“Rukhsati Ka Faisla: Kandil, Doctor Bakhsh Aur Agha Jaan Ki Khamosh Jung”



Agaa jaan k hosh khona 

 आगाजान आगाजान क्या हुआ आपको?

कुछ बोलिए तो आगा जान। 

हाशिम के वालिद आगा जान को झिंझोड रहे थे।

लेकिन आगा जान खामोश सोफे पर बैठे थे ।

कुछ हरकत नहीं कर रहे थे वह। 

नवाब साहब आपको क्या हुआ है। 

आप कुछ बोल क्यों नहीं रहे हो?

बेगम साहिबा भी परेशान हो गई कि वह इस तरह से रिएक्ट क्यों कर रहे हैं?

नवाब साहब कुछ बोलिए नवाब साहब। 

बेगम साहिबा ने उनका कंधा पड़कर उन्हें झिंझोड़ा।

तो जैसे नवाब साहब होश में आए। 

अचानक से उनकी आंख में से एक कतरा आंसू का नीचे गिरा। 

क्या हुआ नवाब साहब आपकी आंखों में आंसू?

बेगम साहिबा उनके आंसू को देखकर बोली।

बेगम साहिबा आज मुझे अपनी गलती का एहसास हो रहा है।

मुझे यह एहसास हो रहा है ,कि मैंने कितना कुछ गलत किया है। 

आगा जान के लहजे में बहुत उदासी छलक रही थी। 

वह सोफे पर से उठे। 

और सीधा छड़ी पकड़ कर अपने कमरे की तरफ चले गए। अरे नवाब साहब रुकिए रुकिए कहां जा रहे हैं आप?

बेगम साहिबा पीछे से आवाज लग रही थी। 

लेकिन नवाब साहब अपनी धुन बाने अपने कमरे की तरफ चले गए।

और उन्होंने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया।

नवाब साहब अपने कमरे में इधर-उधर टहलने लगे। 

आज उन्हें जितनी तकलीफ कंदील के लहजे से हुई थी। इतनी तकलीफ उन्हें किसी चीज से नहीं हुई।

जहां उन्हे कंदील  की बातों से बहुत तकलीफ हुई थी। 

वही कंदील की बातों से उनकी आंखें भी खुल गई थी। 

उन्हें ऐहसास सो रहा था, कि कितना कुछ गलत कर दिया उन्होंने।

उसके बाद आज फिर वह गलत करने जा रहे थे। 

नवाब साहब ने अपनी पॉकेट से अपने फोन को निकाला। और डॉक्टर बख्श को कॉल लगाई। 

कुछ ही देर बाद कॉल रिसीव हो गई थी।

जी  नवाब साहब। दूसरी तरफ से कॉल उठाकर डायरेक्ट डॉक्टर बख्श ने कहा।

सैफ हारून बक्श।

2 दिन को के बाद कंदील को यहां से रुखसत  करवा कर  ले जाने की तैयारी करो।

मैं उसकी रुखसती करना चाहता हूं।

नवाब साहब ने कहा।

क्या नवाब साहब आपने क्या कहा?

जरा दोबारा अपने लफ़्ज़ों को दोहराइये। 

डॉक्टर बख्श को आगा जान के कही हुई बातों पर यकीन नहीं हो रहा था।

सैफ हारून बक्श। 

मैंने कहा 2 दिन बाद रुखसती करवा के हवेली से कंदील को ले जाना।

सुन लिया तुमने।

मैं कंदील की रुखसती करना चाहता हूं।

आगा जान कहकर बिना डॉक्टर बख्श की बात सुने फोन को कट कर दिया।

डॉक्टर बख्श हैरानी के साथ-साथ खुश भी थे। 

उन्हें यकीन नहीं हो रहा था, के आगा जान मान गए हैं? क्योंकि जब भी कभी इस टॉपिक पर डॉक्टर बख्श ने बात की?

आगा जान ने उन्हें बहुत कुछ कह कर फोन को कट कर देते है।

उन्हे तो डॉक्टर बख्श के फोन करने से भी चिड़ थी।

डॉ बख्श अच्छी तरह से समझ चुके थे, कि आगा जान उससे बेइंतहा नफरत करते हैं। 

लेकिन आज ऐसा क्या हुआ था, कि आगा जान खुद इस बात को कह रहे थे ।

वह कंदील को रुखसती करके अपने घर पर ले जाए?

बरहाल जो कुछ भी था, डॉक्टर बख्श को यह सुनकर बहुत सुकून मिला था।

कन्दील  अब उनके साथ रहेगी।

डॉक्टर बख्श को यह जानकर बहुत खुशी हो रही थी ।

कि आगा जान अब कंदील को विदा करके डॉक्टर बख्श के साथ भेज देंगे। 

जहां डॉक्टर बख्श इस बात थे खुश हो रहे थे ।

वही वह हैरान भी हो रहे थे ,उनकी समझ में नहीं आ रहा  पिछले 6 सालों से, आगा जान ने इस बात को नहीं माना था 

आज ऐसा क्या हुआ था, कि अचानक से उन्होंने फोन करके खुद ही बोला था ।

कि वह दो दिन बाद कंदील की रुखसती कर देंगे?

डॉ बख्श इस बात को सोच रहे थे।

जब से डॉक्टर बख्श को ये पता लगा था ,के कन्दील प्रेग्नेंट है।

वह इतने ज्यादा खुश थे ,कि अपनी खुशी को जाहिर नहीं कर सकते थे।

पिछले कुछ दिनों से जो कंदील से वह नफरत करने लगे थे।

आज  उनको इस बात का एहसास हो रहा था, कि वह नफरत तो कहीं थी ही नहीं। 

और वह कंदील से नफरत कभी कर भी नहीं सकते थे। 

वो तो सिर्फ कुछ टाइम के लिए कंदील से नाराज हो गए थे। 

अब वो नाराजगी खत्म हो चुकी थी। 

डॉ बख्श यह सोचकर मुस्कुराने लगे।


तभी दरवाजा खोलकर कोई अंदर आया।

डॉ बख्श ने दरवाजे के सामने देखा।

वहा कन्दील खड़ी थी।

कंदील को देखकर डॉक्टर बख्श के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई थी।

कंदील तुम वहां क्यों खड़ी हो आओ अंदर आओ?

डॉ बख्श ने कहा। 

कंदील खामोशी से चलते हुए डॉक्टर बख्श के पास आ गई।

और डॉक्टर बख्श के सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई।

डॉ बख्श मुझे आपसे कुछ बात करनी है।

कंदील ने कहा।

पीच कलर के लॉन्ग सूट पर बालों को खुले हुआ छोड़कर दुपट्टे को एक साइड पर डाले हुए।

वो  बहुत स्मार्ट लग रही थी।

और उसके होंठ के पास के तिल में तो डॉक्टर बख्श की जान अटकती थी।

कंदील बहुत ही दिलकश लग रही थी। 

डॉ बख्श उसको देखने लगे।

हां कंदील बोलो क्या कहना है तुम्हें?

डॉक्टर बख्श बहुत ध्यान से उसकी बात को सुन रहे थे।

डॉ बक्श में नफरत करती हूं आपसे।

आई हेट यू वेरी मच।

कंदील उनको गौर से देखती हुई बोली।

कंदील के इस तरह कहने पर डॉक्टर बख्श के होठों पर मुस्कुराहट आ गई थी?

अच्छा तो तुम ये बताने के लिए मेरे पास आई हो कि तुम मुझसे नफरत करती हो। 

मगर यह बात तो मैं जानता हूं।

वह मुस्कुरा कर बोले।

और उनकी मुस्कुराहट कंदील को और गुस्सा दिला गई।

कंदील ने नफरत से अपना मुंह डॉक्टर बख्श की तरफ से मोड़ लिया।

डॉक्टर बख्श मैंने आगा जान से बात कर ली है। 

मैंने बोल दिया है कि वह मेरी रुखसती जल्द से जल्द करवा दे। 

कंदील ने कहा।

बट डॉक्टर बख्श एक प्रॉब्लम है। 

कंदील बोली।

क्या प्रॉब्लम है कंदील?

डॉ बख्श ने कहा।

प्रॉब्लम यह है डॉक्टर बख्श की अगर आगा जान नहीं मानते रूकस्ती के लिए ,क्योंकि इस वक्त  वह मुझे सिरे से मना कर रहे हैं कि वह आपके साथ? मेरी रुखसती नहीं करवाएंगे। 

और वह आपसे बेइंतहा नफरत करते हैं।

अगर ऐसा हुआ वह नहीं माने। 

तो हमें अस्पताल के सारे लोगों को इनवाइट करके अपने निकाह को दोहराना पड़ेगा।

कंदील ने कहा।

कंदील जैसा तुम चाहती हो, और जो तुम बोलोगी वैसा ही होगा। 

डॉ बक्श ने कहा।

अब डॉक्टर बख्श की समझ में आ चुका था।

कि नवाब साहब का फोन उसके पास आया था।

तो किस लिए आया था? 

मगर अभी वह कंदील को यह बात नहीं बताना चाहता था।

उसने सोचा कि   आगा जान खुद ही ,कंदील से यह बात बोलेंगे। 

कंदील उठकर जाने लगी थी, अपनी बात को मुकम्मल करके।

डॉ बक्श ने उसे नहीं रोका वह खामोश रहे।

एक बात और डॉक्टर बख्श। 

कंदील जाते-जाते फिर से मुड़कर डॉक्टर बख्श की तरफ देखकर बोली। 

डॉ बख्श उसको देखने लगे।

मै सिर्फ अपने बच्चे के लिए आपके साथ जा रही हू।

आफके साथ रहने के लिए तैयार हुई हू।

क्योंकि मैं नहीं चाहती कोई भी मेरे बच्चे पर गलत उंगली उठाई? 

या उसे गलत नाम से बुलाए। 

और सिर्फ उसी के लिए मुझे स्टैंड लेना पड़ा है। 

नहीं तो आपसे कोई मतलब नहीं है, मुझे डॉक्टर बख्श। 

आई हेट यू डॉक्टर बख्श।

कंदील  कह कर आगे बढ़ गई।


जानता हूं कंदील तुम मेरी एक गलती की वजह से  मुझसे नफरत करने लगी हो।

हमममम, मै भी देखता हूं कि कब तक तुम मुझे यूं ही नफरत करती रहोगी?

तुम एक दिन इस नफरत को मिटाना पड़ेगा।

तुम्हें अपने दिल में फिर से मेरे लिए वही उनकी फीलिंग को जागना पड़ेगा। 

मैं इंतजार करूंगा इस बात का। 

और पूरी कोशिश करूंगा कि तुम्हें हर तरह से  खुश रख सकूं। 

उसके लिए तुम जो भी मेरे साथ बिहेव करोगी।

कंदील मुझे सब मंजूर होगा। 

डॉक्टर बख्श आहिस्ता आहिस्ता बोल रहे थे

कंदील उनके रूम से जा चुकी थी।




🔹 Is Kahani Me Aage Kya Hone Wala Hai? 

Agha Jaan ka faisla sirf rukhsaati ka nahi, balki unki zindagi ki sabse badi regret ka izhaar hai।

Kandil doctor Bakhsh ke saath majboori me ja rahi hai, mohabbat me nahi—ye rishta sirf bacche ke naam aur izzat ke liye hai।

Doctor Bakhsh ka confidence dheere-dheere obsession me badal sakta hai, jahan wo Kandil ki nafrat ko bhi mohabbat samajhne lageगा।

Kandil ka struggle ab haveli se nikal kar naye ghar me shuru hoga—jahan uski khamoshi aur zyada boli जाएगी।

Aane wale parts me past secrets, guilt, aur ek bada emotional confrontation hoga—jo ya to sab kuch jod dega, ya hamesha ke liye tod dega।

🔹 Is Kahani Se Kya Seekh Milti Hai?

Faisle jab waqt par na liye jayein, to unka bojh zindagi bhar uthana padta hai।

Sirf naam ka rishta mohabbat nahi hota।

Aurat aksar apne liye nahi, apne bacche ke liye sab kuch seh leti hai।

Nafrat bhi kabhi-kabhi zakhmi mohabbat ka dusra naam hoti hai।

Izzat bachane ke naam par kiye gaye faisle aksar kai zindagiyon ko zakhmi kar dete hain।

🔹 Short Next Part 

Next Part: “Rukhsati Se Pehle Ki Raat”

Raat gehri ho chuki thi.

Haveli ke lambe corridors me sirf Kandil ke kadmon ki awaaz thi.

Uska haath apne pet par tha—jaise apne bacche ko tasalli de rahi ho।

“Main majboor hoon…

par kamzor nahi,”

usne khud se kaha।

Dusri taraf, Agha Jaan apne kamre me tasbeeh ghoomate hue ek hi baat soch rahe the—

“Kaash… maine pehle hi sahi faisla liya hota.”

Aur shehar ke dusre kone me, Doctor Bakhsh sheeshe ke saamne khade hokar muskura rahe the—

“Ab wo mere saath rahegi…

chahe nafrat ke saath hi sahi.”

Teen zindagiyan.

Ek faisla.

Aur ek raat—jo sab kuch badalne wali thi।

🔹 Readers Ke Liye Shukriya Message 💌

Dear Readers,

Is kahani ko padhne, mehsoos karne aur Kandil ke dard ko samajhne ke liye dil se shukriya।

Aapka har read, har comment, har jazba—is kahani ko zinda rakhta hai।

Umeed hai ye kahani aapko sirf entertain nahi karegi,

balki sochne par bhi majboor karegi।

Aage ki kahani ke liye jude rahiye…

kyunki ab rukhsaati ke baad ki khamoshi bolne wali hai 🌙


https://www.indiapulsedaily.com/2026/01/the-little-bakery-rayyan-ena-zoboriya-story.html


https://timespeakestruth.blogspot.com/2025/12/tata-harrier-safari-petrol-launch-2025.html

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