“हाशिम की एंट्री: जिल्ले हुमा की जान बची या शुरू हुआ नया तूफ़ान

 




Haweli me zille huma

जिल्ले हुमा को बहुत ज्यादा डर लग रहा था ,इस रूम में। क्योंकि वह दो आदमी जो उसको देखकर बातें कर रहे थे?

जिल्ले हुमा का डरना लाजमी था।

  जिल्ले हुमा ने उस  दरवाजे को लॉक तो कर दिया था।

लेकिन उसे अच्छी तरह पता था यह दरवाजा दूसरी साइड से खुल जाएगा।

वह डरी हुई अभी भी बैड के कोने पर बैठी थी। 

वह बार-बार यही सोचने की कोशिश कर रही थी।

आखिर आगा जान ने उसके साथ ऐसा क्यों करवाया था? 

अभी वह इन खयालों में ही खोई हुई थी, कि दरवाजे पर तेज तेज दस्तक होने लगी।

दरवाजा खोलो दरवाजा खोलो।

कोई दरवाजे के पीछे से आवाज लग रहा था।

जिल्ले हुमा डरकर और पीछे हो गई। 

उसने दरवाजा नहीं खोला।

यह चिड़िया खुद को बहुत चालाक समझ रही है ।

यह ऐसे नहीं मानेगी। 

जाओ लॉक की दूसरी चाबी लेकर आओ। 

उस आदमी ने दूसरे आदमी से कहा।

जिल्ले हुमा  को  उन दोनों आदमीयो  की आवाज साफ सुनाई पड़ रही थी।

जिल्ले हुमा की नजर दरवाजे पर ही टिकी हुई थी। 

उसने देखा कि दरवाजे का, हैंडिल घूम रहा था। 

कुछ ही सेकंड बाद दरवाजा खुल चुका था।

और वह दोनों आदमी दरवाजे के सामने थे। 

जिल्ले हुमा भागती हुई बैड के दूसरी साइड वाली दीवार से जाकर टिक गई।

ओ तेरी ये चिड़िया हमारे साथ खेल खेल रही है। 

इसको नहीं पता इस खेल में हम बहुत पुराने हैं।

वह दूसरा आदमी उस पहले आदमी से कह रहा था। 

इतना बोलकर वह दोनों आगे बढ़ने लगे।

  जिल्ले हुमा की समझ में नहीं आ रहा था ,कि वह क्या करें?

मेरे पास मत आओ तुम दोनों दूर रहो मुझसे।

जिल्ले हुमा ने कापती हुई आवाज के साथ कहा। 

रानी तुम्हें देखकर तुमसे कैसे दूर रहा जा सकता है?

उन दोनों में से एक आदमी बोला।

वह दोनों आदमी बैड के एक साइड पर से आ रहे थे 

और दूसरे साइट पर जिल्ले हुमा खड़ी हुई थी।

बेडरूम के बिलकुल बीच में  बैड डला हुआ था।

और सामने दरवाजा था।

वह दोनों जिल्ले हुमा के बहुत नजदीक आ चुके थे।

जिल्ले हुमा तेज भागती हुई बैड पर चढ़ी।

और बैड से सीधे दरवाजे की तरफ भागी।

अरे यार यह तो बहुत तेज निकली।

हमें इधर बुलाकर बैड पर से निकल गई।

चल पकड़ उसे कहीं भाग न जाए।

दोनों आदमी  एक दूसरे से बात करते हुए जिल्ले हुमा के पीछे उसको पकड़ने के लिए भाग रहे थे।

जिले  बहुत तेज भाग रही थी और वह दोनों आदमी उसके पीछे भाग रहे थे।

काफी बड़ा था यह गेस्ट हाउस।

रुक साली रुक।

एक बार हमारे हाथ आजा फिर हम तुझे दिखाते हैं। 

तेरी सारी अकड़ निकाल देंगे हम।

वो दोनों आदमी बड़बड़ करते हुए जिल्ले हुमा के पीछे भाग रहे थे।

दिल्ली में इतना तेज भाग रही थी के सामने से आता हुआ शख्स उसको दिखाई नहीं पड़ा।

जिल्ले हुमा  उसे शख्स से जा टकराई। 

उस शख्स ने जिल्ले हुमा को कस के पकड़ लिया।

नहीं छोड़ दो मुझे छोड़ दो।

मत करो मेरे साथ ऐसा मैंने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा? 

जिल्ले हुमा बदरवास हो गई थी।

मगर उस शख्स की पकड़ जिल्ले हुमा पर ढीली नहीं पड़ी।

छोड़ो मुझे छोड़ दो। 

जिल्ले हुमा चिल्ला रही थी, उसे लग रहा था किसी भी तरह इस शख्स की गिरफ्त से बाहर निकल जाए।

जिल्ले हुमा चुप हो जाओ।

डरने की जरूरत नही है

जानी पहचानी आवाज पर जिल्ले हुमा ने  उस शख्स के सीने से मुंह हटाकर उसकी तरफ देखा। 

आप , जिल्ले हुमा के मुंह से निकला।

मैं आ गया हूं इसलिए   तुम्हें डरने की बिलकुल जरुरत नहीं है।

तुम इस वक्त सेव हो जिल्ले। 

हाशिम ने मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखते हुए कहा।

जिल्ले हुमा वापस हाशिम  के सीने में सर रखकर सिसक कर रोने लगी। 

खामोश हो जाओ यार इस तरह नहीं रोते हैं।

वह बहुत प्यार से जिल्ले हुमा  से बोला था। 

उसने एक गुस्से भरी नजर उन दोनों आदमियों पर डालीं। 

जो हाशिम को देखकर डर कर वहीं रुक गए थे।

छोटे नवाब हम, हमें माफ कर दीजिए।

हमसे गलती हो गई।

वह दोनों हाशिम के आगे हाथ जोड़ने लगे।

हाशिम ने जिल्ले हुमा के आंसू साफ किया।

और उसे अपने पीछे किया।

और दोनों हाथों की आस्तीन चढ़ता हुआ।

उसने उन दोनों  आदमियों को मारना शुरू किया। 

हाशिम की दो-तीन मुक्के और लातों में। 

वह दोनों अधमरे हो गए थे।

माफ करिए साहब हमें, हमसे गलती हो गई।

वह दोनों अपनी गलती मान रहे थे।

नहीं तुम्हारे लिए गलती की सजा मौत है ।

क्योंकि तुमने मेरी इज्जत पर हाथ डाला है?

और कोई अगर हाशिम की इज्जत पर हाथ डालें।

तो वापस कैसे निकल सकता है? 

हाशिम ने अपनी बेल्ट निकाली।

और उन्हें मरने लगा।

हाशिम साहब प्लीज मत मारिए इन्हे।

जिल्ले हुमा सामने आ गई। 

जिल्ले हुमा इसने तुम्हें तकलीफ पहुंचाने की कोशिश की है।

मैं इनको कैसे छोड़ दूं? 

हाशिम बोला। 

हाशिम आप यहां से मुझे ले कर चलिए मुझे यहां बहुत डर लग रहा है। 

उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।

वह रिक्वेस्ट कर रही थी हाशिम से।

अगली बार अगर कुछ ऐसी हरकत करने की कोशिश की। 

जिससे मैं हर्ट हुआ तो मैं तुम दोनों को बिना सोचे ही गोली से मार दूंगा।

हाशिम ने उनसे कहा और जिल्ले हुमा का हाथ पकड़ कर। 

वहां से ले गया।

हाशिम ने जिल्ले हुमा को गाड़ी का दरवाजा खोलकर गाड़ी में बैठाया ।

और खुद उसके बराबर वाली सीट पर आकर बैठ गया।

ड्राइवर गाड़ी चलाओ।


हाशिम ने ड्राइवर को हुक्म देते हुए कहा।

जी साहब उस  ड्राइवर ने गाड़ी को स्टार्ट कर दिया।

हाशिम का हाथ जिल्ले हुमा के हाथ में था।

उसने कस के, हाशिम का हाथ थाम रखा था।

हाशमी ने सारे रास्ते हुमा से कोई बात नहीं की। 

फिर ड्राइवर ने गाड़ी को एक आलीशान के घर के आगे रोक लिया।

हाशिम  दरवाजा खोलकर खुद नीचे उतरा। 

और फिर जिल्ले हुमा का हाथ पकड़ कर उसे नीचे उतारा। जिल्ले हुमा घर को बहुत गौर से देखने लगी बहुत आलीशान घर था यह, चारों तरफ गार्डन था इस घर के।

  जिल्ले हुमा के लिए ये घर बिल्कुल अनजान था। 

हम कहां पर आए हैं?

जिल्ले हुमा ने हाशिम से सवाल किया। 

अंदर चले , अंदर चलकर बात करते हैं। 

हाशिम जिल्ले हुमा का हाथ पकड़ कर उसे अंदर ले जाने लगा।

जिल्ले हुमा हाशिम पर भरोसा करते हुए उसके साथ चलने 

लगी।




🔹 Next Short Part 

हाशिम उसे अंदर लेकर आया तो हवेली की ख़ामोशी और गहरी लग रही थी।

चारों तरफ़ सन्नाटा था, बस उनके क़दमों की आवाज़ गूंज रही थी।

जिल्ले हुमा का दिल अभी भी तेज़ धड़क रहा था।

वह हर मोड़ पर डर के साए तलाश रही थी।

“अब तुम यहाँ सुरक्षित हो,”

हाशिम ने ठंडी आवाज़ में कहा।

जिल्ले हुमा ने उसकी तरफ देखा,

“क्या सच में…? या यह भी आगा जान की कोई चाल है?”

हाशिम की आँखों में एक अजीब सी चमक आई,

“यह घर अब मेरा है… और जब तक मैं ज़िंदा हूँ, कोई तुम्हें छू भी नहीं सकता।”

लेकिन हवेली के ऊपरी मंज़िल से आती एक परछाईं

चुपचाप उन दोनों को देख रही थी…

जारी रहेगा…

🔹 Readers Message 


मेरी इस कहानी को इतना प्यार देने के लिए

आप सभी का दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया ❤️

यह कहानी आज दुनिया के कई देशों में पढ़ी जा रही है।

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