डॉक्टर बख्श का सच | कंदील की बेहोशी और टूटा भरोसा | Emotional Urdu Hindi Novel
Kandeel k tuta bharosa
कंदील के बताए गए रास्ते पर वह ड्राइवर गाड़ी को चला रहा था।
जैसे ही हवेली नजदीक आई कन्दील ने उसको बोलकर गाड़ी रोकने के लिए कहा।
उस शख्स ने गाड़ी को रोक दिया ,और कंदील खुद को संभालती हुई उस गाड़ी के से नीचे उतरी।
सारे रास्ते डॉक्टर बख्श की याद से उसका दिमाग और ज्यादा आउट होने लगा था।
वह बमुश्किल चलते हुए हवेली के अंदर गई।
उसने हवेली के चारों तरफ देखा तो सब लोग अपने काम में मसरूफ थे।
आहिस्ता आहिस्ता चलते हुए हाल के नजदीक आई कन्दील।
इस वक्त इतनी तकलीफ उसके जिस्म में नहीं हो रही थी जितना दर्द उसके दिल में हो रहा था।
इस वक्त कंदील का दिल जल रहा था।
कंदील,उसे पीछे से किसी ने आवाज लगाई ,तो उसके टेरिस पर जाते हुए कदम रुक गए थे।
कंदील ने पीछे मुड़कर देखा।
क्या हुआ कंदील, तुम इस तरह क्यों चल रहे हो ।
उन्होंने कंदील को लंगड़ाते हुए चलते देखा?
वो ,वो ताई अम्मा,
कंदील सोचने लगी कि वह उनको क्या जवाब दे?
वह फिकर मंद भरी नजरों से कंदील की तरफ देख रही थी।
ताई अम्मा मैं हॉस्पिटल की सीढ़िया पर से फिसल गई थी।
तो मेरे पैर में मोच आ गई।
उसने साफ झूठ बोलते हुए कहा।
हाए मेरी बच्ची दिखाना तो कहां मोच आई है?
वह बहुत प्यार से उसके नजदीक आई, और कंदील को सोफे पर बैठाते हुए बोली।
ताई अमामा इस पैर में मोच आइए है, कंदील ने अपना पैर खोलकर उन्हें दिखाते हुई बोली।
तुमने दवाई तो ले ली है, ना बच्ची, वह बहुत फिक्रमंद हो गई थी उसके पैर को देखकर।
ज़ी ताई अम्मा मैंने दवाई ले ली है, और इस पर क्रीम भी लगा ली है।
कंदील ने कहा।
वह अपनी आंखों में आने वाले आंसुओं को छुपाने की कोशिश कर रही थी।
तुम नीचे यहीं पर आराम कर लो ,ऊपर जाने की जरूरत नहीं है।
जब तुम्हारे पैर में मोच आ गई है ,तो किस तरह से ऊपर जाओगी।
ताई अम्मा उसके लिए बहुत ज्यादा फिक्रमंद हो गई थी।
नहीं ताई अम्मा मैं चली जाऊंगी।
खुद को संभालती हुई, वह कह कर सोफे पर से उठ गई थी।
ठीक है तुम अपने रूम में जाओ, मैं किसी मुलाजिमा को भेजती हूं जो तुम्हारे पैर पर, आहिस्ता आहिस्ता मसाज कर सके।
उन्होंने कहा।
कंदील उन को देखकर हल्के से मुस्कुराई और गर्दन को हा मे हिलाया ।
कंदील सीढीओ की तरफ जाने के लिए आगे बढ़ गई।
अब वो उनको क्या बताती कि इसकी क्या वजह थी? किसकी बदौलत उसका यह हाल हुआ था।
यह सोचते हुए वह गिन गिन कर सीढीओ पर कदम रख रही थी।
जैसे वह पूरी सीड़िया चढ़ चुकी थी।
सामने आते हुए शख्स से टकरा गई।
और वह नीचे गिर जाती, अगर वह शख्स कंदील को पकड़ता नहीं।
कंदीलललल
ताई अम्मा नीचे से चीखी।
क्योंकि उसकी नज़रें कंदील का पीछा कर रही थी?
वह तेज भागती हुई चिड़ियों के नजदीक आई।
उन्होंने देखा के मजबूती से हाशिम कन्दील को पकड़े हुए था?
कंदील कंदील क्या हुआ।
कंदील हाशिम की बाहो मे बेहोश हो चुकी थी।
कंदील उठो,कंदील
हाशिम ने उसके गाल को थपथपा कर उसे जगाने की कोशिश की।
लेकिन वह अपनी इस कोशिश में नाकामयाब हो गया था।
इतनी देर में ताई अम्मा ऊपर आ चुकी थी।
हाशिम इसको उठाकर जल्दी से इसके रूम में लेकर आओ।
हाशिम की वालिदा ने, हाशिम की तरफ देखते हुए कहा।
जी अम्मी जान ,हाशिम उनकी बात मानते हुए बोला ।क्योंकि इस वक्त उसकी जो हालत थी वह खुद तो चलकर रूम तक जा नहीं सकती थी?
हाशिम ने उस अपनी बाहों में उठा कर कन्दील को लेकर रूम मे आ गया।
रूम आकर हाशिम ने कंदील को उसके बैड पर लिटा दिया।
कंदील को जैसे उसने ,उसके बैड पर लिटाया तो उसकी नजर उसके रूम के चारों तरफ चली गई?
जो हू बा हू कंदील के रूम जैसा ही था।
बस उसकी ड्रेसिंग इस तरह की थी,जिस से अन्दाजा सा लगाया जा सकता था
यह किसी लड़की का रूम है।
कंदील की जब आंख खुली तो उसके, अपने मौजूद थे।
कुछ देर तो कंदील को यह समझने के लिए लगा था।
कि इस वक्त वह कहां पर है?
और उसको क्या हुआ था?
फिर हल्के हल्के कंदील की समझ में आ गया था, कि किस तरह से सीढीओ पर चलते हुए गिर रही थी ।
कंदील तो किसी ने उसे पकड़ लिया था।
उसके बाद कंदील को होश नहीं रहा, और अब जब आंख खुली तो वह अपने बैड पर मौजूद थी।
और आगा जान, बेगम साहिबा, सारे ही लोग उसके इधर-उधर मौजूद थे।
कंदील ने उठने की कोशिश की तभी सिरहाने बैठी हुई बेगम साहिबा ने उसे रोका, नहीं बेटा लेटी रहो उठने की जरूरत नहीं है।
डॉक्टर ने इंजेक्शन दिया है ,और अभी आराम करने के लिए कहा है तुमसे।
उन्होंने उसे समझाते हुए कहा।
कंदील ने अपनी दूसरी तरफ मुंह मोड़ कर देखा ,दूसरी तरफ से सिरहाने पर आगा जान बैठे हुए थे ।
जिनके चेहरे से ऐसा लग रहा था ,कि इस वक्त वह कंदील के लिए बहुत फिक्रमंद है।
कैसी हो बेटा आगा जान ,बहुत ही प्यार से कंदील से पूछ रहे थे ।
उनका एक हाथ कंदील के सर पर था, जिससे वह उसके सर को सहला रहे थे।
आगा जान, मैं बिल्कुल ठीक हूं आप फिक्र मत कीजिए मेरी, बस वीकनेस की वजह से मुझे थोड़े चक्कर आ गए थे ।
इसलिए शायद में बेहोश हो गई।
कंदील आगा जान से बोली।
अगर यह डॉक्टर ही इस तरह से बेहोश होने लगे, आगा जान तो फिर पेशेंट का क्या हाल होगा।
पेशेंट का किस तरीके से ट्रीटमेंट करेंगे डॉक्टर?
हाशिम कंदील को छेड़ते हुए बोला।
कंदील ने हाशिम की बात का कोई जवाब नहीं दिया।
चलो हम सब लोग बाहर निकल जाते हैं।
इन मैडम को कुछ देर आराम करने की जरूरत है।
हाशिम ने रूम में मौजूद सब लोगों से यह बात कही।
हां हाशिम तुम ठीक कह रहे हो ,कंदील को कुछ देर आराम करना चाहिए।
आगा जान ने हाशिम की हां हमें हां मिलाई।
सब लोग कंदील के रूम से बाहर निकल गए।
इस वक्त कंदील रूम में अकेली मौजूद थी।
और उसका जहन डॉक्टर बख्श की तरफ जा रहा था।
रह रह कर डॉक्टर बख्श की, हरकतों पर कंदील शॉक्ड हो रही थी।
उसने कभी अपनी लाइफ में नहीं सोचा था ,कि डॉक्टर बख्श उसके साथ ऐसा कर सकते हैं।
आज डॉक्टर बख्श ने जो कंदील के साथ किया था।
उससे, उसके जिस्म पर ही नहीं उसकी रूह पर भी जख्म हुए थे।
और इन जख्मों का सही होना अब नामुमकिन था।
डॉक्टर बख्श, मेरे साथ ऐसा क्यो किया ,बताइए डॉक्टर बख्श, वह उन्हें याद करके फिर से फूट-फूट
कर रोने लगी।
जिस खूबसूरत जिंदगी का तसव्वुर वह डॉक्टर बख्श के साथ रहकर करने लगी थी।
आज उस खूबसूरत जिंदगी का अक्स को डॉक्टर बख्श ने रौंद के रख दिया था।
सब कुछ खत्म कर दिया था आज डॉक्टर बख्श
ने।
✅ Next Short Part (Hook / Teaser)
— अगला भाग —
कंदील की आँखों से आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे…
लेकिन उसी वक्त दरवाज़े के बाहर किसी के कदमों की आहट ने उसके दिल की धड़कनें तेज़ कर दी थीं।
दरवाज़ा खुला…
और सामने जो शख़्स खड़ा था, उसे देखकर कंदील का रंग उड़ गया।
क्या वह डॉक्टर बख्श था?
या कोई और सच सामने आने वाला था?
— जारी रहेगा…
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✅ Readers के लिए Emotional Message
“कभी-कभी जिस इंसान पर हम सबसे ज़्यादा भरोसा करते हैं, वही सबसे गहरा ज़ख़्म दे जाता है…
कंदील की कहानी दिल को छू जाने वाली है 💔”
“डॉक्टर बख्श का सच क्या है?
कंदील की हालत आपको झकझोर देगी…
अगला पार्ट ज़रूर पढ़ें!”
“एक बेहोशी… और टूटता हुआ भरोसा…
कंदील की ज़िंदगी अब पहले जैसी नहीं रही।”
✅ Readers के लिए Attractive SMS
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