जिल्ले हुमा और हाशिम | जब एक सपना हक़ीक़त बन गया | भावनात्मक निकाह रात की कहानी
Zille huma mutmain
जिल्ले हुमा को यकीन नहीं हो रहा था।
कि उसकी शादी ऐसे शख्स से हो गई है जो उसके लिए सिर्फ एक ख्वाब की तरह था।
वह जो जिसके बारे में पहली बार देखकर हुमा ने सोचा था कि काश वो शख्स उसका हो जाए।
और शायद यह उसकी दुआ की मकबूलियत का वक्त था, जिल्ले हुमा की दुआ कबूल हो गई थी।
हाशिम उसका हो गया था?
लेकिन उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था ,कि यह सच है।
वह हाशिम के कमरे में चलते हुए बहुत गौर से हर चीज को देख रही थी।
कल तक यह कमरा और यह सारी चीज सब उसके लिए अंजनी थी।
लेकिन आज एक शख्स के अपना बनाने से, यह सारी चीजे, और वह सारे लोग जिल्ले हुमा के अपने हो गए थे।
जो पहले से ही जिल्ले हुमा के थे।
लेकिन अगर यह शख्स ना होता, तो जिल्ले हुमा को कभी सच्चाई का पता नहीं चलता।
ना हवेली के किसी भी शख्स को सच्चाई का
पता चलता।
अभी वह यही सोच रही थी कि दरवाजा खोलने की, और फिर बंद होने की आवाज आई।
उसने आवाज पर पीछे पलट कर देखा।
तो हाशिम उसको देखकर मुस्कुरा रहा था।
व्हाइट कलर के प्लेन सिंपल से कुर्ते पजामे में, हाशिम की शख्सियत और ज्यादा उम्दा लग रही थी।
जिल्ले हुमा ने हाशिम की तरफ देखा और फिर अपनी नजरों को नीचे झुका दिया।
हाशिम मुस्कुरा कर चलता हुआ जिल्ले हुमा के नजदीक आ गया।
हाशिम ने उसके नजदीक आकर, अपने दोनों हाथों से जिल्ले हुमा को कंधों से पकड़ा।
बहुत ही प्यार से जल्ले हुमा को देखने लगा।
जिल्ले हुमा की निगाहें अभी भी नीचे थी।
जिल्ले हुमा का दिल बहुत जोर जोर से
धड़क रहा था।
शादी मुबारक हो जाने हाशिम।
हाशिम अपने मुंह को उसकी गाल के नजदीक लाकर बोला।
हाशिम की सरगोशियां से जिल्ले हुमा के अंदर बेचैनी ही होने लगी।
जिल्ले हुमा ने कोई जवाब नहीं दिया।
शर्म से उसके गाल लाल होने लगे।
बहुत प्यारी लग रही हो तुम।
और तुम पर यह पिंक कलर के कपड़े बहुत जच रहे हैं।
जिल्ले हुमा ने शरमाते हुए दोनों हाथ अपने चेहरे पर रख लिए।
ओह गॉड ओह नो यह फाऊल है।
मुझसे तुम अपना चेहरा छुपा रही हो।
हाशिम ने कहा।
हाशिम ने उसके दोनों हाथों को ,उसके चेहरे पर से हटाया।
और उसका हाथ पकड़ कर मिरर के सामने ले आया।
उसने मिरर के सामने जिल्ले हुमा को खड़ा किया।
और खुद उसके पीछे खड़ा हो गया।
सामने देखो जल्ले हुमा हाशिम ने उसके कंधे पर अपनी थोड़ी रखते हुए कहा।
जिल्ले हुमा ने सामने देखा।
हाशिम और वह दोनों साथ में बहुत ही अच्छे लग रहे थे।उनकी जोड़ी जच रही थी एक साथ।
आज चांद अपने पूरे आबो ताब पर चमक रहा कितना खूबसूरत लग रहा है।
हाशिम ने हल्के से जिल्ले हुमा के कान पर किस करते हुए कहा।
हाशिम की इस हरकत से जल्ले हुमा
खुद में सिमटने लगी।
और इस चांद ने मेरी जिंदगी को रोशनी से भर दिया है।
थैंक यू सो मच जाने हाशिम।
हाशिम ने कहा।
हाशिम साहब मैं हमेशा चांद को देखती थी ।
क्योंकि चांद देखना मुझे बहुत अच्छा लगता था?
लेकिन जब मैं उसको देखती थी, तो मुझे यह ख्याल आता था, की काश ये चांद मेरे पास होता।
फिर मैं अपने हाथों की लकीरों को देखती थी ।
जो मुझे यह कहती थी कि जिल्ले हुमा चांद तो आसमान का है ।
जो सारी दुनिया को रोशनी देता है वह तुम्हें कैसे मिल सकता है?
और फिर मैं मायूस हो जाती थी।
मगर हाशिम साहब आज।
जिल्ले हुमा बोलते बोलते खामोश हो गई थी।
बोलो ना जल्ले तुम क्या कहना चाह रही हो?
तुम्हारा बोलना मुझे बहुत अच्छा लगता है।
मैं सुनना चाहता हूं तुम्हें।
पहली बार जिल्ले हुमा ने हाशिम के सामने इतनी बातें की थी।
आज आप मेरे सामने है तो मुझे यकीन नहीं हो रहा है ।
क्या आप मेरे हो गए हैं?
उसने मिरर से सामने हाशिम की तरफ
देखते हुए कहां?
हाशिम ने कंधों से पढ़ते हुए जल्ले हुमा को अपनी तरफ घुमाया।
उसकी बड़ी-बड़ी सुनहरी आंखें काजल और आईलाइनर्स की खूबसूरती से और ज्यादा दिलकश लग रही थी।
उसकी सुनहरे बालों की लड़े उसके दुपट्टे के बाहर उसके मुंह पर आ रही थी।
जिससे वह और ज्यादा दिलकश लग रही थी।
यकीन कर लो जल्ले हुमा मैं तुम्हारा हो चुका हूं।
हाशिम ने जिल्ले हुमा के गाल पर किस करते हुए कहा। उसकी इस हरकत पर जिल्ले हुमा ने आंखें बड़ा करते हुए उसकी तरफ देखा।
क्या हुआ डियर कोई प्रॉब्लम है?
हाशिम ने आंख मारते हुए जिल्ले हुमा से कहा।
जिल्ले हुमा ने शरमाते हुए अपने सर को हाशिम के सीने में छुपा लिया।
हाशिम ने भी उसे अपनी बाहों में भर लिया।
वह अपने एक हाथ से जिल्ले हुमा के सर को थपक ने लगा।
जिल्ले हुमा बचपन से लेकर आज तक जितनी भी जास्ती तुम्हारे साथ हुई है।
उसके लिए मैं बहुत शर्मिंदा हूं।
तुम्हारे ही घर में तुम्हारे साथ मुलाजिमों वाला सुलूक किया गया।
लेकिन आज एक प्रॉमिस करता हूं, कि मेरी जात से या हवेली वाले किसी शख्स की जात से तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी।
मैं तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होने दूंगा।
हाशिम ने उसके बालों पर किस करते हुए कहा।
जिल्ले हुमा ने कुछ नहीं कहां वो खामोशी से उसके सीने में अपने सर को छुपाए हुए थी।
और उसे बहुत सुकून मिल रहा था?
हाशमी ने उसको अपनी गोद में उठाया।
और ले जाकर आहिस्ता से बेड पर बैठा दिया।
जिल्ले हुमा के लिए इस वक्त की सारे ही मूवमेंट बहुत ज्यादा स्पेशल थे।
हाशिम खुद भी बेड पर आरती बाल्टी मार कर जिल्ले हुमा के सामने बैठ गया।
जिल्ले हुमा जब पहली बार मैंने तुम्हें बारिश में भीगती हुए देखा था।
उस पल में, कहीं खो बैठा था मै कुछ खुद को।
तुम्हारा भोलापन, तुम्हारी पाकीजगी सब ने मुझे
अपना दिवाना बना लिया था।
तुम बेफिक्र होकर बारिश को इंजॉय कर रही थी।
और मैं हर उसे लम्हे में तुम्हें नोट कर रहा था।
बहुत दिलकश और स्पेशल लग रही थी।
तुम मुझे उस वक्त।
लेकिन जब अचानक हंसते हुए तुम रोने लगी।
तो तुम्हें रोता हुआ देखकर मैं परेशान हो गया।
मैं तुम्हारे रोने का सबक जानना चाहता था।
इसलिए मैं तुम्हारे नजदीक यही जानने के लिए आया था। लेकिन तुम उसे वक्त मुझसे बचकर निकल गई।
हाशिम उसके खूबसूरत हाथ को अपने हाथों में लिए हुए था।
फिर दूसरी बार जब मैं तुम्हें अपने रूम में लॉक किया था। उसे वक्त भी मैं तुमसे बात करना चाह रहा था।
लेकिन तुमने मेरे लॉक करने का गलत ही मतलब निकाल लिया।
मुझे उसे वक्त बहुत बुरा लगा था।
मन कर रहा था तुम्हारे मुंह पर दो थप्पड़ मार दू।
क्योंकि तुमने मुझे इतना घटिया हरकत करने वाला समझ लिया था?
माफ कर दीजिए हाशिम साहब ,मगर मैं उस वक्त डर गई थी।
जिल्ले हुमा ने इतनी मासूमियत से माफी मांगी थी।
के हाशिम को उस पर प्यार आने लगा।
माफ कर दिया सब कुछ माफ कर दिया।
हाशिम ने उसके हाथ को चूमते हुए कहा।
हाशिम जिल्ले हुमा की खूशबू से मदहोश हो रहा था।
क्या तुम मुझे हर चीज की ईजाजत देती हो?
हाशिम अपने मुंह को जिल्ले हुमा के मुंह के नजदीक लाते हुए बोलो।
जिल्ले हुमा ने शरमाते हुए अपने मुंह को नीचे झुका लिया।
देती हो ना इजाजत, हाशिम ने उसकी थोड़ी को ऊपर करते हुए कहा।
जिल्ले हुम ने हाशिम की आंखों में देखा।
अपनी गर्दन को उसने हा में हिला दिया।
आपको सब चीज की इजाजत है, जिल्ले हुमा समझ गई थी वो किस चीज की इजाजत मान्ग रहा था ?
थैंक्स हाशिम में मुस्कुरा कर उसके माथे पर किस कर लिया।
हाशिम ने अपने हाथ को लाइट ऑफ करने के लिए स्विच की तरफ बढ़ाया।
तो जिल्ले हुमा ने हाशिम का हाथ रोक लिया।
क्या हुआ लाइट ऑफ नहीं करूं क्या?
हाशिम उसके चेहरे के तास्सुरात को देख रहा था।
हुमा को देखकर अन्दाजा लगा सकता के उसे डर लग रहा था।
मुझे अंधेरे से डर लगता है हाशिम साहब।
जिल्ले हुमा ने अपने डर से हाशिम को आगाह करते हुए कहा।
हाशिम ने जिल्ले हुमा को अपने नजदीक करके कस के गले लगा लिया।
मैं हूं ना जिल्ले हुमा तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है। हाशिम उसके कानों में सरगोशी करने लगा।
हाशिम का इस तरह से आहिस्ता आहिस्ता बोलना जिल्ले हुमा को और बेचैन कर रहा था।
हाशिम ने हाथ बढ़ाकर लाइट के स्विच को ऑफ कर दिया।
और जिल्ले हुमा को कस कर अपनी बाहो मे भर लिया।
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✨ Next Short Part
जब डर की जगह भरोसा आया
कमरा शांत था।
सिर्फ़ दो दिलों की धड़कनों की आवाज़ थी।
जिल्ले हुमा ने हाशिम को कसकर पकड़ रखा था —
जैसे छोड़ दिया तो यह ख़्वाब टूट जाएगा।
हाशिम ने धीरे से कहा,
“आँखें बंद कर लो… मैं यहीं हूँ।”
जिल्ले हुमा ने आँखें बंद कर लीं।
पहली बार अँधेरा उसे डरावना नहीं लगा —
क्योंकि इस बार वह अकेली नहीं थी।
हाशिम ने उसका माथा अपने माथे से टिकाया।
“आज के बाद जो भी दर्द था… वो यहीं खत्म।
अब तुम्हारी हर आह, मेरी ज़िम्मेदारी है।”
जिल्ले हुमा की आँखों से आँसू निकल आए —
मगर ये आँसू डर के नहीं, सुकून के थे।
हवेली बाहर से ख़ामोश थी…
और अंदर, एक टूटा हुआ अतीत धीरे-धीरे भरने लगा।
💌 Readers के लिए संदेश
प्रिय पाठकों,
आप सभी का मेरी यह कहानी पढ़ने के लिए
दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद।
आप जिस भी देश से मेरी यह कहानी पढ़ रहे हैं,
उसके लिए मैं आपका तहे-दिल से आभारी हूँ।
कृपया इस कहानी को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ ज़रूर शेयर करें
और कमेंट में यह ज़रूर बताएं कि आप किस देश से पढ़ रहे हैं।
आपके कमेंट और शेयर से
मेरे अंदर और बेहतर लिखने का हौसला बढ़ता है।
शुक्रिया 😊
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