Doctor Bakhsh and Kandeel | A Marriage of Emotions, Desire, Secrets and Unspoken Truths

 

Doctor Bakhsh k kandeel ke nazdeek ana

सुबह जब डॉक्टर बख्श की ऑख खुली तो उनकी नजर बैड पर गई। 

कंदील वहा मौजूद नही थी, डॉक्टर बख्श समझ गए थे। 

कि वह वॉशरूम में होंगी।

डॉक्टर बख्श उठाकर बैठ गए थे,सारी रात सोफा पर लेटने की वजह से डॉक्टर बख्श की कमर मे दर्द हो रहा था।

डॉक्टर बख्श  अपनी कमर पर हाथ रखते हुए उठे। 

और अलमारी की तरफ जाने लगे अपने कपड़े निकालने के लिए।

उन्होंने अपने कपड़े निकाल कर बैड पर रखे ही थे कि सामने से वॉशरूम खोलने की आवाज आई।

डॉक्टर बॉक्स की नजर खुद-ब-खुद वॉशरूम के दरवाजे पर चली गई।

कंदील पिंक कलर का लॉन्ग सूट पहने हुए थी। 

गीले बालों को टॉवल से रगड़ती हुई वह वॉशरूम से बाहर निकली।

डॉक्टर बख्श अपने सीने पर हाथ बांधे उसे ही देख रहे थे

इस वक्त वह बहुत खूबसूरत नजर आ रही थी।

कंदील ने टावल सोफे पर रखी। 

मिरर के सामने जाकर फिर अपने बाल बनाने लगी।

डॉक्टर बख्श का दिल डगमगा रहा। 

उनका दिल कर रहा था के वो कंदील को जाकर अपनी बाहो मे समेट ले।

मगर इस वक्त कंदील का बिहेव उनके साथ ऐसा था ।

डॉक्टर बख्श की हिम्मत नही पड़ी आगे बढ़कर उसको बाहो मे लेने की।

कंदील ने बाल सवारने के बाद अपनी काली बड़ी खूबसूरत ऑखो मे काजल लगाया।

फिर अपने होठो को  लिपस्टिक से सजाया। 

इस वक्त कंदील के होठ का तिल लिपस्टिक लगाने की वजह से और जच रहा था।

बस इतने हथियार काफी थे डॉक्टर बख्श का कत्ल करने के लिए।

कंदील लिपस्टिक लगाने के बाद मिरर के सामने से हट गई। उसने पीछे मुड़कर देखा तो डॉक्टर बक्श उसी को देख रहे थे।

कुछ लम्हे के लिए  कंदील ने भी डॉक्टर बख्श की आंखों में देखा। 

न जाने डॉक्टर बख्श की आंखों में ऐसा क्या था।

कि कंदील ने अपनी नजरों को नीचे झुका 

लिया?

डॉक्टर बख्श आहिस्ता आहिस्ता चलते हुए कंदील के नजदीक आए ?

सुबह-सुबह इस तरह से घूर रहे हैं , जैसे अभी मुझे खा जाएंगे। 

कंदील अपने मुंह में बड़बड़ा रही थी।

डॉक्टर बख्श कंदील के बिल्कुल नजदीक आ चुके थे।

डॉक्टर बख्श ने कंदील को दोनों कंधों से पकड़ा।

उसको घूमा कर बिल्कुल अपने नजदीक कर लिया। 

कंदील के पीठ डॉक्टर बख्श के सीने को टच कर रही थी। कंदील इस आने वाली आफत से बिल्कुल अनजान थी। इसलिए डॉक्टर बख्श की हरकत से चौंक गई थी। 

यह क्या कर रहे हैं आप डॉक्टर बख्श? 

कंदील ने कहा।

कंदील मैं इस बात का यकीन कर रहा हूं, कि तुम मेरे पास हो।

मेरे दिल की धड़कन और सांसों की आवाज को महसूस कर सकती हो तुम।

डॉ बख्श का मुंह, कंदील के गीले बालों की तरफ था।

और उनकी गरम-गरम सासे कंदील के कानों में सरगोशियां कर रही थी।

डॉ बख्श आप। 

कंदील ने जैसे ही कुछ कहने के लिए अपना मुंह खोला।

डॉ बख्श ने अपनी उंगली कंदील के होठों पर रख दी।

वह नफरत करने लगी थी, डॉक्टर बख्श से मगर इस वक्त डॉक्टर बख्श की सांसे। 

कंदील को बेचैन कर रही थी।

कंदील तुम मेरे सब्र का इम्तिहान ले रही हो।

यह जो सुबह-सुबह तुमने  मुझे मेरे कंट्रोल से बाहर किया है। 

अब इसकी सजा तुम्हें भुगतान पड़ेगी कंदील। 

डॉ बख्श कंदील की गर्दन पर किस करने लगे थे। 

डॉक्टर बख्श प्लीज।

स्टॉप इट डॉक्टर बख्श। 

कंदील भी अपने होश खोने लगी थी।

वाय कंदील। 

क्यों रुकू मैं?

डॉ बख्श ने कहा।

डॉक्टर बख्श आई हेट यू, आई हेट यू वेरी मच।

कंदील बोली।

हालांकि इस वक्त कंदील के लफ्ज़ उसका साथ नहीं दे रहे थे। 

उसकी आवाज में कपकपाहट डॉक्टर बख्श को  साफ महसूस हो रही थी?

बिकॉज़ आई लव यू कंदील।

आई लव यू वेरी मच।

डॉक्टर बख्श की आवाज, कंदील को पिघला 

रही थी।

छोड़िए मुझे डॉक्टर बख्श।

कंदील डॉक्टर बख्श के आगे खुद को बेबस महसूस कर रही थी।

नहीं कंदील मेरा मन कर रहा है ,इस वक्त तुम्हें प्यार करने का।

डॉ बख्श ने कहा।

डॉक्टर बख्श का हाथ कंदील की कमर तक गया।

तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी। 

डॉक्टर बख्श ने उस दस्तक को इग्नोर किया।

मगर दरवाजे पर दस्तक देने वाला भी बहुत ढीट था।

बार-बार दरवाजा बजा रहा था।

ओह शिट ओह शिट डॉक्टर बख्श को इस वक्त किसी का दरवाजे पर दस्तक देना बहुत ही बुरा लग रहा था।

डॉक्टर बख्श का मूड खराब हो चुका था

वह गुस्से में दरवाजा को खोलने गए। 

जैसे ही डॉक्टर बख्श ने दरवाजा खोला। 

सामने अपनी मॉम को देखकर उनके चेहरे पर स्माइल आ गई।

इधर कंदील ने सुकून की सांस लि।

वह शुक्र करने लगी, इस शख्स ने आकर उसको बचा लिया था।

अरे मॉम आप अंदर आइए, डॉ बख्श ने अपनी मॉम का हाथ पड़कर उन्हें अंदर बुलाया। 

आपने खुद तकलीफ क्यों कि, आप किसी मुलाजिमा को भेज देती यहा पर?

डॉ बख्श बोले। 

नहीं बेटा मेरा मन कर रहा था ,तुम्हें और कंदील को साथ में देखने के लिए। 

इसलिए मैं यहां पर खुद आ गई।

कंदील ने उनको देखकर सलाम किया। 

उन्होंने कंदील के सलाम का जवाब दिया।

डॉक्टर बख्श ने उन्हें बैड पर बैठा दिया था।

कंदील बेटा इधर आओ।

उन्होंने कंदील को अपने पास बुलाया। 

कंदील उनके पास चली गई।

इधर बैठो मेरे पास, उन्होंने अपने पास कंदील को बिठाया।

उनकी एक साइड पर डॉक्टर बख्श बैठे हुए थे। 

और दूसरी साइड पर कंदील।

कंदील शायद तुम नहीं जानती यह दिन देखने के लिए मैंने कितने सालों से इंतजार किया है।

आज मैं तुम लोगों को एक साथ देख रही हूं तो मुझे बेइंतहा खुशी हो रही है।

कंदील ने देखा उसकी सास बेहद स्मार्ट थी। 

वह पैंट प्लाजो पर लॉन्ग कुर्ता पहने हुए थी। 

और स्टाइलिश चश्मा उनकी आंखों पर लगा हुआ था। 

वह देखने में बिल्कुल डॉक्टर बख्श की मॉम नहीं लगती थी।

कंदील बेटा अब मैं तुम दोनों को खुश देखना चाहती हूं हमेशा खुश रहना।

वो कंदील के सर पर हाथ फैर कर उसे दुआए देने लगी?

वैसे मॉम आपकी बहू अगर नहीं चाहती तो अभी भी विदाई नहीं होती। 

डॉक्टर बख्श कंदील को चिढ़ाते हुए बोले। 

क्या मतलब बेटा क्या कहना चाहते हो?

मॉम मैं यह कहना चाहता हूं, कि किसी मजबूरी के तहत   कन्दील ने इस विदाई के लिए अपने आगा जान को तैयार किया था।

डॉ बख्श ने कहा।

कैसी मजबूरी बेटा।

मॉम कंदील की तरफ देखते हुए बोली।

कंदील का हलक सूखने लगा।

उसे उम्मीद नहीं थी कि डॉक्टर बख्श, अपनी मॉम से इस तरह की बात बोल देंगे। 

डॉक्टर बख्श ने देखा कि कंदील का चेहरा इस वक्त ऐसा हो रहा था ।

जैसे वह बस अभी रो देगी। 

डॉक्टर बख्श को बहुत तेज हंसी आने लगी थी। 

क्योंकि वह सिर्फ कंदील को चढ़ाने के लिए बोल रहे थे?

अरे मॉम वह यह मजबूरी थी, कि आपकी बहू को भी मुझसे प्यार हो गया था ना, तो ये मुझसे दूर नहीं रह सकती थी।

इसलिए इसने आगा जान से विदाई के लिए जल्दी कहा। 

डॉक्टर बख्श  कंदील की तरफ देखकर  कह रहे थे।

कंदील ने सुकून का सांस लिया। 

क्योंकि वह यह सोच रही थी ,यह डॉक्टर बख्श अपनी मॉम को यह ना बता दे।

की कंदील प्रेग्नेंट है इसलिए उसने डॉक्टर बख्श से विदाई करने के लिए जल्दी कहा?

  मैं चाहती हूं बेटा कि तुम दोनों में एक दूसरे के लिए बेइंतहा प्यार और मोहब्बत रहे।

उन्होंने दोनों के सर पर हाथ फिरते हुए कहा।

ठीक है बेटा तुम फ्रेश होकर नीचे आ जाओ।

मैं कंदील को अपने साथ नीचे लेकर जाती हूं।

डॉक्टर बख्श की मॉम ने कहा। 

डॉक्टर बख्श ने हा में गर्दन को हिला दिया।

कंदील उनके साथ पीछे चलने लगी।

डॉ बख्श नहाने के लिए वॉशरूम में चले गए।



📖 IS KAHANI ME AAGE KYA HO SAKTA HAI? (STORY DIRECTION)

Is kahani me aage teen bade mod (turns) aa sakte hain:

1️⃣ Kandeel ka chhupa hua sach

Kandeel sirf majboori se shadi nahi kar rahi

Uske dil me darr bhi hai aur mohabbat bhi

Pregnancy ka sach kabhi na kabhi saamne aayega

Ye sach Doctor Bakhsh ke gusse aur zimmedari dono ko jaga dega

2️⃣ Doctor Bakhsh ka possessive pyaar

Unka pyaar sirf jazbaat nahi, thoda control bhi hai

Wo Kandeel se mohabbat karte hain, lekin use samajhna abhi baaki hai

Aage chal kar unhe apne rawaiye par khud sawal karna padega

3️⃣ Saas ka kirdaar

Doctor Bakhsh ki mom sirf side character nahi

Wo Kandeel ki dhal bhi ban sakti hain

Aur sach saamne aane par faisla bhi unhi ke haath me ho sakta hai

Kahani aage jaakar power vs care, love vs fear aur marriage vs choice ke beech khadi hogi.

🌱 IS KAHANI SE HAME KYA SIKH MILTI HAI?

Mohabbat sirf qareeb hone ka naam nahi

Izzat aur samajh hona bhi zaroori hota hai.

Majboori me liye gaye faisle der se sahi, sach ban kar ubharte hain

Shadi ke baad bhi ek aurat ka darr aur khamoshi samajhna zaroori hota hai

Pyaar jab zabardasti ban jaye, to wo mohabbat kam aur imtihaan zyada lagta hai

✨ NEXT SHORT PART (SHORT EPISODE)

🌸 A Soft Morning Downstairs

Neeche hall me chai ki khushboo phail chuki thi.

Kandeel chup chaap sofa ke kone me baithi thi.

Uski ungliyaan apni dupatta ke kinare ko masal rahi thi.

Doctor Bakhsh ki mom use gaur se dekh rahi thi.

“Beta… tum khush ho na?”

unhone achanak pooch liya.

Kandeel chaunk gayi.

Phir dheere se muskura kar sirf itna boli—

“Ji… koshish kar rahi hoon.”

Upar se bathroom ka darwaza khula.

Doctor Bakhsh neeche utarte hue ruk gaye.

Unki nazar seedhi Kandeel par jaa tiki.

Us ek pal me…

sirf mohabbat nahi, zimmedari bhi thi.

💌 READERS KE LIYE SHUKRIYA MESSAGE

Thank you for reading this story with patience and depth.

Your time, your emotions, and your connection give life to these characters.

Every reader who feels this story becomes a silent part of it.


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