“शिकायत, मोहब्बत और एक नन्ही जान – डॉक्टर बख्श और कंदील की अधूरी सुलह”

 



डॉक्टर बख्श की मॉम ने कंदील के लिए स्पेशल नाश्ते का एहतमाम करवाया था।

टेबल पर कई तरह की ब्रेकफास्ट की डिशेस तैयार रखी थी।

मिस्टर हारून और मिसेज हारून बख्श  कंदील से बहुत ही अच्छे से बिहेव कर रहे थे।

और दोनों ही कंदील की खाने पर ध्यान दे रहे थे।

अरे कंदील बेटा अभी तो तुमने कुछ भी नहीं खाया खाओ थोड़ा सा और।

मिसेज हारून बख्श बोली।

नहीं नहीं आंटी बहुत पेट भर गया मेरा इससे ज्यादा मैं नहीं खा सकती हूं।

कंदील अपने पेट पर हाथ रखते हुए बोली।

बेटा मैं तुम्हारी आंटी नहीं हूं मॉम हूं।

दोबारा अगर तुमने मुझे आंटी कहा तो मुझे बुरा लग जाएगा।

उन्होंने कंदील को बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा।

सॉरी आंटी आइंदा ऐसा नहीं होगा।

कंदील मुस्कुरा कर बोली।

फिर  से आन्टी मिसेज हारून बख्श बोली।

सोरी मॉम कंदील बोली।

वैसे कंदील बेटा।

सैफ तुम्हारी काफी तारीफ करता, कि तुम एक बहुत ही रिस्पांसिबल डॉक्टर हो।

और अपनी जिम्मेदारियां को बखूबी निभाती हो।

मिस्टर हारून बक्श ने कहा।

ओहहहह  अच्छा अन्कल कंदील के मुंह से निकला।

क्योंकि डॉक्टर बख्श  उसे हर वक्त  पनिशमेंट करते थे। उसके काम में खामियां निकलते थे?

तो कंदील को हैरानी हो रही थी, कि डॉक्टर बख्श अपने घर में कंदील की तारीफ किया करते थे।

अभी वो यही सोच रही थी ,कि उसे सामने से डॉक्टर बख्श आते हुए दिखाई पड़े।

वाइट टी-शर्ट और ब्लू जींस में वह खासे से स्मार्ट लग रहे थे।

अस्पताल में तो वह अस्पताल के कपड़े ही पहने होते थे। कंदील उनको गौर से देखने लगी।

डॉक्टर बख्श भी कंदील की तरफ देखते हुए कुर्सी खींच कर बैठ गए थे।

डॉक्टर बख्श ब्रैड पर जैम लगाने लगे।

मॉम प्लीज जूस का ग्लास तो उठाइए।

डॉ बख्श ने अपनी मॉम से जूस के गिलास उठाने के लिए कहा।

उन्होंने जूस का गिलास डॉक्टर बख्श की तरह

बढ़ा दिया।

एक्सक्यूज मी, कंदील  ने कहा तो तीनों की नजर एक साथ कंदील के ऊपर गई।

कंदील अपना ब्रेकफास्ट कर चुकी थी।

इसलिए वह कुर्सी से उठकर जाने लगी।

क्या हुआ बेटा अपना ब्रेकफास्ट तो खत्म कर लो?

मिसेज हारून बक्श ने कहा।

नहीं मॉम अब आपने वैसे ही इतना कुछ पहले खिला दिया है।

अब इससे ज्यादा मैं नहीं खा सकती हूं।

कंदील बोली।

मुझे थोड़े चक्कर आ रहे हैं इसलिए मैं रूम में जा रही हू। कंदील को लग रहा था कि उसे ऊलटीया होने वाली है। इसलिए वह यहां से जल्दी से जल्दी जाना चाह रही थी।

ओके बेटा जाओ तुम जाकर रूम में आराम करो।

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।

कंदील तेजी से चलती हुई अपने कमरे की तरफ जा रही थी।

डॉ बख्श की नजर कंदील का पीछा कर रही थी।


कंदील जैसे ही रूम में दाखिल हुई।

डायरेक्ट अपने वॉशरूम में गई।

और वॉशरूम में जाते ही उसे उल्टियां होना

शुरू हो गई।

काफी देर उल्टी होने के बाद उसे कुछ रिलैक्स महसूस हुआ।

उसने अपना फेस वाश किया।

और फिर वॉशरूम से बाहर आ गई।

कंदील  निढाल होकर बैड से टेक लगाकर बैठ

गई।

आर यू अलराइट।

जब डॉक्टर बख्श रूम में दाखिल हुए ,तो कंदील को इस तरह बैठा हुआ देखकर उन्होंने कंदील से पूछा।

जी हां मैं ठीक हूं, कंदील ने कहा।

डॉक्टर बख्श ने नोट किया अभी कुछ देर पहले जिस तरह से एक कंदील का चेहरा खिल रहा था ।

अब वह मुरझा चुका था।

डॉक्टर बख्श कंदील के सामने बैठ गए।

और उन्होंने उसका हाथ पकड़ कर उसकी नवज चैक की।

ब्लड प्रेशर लो लग रहा है, उल्टियां हुई थी तुम्हे  अभी।

डॉ बख्श को कंदील की फिक्र होने लगी।

कंदील ने अपनी गर्दन को हां में हिला दिया।

तुम डॉक्टर हो ना कंदील, तो तुम्हें इस बारे में अच्छे से पता होगा।

कि जब लेडिस की ऐसी पोजीशन होती है।

तो उनके साथ ही सब होना नॉर्मल बात है।

तुम्हें ब्रेकफास्ट से पहले अपनी दवाई खा लेनी चाहिए थी।

डॉ बख्श ने कहा।

मुझे ध्यान ही नहीं रहा इस बात का।

भले ही मैं डॉक्टर हूं लेकिन यह मेरे साथ पहली मर्तबा हुआ है।

तो इन सब चीजों से अनजान हू मै।

कंदील ने कहा।

ओके कोई बात नहीं आगे से ध्यान रखना।

डॉक्टर बख्श कंदील को देखकर मुस्कुराने लगे।

वो अपनी जगह से उठकर वही रात वाला पॉलिथीन बैग। जिसमें कंदील की दवाइयां थी।

वह उठकर कंदील के पास ले आए।

ये लो नो इसमें से दवाई है खा लो।

कंदील ने  पॉलिथीन बैग डॉक्टर बख्श के हाथ से ले लिया। डॉ बक्श मुड़कर टेबिल  से पानी जग उठाकर ले आए।

और गिलास में पानी लौटकर कंदील को दिया।

कंदील ने दवाई खाकर वह पॉलिथीन बैठ वापस डॉक्टर बख्श के हाथ में थमा दिया।

डॉक्टर बख्श उस पॉलिथीन बैग को अपनी जगह पर रख कर आ गए।

और फिर कंदील के सामने आकर बैठ गए।

कैसा फील हो रहा है अभी तुम्हे कंदील ?

डॉ बख्श ने कहां?

थोड़ी वीकनेस लग रही है।

कंदील बोली।

खाना और दवाई टाइम पर लो वीकनेस नहीं लगेगी ओके।

उन्होंने मुस्कुराते हुए कंदील से कहा।

आफ्टर ऑल तुम अब सिंगल नहीं हो, एक नन्ही सी जान तुम्हारे अंदर पल रही है।

डॉ बख्श ने कहा।

तो कंदील को शर्मा आ गई।

उसने अपनी निगाहों को झुका लिया।

कंदील आई एम सो हैप्पी, कि तुमने मुझे पापा बनने की खबर इतनी जल्दी सुना दी।

डॉक्टर बख्श कंदील के नजदीक आकर, उसके फेस के पास अपना फेस लाकर बोले।

डॉक्टर बख्श के ये लफ्ज बोलने पर, कंदील  ने शिकवा भरी नजर से डॉक्टर बख्श की तरफ देखा।

जिससे साफ जाहिर था

कि कंदील डॉक्टर बख्श से नाराज है।

उऊफफफ यार क्या कर दिया?

डॉक्टर बख्श ने अपने सीने पर हाथ रखते हुए कहा।

मैंने क्या किया डॉक्टर बख्श? कंदील हैरानी भरी नजरों से डॉक्टर बख्श की तरफ देखने लगी।

तुमने अभी जिन नज़रों से मुझे देखा है।

इससे सीधा मेरे सीने पर वार हुआ है।

डॉ बख्श शरारत भरे लहजे,से कंदील से कह रहे थे।

कंदील ने इस बात पर अपने मुंह को खुला लिया।

डॉक्टर बख्श को उसके मुंह फुलाने पर हंसी आ गई।

तुम इतनी क्यूट हरकतें कैसे कर लेती हो?

डॉ बख्श ने कंदील की नाक को टच करते हुए कहा।

दूर रहिए मुझसे डॉक्टर बख्श ओके।

कंदील ने अपने दोनों हाथों से डॉक्टर बख्श को पीछे धक्का दिया।

आप अच्छी तरह से जानते हो ,कि मैं आपसे नफरत करती हूं।

कंदील का मुंह उसी तरह फुला हुआ था।

मैं भी देखता हूं ,कंदील के तुम कब तक मुझे यूं नफरत करती रहूंगी?

डॉ बख्श मुस्कुराते हुए बोले।

जब तक मैं जिन्दा हू आप से नफरत करती रहूंगी।

कंदील ने फिर शिकवा भरी नजरों से डॉक्टर बख्श की तरफ देखा।

ऊफफफफ कंदील तुम।

डॉ बक्श ने कहा और फिर से कंदील के फेस को अपने फेस के नजदीक कर लिया।

यार तुम मुझे क्यों बार-बार वोर्न करती हो?

क्या चाहती हो तुम कि मैं तुम्हारे साथ?

डॉ बख्श ने बात अधूरी छोड़ दी थी।

एनीवे थे डिप्रेशन में रहने की जरूरत नहीं है।

बेशक मुझसे नफरत करती रहो।

मगर अपना और बच्चे का पूरी तरह से ख्याल रखना।

डॉक्टर बख्श ने अपने माथे से कंदील के माथे को जोड़ते हुए कहा।

एक सवाल पूछना है मुझे आपसे।

कंदील की निगाह नीचे थी।

पूछिए मोहतरमा, डॉ बख्श बोले।

बहुत प्यार करते हो ना आप ,अपने इस आने वाले बच्चे से।

कंदील ने अपने पेट पर हाथ रखते हुए डॉक्टर बख्श से पूछा।

हां बिल्कुल, एक नॉर्मल सी बात है कि एक बाप अपने बच्चों को बहुत प्यार करता है।

कुदरती इस रिश्ते  में मोहब्बत पैदा हो जाती है।

डॉक्टर बख्श ने कहा।

इसलिए आपने, रुखसती के लिए जल्दी किया, राइट डॉक्टर बख्श।

कंदील ने कहा।

किस बात पर डॉक्टर बख्श खामोश होगए।

इसका यह मतलब उसकी पैदाइश हो जाएगी।

तो आप मुझे छोड़ देंगे।

आपको तो सही सलामत आपका बेबी चाहिए ना।

इस वक्त कंदील डायरेक्ट डॉक्टर बख्श की आंखों में देखकर कह रही थी।

डॉक्टर बख्श ने देखा कंदील की आंखों में इस वक्त बहुत शिकवा और शिकायत है डॉक्टर बख्श के लिए।

ये क्या बेतूकी की बात बोल रही हो कंदील तुम।

तुम इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ हो, कि मैं तुमसे कितनी मोहब्बत करता हूं।

मेरी दीवानगी की हद तुम जानती हो कंदील।

डॉक्टर बख्श के चेहरे पर से अचानक हंसी गायब हो गई थी।

ठीक है डॉक्टर बख्श मैंने मान लिया आप मुझे बेइंतहा मोहब्बत करते हैं।

दीवानों की तरह चाहते हैं मुझे।

फिर उस दन आपको क्या हो गया था?

कौन सा शैतान आप पर तारी हुआ था?

जो आपने जबरदस्ती की मेरे साथ।

कंदील की अखियां अचानक से झिलमिला ने लगी थी। कंदील मैं इस बात के लिए तुमसे माफी मांग चुका हूं।

और मैं फिर से तुमसे माफी मांगने के लिए तैयार हूं।

तुम जितनी बार इस बात को बोलोगी मैं इतनी बार तुमसे माफी मांगने के लिए तैयार हूं ।

मगर उन  डायवर्स पेपर्स पर तुम्हारे साइन थे।

और  उन डायवोर्स। पेपर्स पर तुम्हारे साइन देखकर।

मैं अपने गुस्से को कंट्रोल नहीं कर पाया था।

डॉक्टर बख्श ने कहा।

डॉक्टर बख्श एक बहुत बड़ी सच्चाई से मैं आपको आगाह करवाती हूं।

उन डायवर्स पेपर्स पर भले ही साइन मेरे थे।

लेकिन आगा जान ने वह साइन मुझसे धोखे से करवाए थे।

प्रॉपर्टी के पेपर्स के बीच में उन्होंने वह डाइवोर्स पेपर रख दिए थे।

तो मुझे एहसास ही नहीं हुआ कि इसमें डाइवोर्स पेपर है। कंदील ने डॉक्टर बख्श को सच बताते हुए कहा।

कंदील तो यह बात तुम मुझे उस दिन भी बता सकती थी।

डॉ बख्श को ये बात सुनकर हैरानी हो रही थी।

कैसे बताती डॉक्टर बख्श?

आप उस वक्त कुछ भी सुनने के लिए तैयार नहीं थे।

आपको तो बस एक ही चीज करना था।

आपको उस वक्त मेरी ईगो को हर्ट करना था।

और आपने फिर मेरे साथ जबरदस्ती किया।

कंदील कहकर फूट-फूट कर रोने लगी।

और रोते-रोते उसका सर, डॉ बख्श के कंधे पर टिक गया था।

डॉक्टर बख्श खामोश होकर उसके सर को सहला रहे थे। क्योंकि उस हादसे के बाद?

कंदील ने आज पहली बार डॉक्टर बख्श से खुलकर बात की थी।

वो डॉक्टर बख्श के कंधे पर सर रखकर इस तरह रो रही थी।

डॉ बख्श ने कुछ देर उसे यूं ही रोने दिया।



🔮 इस कहानी में आगे क्या होने वाला है?

आने वाले हिस्सों में कहानी एक नए मोड़ पर पहुंचेगी।

डॉक्टर बख्श को यह सच्चाई झकझोर कर रख देगी कि कंदील ने कभी धोखे से तलाक़ के काग़ज़ों पर साइन किए थे।

अब सवाल यह है—

क्या डॉक्टर बख्श अपने किए की भरपाई कर पाएंगे?

क्या कंदील अपने दिल का डर और गुस्सा छोड़ पाएगी?

क्या आने वाला बच्चा इनके टूटे रिश्ते को जोड़ पाएगा या नई दूरियाँ पैदा करेगा?

आगे की कहानी पछतावे, सच्चाई के खुलासे और रिश्तों की असली परीक्षा होगी।

🌱 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि—

बिना पूरी सच्चाई जाने लिया गया फैसला ज़िंदगियाँ बर्बाद कर सकता है।

गुस्से में किया गया एक गलत कदम, उम्र भर का पछतावा बन सकता है।

शादी सिर्फ़ रिश्ता नहीं, ज़िम्मेदारी और समझ का नाम है।

औरत की खामोशी उसकी रज़ामंदी नहीं होती।

बच्चे सिर्फ़ जिम्मेदारी नहीं, बल्कि रिश्तों को सुधारने का मौका भी होते हैं।

✍️ Next Short Part (अगला छोटा भाग)

डॉक्टर बख्श देर तक खामोशी से बैठे रहे।

कंदील की कही हर बात उनके दिल पर हथौड़े की तरह पड़ रही थी।

“अगर मुझे ज़रा भी अंदाज़ा होता…”

डॉक्टर बख्श की आवाज़ भर्रा गई।

कंदील ने धीरे से सिर उठाया।

उसकी आंखों में अब भी डर था… और उम्मीद भी।

“अब देर हो चुकी है डॉक्टर बख्श,”

कंदील ने धीमे स्वर में कहा,

“लेकिन हमारा बच्चा… उसे सच्चा घर चाहिए।”

डॉक्टर बख्श ने पहली बार खुद को टूटते हुए महसूस किया।

💌 Readers ke liye sms

प्रिय पाठकों ❤️

आपका प्यार, सब्र और भरोसा ही मेरी लेखनी की सबसे बड़ी ताक़त है।

इस कहानी के हर किरदार को आपने दिल से अपनाया, इसके लिए दिल से शुक्रिया।

उम्मीद है आगे भी आप कंदील और डॉक्टर बख्श की कहानी में हमारे साथ बने रहेंगे।

आपका प्यार ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है 🌸


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