कंदील और डॉक्टर बख्श की नफरत | एक रिपोर्ट जिसने कंदील की ज़िंदगी बदल दी | Kandil Episode
kandeel ka khuf
कंदील को अभी भी बहुत वीकनेस महसूस हो रही थी।
और वह अस्पताल में आकर सुबह से आराम ही कर रही थी।
फिर कंदील बैड छोड़कर बाहर की तरफ आ गई ।
आखिर आराम भी वो कब तक कर सकती थी?
जैसे वह रूम से बाहर निकली।
उसे सामने से मिस्टर बख्श आते हुए दिखाई पड़े।
उनके को देखकर कंदील का मुंह बन गया।
वह आगे बड़ी डॉक्टर बख्श भी इस साइड पर आ रहे थे। कंदील को जैसे ही महसूस हुआ कि डॉक्टर बख्श
कंदील की तरफ आ रहे हैं।
कंदील ने अपना रास्ता बदल लिया।
जब डॉक्टर बख्श ने यह देखा कि कंदील दूसरी तरफ जाने लगी है।
तो उन्होंने कंदील को आवाज़ लगाई।
डॉक्टर कंदील जफर।
डॉ बक्श बोले।
कंदील उनकी आवाज सुनकर वहीं रुक गई ।
लेकिन उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
जितनी मैं इस शख्स से नफरत करती हूं ।
और चाहती हूं कि मुझे ना दिखाई पड़े।
उतनी ही यह वार्निंग देकर मेरे सामने आता है।
पता नहीं क्या चल रहा है इसके दिल में?
कंदील सोचने लगी उसको डॉक्टर बख्श का इस तरह से रोकना अच्छा नहीं लगा था।
डॉ बख्श उसके नजदीक आ चुके थे।
डॉ कंदील जफर आप दोबारा मीटिंग अटेंड करने के लिए क्यों नहीं आई?
डॉक्टर बख्श कंदील की नजदीक आते हुए बोले।
कंदील ने गुस्से भरी नजरों से डॉक्टर बख्श की तरफ देखा।
सर शायद आप अच्छी तरह से जानते हैं, कि सुबह में बेहोश हो गई थी।
और मैं आराम कर रही थी ,इसलिए दोबारा मैंने मीटिंग अटेंड नहीं की।
कंदील ने जवाब दिया।
ओके सुबह बेहोश हो गई थी, इसलिए आपको आराम के लिए भेज दिया गया था।
लेकिन अब आप मुझे पहले से बेहतर नजर आ रही है।
तो आपको दोबारा मीटिंग के लिए आ जाना चाहिए था। डॉक्टर बख्श ने बड़े रूड लहजे में कहां?
सर बहुत हिम्मत करके मैं बैड से उठी हूं ।
मुझे अभी भी बहुत वीकनेस महसूस हो रही है।
इसलिए मैंने सोचा अपने घर जाकर आराम करूंगी।
कंदील ने डॉक्टर बख्श से कहा।
मुझे तो आप इस वक्त आप बिल्कुल परफेक्ट नजर आ रही है।
कहीं से आपके फेस पर भी वीकनेस नहीं लग रही है।
बस यह बहाना होता है अपने काम से भगाने के लिए।
डॉ बख्श ने कहा।
डॉ बख्श आप कुछ ज्यादा ही बोल रहे हैं।
कंदील ने अपने माथे पर बाल डालते हुए कहा।
जी नहीं कन्दील मैं सच्चाई से आपको आगाह करा रहा हूं। डॉ बक्श बोले।
एनीवे मीटिंग की वीडियो मैंने आपके व्हाट्सएप पर सेंड कर दि उसको ध्यान से देख लीजिएगा।
डॉ बक्श ने कहा।
डॉ बख्श ने कंदील को गौर से देखा उसका चेहरा बहुत पीला लग रहा था ।
और वह देखने में कमजोर नजर आ रही थी।
अब कैसी है आपकी तबीयत डॉक्टर बख्श ने फॉर्मेलिटी के लिए पूछा।
जी बेहतर हूं अभी तो आपने कहा के बेहतर हूं ।
तो अब आपको बेहतर ही दिखाई नही पड़ रही हूं।
कंदील ने उल्टा जवाब दिया।
हां बेहतर ही रहे तो आपके लिए बेहतर है।
डॉक्टर बख्श ने भी कंदील के लहजे मे ही जवाब दिया उसे।
वैसे मेरे दुश्मनों ने चाहा था ,कि मैं बेहतर न रह सकूं।
मेरे दुश्मन ने इतनी गिरी हुई हरकत की थी मेरे साथ।
उसने सोचा कि मैं इस लायक हो जाऊं कि दोबारा खड़े होने के लायक न रह सकूं।
कंदील की आंखें लाल हो गई थी।
और वह गुस्से में डॉक्टर बख्श से कह रही थी।
hahahahahhaa
लेकिन आप में तो कंदील बहुत ज्यादा हिम्मत है।
फिर भी आप उस दुश्मन के सामने खड़ी है ।
आई लाइक दिस।
डॉ बख्श समझ चुके थे, कंदील उनके ही मुत्तालिक बात कर रही है।
डॉ बख्श ने अपनी गर्दन को ऊपर करते हुए कहा।
आप जानते हैं डॉक्टर बख्श के आपकी प्रॉब्लम क्या है? कंदील ने कहा।
नहीं डॉक्टर बख्श ने ना में गर्दन हिलाई।
आपकी प्रॉब्लम यह है कि आपको बर्दाश्त नहीं होता कि मैं खुश रहूं।
कंदील ने उन पर चोट करते हुए कहा।
जी नहीं कंदील जफर यह आपकी गलतफहमी है।
मैं क्यों ऐसा चाहूंगा मुझे आपसे क्या मतलब है?
डॉ बक्श तेज आवाज में बोले।
एक बात जान लीजिए डॉक्टर बख्श, दुनिया मे अगर किसी से सबसे ज्यादा नफरत करती हूं ,मैं, तो वह शख्स आप है। डॉक्टर बख्श आई हेट यू।
आई हेट यू, वेरी मच डॉक्टर बख्श कंदील ने खा जाने वाली नजरों से डॉक्टर बख्श की तरफ देखते हुए कहा।
ओह रियली।
मुझे भी कोई तुमसे मोहब्बत नहीं है।
जितनी तुम मुझसे नफरत करती हो ना।
उससे कई गुना बढ़कर मैं तुमसे नफरत करता हूं।
मैं तुमसे इतनी नफरत करने लगा हूं।
अगर देख लो मेरे दिल में की कितनी आग लगी है।
तो उस आग से तुम जल कर खाक हो जाओ।
डॉक्टर बख्श का चेहरा भी एकदम गुस्से में तमतमा गया था।
और तुमको देखना मेरी मजबूरी है ,क्योंकि तुम भी इसी अस्पताल में हो और मैं भी?
नहीं तो 1 मिनट लगेगा।
तुम्हें इस अस्पताल से बाहर करवाने में।
डॉक्टर बख्श उसे उंगली दिखाते हुए बोले।
इससे पहले की कंदील कुछ बोलती।
डॉ बक्श मुड़कर अपने लंबे-लंबे कदम बढ़ाते हुए आगे बढ़ गए थे।
समझता क्या यह शख्स अपने आप को?
मुझे हॉस्पिटल से क्या निकलेगा ,मैं खुद इस अस्पताल को रिजाइन दे दूंगी।
मुझे नहीं रहना यहां पर?
कंदील अपने पैर पटकते हुए चलने लगी।
यूं ही दो दिन गुजर गए।
कंदील के रास्ते में जब डॉक्टर बख्श आते, तो दोनों अपना रास्ता अलग-अलग कर लेते थे।
दोनों में बेइंतहा नफरत पैदा हो गई थी।
लगता था अब यह नफरत किसी तरह से खत्म होने वाली नहीं थी।
आज जब कंदील हॉस्पिटल आई तो, उसके दिल में यही चल रहा था।
कि उस लैब से अपनी रिपोर्ट लेनी है।
और यही सोचते हुए वह लैब की तरफ अपनी रिपोर्ट लेने के लिए गई।
मगर इससे पहले ही लैब के दरवाजे पर उसे डॉक्टर बख्श नजर आ गए।
कंदील ने जैसे ही डॉक्टर बख्श को देखा उसकी हलक तक कड़वा हो गया था।
हमेशा मेरे रस्ते में कांटे की तरह आता रहता है, यह शख्स। न जाने कब मेरी जिंदगी से जाएगा?
कंदील डॉक्टर बख्श के बिल्कुल नजदीक आ कर, अपने मुंह में बड़बड़ाने लगी।
इतना आसान नहीं है ,कंदील जफर मुझे रास्ते से हटाना। बहुत जिद्दी चीज हूं मैं भी।
डॉक्टर बख्श ने कंदील को बडबडाते हुए सुन लिया था।
इसलिए उसने कंदील से कहा।
हां डॉक्टर बख्श मेरी यही दुआ है, अल्लाह से कि आप जल्द से-जल्द मेरी लाइफ से बिल्कुल चले जाए।
मुझे आपकी शक्ल ना देखने को मिले।
और इसलिए मैं आपके हॉस्पिटल से बहुत जल्दी रिजाइन दे दूंगी।
उसे दिन कहा था ना आपने के आप मुझे हॉस्पिटल से निकलवा देंगे।
अरे आप क्या मुझे हॉस्पिटल से निकलवाएंगे।
डॉक्टर बख्श मैं आपके हॉस्पिटल को खुद छोड़कर चली जाऊंगी?
कंदील ने उनकी बात दोहराते हुए कहा।
और मैं भी उस दिन सुकून का सांस लूंगा।
जिस दिन तुम इस अस्पताल को छोड़कर चली जाओगी। तुम्हारी यह शक्ल है ना जिस पर मासूमियत का तुमने खोल चढ़ा के रखा है।
सख्त नफरत करता हूं, मैं तुम्हारे इस भोले चेहरे से।
क्योंकि जितनी अच्छी तरीके से मैं तुम्हें जान चुका हूं कंदील?
उतनी अच्छी तरीके से ना कोई तुम्हे जान पाया है।
और न जानेगा ।
और हा डॉक्टर कंदील तुम ना चाह कर भी नही भूल सकती मुझे, क्यीकी उस दिन जो कुछ भी हमारे बीच हुआ वो भुलाया नही जा सकता। डॉक्टर बख्श शातिराना हसी अपने होठो पर लाते हुए बोले।
जस्ट शटअप डॉक्टर बख्श कंदील को उनकी बात सुनकर बहुत गुस्सा आया।
जिस चीज को कंदील भूलना चाह रही कितनी बेशर्मी से उसे याद करवा गए थे डॉक्टर बख्श।
प्लीज डॉक्टर बख्श हटिया मेरे रस्ते से।
कंदील ने कहा।
कुछ देर डॉक्टर बख्श खामोशी से कंदील को देखते रहे।
फिर हटकर दूसरी साइट पर चले गए।
थैंक गॉड चला गया यहां से।
कंदील ने कहा।
कंदील लैब के अंदर आई उसने अपनी रिपोर्ट्स ली।
रिपोर्ट्स वह अपने केबिन में ले जाकर देखने लगी।
जैसे ही कंदील ने केबिन में जाकर अपनी रिपोर्ट को पढ़ाना शुरू किया।
उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
नहीं यह कैसे हो सकता है इंपॉसिबल?
यह नहीं हो सकता।
उफ्फ मेरे अल्लाह यह क्या हो गया?
कंदील अपने दोनो हाथों से अपने बालों को पकड़ने लगी।
किसको बताऊं कि मेरे साथ यह प्रॉब्लम हो गई है।
क्या करू मै मेरे अल्लाह मैं क्या करूं?
कंदील हेड डाउन करके बैठ गई थी।
आखिर ऐसी कौन सी बीमारी हो गई थी, कंदील को? अपनी रिपोर्ट देखकर जो कंदील चौक गई थी।
कंदील की समझ में नहीं आ रहा था अब वह क्या करें? अब कंदील अपनी इस बीमारी के बारे में किसको बताएगी।
किससे वह अपनी बीमारी का जिक्र करेगी।
जानने के लिए पढ़ते रहिए।
कंदील
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कंदील देर तक अपनी रिपोर्ट को देखती रही।
उसके हाथ काँप रहे थे और दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था जैसे अभी सीने से बाहर आ जाएगा।
“नहीं… ये सच नहीं हो सकता…”
उसकी आवाज़ खुद उसी को सुनाई नहीं दी।
रिपोर्ट में लिखे शब्द बार-बार उसकी आँखों के सामने घूम रहे थे।
हर लाइन जैसे उसके सपनों को चीर रही थी।
उसे अचानक डॉक्टर बख्श की बात याद आ गई —
“तुम ना चाह कर भी मुझे नहीं भूल पाओगी…”
कंदील ने गुस्से में रिपोर्ट मोड़ दी।
“नहीं! मैं उससे कुछ नहीं कहूँगी… किसी भी हाल में नहीं।”
लेकिन अगले ही पल एक और ख्याल उसके ज़हन में आया —
अगर ये बीमारी बढ़ गई तो?
अगर देर हो गई तो?
कंदील की आँखों से आँसू गिर पड़े।
आज पहली बार उसे अपनी नफरत से ज़्यादा अपने डर का एहसास हुआ।
दरवाज़े के बाहर किसी के कदमों की आहट आई…
और कंदील का दिल बैठ सा गया।
क्या बाहर डॉक्टर बख्श थे?
या कंदील की ज़िंदगी एक और इम्तिहान लेने वाली थी?
💌 Readers ke liye SMS
मेरी प्यारी readers 🤍
मेरी इस कहानी “कंदील” को इतना प्यार देने के लिए
दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया 🥰
आज मेरी यह कहानी
दुनिया के 50 देशों में पढ़ी जा रही है,
और यह सब आप लोगों की वजह से मुमकिन हुआ है 🌍✨
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