“कंदील: हवेली के राज़, जिल्ले हुमा की पहचान और आने वाला तूफ़ान”

 


Zille huma k dard

जिल्ले हुमा की समझ में नहीं आ रहा था।

वह खुश हो इस बात पर कि वह इस हवेली की बेटी है। 

  या इस चीज का गम करें , की जिसने उसके साथ जुल्म किया था।

जिसने सारी जिंदगी उसे हर चीज से दूर रखा था,वो उसके अपने ही दादा थे।

नवाब साहब मैं सोच भी नहीं सकती थी।

कि जिंदगी में आपने इतने गलत फैसला भी लिए है। 

आपके गलत फैसलों की वजह से ही ,मेरा जफर मुझसे दूर हो गया। 

क्यों किया आपने नवाब साहब ऐसा?

बेगम साहिबा, नवाब साहब से पूछ रही थी। 

पहली बार ऐसा हुआ था ,कि वह नवाब साहब से इतने सवाल जवाब कर रही थी। 

नहीं तो जो नवाब साहब बोल देते वह खामोशी थे उनकी बात को मान लेती।

नवाब साहब इस वक्त बेगम साहिबा के सामने उस तरह  खड़े हुए थे जैसे कटघरे में एक मुजरिम खड़ा होता है ।

और उसका जुर्म उस पर साबित हो जाता है। 

उसके पास फिर बोलने के लिए कुछ भी 

नहीं होता है।

हाशिम ने एक नजर आगा जान की तरफ देखा ।

और फिर अपने वालिदैन की तरफ देखा ।

  हाशिम जिल्ले हुमा का हाथ पकड़ कर दरवाजे की तरफ जाने के लिए मुड़ गया।

जिल्ले हुमा खामोशी से उसके साथ चलने लगी।

रुको हाशिम कहां जा रहे हो तुम?

उसके वालिन उसे पीछे से आवाज लगाते हुए कहा।

पापा मैं इस हवेली को छोड़कर जा रहा हूं। 

क्योंकि मुझे मेरी बीवी की इज्जत, और अपनी इज्जत का बहुत ख्याल है?

और आगा जान ने अभी आप सबके सामने इस हवेली से मुझे और मेरी बीवी को बाहर निकाला है।

हाशिम ने बिना मुड़े ही यह सब कहा था।

कोई भी हवेली इस से बाहर नहीं जाएगा।

ना जिल्ले हुमा और ना तुम।

  इस हवेली पर जिल्ले हुमा का और तुम्हारा दोनों का हक है।

आगा जन के कहने से यह बात मैटर ही नहीं करती है।

क्योंकि तुम मेरे वारिस हो, और मेरा वारिस  हवेली से कहीं बाहर नहीं जाएगा?

हाशिम के वालिद ने एक नजर आगा जान की तरफ देखते हुए कहा। 

आगा जान ने गुस्से और खा जाने वाली नजरों से उनकी तरफ देखा।

हां हाशिम बेटा तुम्हारे पापा बिल्कुल ठीक कह रहे हैं। 

कोई कहीं नहीं जाएगा यहां से।

इस बार बेगम साहिबा ने यह बात कही थी।

नवाब साहब,  को जो कुछ करना था कर लिया जितनी मनमानी करना थी कर ली।

अब आपका एक गलत फैसला हमसे बर्दाश्त नहीं होगा बेगम साहिबा ने कहा।

हाशिम पलट कर आगा जान की तरफ देखने लगा उसके हाथ मे अभी भी जिल्ले हुमा का हाथ था।

बेगम साहिबा ,हाशिम और जिल्ले हुमा के नजदीक गई। 

वो जिल्ले हुमा को बहुत गौर से देखने लगी।

जिल्ले हुमा थी, इतनी प्यारी के उसको कोई एक बार देखे तो देखता ही रह जाता है।

और इस वक्त तो और ज्यादा प्यारी लग रही थी?

उन्होंने दोनों हाथों से जिल्ले हुमा के चेहरे को पकड़ा। 

और उसके माथे पर एक बोसा देते हुए कहा।

माशाल्लाह, अल्लाह नजरे बद से बचाए मेरी बच्ची को

बेटा मुझे माफ कर दो। 

इस हवेली में होने के बावजूद मैने तुम्हें कभी देखा।

और ना पहचाना, पहचानती भी कैसे मै तो वाकिफ ही नही थी।

इस बात से के मेरे जफर की एक प्यारी सी बेटी और है। 

जिल्ले हुमा उनके सीने से लग गई।

और सिसक सिसक कर रोने लगी।

बेगम साहिबा के गले से लग कर उसे अपनेपन का एहसास हो रहा था।

नहीं मेरा बच्चा मेरी जान चुप हो जाओ।

हमसे गलती हुई है बहुत बड़ी गलती। 

उसके लिए हम तुमसे माफी मांगते हैं 

उन्होंने जिल्ले हुमा से कहा। 

नहीं बेगम साहिबा ऐसी बात मत कीजिए।

कोई गलती नहीं हुई है आपसे।

सारा कसूर मेरी किस्मत का ही है।

जिल्ले हुमा उनके गले से हटते हुए बोली।

नहीं बेटा तुम्हारी किस्मत का कसूर नहीं है।

अब तुम्हारे साथ कुछ गलत नहीं होगा। 

बेगम साहिबा ने उसके आंसू पूछते हुए कहा।

हवेली के सारे लोगों के चेहरे पर हंसी आ गई थी। 

आगा जान को छोड़कर। 

आग जान, गुस्से में अपनी छड़ी उठाते हुए, हाल से अपने कमरे की तरफ चले गए।

सब बारी-बारी जिल्ले हुमा को  गले लगा कर उसको दुआएं दे रहे थे।

सबको जिल्ले हुमा हाशिम बहुत अच्छे लग रहे थे साथ में।

हाल में लगे सोफे के बीचों-बीच जिल्ले हुमा बैठी हुई थी। और सब लोग उसके आसपास बैठे थे। 

हवेली के सारे ही लोग उसे देखकर बहुत खुश हो रहे थे।

इस वक्त कंदील हॉस्पिटल से नहीं आई थी। 

और वह सच्चाई से वाकिफ भी नहीं थी।

हाशिम के फोन पर रिंग बजने लगी वह फोन पर बात करते हुए।

हाल से दूसरी तरफ चला गया था।

लाएबा, जेबा जाओ और जाकर जिल्ले हुमा को हाशिम के कमरे तक छोड़ कर आ जाओ।

ताई अम्मी ने उन दोनों को बुलाकर कहा। 

दोनों बहुत खुश होते हुए आगे आई।

और एक साइड से जिल्ले हुमा का हाथ जेबा ने पकड़ा ।

और दूसरी साइड से लाएबा ने पकड़ा।

चलिए भाभी  भाई के रूम तक छोड़ कर आते हैं।

दोनों मुस्कुराती हुई जिल्ले हुमा को लेकर टेरेस की सीढ़िया पर चलने लगी।

जिल्ले हुमा को बड़ा अजीब लग रहा था ।

और एक खुशी भी महसूस हो रही थी।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ था ,कि जिल्ले हुमा पहली बार इन सीडीओ पर चल रही थी।

लेकिन आज इन सीडीओ पर, चढ़कर उसको बहुत खुशी महसूस हो रही थी।

वह दोनों हुमा का हाथ पकड़ कर उसे हाशिम के रूम तक ले आई।

  हुमा को बैड पर बिठा दिया।

भाभी यह देखिए यह आपका रूम है ।

लाएबा ने कहा। 

और हम दोनों के बारे में तो आप जानती होंगी ना।

जेबा ने मुस्कुराते हुए जिल्ले हुमा से पूछा।

जी हां आप दोनों के बारे में मैं अच्छी तरह से जानती हूं। बचपन से देखती आई हूं आपको। 

एक खुशी और अफसोस के तास्सुरात थे।

  जिल्ले हुमा की आवाज में। 

भाभी आप सच में बहुत प्यारी हो।

इसीलिए आप शायद पहली बार में, हाशिम भाई को पसंद आ गई थी।

लाएबा जिल्ले हुमा को छेड़ते हुए बोली।

लाएबा की बात पर जिल्ले हुमा मुस्कुराने लगी।

ओ माय गॉड, शर्माती हुई आप कितनी प्यारी लगती हो भाभी।

जेबा कहां पीछे हटने वाली थी?

जिल्ले हुमा अपने मुंह पर दोनों हाथ रखकर जोर से हंसने लगे।

क्योंकि पहली बार उसने अपनी तारीफ?

किसी के मुंह से सुनी थी।

जाओ जेबा मेरे रूम से मेकअप किट निकाल कर लाओ। भाभी का मेकअप करते हैं अच्छे से।

लाएबा ने से जेबा को हुक्म देते हुए कहा।

जेबा कुछ ही देर में उसके रूम से मेकअप किट निकाल कर ले आई।

और दोनों ने मिलकर जिल्ले हुमा का मेकअप किया।

मेकअप करने के बाद लाएबा ने जिल्ले हुमा को मिरर के सामने खड़ा कर दिया।

दिल्ली हुमा ने जब खुद को मिरर में देखा।

तो हैरान हो गई।

उसे लग रहा था उसके सामने जो मिरर में शख्स है।

वो  हुमा नहीं कोई और है। 

इससे पहले जल्ले हुमा ने खुद को कभी काले कपड़ों के अलावा दूसरे लिबास में देखा ही नहीं था।

क्या हुआ भाभी खुद को इस तरह क्यों देख रही है? 

लाएबा ने कहा।

कुछ नहीं बस यकीन कर रही हूं।

यह मैं हूं या फिर कोई ख्वाब है।

जिल्ले हुमा ने कहां?

नहीं भाभी कोई ख्वाब नहीं है, यह हकीकत है। 

लाएबा बोली।

फिर दोनों उसे हाशिम के रूप में छोड़कर। 

वापस नीचे चली गई।

जिल्ले हुमा आहिस्ता आहिस्ता चलते हुए पूरे रूम का जायजा लेने लगी।

उसे वह फर्स्ट मुलाकात याद आ गई ,हाशिम के साथ।

जब पहली बार उसने हाशिम को देखा था। 

और देख कर दिल में हलचल होने लगी थी।


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कंदील हॉस्पिटल से निकली तो उसका मूड डॉक्टर बख्श की वजह से बेहद खराब था।

डॉक्टर बख्श से उसे बेइंतहा नफरत हो गई थी ।

वह बार-बार उसे मजबूर कर रहा था।

   कंदील के सामने आकर उसके लिए अपनी नफरत और बड़ा रहे थे डॉक्टर बख्श।

और उसके थप्पड़ मारने से कंदील को उनसे और ज्यादा नफरत होने लगी थी। 

सारे रास्ते उसे डॉक्टर बख्श के ख्याल ने परेशान कर दिया क्योंकि वो जिस इंसान से  बेइंतहा नफरत कर रही थी?

  वो बार-बार उसे सामने आकर वार्निंग दे रहा था। 

मेम साहब हवेली आ गई है। 

ड्राइवर ने गाड़ी रोकते हुए कहा।

कंदील अपने सर को झटकाते हुए गाड़ी का दरवाजा खोलकर  नीचे उतर गई। 

और हवेली के अंदर आ गई।

जैसे उसने हवेली के अंदर कदम रखा ,सामने हाल में सबको एक साथ मौजूद पाया।

सब लोग कंदील की तरफ देखकर मुस्कुराये।

जवाब में कंदील भी मुस्कुराने लगी।

और अपने कमरे की जगह सीधे उन लोगों के पास आकर, सामने सोफे पर बैठ गई।

क्या बात है आज हवेली के  सब लोग एक साथ?

जिल्ले हुमा ने कहा।

हां बेटा खुशखबरी की बात है।

इसलिए सब लोग एक साथ है।

बेगम साहिब ने कहा।

अच्छा बेगम साहिबा क्या खुशखबरी है?

  कंदील ने पूछा।

वह इस वक्त डॉक्टर बख्श और उसके साथ जो हुआ था उस बात को भूल गई थी।

वह खुशखबरी ये  है  कंदील, के हाशिम ने शादी कर ली है।

बेगम साहिब ने कहा।

व्हाट, हाशिम शादी कर ली है।

कंदील खुश होते हुए बोली। 

मगर कब और किससे? 

और इतनी जल्दी।

कंदील ने एक साथ सारे सवाल   पूछ लिए थे। 

सब बताते हैं बेटा, तुम्हें सब बताते हैं।

पहले जाकर अपने रूम में आराम से फ्रेश होकर आओ। 

ताई अम्मा ने कहा।

क्योंकि उन्हें पता था कि वह सुबह से हॉस्पिटल थी।

  और काफी थक गई होगी?

ताई अम्मी खुशी की बात सुनकर मेरा मन नहीं कर रहा है कि मैं फ्रेश होने जाऊं।

कंदील  बेदिली से उठाते हुए बोली। 

नहीं बेटा तुम थक गई होगी, पहले फ्रेश होकर आ जाओ। फिर आराम से हम तुम्हें सारी  बात बताते हैं। 

ताई अम्मी ने कहा।

उनकी बात सुनकर, कंदील फट से उठ गई। 

फिर अपने रूम की तरफ चली गई।

बेगम साहिबा हाशिम की शादी की खबर सुनकर  कंदील को बहुत खुशी हुई है।

लेकिन जब सारी हकीकत उसे पता चलेगा। 

तो पता नहीं उसका क्या रिएक्शन होगा?

ताई अम्मा को कंदील की फिक्र होने लगी थी। 

डरो नहीं बहू वह बहुत समझदार है। 

और मैं अच्छी तरीके से जानती हूं ।

वह अपनी समझदारी का पूरा सबूत देगी।

जिस तरह से जिल्ले हुमा हम सबको पसंद आई है।

मुझे पूरा यकीन है कंदील को भी वह इस तरह से पसंद आएगी। 

बेगम साहिबा ने कहा।


क्या कन्दील जिल्ले हुमा से अपने रिश्ते को कुबुल कर लेगी

या फिर नफरत करने लगेगी कंदील जिल्ले हुमा से।

जानने के लिए पड़ते रहिए। 



                                  कंदील


Next Short Part 

अगला भाग – छोटा सा झलक

कंदील अपने कमरे में आई और दरवाज़ा बंद कर लिया।

आईने के सामने खड़ी होकर उसने खुद को देखा —

लेकिन उसके दिमाग में बस एक ही नाम गूंज रहा था…

“हाशिम…”

उसका फोन अचानक वाइब्रेट हुआ।

एक मैसेज आया —

“तुम जिस खुशखबरी पर खुश हो,

वो तुम्हारी ज़िंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा बनने वाली है।”

कंदील का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।

उधर, हवेली के एक कोने में

जिल्ले हुमा खिड़की के पास खड़ी थी —

और उसे पहली बार डर लग रहा था…

क्या कंदील उसे अपना पाएगी?

या यही शुरुआत होगी एक नई जंग की…?

जारी रहेगा…

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