जिद में और मजबूत हो जाएगी और कानूनी रूप से अपने हक की लड़ाई लड़ेगी।

कंदील जफर को सच्चाई पता चल सकती है — और वह खुद डॉ. बख्श से सवाल करेगी।

डॉ. बख्श guilt में टूट सकते हैं — एक तरफ पहली मोहब्बत, दूसरी तरफ किसी की इज्ज़त और नाम।

या फिर एक बड़ा ट्विस्ट — कंदील खुद मरियम की कुर्बानी समझ कर कोई बड़ा फैसला ले ले।

यह कहानी ट्रैजिक एंडिंग भी ले सकती है

या फिर इन्साफ और सच्चाई के साथ हलाल समाधान तक पहुँच सकती है।

🌿 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

मोहब्बत जबरदस्ती से नहीं मिलती।

किसी की जान बचाने के लिए किया गया फैसला भी जिंदगी भर की उलझन बन सकता है।

शादी सिर्फ नाम का रिश्ता नहीं — बल्कि जिम्मेदारी और नीयत का बंधन है।

एक गलत समय पर लिया गया सही फैसला भी कई दिलों को तोड़ सकता है।

मोहब्बत का दावा करना आसान है, निभाना मुश्किल।

इस कहानी की सबसे बड़ी सीख:

“मोहब्बत हक से मिलती है, जिद से नहीं।”

❄️ Next Short Part (अगला छोटा हिस्सा)

डॉ. बख्श ने अपने हाथ छुड़ाए और एक गहरी सांस ली।

“मरियम… अगर मैं तुम्हें नाम दे दूँ, तो क्या तुम मेरे दिल में भी जगह बना पाओगी?”

मरियम की आंखों में उम्मीद चमकी।

“दिल का रास्ता वक्त से बनता है, डॉक्टर बख्श… मैं इंतज़ार कर लूंगी।”

उसी वक्त दरवाज़े की घंटी बजी।

दोनों चौंक गए।

दरवाज़े के बाहर खड़ी थी — कंदील जफर।

उसकी आंखों में सवाल थे… और शायद सच्चाई भी।

💌 Readers ke liye Shukriya SMS


आपने इस कहानी के हर दर्द, हर कशमकश और हर मोहब्बत को महसूस किया — इसके लिए दिल से शुक्रिया।

आपका साथ ही इस कहानी की असली ताकत है।

अगर यह कहानी आपके दिल को छू गई हो, तो आगे का सफर और भी दिलचस्प होगा।

बने रहिए, क्योंकि हर मोहब्बत का फैसला अभी बाकी है…



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