“रिवाज़, शर्त और मोहब्बत: डॉक्टर बख्श और कंदील की अनकही जंग”

  


Doctor Bakhsh ki mohabbat 

बक्श ने कंदील को कुछ देर यू ही रोने दिया।

अब कंदील  को थोड़ा हल्का महसूस होने लगा था। 

रोकर उसके दिल का गुबार निकल गया था। 

रिलैक्स कंदील चुप हो जाओ। 

तुम्हें पता है ना ऐसी हालत में रोने से तुम्हारे बच्चे को कितनी दिक्कत हो सकती है। 

डॉ बख्श का हाथ अभी भी कंदील के सर पर था।

आपको पता है, डॉक्टर बख्श मैं आपके साथ क्यों हूं आज? 

कंदील ने डॉक्टर बख्श के कंधे पर से सर हटाकर अपने आंसू पूछते हुए कहा। 

क्यों हो? डॉ बख्श ने कहा। 

अपने बच्चे की वजह से। 

कंदील ने अपने पेट पर हाथ रखते हुए कहा। 

ओहहहह तो यह बात है। 

तुम मेरे साथ आज इसलिए हो, क्योंकि तुम्हें तुम्हारे बच्चे की फिक्र है राइट? 

डॉक्टर बख्श कंदील को गौर से देखने लगे। 

जी हां, कन्दील ने अपनी नाक चढ़ाते हुए कहा। 

अच्छा तो फिर यह बताओ यह बेबी किसका है?

कंदील ने चौकते हुए डॉक्टर बख्श की तरफ देखा। 

डॉक्टर बख्श की आंखों में इस वक्त शरारत थी।

मैं आपके साथ इसलिए हूं क्योंकि  ये बच्चा मेरा है? कंदील बोली। 

अच्छा सिर्फ तुम्हारा है। 

डॉक्टर बख्श को कंदील की बातों पर हंसी आ रही थी।

मतलब इसके लिए तुमने अकेले ही सब कुछ किया था।

मेरा इसमें कोई इंवॉल्व नहीं है ना, मैंने तुम्हारे साथ कोई जबरदस्ती कोई गलत हरकत नहीं की है ना।

फिर तुम मुझसे क्यों नाराज हो? 

तुम्हारी मुझसे नफरत करने की क्या वजह है कंदील?

डॉ बख्श को पता था कि कंदील इस बात से चीड़ जाएगी। 

इसलिए  डॉक्टर बख्श  कन्दील को छेड़ रहे थे।

जी हां यह सिर्फ मेरा बच्चा है।

पर आप दूर रहिए मुझसे। 

कंदील ने दोबारा से डॉक्टर बख्श को धक्का देते हुए कहा।

कंदील की समझ में नहीं आ रहा था ,कि वह डॉक्टर बख्श की इस बात का क्या जवाब दे? 

डॉक्टर बख्श ने कन्दील को लाजवाब कर दिया था।

वैसे कंदील मुझे समझोगी मै समझना चाहता हूं। 

तुमने अकेले इस बच्चे को लाने के लिए क्या-क्या किया? डॉक्टर बख्श  की बेशर्मी की भी कोई इम्तिहान नहीं थी। 

वो कंदील के पीछे पड़ गए थे।

प्लीज डॉक्टर बख्श खामोश रहीऐ ह आप। 

कंदील ने शरमाते हुए अपने मुंह को अपने हाथों से छुपा लिया।

प्लीज यार सॉरी, कहा ना गलती हो गई मुझसे। 

आइंदा मैं कुछ भी ऐसा नहीं करूंगा जिससे तुम्हारी इगो हर्ट हो। 

या तुम्हारे दिल को ठेस पहुंचे। 

डॉक्टर बख्श कंदील के सामने अपने कानों को पकड़ते हुए बोले। 

कंदील खामोश हो गई, उसने उनकी बात का कोई जवाब नहीं दिया।




कंदील के फोन पर रिंग बजने लगी तो दोनों का ध्यान कंदील के फोन पर गया। 

कंदील ने बैड के साइड वाले टेबिल से अपने फोन को उठाया। 

तो उसके चेहरे पर इस्माइल आ गई।

किसका फोन है कंदील? 

डॉ बक्श ने पूछा।

लाएबा का कन्दील  ने कहकर झट से फोन को रिसीव किया और अपने कान से लगाया।

हेलो ,कंदील बोली।

हेलो माय डियर स्वीट कजिन।

लाएबा ने कहा।

क्या कर रही थी आप मोहतरमा? 

लाएबा कंदील को छेड़ते हुए बोले।

कुछ नहीं बस यूं ही।

कंदील बोली।

क्योंकि डॉक्टर बख्श उसे बहुत गौर से देख रहे थे?

और दूसरी तरफ से लाएबा का बेतूका का

सवाल।

क्या यूं ही कंदील?

लगता है आपके डॉक्टर बख्श ने आपको कुछ ज्यादा ही परेशान कर दिया है।

लाएबा अपनी हंसी दबाते हुए बोली।

शट अप लाएबा सुबह-सुबह क्या बोले जा रही हो?

कंदील ने दबी आवाज में लाएबा को शट अप कहा। 

और इतनी सुबह-सुबह फोन करने की क्या जरूरत थी? कंदील बोली।

ओ मैडम, वहां जाकर आपकी टोन भी बदल गई।

एनीवे मैंने यह बताने के लिए कॉल किया है।

की रेडी हो जाओ। 

आगा जान और बेगम साहिबा। 

तुम्हें लेने तुम्हारे घर पर आ रहे हैं।

लाएबा ने कंदील से कहा।

रियली लाएबा।

लाएबा की बात सुनकर कंदील खुश हो गई थी। 

डॉ बक्श ने जैसे ही कंदील को, इस तरह खुश होकर बात करते हुए देखा ।

डॉक्टर बख्श के माथे पर बल पड़ गए थे। 

तुम आगा जान ,बेगम साहिबा से कह दो के वो जल्दी आ जाए मैं बस 10 मिनट में तैयार हो जाती हूं। 

ओके लाएबा। कंदील ने  कह कर फोन को कट कर दिया।

यह कहां जाने के लिए तैयार होने के बात बोल रही हो तुम? 

जब कंदील ने फोन कट कर दिया ,तो डॉक्टर बख्श ने उसको देखते हुए कहा।

आगा जान, बेगम साहिबा मुझे लेने के लिए यहां आ रहे हैं।

इसलिए लाएबा ने फोन किया था, कि मैं जल्दी से तैयार हो जाऊं।

कंदील बहुत खुश होते हुए बता रही थी। 

नहीं बिल्कुल नहीं।

तुम नहीं जाओगी उन लोगों के साथ।

डॉ बख्श ने कहा।

लेकिन क्यों डॉक्टर बख्श?

मैं क्यों नहीं जाऊंगी उनके साथ?

कंदील का चेहरा एकदम से फक पड़ गया था। 

मैंने कह दिया ना नहीं जाओगी मेरी मर्जी, मैं नहीं भेजूंगा उन लोगों के साथ तुम्हें।

डॉक्टर बख्श कंदील की तरफ से रुख मोड़ कर खड़े हो गए थे। 

मगर डॉक्टर बख्श आप ऐसा क्यों करेंगे? 

कंदील का मुंह लटक गया। 

कहा ना मेरी मर्जी नहीं जाने देता मैं तुम्हें उन लोगों के साथ। उन्होंने भी तो मुझे इतना परेशान किया था। 

कितने सालों अपने पास तुम्हें रोक के रखा था। 

अब मेरी बारी है मैं परेशान करूंगा उन्हें।

डॉ बख्श अपनी हंसी को दबाने की कोशिश कर रहे थे। उनका चेहरा इस वक्त कंदील नहीं देख सकती थी।

क्योंकि कंदील के फेस की तरफ डॉक्टर बख्श की पीठ थी?

यह क्या बात होती है सैफ? 

यह तो चीटिंग हुई ना।

एक रिवाज होता है, की शादी के दूसरे दिन लड़की के घर वाले उसे लेने। उसके ससुराल आते हैं। 

और उसको जाना पड़ता है, कंदील ने कहा। 

क्या-कहा कंदील तुमने दोबारा कहना? 

अब डॉक्टर बख्श ने अपना मुंह कंदील की तरफ कर लिया था।

क्योंकि अनजाने में ही सही इस वक्त कंदील ने डॉक्टर बख्श को सैफ कहा था?

जो डॉक्टर बख्श को बहुत अच्छा लगता था।

मैं यह बोल रही हूं डॉक्टर बख्श के एक रिवाज होता है यह जाना जरूरी होता है ,अपने घर पर। 

कंदील ने कहा, डॉक्टर बख्श ने देखा कि कंदील का चेहरा लटक गया था। 

अपने घर न जाने की बात सुनकर। 

अच्छा ठीक है एक शर्त पर, मैं तुम्हें तुम्हारी हवेली जाने दूंगा। बोलो तुम्हें मेरी शर्त मंजूर है। 

डॉक्टर बख्श कंदील से बोले। 

क्या शर्त हैं आपकी डॉक्टर बख्श? 

कंदील के समझ में नहीं आया था, कि वह क्या कहना चाह रहे थे?

मुझे तुम्हारा किस चाहिए मेरे गाल पर ।

और डॉ बख्श ने अपने होट पर इशारा करते हुए कहा।

जी नहीं डॉक्टर बख्श हरगिज में ऐसा नहीं करूंगी।

कंदील की आंखें बड़ी हो गई थी ।

डॉक्टर बख्श की ये शर्त रखने पर।

ठीक है मत करो ऐसा। 

फिर तुम अपने घर भी नहीं जा सकती हो। 

डॉ बख्श ने कहा। 

लेकिन डॉक्टर बख्श यह तो गलत बात है। 

आप इस तरह से नहीं कर सकते हो। 

कंदील ने कहा। 

क्यों नहीं कर सकता हूं यह मेरी लाइफ है  इसे मैं किसी भी तरह से जी सकता हूं। 

डॉक्टर बख्श  बोले। 

डॉ बख्श बहुत ही गौर से कंदील के चेहरे के बदलते हुए  तास्सुरात को देख रहे थे।

कंदील अपने सीने पर हाथ बांधकर, अपनी गर्दन को घुमा कर। 

गुस्से में दूसरी साइड पर देख रही थी।

कंदील हैरानी हो रही थी डॉक्टर बख्श की इस हरकत पर



🔹 इस कहानी में आगे क्या हो सकता है? (Story Prediction)

आगे कहानी में ये मोड़ आ सकते हैं:

कंदील मजबूरी में डॉक्टर बख्श की शर्त मान लेगी, लेकिन यह किस नहीं बल्कि एक भावनात्मक समझौता बनेगा।

आगा जान और बेगम साहिबा के सामने डॉक्टर बख्श का पजेसिव और केयरिंग रूप सामने आएगा।

कंदील को धीरे-धीरे एहसास होगा कि डॉक्टर बख्श की शरारत के पीछे डर और मोहब्बत छुपी है।

बच्चे को लेकर दोनों के बीच टकराव बढ़ेगा, लेकिन यही बच्चा उनके रिश्ते को जोड़ने वाला धागा बनेगा।

🔹 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

1️⃣ रिश्तों में ज़िद नहीं, समझ जरूरी होती है

शर्तें मनवा कर नहीं, दिल जीत कर रिश्ते निभाए जाते हैं।

2️⃣ औरत की मजबूरी को मज़ाक नहीं बनाना चाहिए

कंदील की खामोशी उसकी कमज़ोरी नहीं, उसका दर्द है।

3️⃣ मोहब्बत में रिवाज़ अहम हैं, लेकिन इज्ज़त उससे भी ज्यादा

जहां इज्ज़त नहीं, वहां मोहब्बत अधूरी रहती है।

4️⃣ बच्चा सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, रिश्ते को संवारने का मौका होता है

🔹 Next Short Part (अगला छोटा हिस्सा)

अगला भाग (Short Part):

कंदील ने धीरे-धीरे अपनी आंखें बंद कर लीं।

डॉक्टर बख्श उसके चेहरे की मासूमियत को देख ठिठक गए।

“छोड़ो कंदील…”

उनकी आवाज़ अचानक नरम हो गई।

“मैं तुम्हें मजबूर नहीं करना चाहता…

मैं बस यह जानना चाहता हूं कि

क्या कभी तुम मुझे अपना समझ पाओगी?”

कंदील ने पहली बार उनकी तरफ देखा।

उसकी आंखों में नफ़रत नहीं थी…

बस डर था।

और शायद…

कहीं बहुत गहराई में छुपी हुई मोहब्बत भी।

🔹 Readers के लिए Shukriya Message 💌

“इस कहानी को पढ़ने और महसूस करने के लिए दिल से शुक्रिया 🌹

आपका हर एक व्यू, हर कमेंट और हर दुआ

इस कहानी को ज़िंदा रखती है।

दुआ कीजिए कि कंदील और डॉक्टर बख्श की कहानी

आपके दिल तक ऐसे ही पहुंचती रहे।”

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