Jab Mohabbat Ik Qaid Ban Jaye — Zille Huma Ki Kahani

 




Hashim ke sawal

आगा जान कहा है।

 जिल्ले हुमा। 

बताइए आपने किसके जरिये से जिल्ले हुमा को अगवा करवाया है।

मै उस शख्स की जान ले लूंगा, जिसने छुआ होगा जिल्ले हुमा को

हाशिम की गुस्से की वजह से आंखे लाल थी।

और पहली मर्तबा वह इस लहजे में आगा जान  के सामने उनसे बात कर रहा था।

यह वही हाशिम था ,जिसने आगा जान से कभी नजर मिलाकर बात नहीं की थी।

और आज वह इस तरह से उन पर चीख रहा था।

हाशिम क्या बदतमीजी है यह होश में तो हो तुम?

इस तरह से मुझसे बात कर रहे हो।

आगा जान को यकीन नही हो रहा था के हाशिम उनसे इस तरह बात कर रहा था।

हां आगा जान मैं पूरी तरह होश में हूं।

और मैं जानता हूं कि आपसे किस तरह से बात कर रहा हूं। 

बस हर दौर  में आपके ही भूल जाते हैं ,के  इंसान को अपनी हद पार नहीं करना चाहिए।

हाशिम ने कहा।

मुझे अपने खास आदमी से ये पता चला है।

कि आपने जिल्ले हुमा को अगवा करवा दिया है।

हाशिम बोला।

आगा जान को इस वक्त हाशिम में  24 साल पुराने जफर साहब नजर आ रहे थे।

हां मैं मानता हूं इस बात को, कि मैंने जिल्ले हुमा को अगवा करवाया है।

क्योंकि मैं नहीं चाहता, कि उस अदना सी मुलाजिमा के  साथ  तुम्हारी नजदीकियां बड़े?

आगा जान अपनी पुश्तैनी कुर्सी पर बैठे थे। 

गुस्से की वजह से उनके माथे पर बल पड़े हुए थे

आगा जान वार्निंग देता हूं मैं आपको।

अगर उस लड़की को कुछ हुआ ना।

हाशिम इस वक्त बागी हो गया था।

तो, क्या कर लोगे हाशिम तुम?

आगा जान ने कहा।

यह तो मैं वक्त आने पर बताऊंगा, अगा जान बस आप दुआ करते रहिए।

कि आपके आदमी जिल्ले हुमा को कुछ नुकसान ना पहुंचाएं।

हाशिम की आंखों में खून उतर आया था।

हाशिम तुम एक मुलाजिमा के लिए अपने आगा जान से बगावत कर रहे हो।

आगा जान अपनी छड़ी को जमीन पर टेकते  हुए अपनी कुर्सी से खड़े हुए।

आगा जान उसकी हैसियत से मुझे कोई मतलब नहीं है।

मगर वह मेरी अना और जिद बन गई है।

हाशिम ने कहा।

हाशिम तुम एक मुलाजिमा के लिए अपने आगे जान से बहस कर रहे हो।

  उसकी हैसियत क्या है इतनी बड़ी हवेली के  तुम मालिक हो उसकी वह नौकर है?।

आगा जान बोले।

हैसियत तो आपकी भी हर दौर में बदल जाती है।

आगा जान।

आपको तो अपने बच्चों की भी कभी परवाह नहीं रही।

आगा जान।

आपकी वजह से जफर चाचा की दोनों बीवियां मर गई ।

और जफर चाचा खुद भी मर गए।

उनकी दोनों बच्चियों को अपने यतीम कर दिया ।

आगा जान, कैसे भूल गए हैं आप?

और  अपनी हरकत दोहराने के लिए, अपने कंदील से धोखे से डायवर्स पेपर्स पर साइन करवाए।

यह जानते हुए भी के डॉक्टर बख्श और कंदील की नजदीकियां बढ़ गई है। 

कंदील को डॉक्टर बख्श का साथ अच्छे लगने लगा था। आपकी कंदील पर हर तरह से नजर रहती थी ।

आप हर बात से वाकिफ थे।

फिर भी आपने ऐसा किया।

  वह कंदील के साईन किये हुए पेपर्स डॉक्टर बख्श को भेज दिए। 

ताकि कंदील और डॉक्टर बख्श फिर से अलग हो जाए। 

मगर आगा जान  अपनी जिंदगी में, मैं आपकी दखलअंदाजी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करूंगा।

यह मेरी जिंदगी है, और इसे जीने का मुझे पूरा हक है ।

मैं नहीं चाहता हूं ,कोई भी मेरी जिंदगी में दखलअंदाजी करें। 

समझ गए आप हाशिम कहता हुआ, उनके रूम से बाहर चला गया। 

और आगा जान हैरानी और गुस्से के मिलेजुले तासूरात के साथ, हाशिम को बाहर जाता हुआ देख रहे थे।

आगा जान तो कभी ख्वाब में भी यह बात नहीं सोच सकते थे।

कि उनका हाशिम जिससे वह बेपनाह चाहते हैं ।

वह उनसे इस तरह से बात करेगा।

आगा जान की बेइज्जती करेगी।

आगा जान बहुत गुस्से में अपने कमरे से इधर-उधर टहलने लगे।


फ्लैशबैक। 


जब हाशिम जिल्ले हुमा के क्वार्टर की तरफ आया था। 

उस वक्त  आगा जान का एक खास आदमी सारे क्वार्टर्स पर नजर रखे हुए था।

ये उस मुलाजिम का रोज का काम था। 

आगा जान ने उसको अपने सारे मुलाजिमो के क्वार्टर पर नजर रखने के लिए कहा था।

हाशिम को देखकर वह छुप गया था।

उसने देखा कि हाशिम जिल्ले हुमा के कमरे में गया था।

नहङ और कुछ देर उससे बात कर रहा था।

उसके बाद उसके क्वार्टर  का दरवाजा बंद हो गया। 

उस मुलाजिम ने यह खबर आगा जान को दी।

आगा जान ने हुक्म सुनाया  वहीं रुक कर हाशिम पर नजर रखी जाए।

सारी रात वह मुलाजिम हाशिम पर नजर रखे रहा।

सुबह होते ही।

जैसे ही हाशिम जिल्ले हुमा के क्वार्टर से बाहर निकाला। उसने आगा जान को फिर से खबर दी।

तब आगा जान ने कहा।

  अपने कुछ आदमियों को साथ ले जाकर?

उस जिल्ले हुमा को अगवा करके, गांव वाले फार्म हाउस पर ले जाओ। 

और ध्यान रखना, जिल्ले हुमा को किसी तरह की कोई तकलीफ ना उठाना पड़े।

आगा जान के मुलाजिमे ने उसके हुकुम की तावेदारी की और जिल्ले हुमा को उठाकर।

वहां से ले गए।

गांव वाले फार्म हाउस पर। 

फ्लैश बैक खत्म। 



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जिल्ले हुमा को जब होश आया।

तो वो एक बहुत ही शानदार रूम में , बेड पर लेटी हुई थी। इस रूम को देखकर अन्दाजा लगाया जा सकता था।

कि इसकी सजावट में काफी पैसा खर्च किया गया होगा। रूम में चारों तरफ खिड़कियां लगी हुई थी।

जिन पर पर्दे पड़े हुए थे। 

और दरवाजा बंद था।

जिल्ले हुमा अपने सर को पकड़ते हुए,  बेड पर बैठी हो गई क्योकी उसे चक्कर आ रहे थे। 

कहां हूं मैं? 

जिल्ले हुमा सोचने लगी।

सुबह जब उसकी आंख खुली थी, तो हाशिम वहां मौजूद नहीं था।

मगर दरवाजा खुला हुआ था ,वह दरवाजे को बंद करने के लिए जैसे ही आगे बढ़ी।

उसे महसूस हुआ कि किसी ने उसके मुंह पर कोई रुमाल जैसी चीज रखी है।

और फिर जिल्ले हुमा की आंखें बंद हो गई।

और अब जब उसकी आंखें खुली थी।

तो वो एक नई जगह और नए रुम में थी।

उसकी समझ में नहीं आ रहा था किसने किया था, उसके साथ ऐसा।

वह खुद को संभालती हुई बेड से नीचे उतरी।

क्योंकि अभी भी उसे चक्कर आ रहे थे? 

और दरवाजे के पास जाकर उसने दरवाजे को बजाना शुरू किया। 

दरवाजा खोलो कोई है दरवाजा खोलो।

जिल्ले हुमा तेज तेज चीख रही थी।

लेकिन उसकी बात का कोई जवाब ही नहीं दे रहा था। 

रूम मे चारों तरफ खिड़कियां थी ।

जिल्ले हुम ने उससे बाहर देखने की कोशिश की लेकिन उसे कोई दिखाई नहीं पड़ा।

क्योंकि दरवाजे के बैक साइड से खिड़कियों पर पर्दे पड़े हुए थे?

सारी कोशिश करने के बाद जिल्ले हुमा वापस बैड पर आकर बैठ गई।

वह सोचने लगी कि किस तरह से इस रूम से बाहर जाए वो।

तभी दरवाजा खुलने की आवाज आई हुमा ने दरवाजे की तरफ देखा। 

दो लम्बे चौड़े आदमी थे सामने ,जिल्ले हुमा उन्हे देखकर बैड पर पीछे खिसकने लगी।

क्योकि जिल्ले हुमा को उनसे डर लग रहा था।

यार ये तो बहुत खूबसूरत चिड़िया है।

तूने तो कहा था मुलाजिमा है ये तो किसी शहजादी से कम नही लगती है।

उन दोनों आदमीयो में से एक आदमी कह रहा था। 

और हंसता हुआ जिल्ले हुमा की तरफ देख रहा था। 

इस वक्त जिल्ले हुम का मुंह खुला हुआ था।

उसने अपने दुपट्टा तलाश  करने कोशिश की लेकिन उसका दुपट्टा कहीं भी नहीं था।

ओए ज्यादा बकवास करने की जरूरत नही है। 

नवाब साहब ने कहा है ,इसको कोई नुकसान ना पहुंचे ये बहुत खास है उनके लिए। 

वह दूसरे आदमी ने उस आदमी को समझाते हुए कहा।

अरे यार हम इसे नुकसान कहां पहुंचना  रहे हैं ।

नवाब साहब को कैसे पता चलेगा कि हमने इसके साथ कुछ किया है?

वह लालच भरी नजरों से जिल्ले हुमा की तरफ देखता हुआ बोला।

नवाब साहब मतलब नवाब साहब ने मुझे अगवा करवाया है।

जिल्ले हुमा सोचने लगी।

ओए ज्यादा पागल मत बन ,चल यहां से।

वह आदमी दूसरे आदमी को खींचता हुआ रूम से बाहर ले गया।

जिल्ले हुमा  बहुत तेज बेड से नीचे उतरी। 

और उसने दरवाजे को लॉक कर दिया।

दरवाजे से टेक लगाकर, सुकून का  सांस लिया।

नवाब साहब ने ऐसा क्यों करवाया है मेरे साथ?

आखिर वह क्या चाहते हैं मुझसे?

जिल्ले हुमान सोचने लगी थी।


आखिर क्यो आगा जान जिल्ले हुमा की जिन्दगी मे अपना दखल देते है।

क्या सच्चाई है जिल्ले हुमा की जानने के लिए पढ़ते रहिए। 



                             कंदील



🔹 अगला हिस्सा — वो सवाल जो किसी ने नहीं पूछा

ज़िल्ले हुमा बिस्तर पर बैठी थी,
दरवाज़े से टेक लगाए हुए।

उसके दिल की धड़कन
उसके ख़यालों से कहीं ज़्यादा तेज़ थी।

“आगा जान ने ऐसा क्यों किया?”
“आख़िर मुझसे चाहते क्या हैं?”

उसने एक बार फिर कमरे को देखा।

ये सज़ा का कमरा नहीं था।
ये एक क़ैद थी —
जो आराम और सहूलियतों में लपेट दी गई थी।

खिड़की के पर्दे
हल्की हवा से हिल रहे थे।

ज़िल्ले हुमा ने
धीमी आवाज़ में कहा—

“अगर मुझे तोड़ना ही है…
तो फिर इतनी हिफ़ाज़त क्यों?”

अचानक बाहर क़दमों की आहट रुकी।

दरवाज़े के उस पार से
एक जानी-पहचानी आवाज़ आई—

“तुम महफ़ूज़ हो, ज़िल्ले हुमा…
मगर हिफ़ाज़त की भी
एक क़ीमत होती है।”

उसके हाथ काँप गए।

उसी लम्हे
उसे सब समझ आ गया—

ये सिर्फ़ अग़वा नहीं था।
ये एक इम्तिहान था।

और वो
किसी और की जंग के
बीच खड़ी थी।


🔹 रिडर्स के लिए

प्यारे पाठको,

दिल से शुक्रिया
कि आपने ये कहानी पढ़ी।

ये कहानी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में
पढ़ी जा रही है।
कृपया कमेंट्स में ज़रूर बताइए
कि आप किस देश से ये कहानी पढ़ रहे हैं।

अगर ये कहानी
आपके दिल को छू गई हो,
तो इसे अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करें

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मुझे आगे लिखते रहने का
हौसला देते हैं 🙂😊

शुक्रिया — दिल से।






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