चांदनी रात का इक़रार: मालिक और मुलाजिमा की मोहब्बत | Urdu Romantic Novel

 



आप मुझे अंदर आने के लिए नहीं कहोगी।

हाशिम ने कहा। 

जिल्ले हुमा   कुछ नहीं बोली बस खामोश खड़ी रही।

ओके कोई बात नहीं मत बुलाओ मुझे अंदर तुम।

हाशिम ने कहा। 

मगर मुझे अंदर आकर तुम्हारा घर देखना है।

हाशिम दरवाजे के बीच में से जिल्ले हुमा को एक साइड करता हुआ घर के अंदर दाखिल हुआ।

जिल्ले हुमा  को उम्मीद नही थी, के वो इस किस तरह से उसे रास्ते से हटाएगा।

हाशिम उसके कमरे को गौर से देखने लगा। 

काफी छोटा कमरा था , हाशिम के हिसाब से। 

मगर साहूलत की हर चीज़ इसमें मौजूद थी ।

और सब चीज़ अपनी जगह पर रखी हुई थी। 

हाशिम की नजर  अचानक से उस टूटी हुई खिड़की पर गई। 

जहां से चांद की रोशनी साफ उसे कमरे में आ रही थी। हाशिम उस खिड़की के पास आकर खड़ा हो 

गया।

जिल्ले हुमा दरवाजे के पास से उसे देख रही थी।

वह जिल्ले हुआ कि अंदाज में ही खामोश खडा खिड़की से टिका हुआ चांद को तकने लगा।

चांदनी रात में चांद बहुत खूबसूरत नजर आता है।

अचानक से हाशिम ने पीठ मोड़ते हुए यह लफ्ज जिल्ले हुमा को देखकर कहे थे। 

जिल्ले हुमा भी हाशिम की तरफ देखने लगी। 

हां चांदनी रात का चांद तो खूबसूरत होता है। 

उसकी जगह कोई नहीं ले सकता। 

जिल्ले हुमा ने कहां?

मगर यह चान्द किसी का, हो नहीं सकता। 

इसको हम दूर से देखकर ही, सिर्फ अपनी आंखों को सुकून पहुंचा सकते हैं। 

हकीकत में वह हमारी पहुंच से बहुत दूर है। 

कोई बहुत गहरी बात  जिल्ले हुमा  के लफ्जों में शामिल थी इस वक्त।

जिनको महसूस करना हाशिम के बस की 

बात नहीं थी।

मगर मैं इस चांद तक पहुंच सकता हूं ।

और यह मेरी पहुंच से दूर नहीं है। 

हाशिम आहिस्ता आहिस्ता अपने कदम उठाता हुआ। 

जिल्ले हुमा के नजदीक आते हुए बोला।

जिल्ले हुमा , हाशिम ने बिल्कुल नजदीक आकर उसको पुकार।

जी साहब जी,

जिल्ले हुमा बोली।

तुम मुझे साहब जी कहकर क्यों बुलाती हो।

हाशिम की नजर उस पर और गहरी हो गई थी? 

क्योंकि आप मेरे मालिक हैं ,तो मेरा फर्ज बनता है के मैं आपको साहब जी कह कर ही बुलाऊं?

उसने अपनी नजरों को नीचे झुकते हुए कहा।

तुम्हारा मालिक, हाशिम जाने  क्या कहने की कोशिश कर रहा था?

जी साहब जी

हुमा ने कहा।

जिल्ले हुमा को बहुत अजीब लग रहा था, इस आधी रात में अकेले हाशिम के साथ  थी वह।

अगर हवेली का कोई शख्स या मुलाजिम उन दोनों को यहां इस तरह अकेले देख लेते। 

तो न जाने कितनी तरह की गलत बातें जिल्ले हूमा के लिए इस्तेमाल की जाती। 

हाशिम तो मालिक था उसे कोई कुछ 

नहीं कह सकता था।

मैं अगर तुम्हारा मालिक बन गया, तो तुम्हारी हर चीज पर मेरा इख्तियार होगा जिल्ले हुमा।

हाशिम ने जिल्ले हुमा को दोनों कंधों से पकढ़ते हुए अपनी नजदीक करते हुए कहा।

हाशिम साहब छोड़िए मुझे। 

जिल्ले हुमा ने कहा।

जिल्ले हुमा क्यों डरती हो, तुम मुझसे इतना?

हाशिम  अपने फेस को उसके फेस के नजदीक लाते हुए बोला। 

हाशिम ने महसूस किया, हुमा की  सांसों की आवाज और तेज होने लगी थी।

मुझे आपसे इसलिए डर लगता है क्योंकि आप? 

जिल्ले हुमा बोलते बोलते रुक गई थी। 

आज हुमा को महसूस हो रहा था, कि वह हाशिम के सामने खुद को हार जाएगी

के ,क्या बोलो जिल्ले हुमा सुनना चाहता हूं मै? 

हाशिम आहिस्ता आहिस्ता, उसे सरगोशी

कर रहा था।

आपके नजदीक आने से मेरा दिल बहुत तेज धड़कने लगता है। 

और आपका साथ होना अच्छा लगता है मुझे। 

ऐसा लगता है उस आसमान की चांद की तरह, आप भी मेरे साथ रहो मेरे पास रहो।

आज जिल्ले हुमा जो बोल रही थी उसको खुद को भी नहीं मालूम था।

कि वह ऐसा क्यों बोल रही है?

हाशिम ने देखा उसकी आंखें बंद थी।

  वह अपने दिल की बात हाशिम से कह रही थी। 

हाशिम  को इस चांदनी रात में वो और ज्यादा खूबसूरत नजर आ रही थी। 

हाशिम को लग रहा था कि रात यहीं रुक जाए। 

यह लम्हा यहीं ठहर जाए।

जिल्ले हुमा  हाशिम अपने होठों को बिल्कुल जिलले हुमा के कान के नजदीक लेकर आया।

हमममम, जिल्ले हुमा  की मुंह से बहुत आहिस्ता यह लफ्ज निकले थे। 

जो हाशिम को और पागल बना रहे थे।

मै शादी करना चाहता हू तुमसे। 

हाशिम ने उसके कान मे ये बात कही।

जुल्ले हुमा ने आंखें फाढ़ते हुए हैरान होकर हाशिम को देखा। 

उसे यकीन नहीं हो रहा था, कि इस वक्त हाशिम ने उससे क्या बोल दिया है? 

शायद उसने सुनने में गलती की हो।

क्या कहा आपने दोबारा कहिए? 

जिल्ले हुमा को अपने कानों पर यकीन ही नहीं हो रहा था। स मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं। 

हाशिम ने कहा।

जिल्ले हुमा ने हाशिम को पीछे धक्का दिया ,और  जोर-जोर से हंसने लगी। 

पहली बार हाशिम ने उसको इस तरह से हंसते हुए देखा था। 

लेकिन इस वक्त हाशिम को उस की हंसी खोखली नजर आ रही थी।

वह हंसते-हंसते उस टूटी हुई खिड़की के नजदीक चली गई। 

उसने दीवार से टेक लगा ली।

हाशिम भी अपने कदमों को तेज बढ़ता हुआ जिल्ले हुमा के नजदीक आ गया।

उसकी हंसी थम गई थी ,और वह खामोश होकर चांद को  तक रही थी। 

क्या हुआ जिल्ले हुमा तुमने जवाब नहीं दिया?

हाशिम ने पीछे से उसके कंधे पढ़ते हुए कहा।

जैसे ही हाशिम ने उसके कंधों पर हाथ रख रखा, जिल्ले हुमा ने अपनी आंखों को कस कर बंद कर लिया?

  ऊफफफ अल्लाह काश सच होता यह ,जो लफ्ज हाशिम ने  अपने मुंह से कहे हैं। 

यह सच में  हाशिम साहब ने कहे होते, मैं कोई खुली आंखों से ख्वाब नहीं देख रही होती।

जिल्ले हुमा ने कहां? 

हाशिम ने उसे कंधों से पकढ़ते हुए सीधा करके उसका रुख अपनी तरफ किया। 

आंखों को खोलो, और मेरी तरफ देखो। 

यह कोई ख्व नहीं है ,मैं कोई ख्वाब नहीं हकीकत हूं। 

और मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं। 

हाशिम ने कहा। 

हाशिम साहब कैसा मजाक कर रहे है

आप मेरी जिंदगी से? 

मेरी जिंदगी तो पहले ही मजाक बनी हुई है। 

और आप ऐसी बातें बोल रहे हैं जिसका होना, इंपॉसिबल बात है।

हुमा की आंखों में अचानक से आंसू आ गए थे। 

तुम्हें क्यों मेरी बातो और मेरी जज्बातों पर यकीन नहीं हो रहा है ।

हुमा? मैने जब से तुम्हें पहली बार देखा जब से मैं तुम्हें चाहने लगा हूं।

मोहब्बत हो गई है मुझे तुमसे। 

हाशिम उसकी आंखों में बहुत गौर से देख रहा था। 

हाशिम साहब। 

कैसे मोहब्बत हो सकती है आपको मुझसे ,मैं आपकी हवेली  की एक अदना सी मुलाजिमा  हूं? 

आप हवेली के मालिक हैं ,सब कुछ आपका है। 

आपकी खूबसूरत शानदार पर्सनैलिटी।

कोई भी खूबसूरत अमीर लड़की, आपको इशारे में मिल सकती है। 

हुमा को आज अपनी कमतरी का बहुत ज्यादा एहसास हो रहा था। 

मैं जानता हूं इस बात को।

लेकिन मुझे किसी अमीर लड़की से कोई मतलब नहीं मुझे कोई खूबसूरत लड़की नहीं चाहिए। 

मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई है ,जिल्ले हुमा। 

मै तुमसे ही शादी करूंगा। 

उसने ,उसके सुनहरी बालों की लट को, अपने हाथ से छूते हुए कहा। 

हाशिम साहब ,इस वक्त यहां से चले जाइए ।

मत ओढाईए मेरी गरीबी का मजाक आप। 

चले जाइए यहां से। 

हुमा के ऑसू पट पट बह रहे थे।

नहीं जाऊंगा मैं जिल्ले हुमा। 

जब तक तुम्हारा जवाब हां में नहीं होगा। 

तुम उस दिन भी मुझसे भाग कर  आ गई थी।

जब टेरिस पर, बरसात में भीग रही थी। 

और उसे दिन जब मैंने रूम में तुम्हे  लॉक किया था।

तब भी तुम मुझसे भाग कर आ गई थी। 

लेकिन आज मैं यहां से नहीं जाऊंगा जिल्ले हुमा। 

तुम्हें मेरे जज्बातों को समझना होगा।

मैं तुम्हारी हां सुन के यहां से जाऊंगा। 

हाशिम साहब अगर आपके इरादों के बारे में आगा जान को पता चल गया। 

तो आपको कुछ नहीं कहेंगे मुझे जान से मार देंगे। 

जिल्ले हुमा ने कहा।

जिल्ले हुमा तुम क्यों डरती हो आगा जान से इतना? 

मेरे होते हुए तुम्हें कोई, टच भी नहीं कर सकता ।

चाहे वह आगा जान ही क्यों ना हो? 

हाशिम जिल्ले हुमा को  यकीन दिलाने की कोशिश कर रहा था। 

क्या कहा आपने की चाहे वह आगा जान ही क्यों ना हो। आप उनसे भी नहीं डरते हैं? 

जिल्ले हुमा को यकीन नहीं हो रहा था।

हाशिम की बात पर।

हां  चाहे वह आगा जान ही क्यों ना हो।

  अगर बात सही है तो मैं उनसे भी नहीं डरता हूं?

हाशिम बोला।

मै अल्लाह को गवाह बना कर तुमसे शादी करना चाहता हू

हाशिम की ऑखो मे इतनी सच्चाई थी।

के जिल्ले हुमा के लफ्ज ही गुम हो गए वो खामोश हो गई।



🔹 Next Short Part 


चांदनी खिड़की से फिसलती हुई फ़र्श पर उतर रही थी।

जिल्ले हुमा अब भी खामोश खड़ी थी, जैसे उसकी ज़ुबान पर किसी ने ताले जड़ दिए हों।


हाशिम ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा।

“खामोशी भी कभी-कभी जवाब होती है…

मगर मैं तुम्हारे लफ्ज़ सुनना चाहता हूँ, हुमा।”

जिल्ले हुमा की पलकों से आंसू गिर पड़े।


“अगर मैंने हां कहा…

तो मेरी ज़िंदगी पहले से ज़्यादा मुश्किल हो जाएगी,”

वह टूटे हुए लहजे में बोली।


“और अगर तुमने ना कहा…”

हाशिम की आवाज़ पहली बार लड़खड़ाई,

“तो मेरी ज़िंदगी बे-मानी हो जाएगी।”


हवा ने परदे को हिलाया,

चांद जैसे दोनों की तक़दीर सुन रहा हो।


जिल्ले हुमा ने कांपते हुए सिर उठाया।

“मैं आपको खोने से डरती हूँ, हाशिम साहब…”


हाशिम ने उसके माथे पर हाथ रखा।

“तो फिर मुझे अपना समझो…

डर ख़ुद रास्ता बदल लेगा।”


और उसी पल,

हवेली की सीढ़ियों पर किसी के क़दमों की आहट गूंजी…


(जारी है…)



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🔹 Readers Ke Liye SMS

आप सभी का दिल से शुक्रिया ❤️

इस कहानी को पढ़ने के लिए।

कृपया इसे Share और Comment ज़रूर करें ताकि मुझे पता चल सके

आप इस कहानी को दुनिया के किस देश और किस कोने से पढ़ रहे हैं।

आपका एक कमेंट

मेरे अंदर और लिखने का हौसला पैदा करता है 🥰

आपका प्यार ही मेरी सबसे बड़ी ताक़त है।



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