“काले लिबास का राज़: हाशिम, जिल्ले हुमा और आगा जान की छुपी साज़िश”




 वह अपने असिस्टेंट से अपने बिजनेस के सिलसिले में बात कर रहा था। 

बात करते हुए वह अपने रूम का दरवाजा खोलकर पीछे की तरफ आ गया।

यहा बहुत खूबसूरत टेरिस गार्डन था। 

और यहां से वह क्वार्टर्स भी साफ नजर आते थे।

जो मुलाजिमों के लिए खास तौर पर आगा जान ने तैयार करवाए थे।

हाशिम ने जब फोन को कट कर दिया तो उसकी निगाह। नीचे मुलाजिमो के क्वार्टर की तरफ गई।

हाशिम इन क्वार्टर्स को देखकर जिल्ले हुमा के बारे में सोचने लगा।

अजीब सी उलझन में उलझा दिया था उस लड़की ने हाशिम को।

हाशिम जिल्ले हुमा से बात करना चाहता था। 

लेकिन जिल्ले हुमा उससे बात करते  से डरती थी, घबराती थीं।

और हाशिम को जिद हो गई थी ,कि कुछ भी हो वह जिल्ले हुमा से  फिर से बात करके रहेगा।

यही सब सोचते हुए वह जिल्ले  हुमा को तलाश करता हुआ। टेरिस से नीचे आया।

लेकिन उसे जिल्ले हुमा कहीं भी नजर नहीं आई थी। 

वो किसी से जिल्ले हुमा के बारे में कुछ भी नहीं पूछ सकता  था।

हाशिम के कदम आगा जान के रूम की तरफ बढ़ने लगे थे।

हाशिम दरवाजे पर दस्तक देने वाला था, कि  अचानक से जिल्ले हुमा के नाम पर, उसका हाथ रुक गया।

हां नवाब साहब जिल्ले हुमा को अभी तक किसी ने नहीं देखा 

वह आपके हुक्म पर  ,अपने आप को पूरा ढककर और छुपा कर रखती है ।

और काले कपड़ों के सिवा दूसरा कोई लिबास ईख्तियार नहीं करती है। 

यह किसी औरत की आवाज थी।

हां हम जानते हैं इस बात को, और हमें तुमहारी वफादारी पर गर्व है।

जो इतने दिन से तुम हमारी सारी बात मानती आ रही हो। इस बार आगा जान की कड़कदार आवाज सुनाई पड़ी थी।

नवाब साहब उसे कब तक इस तरह से रहना पड़ेगा?

उस औरत की आवाज आई।

जब तक कन्दील और हाशिम की शादी नहीं हो जाती। उसको खुद को इसी तरह से छुपा कर रखना पड़ेगा।

और कले ही लिबास में अपने आप को छुपाना पड़ेगा।

आगा जान ने कहा। 

अपना और कंदील का नाम सुनकर हाशिम चौक गया। 

अब तुम जाओ यहां से अगर किसी ने तुम्हें हमसे जिल्ले हुमा के बारे में बात करते हुए सुन लिया।

तो फिर वो जिल्ले  हुमा की सच्चाई जानने की कोशिश करेगा।

आगा जान ने उस औरत से कहा।

हाशिम को महसूस हुआ कि कोई दरवाजे पर आ रहा है। हाशिम बिना आवाज किए वहां से हट गया। 

और  दरवाजे की दीवार से टिक गया।

आगा जान के रूम का दरवाजा खुलने की और फिर बंद होने की आवाज आई। 

हाशिम छुप  कर देख रहा था कि , अंदर से कौन निकला है?

हाशिम को यह समझने में देर नहीं लगी कि वह घर की पुरानी मुलाजिमा रहमत बीवी थी।



आगा जान  की बात सुनकर हाशिम को बड़ी हैरानी हो रही थी ।

उन्होंने सब कुछ तय कर लिया था ।

और  इस बारे में हाशिम को बताया भी नहीं था।

हाशिम को अब समझ में आ रहा था ।

जब वह अमेरिका में था, तो स्पेशली ही कंदील  का फोटो दिखाकर और उसके बारे में, बताना।

मतलब आगा जान ने पहले से ही फैसला कर लिया था।

  कंदील की और हाशिम की शादी करवाना है।

और उन्होंने अपने फैसले के बारे में हाशिम को बताया भी नहीं था।

  इन सब चीजों से जिल्ले हुमा का क्या वास्ता था।

हाशिम को? इसका जवाब यह तो वह मुलाजिमा दे सकती थी या फिर आगा जान।

उसे अब इस बात की सच्चाई तक जाना था।


जिल्ले हुमा अपना ख्याल रखना।

मुझे 2 दिन लगेंगे वापस आने में। 

उसकी वालिदा अपना सामान पैक कर रही थी।

और जिल्ले हुमा से कह रही थी।

मगर अम्मी जान आप मुझे इस तरह अकेला छोड़कर क्यों जा रहे हैं।

आपको पता है आपके जाने के बाद मैं बिल्कुल अकेली हो जाऊंगी?

जिल्ले हुमा ने कहा।

जानती हूं मैं बेटा, लेकिन मेरी मजबूरी है तुम्हारी मामू जान ने मुझे जरूरी बुलाया है। 

इस वक्त उनकी बहुत ज्यादा तबीयत खराब है।

और मेरे सिवा उनका कोई नही  उन्होंने कहा।

अम्मी जान हम ऐसा कर सकते हैं, आप मुझे अपने साथ लेकर चलिए।

मैं यहां अकेले नहीं रह सकती हूं।

जिल्ले हुमा की आंखें झिलमिल रही थी।

वह किसी बच्चे की तरह अपनी मां से, खुशामद कर रही थी। 

बेटा मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तुम अकेली रह जाओगी।

लेकिन नवाब साहब का हुकुम  है , कि तुम  इस हवेली से बाहर  ना जा सको।

इसलिए मुझे यहां तुम्हें छोड़कर जाना पड़ रहा है। 

रहमत बीबी  ने कहा।

गांव से उनके भाई की कॉल आई थी।

के उनकी बेहद तबीयत खराब है, इसलिए अभी के अभी आ जाए?

रहमत बीबी को उनके भाई के सिवा दूसरा कोई नहीं था। इसलिए वो उनके पास, गांव जा रही थी।

तुम अकेली कहां हो बेटा, हवेली के सारे लोग यहां मौजूद हैं ।

और मुलाजिमों के  क्वार्टर्स भी बराबर बराबर है?

उसकी वालिदा ने उसे समझाया।

आपने ठीक कहा अम्मी जान ,के हवेली में सारे लोग मौजूद है।

लेकिन वह हवेली के लोग हैं, उनसे मेरा कोई वास्ता नहीं है।


मेरा वास्ता तो सिर्फ आपसे है, ना आप मेरी अम्मी जान  वह उनके कंधे से कर टिककर आंसू बहा रही थी।

जिल्ले हुमा बच्चों की तरह नहीं रोते हैं।

समझने की कोशिश करो मैं तुम्हें अपने साथ नहीं लेकर जा सकती हूं।

उन्होंने बहुत प्यार से उसकी आंखों से आंसू साफ करते हुए कहा। 

वह खामोश हो गई, वह भी जानती थी कि उसके अम्मी जान की मजबूरी है।

और आगा जान का हुक्म है कि वह बाहर न जाए।

तो  आगा जान का हुकुम मानना उनके लिए बेहद जरूरी था।

तुम अंदर से दरवाजा बंद कर लो।

और मैं वहां पहुंचते ही तुम्हें फोन कर दूंगी।

उन्होंने दरवाजे से बाहर निकाल कर।

जिल्ले हुमा से कहा।

जिल्ले हुमा ने दरवाजा बंद कर लिया।

जिल्ले हुमा को बहुत डर लग रहा था, उसे अकेले ही रात गुजारनी  थी आज।

वह अपनी उसी पुरानी टूटी हुई खिड़की के पास आकर खड़ी हो गई।

जहां बचपन से जवानी तक उसने गुजरा था।

और आज भी वही खूबसूरत चांद रात थी।

चांद अपने अबो ताब पर आसमान में चमक रहा था।

चारों तरफ उसके  तारे झील मिला रहे थे।

जिल्ले हुमा अपने सर पर दुपट्टा ओढ़े हुए एक तरफ से अपने दुपट्टे को पकड़ के मुंह से दबाए थी।

जिसकी वजह से उसके आधे बाल दिखाई पड़ रहे थे।

वो दीवार से टेक लगाएं चांद को देखने लगी।

एकदम उसे हाशिम का ख्याल आ गया।

उसे वह दिन याद आ गया जब पहली बार उसने हाशिम को देखा था।

उस वक्त उसके जिस्म पर उसकी शर्ट नहीं थी। 

और उसकी एक्सरसाइज से बनाई हुई बॉडी। 

साफ दिखाई पड़ रही थी।

हाशिम साहब आप भी इस चांद की तरह ही हो।

जिसकी रोशनी तो मैं देख सकती हूं ।

लेकिन इसके करीब में नहीं भटक सकती हूं।

जो दूर से देखने पर मुझे लगता है कि मेरा है।

लेकिन यह मेरी गलतफहमी है वह मेरा नहीं है 

वह मुझसे दूर है।

हाशिम का ख्याल आते ही, उसने अपनी जहन को झटक दिया। 

क्यों सोचती वो उस शख्स के बारे में जो उसका हो नहीं सकता था? 

और फिर उस शख्स की हरकतें, वह बार-बार जिल्ले हुमा को परेशान कर रही थी।

जिल्ले हुमे अभी हाशिम के ख्यालों में ही गुम थी ।

और अपने दिल को समझने की कोशिश कर रही थी।

  ऐ दिल उस शख्स के बारे में सोचने की जरूरत नहीं जो तुम्हारा हो, ही नहीं सकता।

क्या अचानक से उसके दरवाजे पर दस्तक होने लगी?  दरवाजे पर दस्तक होने से  तो उसका दिल तेज से धड़कने लगा।

कौन हो सकता है इस वक्त?

  आज तो अम्मी जान भी नहीं है। 

जिल्ले हुमा सोचने लगी।

आहिस्ता आहिस्ता वह दरवाजे के नजदीक आई।

फिर दरवाजा दोबारा बजाया गया।

कौन है।

जिल्ले हुमा ने बिना दरवाजा खोले पूछा?

मैं हूं हाशिम।

बाहर से आवाज आई।

हाशिम का नाम सुनकर जिल्ले हुमा चौक गई थी। 

वह इस वक्त क्यों उसके  क्वार्टर के बाहर खड़ा था? 

उसे समझ में नहीं आ रहा था।

दरवाजा खोलो हाशिम ने कहा।

वह जिल्ले हुमा का मालिक था, और उसकी बात मानना जिल्ले हुमा की मजबूरी थी।

लिहाजा जिल्ले हुमा ने काफी हिम्मत करते हुए दरवाजे को खोल दिया।

हाशिम भी ईत्तेफाक से इस वक्त  ब्लू जीन्स और काली टी शर्ट पहने बहुत शानदार लग रहा था।

हढबड़ाहट में जिल्ले हुमा अपने मुंह को ढकना भूल गई थी।

और उसके दुपट्टे में से भी उसके आधे बाल दिखाई पड़ रहे थे। 

चांद की रोशनी उसके मुंह पर पड़ रही थी।

हाशिम ने जब दरवाजा खुलते ही ,यह मंजर देखा।

तो कुछ लम्हे के लिए वह कुछ कहना ही भूल गया।

हुमा का खूबसूरत और शफ़क़ चेहरा इस चान्द की रौशनी में और ज्यादा खूबसूरत नजर आ रहा था।

वह पाकीजगी की हुमा के चेहरे पर दिख रही थी। जिसको देखकर हाशिम, कुछ बोल ही नहीं 

पाया था।

जिल्ले हुमा हाशिम को देखने लगी उसकी नजरों में काफी सवाल और डर था।

हाशिम उसको देखकर  मुस्कुराने लगा।

जिल्ले हुमा ने अपनी नजरो को नीचे झुका लिया।

रहमत बी बी कहा है।

हाशिम ने बड़े नर्म भरे लहजे में हुमा से पूछा था।

साहब जी वह आज यहां नहीं है। 

हुमा ने हाशिम की बात का जवाब दिया।

कहां गई हैं वह? 

हाशिम ने अपने माथे पर बाल डालते हुए कहा।

वह गांव गई है ,मेरे मामू जान के पास उनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब है उनसे मिलने गई है।

हुमा ने कहां?

मतलब इस वक्त तुम यहां अकेली हो। 

हाशिम ने कहा। 

उसने एक मुलाजिम  से पता किया था, की रहमत बीबी अपनी बेटी के साथ कॉव्टर में रहती हैं।

उनके शौहर नहीं है उनका इंतकाल हो गया है। 

तो हाशिम इस बात से वाकिफ था, कि वह यहां इस वक्त अकेली है।

जी हां। 

जिल्ले हुमा ने कहा उसकी निगाहें अभी भी उसी तरह से नीचे झुकी हुई थी।

मैं अंदर आ जाऊं। 

हाशिम ने कहा उसके लहजे में बहुत ज्यादा प्यार और अपनायत थी। 

जिल्ले हुमा चौकते हुए हाशिम की तरफ देखा। 

यह मुलाजिम  का घर है, आप अंदर कैसे आ सकते हैं?

आप तो नवाब है। 

आपके कद का इस घर का दरवाजा भी नहीं है। 

हुमा ने  तन्ज भरे लहजे मे कहा।

जो हाशिम को साफ मेहसूस हो गया था।

बहुत ज्यादा बोलती हो तुम हाशिम ने थोड़े सख्त लहजे में कहा ।

उसको जिल्ले हूमा की बात बुरी लग गई थी।





🔹 Short Next Part (Teaser)


दरवाज़े के बीच खड़े हाशिम और जिल्ले हुमा के बीच खामोशी तैरने लगी।

हाशिम की सख़्त आवाज़ के बावजूद, उसकी आँखों में एक अजीब बेचैनी थी।


“माफ़ करना…,” हाशिम ने अचानक कहा,

“लेकिन मैं यहां यूँ ही नहीं आया हूँ।”


जिल्ले हुमा का दिल ज़ोर से धड़क उठा।

क्या हाशिम को आगा जान की साज़िश का पता चल चुका था?

या वह सिर्फ़ अपने दिल की बेचैनी मिटाने आया था?


और उस रात…

हवेली की दीवारों ने एक ऐसा सच सुना,

जो आने वाले रिश्तों को हमेशा के लिए बदल देने वाला था।


(जारी रहेगा…)



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