“जब शक ने डर का रूप ले लिया – हाशिम और जिल्ले हुमा की सच्चाई | कंदील एपिसोड”

 


aaga jaan ka gussa


तुम जैसे गिरे हुए जालील इंसान ने सोच भी कैसे लिया कि मैं तुम्हारे साथ कंदील को, विदा करूंगा।

क्या तुमने इस बात से अन्दाजा नहीं लगाया, कि कंदील तुमसे कितनी नफरत करती है?

उसने तलाक नामे पर दस्तखत कर दिए।

आगा जान उस शख्स से फोन पर बात कर रहे थे। 

और हाशिम यह समझने की कोशिश कर रहा था, कि यह किस शख्स से कंदील के मुत्तालिक बात कर रहे हैं।

हां कंदील ने उन पेपर्स पर साइन अपनी मर्जी से किए हैं। आगा जान ने कहा।

मैं भी देखता हूं तुम कंदील का और मेरा क्या बिगाड़ सकते हो?

मेरी पोती के साथ अगर तुमने कुछ भी गलत करने की कोशिश की।

तो तुम्हारे रिश्तेदार तुम्हारी लाश तक नहीं ढूंढ पाएंगे।

आगा जान उस शख्स को धमकी दे रहे थे।

और फिर बहुत ही गुस्से में आगा जान ने उस शख्स का फोन कट कर दिया।

क्या हुआ आगा जान कौन था यह शख्स? 

हाशिम ने जब यह देखा ,कि उसका फोन काट ने के बाद भी आगा जान बहुत गुस्से में है।

तो उनसे सवाल किया।

यह वही शख्स है, इसके बारे में मैंने तुम्हें पहले ही बताया था।

आगे जान ने पूरी बात, हाशिम को बताते हुए कहा।

मगर आगा जान  ये तलाक के पेपर्स का क्या जिक्र था? हाशिम ने फिर से आगा जान से सवाल किया।

हाशिम मैं तुम्हें एक-एक बात बता दूंगा।

बस मुझे थोड़ा सा वक्त दो  आगा जान ने कहा। 

उनकी बात सुनकर हाशिम ने अपनी गर्दन को हां में हिलाया और मुस्कुराने लगा।


हाशिम  हवेली आने पर नई-नई परेशानी और उलझन में उल्झता ही जा रहा था।

वह एक उलझन से को सुलझाने की कोशिश करता ,फिर दूसरी उलझन में उलझ जाता था। 

और इन्हीं उलझन को सुलझाने के लिए उसने फैसला कर लिया कि जितनी भी उलझने है।

उनको वह उलझा कर ही रहेगा।

अभी भी अपने रूम के बाहर टेरिस पर से वह नीचे देख रहा था।

के अचानक से  उसे काले लिबास में वो टेरिस पर आती हुई नजर आई?

हाशिम ने सोच लिया था, इस बार वह उससे सब कुछ पूछ कर ही रहेगा।

हाशिम ने देखा कि वह सीढीओ के ऊपर चढ़ रही थी।

इसका यही मतलब था, कि वह टेरिस की तरफ ही आने की कोशिश कर रही थी।

जिल्ले हुमा टेरिस पर आकर कंदील की के रूम की तरफ जाने लगी थी। 

के अचानक से उसे पीछे से हाशिम ने आवाज लगाई?

जिल्ले हुमा।

हाशिम की आवाज सुनकर उसके पैर वही जमकर रह गए थे।

उसकी समझ में नहीं आ रहा था, कि हाशिम ने उसे क्यों रोका है?

वह खामोश रही उसने कोई जवाब नहीं दिया ,वह हाशिम के बोलने का इंतजार कर  रही थी।

जब हाशिम ने कोई जवाब नहीं दिया, तो जिल्ले हुमा ने फिर अपने कदमों को आगे बढ़ाने की कोशिश की कंदील के रूम की तरफ।

रुको मेरी बात सुनो पहले। 

हाशिम ने हुक्म देते हुए कहा।

फिर से हाशिम की आवाज सुनकर जिल्ले हुमा के कदम वहीं रुक गए थे।

लेकिन अभी बोला उसने कुछ भी नहीं था।

हाशिम उसका हाथ पकड़ कर अपने रूम तक ले आया। जिल्ले हुमा को अपने रूम में धकेल कर उसने दरवाजा बंद कर दिया।

जिल्ले हुमा का दिल बहुत जोरों से धड़कने लगा, के हाशिम  इस तरह से उसे खींच कर अपने रूम में लेकर आया था।

वह आने वाले  अन्देशो से डरने लगी।

,कि ना जाने क्यों वह उसको इस तरह से खींचकर अपने रूम में लेकर आया था?

यह क्या कर रहे हैं आप?

अपने रूम का दरवाजा खोलिए, और मुझे बाहर जाने दीजिए। 

जिल्ले हुमा ने कहां?

जिल्ले हुमा ने पूरी तरह से उस काले लिबास मे खुद के चेहरे को और बदन को ढके हुए थी।

कौन हो तुम? 

हाशिम ने सवाल किया।

उसका हाथ अभी भी हाशिम के हाथ में था ,और हाशिम दरवाजे की तरफ पीठ करके खड़ा हुआ था ,उसके सामने ही जिल्ले हुमा थी।

मैंने बताया ना आपको मेरा नाम जिल्ले हुमा है।

जिल्ले हुमा ने कहां?

यह तो मैं जानता हूं कि तुम्हारा नाम जिल्ले हुमा है। 

मगर मैं तुम्हारी पहचान जानना चाहता हूं। 

हाशिम ने उसका चादर हनुमान दुपट्टा, उसके सर पर से हटाते हुए कहा।

हाशिम के इस हमले से वह डर गई, और डर कर पीछे हटने लगी। 

वह जैसे-जैसे डर के पीछे हट रही थी ,हाशिम उसके और नजदीक आ रहा था।

साहब जी यह क्या कर रहे हैं आप ,आपको खुदा का वास्ता ऐसा मत कीजिए? 

जिल्ले हुमा की खूबसूरत बड़ी-बड़ी आंखों में आंसू आ गए थे।

वह इस वक्त  बेतहाशा हाशिम से डर रही थी। 

जिल्ले हुमा पीछे  खिसकते  खिसकते दीवार से जा लगी थी। 

और हाशिम भी उसके पास ही आ गया था।

हाशिम कुछ लम्हे के लिए उसके खूबसूरत और भोले भाले चेहरे में  खो सा गया था। 

लेकिन जैसे ही उसकी आंखों से आंसू गिरे।

हाशिम को होश आया।

यह क्या कर रही हो ,तुम क्यों रो रही हो?

हाशिम  ने उसकी थोड़ी को ऊपर करते हुए उसकी आंखों में देखकर, जिल्ले हुमा से सवाल किया। 

वह हाशिम की आंखों में बहुत गौर से देखने लगी।

फिर जिल्ले हुमा ने अपनी नजरों को नीचे झुका लिया।

मेहरबानी करके साहब जी ,आप ऐसा मत कीजिए मेरे साथ। 

अल्लाह के नजदीकी बहुत बड़ा गुनाह होता है ये। 

जिल्ले हुमा ने कहा।

हाशिम की तो इस लड़की की बात सुनकर चौदाह तबक रोशन हो गए थे। 

वह तो इस घिनौने और गंदी हरकत के बारे में सोच भी नहीं  सकता था।

जो  राय इस लड़की ने उसके लिए अपने दिल में कायम  कर ली थी।

क्या बकवास है यह? 

मैं क्या करना चाहता हूं तुम्हारे साथ?

हाशिम ने गुस्से से उसका हाथ दोबारा खींचते हुए अपनी नजदीक किया।

जिल्ले हुमा उसकी बात सुनकर खामोश हो गई जिल्ले हुमा के समझ में नहीं आ रहा था कि इस वक्त वह हाशिम से क्या बोले?

जवाब दो मैं क्या करना चाहता हूं तुम्हारे साथ? 

हाशिम  ने दोनों कंधों से जिल्ले हुमा को पकड़ते हुए कहा था।

इतनी गंदी ना मेरी  सोच है, और ना मैं मेरा करैक्टर, जो तुमने इस वक्त मेरे बारे में सोच लिया। 

हाशिम ने जिल्ले हुमा को दोनों कंधों से छोड़ते हुए दीवार की तरफ धकेलते हुए कहा।

हाशिम जिल्ले हुमा की तरफ से पीठ मोड़कर खड़ा हो गया।

   जिल्ले हुमा हिचकियों के साथ तेज आवाज में रोने लगी।

हाशिम जो गुस्से की वजह से पीछे मुड़ा था।

जिल्ले हुमा के रोने की आवाज से, उसने गुस्से मे अपनी मुट्ठियों को बंद कर लिया।

वह नहीं जानता था, कि उसे इस लड़की का रोना क्यों बर्दाश्त नहीं हो रहा था? 

हालांकि वह से बचपन से नहीं जानता था उस जिल्ले हुमा को , कुछ दिन हुए थे उस लड़की को देखे हुए।

फिर भी उसका रोना हाशिम से बर्दाश्त नहीं हो रहा था।

शशशशशशश खामोश हो जाओ तुम 

हाशिम फिर से जिल्ले हुमा की तरफ पलटा और उसने, उसके फोटो पर अपनी उंगली रखते हुए कहा।

जिल्ले हुमा अपनी आंखें फाड़ कर हाशिम को देखने लगी। 

उसकी आंखें आंसुओं से झिलमिल हो रही थी।

तुम जानती हो , मुझे तुम्हारा रोना बर्दाश्त नहीं होता।

हाशिम बेख्याली में उससे यह बात बोल गया था। 

जिल्ले हुमा कि ऑखे और  बड़ी हो गई थी ,हाशिम की बात सुनकर।

मैं सिर्फ यह जानना चाहता था ,कि कौन हो तुम हकीकत क्या है तुम्हारी? 

क्योंकि जितनी खूबसूरत हो तुम? 

तुम मुलाजिमा नहीं हो सकती हो। 

तुम्हें देखकर ऐसा लगता है, कि तुम किसी रियासत की शहजादी हो।

हाशिम उसकी आंखों की तरफ देखकर गुम होते हुए जिल्ले हुमा से कह रहा था। 

जिल्ले हुमा भी सब कुछ भूल कर सिर्फ उसकी बातों को सुन रही थी।

साहब सच्चाई यही है, कि मै इस घर की मुलाजिमा हूं। 

और गार्डन की पीछे की तरफ जो मुलाजिमाओं के क्वार्टर है मैं वहां रहती हूं।

यही मेरी सच्चाई है। 

जिल्ले हुमा ने अपनी नजरों को नीचे करते हुए कहा।

नहीं  यह सच नहीं है ,तुम्हारी सच्चाई कुछ और है।

तुम इस हवेली की मुलाजिमा नहीं हो।

हाशिम पूरे कॉन्फिडेंट के साथ जिल्ले हुमा से यह बात बोल रहा था।

यह आपके दिल का इख्तियार है साहब जी, की आप मुझे इस हवेली की मुलाजिमा नहीं समझ रहे हैं।

मगर सच्चाई तो यही है ,मैं हवेली की मुलाजिमा ही हूं।

हाशिम के हाथ जिल्ले हुमा के कंधे के ऊपर दोनों तरफ दीवार पर रखे हुए थे। 

जिल्ले हुमा हाशिम के हाथों के बीच में सिकुड़ी हुई खड़ी  थी।

साहब जी मुझे जाने दीजिए ,नहीं तो अम्मी जान मुझसे सवाल करेंगी कि मैंने इतना वक्त कहां गुजारा? 

जिल्ले हुमा ने हाशिम से कहा।

हाशिम ने अपने हाथों को जिल्ले हुमा के कंधों के ऊपर से  दीवार से हटाया। 

और रूम का दरवाजा खोलकर एक तरफ खड़ा हो गया।

ठीक है तुम जाओ। 

हाशिम ने उसे बाहर जाने के लिए कहा।

तो वो दरवाजे से बाहर निकलने लगी।

जिल्ले हुमा। 

हाशिम ने पीछे से पुकारा।

जिल्ले हुमा के कदम वहीं रुक गए।

सीढीओ पर से संभाल कर उतरना।

कहीं गिर ना जाओ। 

हाशिम  ने जिल्ले हुमा से कहा। 

क्योंकि वह जिस तरीके का लिबास पहनती थी?

उसमें बहुत संभाल कर चलने की जरूरत थी।

काफी बार ऐसा हो सकता था, कि इंसान उसकी वजह से गिर सकता था। 

हाशिम की बात सुनकर जिल्ले हुमा  वहां से चली गई।

हाशिम ने दरवाजा बंद किया। 

और गुस्से से दरवाजे पर मुक्का मारने लगा।

क्योंकि हाशिम को इस वक्त ,इस बात पर बहुत गुस्सा आ रहा था।

किस जिल्ले हुमा ने उसे बहुत गलत समझ लिया था। 

हाशिम उन रहीसजादो में से बिल्कुल नहीं था।

जो किसी का भी फायदा उठाता।

या कोई भी गलत और घिनौनी हरकत करता।

आखिर क्या है।

जिल्ले हुमा की सच्चाई जो जानना चाहता है हाशिम 

जानने का लिए पढ़ते रहिए ।




                            कंदील


✅ Next Short Part / Hook 


— अगला भाग —

हाशिम के दिमाग में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा था — “आखिर कौन है जिल्ले हुमा?”

इधर कंदील के तलाक की खबर हवेली में तूफान बनकर फैलने ही वाली थी…

और उधर जिल्‍ले हुमा की असली पहचान से जुड़ा एक ऐसा राज खुलने वाला था,

जो हाशिम और कंदील — दोनों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल देगा…


जारी रहेगा…



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