"कंदील और डॉक्टर बख्श का सच : टूटा रिश्ता या अधूरी मोहब्बत?"




Kandeel ki badlti हालत


 बजाहिर अंदर से तो कंदील थक चुकी थी। 

लेकिन अपनी हालत किसी के सामने जाहिर नहीं करना चाहती थी। 

और करती भी कैसे,क्या बोलती वो के उसकी हालत का जिम्मेदार कौन है।

वो शख्स जिस से वो प्यार करती, जो शौहर है उसका उसने किया था ऐसा कन्दील के साथ 

और इस तरह घर में रहकर भी कुछ नहीं होने वाला था। 

2 दिन हो गए थे उसे बिना हॉस्पिटल गए हुए।

उसने आज सोच लिया था, कि वह हॉस्पिटल जरूर जाएगी। 

इसीलिए वह जल्दी उठकर टाइम से पहले ही हॉस्पिटल जाने के लिए तैयार हो गई थी।

हॉस्पिटल आकर अभी वह अपने केबिन में बैठी हुई थी कि फरहान की।

कॉल आ गई।

डॉक्टर कंदील जफर, आपको अभी इसी वक्त डॉक्टर बख्श अपनी केबिन में बुला रहे हैं। 

फरहान के बात करने के अंदाज  से लग रहा था।

कि वह बहुत जल्दी में है, इसलिए उसने इतना कहते ही फोन को कट कर दिया।

कंदील सामने तो नहीं करना चाहती थी, उस शख्स का लेकिन अब तो यह रोज की बात थी।

उस शख्स का सामना तो उसे बार-बार करना था।

इसलिए ना चाहते हुए भी उसे अपनी जगह से उठकर जाना पड़ा।

  जब कंदील रूम में दाखिल हुई, तो डॉक्टर बख्श और फरहान किसी बात पर डिस्कशन कर रहे थे।

कंदील के आने पर डॉक्टर बख्श ने  एक नजर कंदील की तरफ देखा। 

और दोबारा फरहान से बात करने लगे। 

उन्होंने इस तरह से उसको नजअंदाज कर दिया, जैसे उसका आना नहीं आना उनके लिए बराबर है।

कंदील फरहान के बराबर वाली कुर्सी पर बैठ गई सामने डॉक्टर बख्श बैठे हुए थे।

वह दोनों कि बात खत्म होने का इंतजार करने लगी।

नर्सरी रूम में जितने भी वेंटिलेटर  है उनको दोबारा चेक करवाइए।

अगर उनमें कोई दिक्कत है तो नई मशीन मंगवाई ।

इस वक्त हमें और वेंटीलेटर की जरूरत है।

डॉ बख्श फरहान से कह रहे थे।

यस सर, फरहान कहकर अपनी सीट से खड़ा हो गया। 

और वहां पर रखी फाइल्स को उसने उठा लिया।

फरहान ने एक नगर कंदील की तरफ देखा।

और मुस्कुरा कर केबिन से बाहर चला गया।

अब रूम में सिर्फ डॉक्टर बख्श और कंदील ही रह गए थे।

डॉ बख्श बहुत गौर से कंदील की तरफ देख रहे थे।

लेकिन आज पहली बार ऐसा हुआ था। 

के वो इतनी नफरत से उसको देख रहे थे?

कंदील अपनी निगाहों को नीचे किए हुए थी। 

अब उसमें इतनी हिम्मत बाकी नहीं थी, कि वह डॉक्टर बख्श की तरफ देख पाती।

सर आपने मुझे बुलाया था, कंदील ने कहा।

जी हां मैंने आपको बुलाया था। 

मैंने आपको इसलिए यहां बुलाया था।

पिछले केसेस की जितनी फाइल थी, उसमें जितने भी सीरियस पेशेंट है।

उन सब की रिपोर्ट मुझे कल तक चाहिए।

डॉ बख्श ने कहा।

ठीक है सर मैं कल तक आपको सारी रिपोर्ट तैयार करके भेज दूंगी।

कंदील ने कहा उसकी निगाहें अभी नीचे ही झुकी हुई थी।

डॉक्टर बख्श उसके चेहरे का जायजा ले रहे थे।

उसका चेहरा इन दो दिनों में मुरझा कर रह गया था। 

जो खुशी, कंदील के चेहरे को पर पहले दिखती थी ।

आज वह खुशी कहीं नजर नहीं आ रही थी।

वह बहुत उदास और बीमार लग रही थी।

डॉक्टर बख्श को।

दोनों के बीच में फिर से खामोशी छा चुकी थी।

लग रहा था दो अनजान लोग बैठे है एक ही रूम मे।

सर कुछ और काम भी था, आपको कंदील ने खामोशी को तोड़ते हुए कहा।

जी नहीं कोई और काम नहीं है मुझे आपसे ,डॉक्टर बख्श ने बहुत रूखेपन से कंदील को जवाब दिया।

ओ,के सर कहती हुई कंदील अपनी जगह से उठ गई। 

और दरवाजे की तरफ जाने लगी। 

डॉक्टर बख्श उसको जाते हुए देख रहे थे।

मगर आज उन्होंने उसे पीछे से आवाज लगाकर नहीं रोका था।

क्योंकि जो रिश्ता उन दोनों के बीच में था?

उसे वह दोनों ही खत्म कर चुके थे।

डॉ बख्श, आगा जान और उनके दरमियान में  हुई, बातों को सोचने लगे। 

आगा जान को पहले से ही मालूम था ,कि डॉक्टर बख्श किस हॉस्पिटल में आ रहे हैं। 

इसलिए जब डॉक्टर बख्श अमेरिका से वापस आए थे।

तब डॉक्टर बख्श ने आगाजान को कॉल किया था। 

और फोन पर उनसे कहा था ,कि वह जल्द से जल्द कंदील की रुखसती करके  इज्जत से मेरे साथ मेरे घर पर भेज दे।। 

उस पर आगा जान बहुत ज्यादा गुस्सा   हुए थे। 

उन्होंने सिरे से इस बात से इनकार कर दिया था ।

क्योंकि कंदील भी इस बात के लिए राजी नहीं थी उनका कहना है?

और कंदील तुमसे सख्त नफरत करती है। 

कंदील को अपने दिल और दिमाग से निकाल दो। 

आगा जान का हुक्म था यह। 

लेकिन डॉक्टर बख्श पर आगा जान की किसी बात का भी कोई असर नहीं हुआ था। 

उन्होंने कंदील को यह भी एहसास नहीं होने दिया था, कि आगा जान अच्छी तरह से ये बात जानते हैं। 

वो अमेरिका से वापस इसी अस्पताल में आये है।

डॉ बख्श ने कभी इस बात का भी जिक्र नहीं किया, कि आगा जान से उनकी बात कॉल पर होती रहती है।

आगा जान ने डॉक्टर बख्श को काफी धमकाया , वह वापस चला जाए। 

लेकिन डॉक्टर बख्श पर आगा जान की किसी भी धमकी का कोई असर नहीं हुआ था।

डॉक्टर बख्श का कहना था मेरे पास लीगल पेपर है।

मैं चाहूं तो अपनी वाइफ को ले जा सकता हूं।

और जो एग्रीमेंट उसने किया था, उस एग्रीमेंट कि मिआद खत्म हो गई है ।

तो आपके पास कोई वजह नहीं बनती कि आप कंदील को अपने पास रखें। 

लेकिन मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूंगा  जिससे आपको और कंदील को कोई तकलीफ पहुँचे।

इज्जत से कंदील को आपके घर से लेकर जाऊंगा।

डॉक्टर बख्श ने कहा था।

और मैं हरगिज कंदील की रूकसती तुम्हारे साथ  नहीं करूंगा।

तुम कितनी भी कोशिश कर लो सैफ हारून बख्श।

लेकिन कंदील  के दिल में अपने लिए जगह नहीं बना सकते क्योंकि तुमने वह काम पहले कर दिया है? 

जिससे उसको तुमसे नफरत हो गई है।

तुमने पहले ही उसके घर वालों की काफी बदनामी कर दी है।

वह तुम्हारे साथ कभी नहीं जाएगी।

और नहीं मानता हूं मैं ऐसी शादी को। 

जो तुमने कंदील से जबरदस्ती की है। 

आगा जान बहुत गुस्से में डॉक्टर बख्श को कह रहे थे। 

मैं भी आपको दिखा कर रहूंगा ,कंदील को अपने साथ ही ले जाकर रहूंगा इज्जत के साथ।

आप मेरी इस बात को लिख लीजिए।

डॉ बख्श ने कहा।

लेकिन आज डॉक्टर बख्श की वह सारी बातें झूठी साबित हुई थी।

जो  आगा जान ने कहा था, वह सब सच हो गया था। 

आगा जान, कंदील  दोनों ने मिलकर डॉक्टर बख्श को धोखा दिया था। 

डॉक्टर बख्श कभी समझ ही नहीं पाए थे कंदील को।

आज दूर हो गए थे कंदील और डॉक्टर बख्श 😒🥺🥺



✨ Next Short Part —


कंदील अपने केबिन की तरफ वापस जा रही थी,

लेकिन उसके कदम पहले से कहीं ज्यादा भारी लग रहे थे।


जिस रास्ते पर वह रोज चलकर आती थी,

आज वही रास्ता उसे अनजान लग रहा था।


वह अपनी सीट पर बैठी,

फाइलें सामने रखीं…

लेकिन हाथ उनमें पड़ ही नहीं रहे थे।


उसकी आंखों में आज भी वही सवाल तैर रहा था—


“क्यों… आखिर क्यों उसने मुझे इस तरह तोड़ दिया?”


फोन स्क्रीन पर एक गहरी दरार पड़ी हुई थी,

बिल्कुल उसकी ज़िंदगी की तरह।

एक मैसेज ब्लिंक कर रहा था—

लेकिन वह पढ़ने की हिम्मत भी नहीं कर पा रही थी।


उसी वक्त हॉस्पिटल के लाउडस्पीकर पर अनाउंसमेंट हुआ—


“डॉ. कंदील, इमरजेंसी वॉर्ड में तुरंत आएं…”


उसने सर उठाया, सांस भरी

और खुद को फिर एक बार मजबूत बनाया।


क्योंकि टूटकर भी

उसे हर दिन खड़ा रहना था…

किसी के लिए नहीं—

खुद के लिए।



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