“अजनबी हमसफ़र: जबरन रिश्ते में पनपती खामोश मोहब्बत”
Sach hua doctor saif haroon bakh ka khoab
आज डॉक्टर बख्श की सालों पुरानी ख्वाहिश पूरी हो रही थी।
कंदील विदा होकर उनके साथ जा रही थी।
और डॉक्टर बख्श बेइंतहा खुश थे।
क्योंकि इस पल का उन्होंने बेसब्री से इंतजार किया था?
कंदील को डॉक्टर बख्श के साथ स्टेज पर लाकर बैठाया गया।
तो डॉक्टर बख्श कंदील को देखकर चौंक गए।
कंदील इस वक्त बेहद खूबसूरत नजर आ रही थी।
खूबसूरत तो वो पहले से ही थी।
लेकिन इस वक्त वह किसी अप्सरा से काम नहीं लग रही थी।
हसीन तो डॉक्टर बख्श भी बेइंतहा लग रहे थे।
उन्होंने स्काई ब्लू कलर की शेरवानी पहन रखी थी।
और शेरवानी से मैचिंग पगड़ी उनके सर पर थी।
डॉक्टर बख्श की पर्सनालिटी ऐसी थी।
जिस पर किसी भी टाइप के कपड़े पहनते तो अच्छे लगते थे।
उनका बड़ा हुआ शेव उनकी पर्सनालिटी को और दिलकश बना रहा था।
डॉक्टर बख्श कुछ लम्हे के लिए कंदील को बिना पलक झपकाए देखते ही रहे।
कंदील ने भी एक लम्हे को नजरे मिलाकर डॉक्टर बख्श की तरफ देखा।
और दूसरे ही लम्हे अपनी नजरों को फेर लिया।
डॉ बख्श ने नोट किया के कंदील की आंखों में एक अजनबी पन था,डॉक्टर बख्श के लिए।
डॉक्टर बक्श ने अपने सर को झटका और कंदील की तरफ से नजरों को हटा लिया।
आज हवेली को दुल्हन की तरह सजाया गया था।
हर चीज पर बहुत ही ज्यादा ध्यान दिया गया था।
हवेली के हर शख्स के फेस पर खुशी भी दिखाई पड़ रही थी।
कंदील ने नोट किया के आगा जान भी पुरसुकून और खुश नजर आ रहे थे।
कंदील को छोड़कर सारे लोग काफी खुश नजर आ रहे थे।
डॉक्टर बख्श के तो चेहरे से जाहिर हो रहा था ।
कि उनकी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था।
सारी जरूरी रसों के बाद कंदील की विदाई हो गई।
आगा जान ने उसे विदा करके उसके सर पर हाथ रखा।
और कार का दरवाजा खोलकर उसे कार के अंदर बैठाया।
डॉ बख्श पहले ही उस कर में मौजूद थे।
सुनो सैफ हारून बख्श।
मेरी बेटी कंदील का ख्याल रखना।
आगा जान की,रौबदार आवाज मे इस वक्त बहुत मिन्नते लग रही थी।
वो इस लहजे में डॉक्टर बख्श से कह रहे थे।
आगा जान फिक्र मत कीजिए आप।
मैं अपनी जान से ज्यादा संभाल कर कंदील का ख्याल रखूंगा।
डॉक्टर बख्श ने एक नजर कंदील फिर दोबारा आगा जान की तरफ देखते हुए कहा।
हा बारखुरदार मुझे तुम तुमसे यही उम्मीद है।
आगा जान ने कहा।
कंदील ने आगा जान के हाथ को पड़कर अपनी आंखों से लगा लिया।
इस वक्त कंदील को अपने वालिद और वालिदा याद आ रहे थे।
उसकी आंखें नम होने लगी।
बेटा अपना ख्याल रखना।
आगा जान ने कंदील से कहा।
कंदील ने अपने गर्दन को हां में हिला दिया।
तभी ड्राइवर ने गाड़ी चला दी।
कंदील कार के गेट से मुह बाहर निकाल कर देखने लगी।
आगा जान और बाकी के सारे लोग उसे नजर आ रहे थे। आज यह हवेली उसे अजनबी लग रही थी।
एक कतरा आंसू का कंदील की आंख से नीचे गिर गया। कंदील ने अपने सर को अंदर किया।
और गाड़ी से टेक लगाकर आंखें बंद करके बैठ गई।
डॉक्टर बख्श ने कंदील की तरफ देखा उन्हें महसूस हुआ कि कंदील रो रही है।
आर यू ओके।
डॉक्टर बख्श ने कंदील से कहा।
हां, कंदील ने हा में गर्दन को हिला दिया।
फिर सारे रास्ते दोनों में कोई बात नहीं हुई।
दोनों एक दूसरे के बिल्कुल नजदीक बैठे थे।
लेकिन दो अजनबियों की तरह।
कंदील मैं कोशिश करूंगा, कि आने वाले टाइम में तुम्हें मेरी तरफ से कोई तकलीफ ना उठानी पड़े।
मेरी जात से तुम्हें कोई परेशानी ना हो।
डॉक्टर बख्श अपने दिल में सोच रहे थे।
अब तो यह सफर जिंदगी का सफर हो गया है ।
जो हम सफर है वह साथ होने के बाद भी, साथ नहीं है। अजनबी है वह बड़ी अजीब सी बात है ना।
जो हमसफर है मेरा उससे नफरत करती हूं मै।
कंदील अपने दिल में यह बात सोच रही थी।
दोनों की सोच एक दूसरे से मुख्तलिफ थी।
दोनों ही एक दूसरे की सोच को नहीं समझ सकते थे।
जब वह कमरे में दाखिल हुए तो उन्होंने देखा।
कंदील बैड से टेक लगाकर खुद से बेखबर नींद की वीदियो में खो चुकी थी।
डॉक्टर बख्श ने दरवाजा बंद किया।
और कंदील की तरफ आने लगे।
वह इतनी बेखबर सो चुकी थी, कि दरवाजा बंद करने की आवाज पर भी उसकी आंख नहीं खुली।
डॉक्टर बख्श कुछ लम्हों के लिए उसे यूं ही देखते रहे।
इस वक्त कंदील किसी बच्चे की तरह बेखबर होकर सो रही थी।
कंदील के दुपट्टे के पल्लू से उसका थोड़ा सा चेहरा छुपा हुआ था।
डॉक्टर बख्श कंदील के नजदीक आए
डॉक्टर बख्श ने बहुत आहिस्ता से वह पल्लू कंदील के चेहरे पर से हटाया ,और उसको देखने लगे।
कंदील तुम फिर मेरे सब्र का इम्तिहान ले रही हो।
इस वक्त तुम्हें सोना नहीं चाहिए था।
डॉ बख्श ने यह लफ्ज बहुत आहिस्ता से कहे थे।
फिर डॉक्टर बॉक्स कंदील को यूं ही छोड़कर वॉशरूम में चले गए।
कुछ टाइम बाद जब डॉक्टर बख्श वॉशरूम से बाहर आए। तब भी कंदील इस पोजीशन में सो रही थी।
ओहहहहहहह डॉ बक्श ने एक गहरी सास भरी।
डॉ बक्श आहिस्ता आहिस्ता कदम उठाते हुए कंदील के पास गए।
कंदील ,कंदील उठो।
डॉ बख्श ने आहिस्ता से कंदील के कंधे को झिंझोड़ा
आहहहहह क्या हुआ डॉक्टर बख्श?
कंदील हडबड़ाते हुए बोली।
डॉक्टर बख्श को उसके इस तरह से उठने पर हंसी आ गई।
तुम्हें नहीं पता कंदील की हमारी शादी हुई है।
और तुम इस तरह से सो रही हो।
डॉक्टर बख्श ने कहा।
पता ही नहीं चला कब नींद आ गई?
कंदील ने कहा।
अब अगर तुम उठ गई हो तो हम बाकी का काम पूरा कर लेते हैं।
डॉक्टर बख्श उसकी आंखों में शरारत से देखने लगे।
क कौन सा काम डॉक्टर बख्श? कंदील आंखें बड़ी करते हुए बोली।
क्या कन्दील तुम्हें हर बात लेक्चर देकर समझानी पड़ती है? इतनी बेवकूफ क्यों हो तुम?
डॉ बक्श ने कहा।
कंदील ने डॉक्टर बख्श की आंखों में देखा।
न जाने क्या था इस वक्त डॉक्टर बख्श की आंखों में? कंदील ने अपनी नजरों को नीचे झुका लिया।
डॉक्टर बख्श के हाथ कंदील के नेकलेस पर गए।
डॉक्टर बख्श क्या कर रहे हैं आप?
कंदील ने कहा।
इशशशशशश डॉ बख्श ने कन्दील के होठों पर उंगली रखते हुए कहा।
कंदील खामोश हो गई ,और आंखें फाड़ का डॉक्टर बख्श को देखने लगी।
डॉक्टर बख्श ने उसका नेकलेस उतार कर बैड के साइड वाली मेज पर रखा।
फिर बारी-बारी कानों के दोनों झुमके को उतारा।
डॉक्टर बख्श आप क्या कर रहे हैं?
कंदील ने दोबारा डॉक्टर बख्श से पूछा।
तुम खामोश होकर नहीं बैठ सकती ना कंदील।
डॉ बख्श ने कहा।
फिर डॉक्टर बख्श ने कंदील का भारी भरकम दुपट्टा उसके सर पर से उतारा।
हाऊ डेयर यू डॉक्टर बख्श।
इस बार कंदील को गुस्सा आ गया था।
डॉक्टर बख्श ने अपने होठों से कंदील के होठों को मिला दिया।
जिससे कंदील की आवाज वही बंद हो गई।
उन दोनों की नोज आपस में टकराने लगी।
इस वक्त कंदील की दिल की धड़कन बहुत तेज तेज धड़क रही थी।
डॉक्टर बख्श कंदील से अलग हो गए।
इतनी तेज धड़क रही है तुम्हारे दिल की धड़कन है।
तुम जानती हो ना तुम प्रेग्नेंट हो ,और इस वक्त में तुम्हें इतना कुछ निगेटिव नही सोचना चाहिए कि तुम्हारे दिल की धड़कनें बहुत तेज से धड़कने लगे।
डॉक्टर बख्श उसकी तरफ देखकर, उसके हाथों से उसके कंगन उतारते हुए बोले।
डॉ बख्श ने कंदील के सारे जेबर बैड के साइड वाली मेज पर रख दिए थे।
और वह, वहा से दूध का गिलास उठा कर ले आए।
यह लो जल्दी से इसको फिनिश करो।
डॉ बख्श ने वह गिलास कंदील को देते हुए कहा।
जी नहीं डॉक्टर बख्श मैं दूध नहीं पीती हूं।
कंदील ने अपना मुंह दूसरी तरफ फेरते हुए कहा।
मैं जानता हूं तुम दूध नहीं पीती हो लेकिन इस वक्त यह तुम्हारे लिए बेहद जरूरी है।
खास कर के तुम्हारे बेबी के लिए, डॉक्टर बख्श ने लफ्ज बेबी पर जोर देते हुए कहा।
ऐसा लगता है कितनी फिक्र है इनको मेरी।
कंदील ने दिल में सोचते हुए डॉक्टर बख्श के हाथ से दूध का गिलास ले लिया।
और एक ही सास मे दूध को पी लिया।
ओहहहहो इलललल कितना गन्दा टेस्ट है इसका
कंदील ने ऊबकाई लेते हुए कहा।
फिर डॉक्टर बख्श सामने वाले दराज में से एक पॉलिथीन बैग लेकर आए।
उन्होंने वह बैक कंदील के हाथ में देते हुए कहा।
इसमें आयरन और विटामिन की गोलियां है।
इस वक्त वह भी तुम्हारे लिए बहुत जरूरी है।
कंदील ने बिना कुछ कहे, वह पॉलिथीन बैग डॉ बख्श के हाथ से ले लिया।
कंदील ने दवाई भी खाली।
जाओ और वॉशरूम में जाकर अपने कपड़े चेंज करो।
यह बहुत हैवी कपड़े हैं तुम्हारे, और आई एम श्योर 100% की इनको पहन कर तुम्हें नींद नहीं आएगी।
मैंने आधी हेल्प कर दी है तुम्हारी ,तुम्हारे जेबर उतरकर।
डॉ बख्श कहा।
इस वक्त वह कंदील के सामने किसी फरमाबरदार शौहर का रोल निभा रहे थे।
कंदील भी उनकी बात को किसी फरमाबरदार बीबी की तरहा मान रही थी।
कंदील बिना कुछ बोले वॉशरूम में चली गई।
कुछ टाइम बाद कंदील वॉशरूम से बाहर आई तो डॉक्टर बख्श सोफे पर बैठकर अपने जूते उतार रहे थे।
कंदील ने स्काई ब्लू कलर का नाइट सूट पहन रखा था।
एक लम्हे के लिए डॉक्टर बख्श ने कंदील की तरफ देखा। कंदील ने भी डॉक्टर बख्श की तरफ देखा।
कुछ लम्हे दोनों की आंखें चार हुई।
फिर डॉक्टर बख्श की निगाह अपने जूते पर चली गई।
और कंदील भी इधर-उधर देखने लगी।
अपने जूते उतार का डॉक्टर बख्श सोफे पर लेट गए।
आराम से बेड पर लेट जाओ।
चाहो तो साइड वाली लाइट ऑफ कर देना।
और अगर दिल करे तो खुला रखना।
डॉ बख्श ने कहकर करवट बदलकर अपना मुंह दूसरी साइट पर कर लिया।
कंदील को बहुत तहज्जुब हो रहा था ।
डॉक्टर बख्श के बिहेव से वह तो सोच रही थी ।
कि डॉक्टर बख्श उसके साथ, फिर से जबरदस्ती करेंगे। लेकिन इस वक्त जो डॉक्टर बख्श उसके सामने थे।
वह बिल्कुल मुख्तलिफ थे।
कंदील बैड पर लेट गई।
और उसने साइड वाली लाइट ऑफ कर दी।
इस तरह से बीहेव करने का क्या मकसद हो सकता है? आखिर डॉक्टर बख्श के दिमाग में चल क्या रहा है?
यही कुछ सोचते सोचते कंदील कब नींद की आगोश में चली गई उसे पता ही नहीं चला?
🔹 इस कहानी में आगे क्या हो सकता है?
आगे कहानी में:
कंदील धीरे-धीरे डॉक्टर बख्श के बदले हुए व्यवहार को नोटिस करेगी
डॉक्टर बख्श की जबरदस्ती नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सब्र सामने आएगा
कंदील के दिल में डर और नफरत के साथ-साथ कन्फ्यूज़न पैदा होगा
अतीत के राज (कंदील की प्रेग्नेंसी और शादी की मजबूरी) खुलेंगे
यह रिश्ता नफरत से समझ और फिर शायद मोहब्बत की तरफ बढ़ेगा
आगा जान के फैसलों पर सवाल उठेंगे
🔹 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
सीख:
हर रिश्ता जबरदस्ती से शुरू हो सकता है, लेकिन उसे निभाने के लिए सब्र और समझ चाहिए
औरत की खामोशी उसकी रज़ामंदी नहीं होती
मोहब्बत हक जमाने से नहीं, एहसास देने से पैदा होती है
जिम्मेदारी, सम्मान और संयम रिश्ते को बचा सकते हैं
🔹 Next Short Part (छोटा अगला पार्ट)
अगला हिस्सा:
सुबह की हल्की रोशनी कमरे में दाखिल हो चुकी थी।
कंदील की आंख खुली तो उसने खुद को अकेला पाया।
सोफे पर पड़ी सिलवटें गवाही दे रही थीं कि डॉक्टर बख्श सारी रात वहीं सोए थे।
उसके दिल में एक अजीब सा एहसास उठा—
डर नहीं…
हैरानी नहीं…
बल्कि एक अनकहा सुकून।
कंदील ने पहली बार सोचा—
“क्या हर ज़बरदस्ती करने वाला मर्द आख़िरकार ज़ालिम ही होता है?”
और उसी सवाल के साथ
इस रिश्ते की नई सुबह ने जन्म लिया…
🔹 Readers के लिए शुक्रिया मैसेज
शुक्रिया प्यारे पाठको 🌸
आपका प्यार, सब्र और कहानी से जुड़ाव ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।
अगर यह कहानी आपके दिल को छू रही है,
तो समझिए यह सफ़र अधूरा नहीं जाएगा।
दुआओं में याद रखिए,
अगला हिस्सा बहुत जल्द… 🤍
https://www.indiapulsedaily.com/2026/01/the-frozen-lake-quiet-friendship.html
https://timespeakestruth.blogspot.com/2025/12/tata-harrier-safari-petrol-launch-2025.html




Comments
Post a Comment