एक रात का सन्नाटा: हाशिम, जिल्ले हुमा और टूटता भरोसा One Night of Silence: Hashim, Zille Huma & a Broken Trust
Zille huma ka khuf
हाशिम साहब आप इस वक्त यहां से चले जाइए ।
अगर आपको इस वक्त यहां पर किसी ने देख लिया।
तो कोई आपसे कुछ भी नहीं कहेगा ।
लेकिन सारा एग्जाम मेरे ही कैरेक्टर पर लगाया जाएगा।
हुमा उससे दूर होते हुए बोली।
नहीं जिल्ले हुमा मैं तुम्हारे करेक्टर पर कोई इल्जाम नहीं लगने दूंगा।
जब तक मैं हूं तुम्हारे साथ, तुम्हें किसी से डरने की कोई जरूरत नहीं है।
हाशिम ने जिल्ले हुमा को भरोसा दिलाते हुए कहा।
और अब मैं जानता हूं ,कि तुम इस रूम में अकेली हो तो मैं हरगिज तुम्हे अकेले नहीं रहने दूंगा।
हाशिम ने कहा।
जिल्ले हुमा कि समझ में नहीं आ रहा था ।
कि वह क्या करें इस शख्स का भरोसा कर ले?
जिसका हर लफ्ज उसको ,इस वक्त सच्चाई नजर आ रहा था।
या फिर वह भी दूसरे अमीर लोगों की तरह सिर्फ उसका यूज करना चाह रहा था।
आप और यहां रहेंगे इतने छोटे से कमरे में।
जो किसी भी तरह से आपके लायक नहीं है ।
हाशिम साहब।
जिल्ले हुमा ने कहां?
तुम्हारे लिए यह भी कर लूंगा मैं ।
हाशिम ने कहा।
फिर हाशिम दरवाजे के नजदीक आया।
और दरवाजे को बंद कर दिया।
हाशिम साहब अपने दरवाजा क्यों बंद कर दिया?
जिल्ले हुमा को उसके दरवाजा बंद करने पर डर लग रहा था।
वैसे मैं किसी से नहीं डरता हूं ।
लेकिन इस वक्त तुम्हारे साथ मुझे यहां देखकर लोग तरह-तरह की बातें बना सकते हैं।
हाशिम ने कहा।
कोई हम दोनों को साथ में ना देख ले इसलिए मैंने यह दरवाजा बंद किया है।
हाशिम ने कहा ,और वही दरवाजे से टेक लगाए हुए जिल्ले हुमा को देखने लगा।
हाशिम साहब लौट जाइए अपनी हवेली पर।
बहुत तकलीफ होगी आपको यहां , इस घर में ऐसी कोई चीज मौजूद नहीं है जो आपकी सहूलियत के मुताबिक हो।
जिल्ले हुमा ने बहुत गहरी बात बोल दी थी
हाशिम से।
तुम क्यों वार्निंग दे रही हो मुझे जिल्ले हुमा?
कुछ ही दिन में तुम मेरी जिद बन गई हो।
और जब हाशिम की कोई जिद बन जाती है।
तो हाशिम उसे पूरी करके ही दम लेता है।
फिर चाहे उसके लिए उसे कितनी तकलीफो , कितने पहाड़ों का सामना करना पड़े।
और यह तो एक रात गुजारने की बात है।
जिससे मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है।
हाशिम यू ही अभी दरवाजे में ही फिट था ।
और जिल्ले हुमा उससे थोड़ी दूर पर
खड़ी हुई थी।
जिल्ले हुमा ने अपनी अलमारी में से एक साफ सूथरा बिस्तर निकला और उस बिस्तर को खाट पर बिछा दिया
और एक साफ सुथरी चादर भी उस खाट पर बिछा दी।
उस खाट के बराबर में एक और खाट थी।
उसको जिल्ले हुमा ने यूं ही रहने दिया।
साहब जी आप इस बिस्तर पर लेट जाइए।
जिल्ले हुमा ने उस बिस्तर पर इशारा करते
हुए कहा।
हाशिम उस बिस्तर के नजदीक जाकर उस बिस्तर पर बैठ गया।
जिल्ले हुमा अभी भी हाशिम से काफी दूर
खड़ी हुई थी।
बट जिल्ले हुमा मुझे तो यहां नींद नहीं आएगी।
हाशिम ने कहा।
उसकी बात सुनकर जिल्ले हुमा मुस्कुराने लगी।
हाशिम को जिल्ले हुमा का मुस्कुराना बहुत खूबसूरत लग रहा था।
मैंने तो आपसे पहले ही कहा था, साहब जी की अपनी हवेली पर वापस लौट जाइए।
इस छोटे से कमरे में आपकी जरूरत के मुताबिक कोई भी चीज मौजूद नहीं है।
मगर आपको ही जिद थी, यहां पर रात गुजारने की।
जिल्ले हुमा ने उसे याद दिलाया।
हां मुझे जिद है यहां रात गुजारने की, और मैं यहां पर ही रात गुजारून्गा।
मगर मैं सो नहीं सकता हूं।
हाशिम ने कहा।
तो फिर ऐसे जाग कर आप रात गुजारेंगे।
हुमा बोली।
हां मै जागकर ही रात गुजर लूंगा तुम्हें देखकर।
हाशिम के लहजे में बहुत गहरा प्यार था।
जिल्ले हुमा बराबर वाली खाट पर आकर बैठ गई।
हाशिम की तरफ उसकी पीठ थी।
जिल्ले हुमा इस वक्त इतनी थकी हुई थी, कि उसे बहुत तेज नींद आ रही थी।
मगर वह हाशिम के मौजूद होते हुए सो नहीं सकती थी।
सोना तो बहुत दूर की बात है वह इस खाट पर लेट भी नहीं सकती थी।
हाशिम इस रूम को बहुत गौर से देखने लगा।
उसके जहन में यह बात आ रही थी ,कि न जाने किस तरह से यहां गुजारा करती होगी यह दोनों।
जिल्ले हुमा तुम्हें और तुम्हारी वालिदा को कोई प्रॉब्लम नहीं होती यहां पर रहते हुए।
हाशिम ने बिना पीठ मोड़े जिल्ले हुमा से सवाल किया था।
काफी छोटा कमरा है तुम्हारा।
हाशिम बोला।
लेकिन कोई आवाज नहीं आई।
जिल्ले हुमा कुछ बोल क्यों नहीं रही हो तुम?
हाशिम ने कहकर पीठ मोड कर, जिल्ले हुमा की तरफ देखा।
तो वह खाट पर लेट चुकी थी।
और उसकी आंखें बंद थी मतलब वह गहरी नींद में सो चुकी थी।
हाशिम आहिस्ता से उठकर जिल्ले हुमा की खाट के नजदीक आया।
उसके आधे पैर जमीन पर लटके हुए थे।
और आधी वो खाट पर लेटी हुई थी।
उसका दुपट्टा उसके सर से आधा उतरा हुआ था।
हाशिम ने देखा कि उस खाट पर कुछ नहीं बिछा हुआ था।
उसको यहां लेटने में, दिक्कत हो रही होगी
क्योंकि बिस्तर इस खाट पर नहीं बिछा हुआ था?
बिना बिस्तर के ये खाट चूभती थी।
हाशिम ने कुछ सोचते हुए उसे अपनी गोद में उठाया।
और बहुत आहिस्ता से दूसरी खाट पर लाकर लिटा दिया ।जहां पर जिल्ले हुमा ने हाशिम के लिए बिस्तर बिछाया था।
जिल्ले हुमा इतनी गहरी नींद में सो चुकी थी।
कि हाशिम को अपनी गोद में उठाने का उसके बाद उसे दूसरे बिस्तर पर लेटने का उसे एहसास ही नहीं हुआ।
हाशिम उसको बिस्तर पर लिटा कर दूसरे खाट पर जाकर बैठ गया।
और वहीं से उसका दीदार करने लगा।
काले लिबास उसके ऊपर बहुत जचता था।
वह किसी शहजादी से कम नहीं लगती थी।
हाशिम उसकी वालिदा से उसके बारे में सच्चाई जानने के लिए आया था।
लेकिन इस वक्त वह यहां मौजूद नहीं थी।
फिर उसने अपने दिल का हाल जिल्ले हुमा को सुना दिया था।
अब उसने एक फैसला कर लिया था, कि वह जल्द से जल्द जिल्ले हुमा से शादी कर लेगा।
सोते हुए में वह और ज्यादा खूबसूरत लग रही थी।
सारी रात हाशिम जिल्ले हुमा को यूं ही देखता रहा।
इस दरमियान जिल्ले हुमा की ऑख एक बार भी नही खुली थी।
हाशिम ने देखा खिड़की के बाहर हल्का सा उजाला नजर आ रहा है।
फिर हाशिम उस खाट से उठा और दरवाजे के नजदीक आया उसने दोबारा जिल्ले हुमा की तरफ मुड़कर देखा वो अभी भी गहरी नींद मे थी।
हाशिम ने आहिस्ता से दरवाजा खोला और दरवाजे निकल कर बाहर चला गया फिर उसने दरवाजे को आहिस्ता बन्द कर दिया वो नही चाहता था के जिल्ले हुमा की नींद खुल जाए।
और वो ये भी नही चाहता था के उसको कोई जिल्ले हुमा के रूम से बाहर निकालता हुआ देखा।
इसलिए ही हल्का उजाला होने पर वो जिल्ले हुमा के रूम से बाहर निकाल आया था।
जिल्ले हुमा की जब आंख खुली तो उसने देखा वो उसी बिस्तर पर लेटी हुई थी जो कल रात उसने हाशिम के लिए बिछाया था।
और हाशिम वहा मौजूद नही थी।
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अस्पताल में यह बात सभी ने नोट की थी कि कंदील और डॉक्टर बख्श एक दूसरे को बहुत ज्यादा इग्नोर कर रहे हैं। जहां कुछ दिनों पहले दोनों में फ्रेंडली बातचीत होने लगी थी।
दोनों की नजदीकीया भी किसी से छुपी नहीं थी।
वहीं अब एक दोनों एक दूसरे से दूरियां बनाते हुए नजर आ रहे थे।
कुछ दिनों में डॉक्टर बख्श और कंदील दोनों ही बदले हुए नजर आ रहे थे।
कंदील अपने केबिन में अकेली बैठी सोच रही थी।
अचानक से उसे वह बात याद आ गई।
जिस दिन आगा जान ने उससे पेपर पर साइन करवाए थे। आगा जान ने जिन पेपर्स पर कंदील से साइन करवाए थे। उसने शुरू के कुछ पेपर तो पढ़ लिए थे।
लेकिन आधे से ज्यादा पेपर्स उसने नही पड़े थे।
मतलब साफ जाहिर था।
आगा जान ने जानबूझकर उन पेपर्स के दरमियान वह डिवोर्स का पेपर रखकर कंदील से उन पेपर्स पर साइन करवाए थे।
ताकि कंदील उनसे कोई सवाल नहीं कर सके।
कंदील के अब यह बात समझ में आई थी।
और कंदील को आगा जान से बिल्कुल भी यह उम्मीद नहीं थी के आगा जान उससे इस तरह ?
इन पेपर्स पर साइन करवाएंगे।
आगा जान आप ने एसा क्यों किया ।
क्यों मेरी जिंदगी फिर से बर्बाद कर दि आपने?
कंदील अपने दोनों हाथों से अपने बालों को जकड़ते हुए कह रही थी।
और उस शख्स ने तो मेरा भरोसा बिल्कुल ही तोड़ दिया। जिस शख्स पर मैंने ऑखे मून्द कर भरोसा किया था।
कंदील डॉक्टर बख्श के बारे में सोचने लगी।
एक बार सैफ एक बार तो मेरी बात सुन लेते थे।
क्या आपको मेरी बातों पर इतना भी यकीन नहीं था?
एक बार मेरी बात सुन सकते।
कंदील सोचकर, रोने लगी।
कंदील की वह हालत थी ,वह अपना दर्द किसी से कह नहीं सकती थी।
हवेली के लोग तो पहले ही सैफ को पसंद नहीं करते थे।
और यह सब सुनने के बाद तो उससे बेइंतहा नफरत करने लगते।
कंदील की जिन्दगी की तकलीफे कम नही हो रही थी।
और बढ़ती ही जा रही थी
🔹 NEXT SHORT PART
कंदील ने आंसू पोंछे और खुद को संभालते हुए आईने में देखा।
आईना उसे वही औरत दिखा रहा था,
जो हर बार टूट कर भी खड़ी हो जाती थी।
“अब और नहीं…”
कंदील ने खुद से कहा।
उधर अस्पताल में डॉक्टर बख्श ने कंदील को दूर से देखा।
वह कुछ कहना चाहते थे,
लेकिन उनके शब्द उनके ही गले में अटक गए।
और उसी शहर में,
हाशिम अपने कमरे में खड़ा खिड़की से बाहर देख रहा था।
उसे अब यकीन हो चुका था—
जिल्ले हुमा सिर्फ उसकी चाहत नहीं, उसकी तक़दीर बन चुकी है।
लेकिन क्या तक़दीर इतनी आसानी से मिलती है…?
या फिर दर्द अभी बाकी है…?
जारी रहेगा…




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