हवेली के उसूल, अस्पताल की साज़िश और कंदील का बेहोश होना | एक दर्दनाक मोड़
Subha ka waqt
हवेली के सारे लोग ब्रेकफास्ट करने के लिए टेबिल पर मौजूद थे।
हाशिम और जिल्ले हुमा का वेट कर रहे थे।
क्योंकि इस हवेली का रूल था ,कि जितने लोग घर में मौजूद हैं ।
उन सबको एक साथ टेबिल पर मौजूद होना बहुत जरूरी है?
उनमें से कोई भी एक अगर कम होता तो नाश्ता स्टार्ट नहीं किया जाता था।
यह आगा जान का हुक्म था।
सब लोग तिरछी निगाह करके आगा जान की तरफ देख रहे थे ।
क्योंकि कल के बाद से ,आज वह सब को दिखाई पड़े थे ।और उनके चेहरे से अंदाजा लगाया जा सकता था।
कि अभी भी वह काफी गुस्से में है?
तभी जिल्ले हुमा, हाशिम सीढ़ीयो से नीचे उतारते हुए दिखाई पड़े?
सबकी निगाह अचानक से उनकी तरह चली गई।
आगा जान के अलावा सभी उन दोनों को देखकर मुस्कुरा रहे थे।
और कंदील तो कुछ ज्यादा ही एक्साइटेड हो रही थी ।
जल्ले हुमा से मिलने के लिए।
हाशिम सबको मॉर्निंग विश करके चेयर खींच कर उस पर बैठ गया।
लेकिन जिल्ले हुमा अभी भी सबके चेहरे देख रही थी।
वो बहुत कंफ्यूज हो रही थी।
क्या हुआ बेटा तुम खड़ी क्यों हो चेयर पर बैठो?
बेगम साहिबा जिल्ले हुमा से कहा।
जिल्ले हुमा भी कुर्सी खींच कर बैठ गई।
अब सब लोग आगा जान के खाने का वेट करने लगे।
क्योंकि पहले आगाजान खाना शुरू करते थे?
उसके बाद बाकी के सारे लोग।
आगा जान ने एक नजर जल्ले हुमा की तरफ देखा।
और उनके माथे पर बाल आ गए।
उन्होंने अपनी प्लेट में चम्मच उठकर खाना शुरू किया।
उनके खाना शुरू करने के बाद बाकी सारे लोगों ने भी खाना शुरू किया।
कंदील का ध्यान खाने पर कम, जिल्ले हुमा को देखने में ज्यादा था।
मगर वो उससे कोई बात नहीं कर सकती थी ।
क्योंकि जिल्ले हुमा उससे थोड़ी सी दूर पर बैठी हुई थी?
उसने सोच लिया था, कि नाश्ता खत्म करने के बाद वह जिल्ले हुमा से मिलेगी।
अभी उसने अपना नाश्ता भी कंप्लीट नहीं किया था।
की तभी कंदील के फोन पर रिंग बजने लगी।
फोन की स्क्रीन पर फरहान का नाम फ्लैश हो रहा था।
कंदील ने चम्मच को प्लेट में रखते हुए फोन रिसीव किया।
जी फरहान बोलिए।
कंदील बोली।
डॉक्टर कंदील कहां रह गई हैं आप?
आपको अच्छे से पता है ना कि आज मीटिंग है।
और अगर तो आप थोड़ी सी भी लेट हुई।
तो डॉक्टर बख्श क्या कर सकते हैं?
आप अच्छी तरह जानती है
फरहान ने कंदील से कहा।
मगर फरहान अभी तो मीटिंग शुरू होने में टाइम है।
कंदील ने अपनी रिस्ट वॉच पर नजर डालते हुए कहा।
नहीं डॉक्टर कंदील अब टाइम नहीं है।
डॉ बख्श ने जस्ट अभी टाईम चेंज कर दिया है।
आपको जस्ट 10 मिनट के अंदर हॉस्पिटल में पहुंचना है। ओके फरहान ने कह कर फोन कट कर दिया।
कंदील ने फोन अपने पर्स में रखा।
और बिना खाए ही टेबल से उठने लगी।
क्या हुआ कंदील नाश्ता क्यों नहीं करती कहां जा रही हो तुम?
ताई अम्मी ने उसको इस तरह खड़ा हुए देखा तो कहा।
ताई अम्मी अभी-अभी हॉस्पिटल से कॉल आई है ।
मुझे जस्ट अभी हॉस्पिटल पहुंचना है।
कंदील ने ताई अम्मी की,तरफ देखते हुए कहा।
बाकी सब की भी तवज्जो कंदील की तरफ हो गई।
मगर बेटा कम से कम नाश्ता तो कंप्लीट कर लो।
बेगम साहिबा ने कहा।
नहीं बेगम साहिबा, अगर नाश्ता कंप्लीट करने के लिए बैठ गई तो मीटिंग के लिए लेट हो जाऊंगी। आप परेशान मत होइए ,मै हॉस्पिटल मे कुछ खा लूगी
कंदील ने कहा।
और चेयर खींच कर, वहां से जाने लगी।
अभी कन्दील उठी रही थी, के अचानक से उसे चक्कर आने लगे?
और उसने खुद को संभालते हुए वापस चेयर को पकड़ा।
क्या हुआ कंदील तुम ठीक हो ना?
कंदील को इस तरह देखकर बेगम साहिबा ने कहा।
जी बेगम साहिबा मैं बिल्कुल ठीक हूं।
बस वह अचानक से चक्कर आ गया था।
कंदील ने अपने सर पर हाथ रखते हुए कहा।
ठीक से बेटा खाना खाया नहीं है सुबह-सुबह चक्कर आ रहे हैं।
तुम्हारी तबीयत तो ठीक है।
बेगम साहिबा को उसकी फिक्र होने लगी।
जी बेगम साहिबा मेरी तबीयत बिल्कुल ठीक है।
अचानक से चक्कर आ गया था।
कंदील कहकर फिर वहां से चली गई।
इस वक्त कंदील को डॉक्टर बख्श के ऊपर बेइंतहा गुस्सा आ रहा था।
क्योंकि जो टाइम मीटिंग का पहले था, उन्होंने उसको चेंज कर दिया था?
वह गुस्से में अपनी गाड़ी स्टार्ट करके अस्पताल पहुंची।
जैसे ही वह गाड़ी पार्क करके गाड़ी से नीचे उतरी।
सामने से उसे डॉक्टर समीर आता हुआ दिखाई पड़ा।
डॉ समीर को देखकर, कंदील को गुस्सा आ गया था।
लेकिन दूसरे ही पल उसने अपने गुस्से को कंट्रोल कर लिया।
और वह अस्पताल के अंदर जाने लगी।
डॉ समीर भी उसके साथ चलने लगा।
लगता है आजकल आपके डॉक्टर बख्श आपसे कुछ नाराज चल रहे हैं।
आपको लिफ्ट ही नहीं दे रहे हैं वह।
डॉक्टर समीर उसकी तरफ तिरछी निगाह कर कर देख कर बोला।
कंदील ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया।
वह खामोशी से चलने लगी।
वैसे अभी कुछ दिन पहले खबर उड़ रही थी ।
आप दोनों के मुताल्लिक, आपके और डॉक्टर बख्श के बीच में कोई चक्कर चल रहा है?
डॉ समीर ने कहा।
कंदील को बहुत गुस्सा आया डॉक्टर समीर की बात सुनकर।
वैसे कमाल की बात है ना डॉक्टर कंदील आपने।
डॉक्टर बख्श जैसे सीरियस और रूड बिहेवियर वाले शख्स को।
अपनी अदाओं के जाल में फंसा लिया।
वह दोनों हॉस्पिटल के लाबी में से निकाल कर मीटिंग वाले रूम की तरफ जाने लगे।
आप भी बहुत शरारती लेडी है ,डॉक्टर कंदील जफर एक साथ आप कई डॉक्टरों को फंसाए हुए हैं।
समीर अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा था।
कंदील ने एक लम्हा रुक कर डॉक्टर समीर की तरफ देखा उसे बहुत तेज गुस्सा आ रहा था।
चटाखख
कंदील एक जोरदार थप्पड़ डॉक्टर समीर के मुंह पर मार दिया।
डॉक्टर समीर आपकी हिम्मत कैसे हुई मेरे कैरेक्टर पर उंगली उठाने की?
मैं कुछ नहीं बोल रही थी ,तो इसका यह मतलब नहीं था कि आप कुछ भी करते रहोगे।
आइंदा अगर मुझसे बदतमीजी कि या मेरे रस्ते में आने की कोशिश की।
तो आप सोच भी नहीं सकते कि आपके हाल कितना बुरा होगा।
कंदील की आंखों में आंसू आ गए थे।
डॉक्टर समीर ने अपने गाल पर हाथ रखा।
और गुस्से भरी नजर से कंदील की तरफ देखने लगे।
कंदील मै तुम्हारी ये हरकत बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करूंगा तुमने यह बिल्कुल ठीक नहीं किया ।
मेरे ऊपर हाथ उठाया।
तुम देखना मैं इसका बदला तुमसे किस तरह से लूंगा।
डॉक्टर समीर ने कहा।
और कह कर आगे बढ़ गया।
कंदील भी अपने गुस्से को जप्त करके आगे बढ़ने लगी।
डॉक्टर बख्श कैमरे में इस मंजर को देख रहे थे।
उनके चेहरे पर सख्ती आ गई थी।
भले वह कंदील से नफरत करने लगे थे।
मगर डॉक्टर समीर का कंदील से इस तरह से बात करना। उन्हें बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा था।
वो समझ गए थे, कि डॉक्टर समीर ने कंदील से भी कुछ उल्टा सीधा कहा है ।
इसलिए कंदील ने डॉक्टर समीर के मुंह पर तमाचा मारा था।
डॉक्टर बख्श रूम में बिल्कुल सामने वाले सीट पर बैठे हुए थे।
बीच में काफी बड़ा मेज था।
उसके दोनों साइडों पर बाकी डॉक्टर्स बैठे हुए थे।
अभी कन्दील इजाजत लेकर अंदर आई थी ।
डॉक्टर बख्श ने उसको गौर से देखा कंदील की आंखों में आंसू साफ नजर आ रहे थे।
कंदील ने भी एक नजर डॉक्टर बख्श की तरफ देखा।
और फिर नफरत से अपने मुंह को दूसरी तरफ घूम लिया।
कंदील की हरकत पर डॉक्टर बख्श के माथे पर बाल बढ़ गए थे।
यह समझती क्या है खुद को?
इस तरह से मुझे देखकर मुंह बिगाड़ रही है।
जैसे मुझे इसको देखना बहुत अच्छा लगता हो।
डॉ बख्श कंदील के बारे में सोच रहे थे।
डॉ बख्श यह रही स्पीच की फाइल।
डॉ फरहान ने एक फाइल डॉक्टर बख्श को देते हुए कहा।
डॉ बख्श ने उस फाइल को अपने हाथ में लिया।
और स्पीच देना स्टार्ट की।
सारे ही डॉक्टर्स बहुत ध्यान से डॉक्टर बख्श की स्पीच को सुन रहे थे।
डॉक्टर बख्श के अस्पताल का एक नया प्रोजेक्ट था।
जिसमें सारे डॉक्टरों को अपनी राय देना बेहद जरूरी था। इसलिए ही डॉक्टर बख्श ने इस वक्त यह मीटिंग रखी थी। सब डॉक्टर बख्श की बात को बहुत ध्यान से सुन रहे थे। सिवाय कंदील के, कंदील के जहन में इस वक्त डॉक्टर समीर की बातें आ रही थी।
और उसका सर घूम रहा था।
अचानक से ही, कंदील बेहोश हो गई।
बेहोश होने से कंदील का सर वही बड़ी सी इमेज पर टिक गया था।
जैसे ही कंदील का सर मेज पर टिका एक आवाज हुई?
सारे ही डॉक्टर्स ने उस आवाज की तरफ देखा।
कंदील का सर मेज पर गिरा हुआ था।
सारे डॉक्टर्स अपनी चेयर पर उठ गए।
और कंदील की तरफ आ गए।
डॉ बख्श ने कंदील की नब्ज चेक।
काफी स्लो चल रही थी।
डॉ फरहान स्ट्रेचर मंगाकर इन्हें रूम में लेकर जाओ।
और इनका चेकअप करवाओ।
डॉ बख्श फरहान से कहा।
और फरहान ने उनकी बात सुनते हुए स्ट्रेचर मंगाई।
और एक दो लोगो को की मदद से कंदील को स्ट्रेचर पर लिताया।
और फिर उसे रूम में लेकर चले गए।
डॉक्टर बक्श ने अपनी स्पीच को फिर से स्टार्ट कर दिया। लेकिन उनका जहन डिस्टर्ब हो चुका था ।
उनका जहन बार-बार कंदील की तरफ जा रहा था।
✨ Next Short Part
अगला भाग: “जब सख़्ती के पीछे फ़िक्र छुपी थी”
स्ट्रेचर तेज़ी से कॉरिडोर से गुज़र रहा था।
कंदील की आँखें बंद थीं —
लेकिन डॉक्टर बख्श की आँखों में बेचैनी साफ़ दिखाई दे रही थी।
“ब्लड प्रेशर गिर रहा है…”
“IV जल्दी लगाओ…”
डॉक्टर बख्श खुद ICU के बाहर खड़े रह गए।
वो जो मीटिंग में एक लफ़्ज़ भी ज़ाया नहीं करते थे —
आज एक लड़की की ख़ामोशी से हार रहे थे।
उधर…
डॉक्टर समीर दूर खड़ा यह सब देख रहा था।
उसकी आँखों में पछतावा नहीं —
बल्कि एक खतरनाक साज़िश पल रही थी।
और हवेली में…
जिल्ले हुमा का दिल बेवजह काँप रहा था।
“क्यों ऐसा लग रहा है…
जैसे कुछ बहुत बुरा होने वाला है?”
💌 Readers ke liye SMS
Dear Readers,
मेरी इस कहानी को पढ़ने के लिए आपका दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया 💖
आपकी मोहब्बत की बदौलत ये कहानी आज 30 देशों में पढ़ी जा रही है —
यह मेरे लिए किसी दुआ से कम नहीं है।
कृपया मेरी इस कहानी को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर करें
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दिल से शुक्रिया 🤍
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