“जिल्ले हुमा का छुपा हुआ सच – किस राज़ ने उसकी खूबसूरती को कैद कर दिया?”
आज न जाने क्यों उसकी आंखों से नींद कोसो दूर थी?
वो ना चाहते हुए भी उस शख्स के बारे में सोच रही थी जिससे वह बिल्कुल अनजान थी।
बार-बार सुबह का मंजर किसी फिल्म के सीन की तरह उसकी की आंखों के सामने लहरा रहा था।
उसकी सुनहरी खूबसूरत आंखें,उस शख्स को भूलने के लिए तैयार ही नहीं थी।
वह दूसरी तरफ करवट बदल कर लेट गई।
क्योंकि उसने सोचा कि अगर उसकी वालिदा ने इस वक्त उसे जागते हुए देख लिया?
तो न जाने कितने सवाल करेंगी।
जिल्ले हुमा मत सोच उसके बारे में, कहां वह और कहां तू?
दोनों में जमीन आसमान का फर्क है।
दोनों का ही कोई मेल नहीं है।
उसने अपने जहन से यह बात हटाने की
कोशिश की।
मेरी हैसियत इस तरह की नहीं है, कि मैं इतने बड़े-बड़े ख्वाब देखूं।
आसमान और जमीन में बहुत फर्क होता है।
उन दोनों का मिलना नामुमकिन सी बात है।
और इतना फर्क मुझ में और शख्स के दरमियान है।
तो क्यों मैं बार-बार उस शख्स के बारे में सोच
रही हूं?
जिल्ले हुमा उठकर बैठ गई।
और बहुत आहिस्ता से उठकर, अपने कमरे की उस टूटी फूटी खिड़की के पास चली गई।
जहां से चांद अपनी आबो ताब पर चमकता हुआ बहुत खूबसूरत नजर आता था।
जिल्ले हुमा ने चान्द को देखा और सोचने लगी थी।
कि आसमान में चांद इतनी दूर रहने के बाद भी, सबको रौशनी से नवाजता है।
अल्लाह ताला ने उसे इतनी ताकत आता कर रखी है।
कि उसकी रोशनी जब फैलती है तो सारे जहां में बिखर जाती है।
जिल्ले हुमा बहुत गौर से उस चान्द को देख रही थी।
जो खूबसूरती के साथ-साथ। बड़ी शान से आसमान में चमक रहा था।
सबको पता था कि वह चांद है ,और वह अल्लाह के करम से चमकता है।
उसे अपनी पहचान छुपाने की कोई जरूरत नहीं थी।
और वह क्यों अपनी पहचान छुपाता?
उसे तो अल्लाह ताला ने चमकने के लिए ही बनाया था।
फिर जिल्ले हुमा के लिए ऐसा क्यों था?
क्यों उसे अपनी पहचान छुपानी पड़ रही थी?
क्यों उसे यह हुक्म दिया गया था ,कि वह किसी के सामने ना आए?
सबके सामने खुद को छुपा के रखें।
उसका खूबसूरत चांद सा चेहरा।
किसी की भी आंखों में चुभने ना लगे।
कोई जिल्ले हुमा को देख ना ले।
उसकी अम्मी जान ने उसे यह हुकुम क्यों दिया था, कि वह किसी भी शख्स के सामने ना आए?
अपनी खूबसूरती को छुपा कर रखें।
क्या उसकी खूबसूरती इतनी दागदार थी?
की कोई अगर देख लेता।
तो गुनाह हो जाता।
और कौन सा गम उसकी जिंदगी में ऐसा था जो उसे? काले कपड़ों के अलावा कोई दूसरा कपड़ा नहीं पहनने देता था।
जिल्ले हुमा के जहन में हजारों सोचे थी।
मगर इसका जवाब वह किससे मांगती।
वह चांद की रौशनी में अपने खूबसूरत लंबे सुनहरी बालों को देखने लगी।
जो कमर तक लंबे थे।
कभी-कभी तो छोटे से टूटे-फूटे घर मे जिल्ले हुमा का दम घटने लगता था।
मगर उसके लिए जो हुक्म दिया गया था।
उसको उस हुकुम पर चलना बहुत जरूरी था।
उसने पलट कर अपने पीछे देखा।
ठीक उसके पीछे खाट पर जो वह वुजूद लेटा हुआ था।
उस वुजूद का जिल्ले हुमा की जिंदगी पर बहुत बड़ा एहसान था।
और उस एहसान की तबेदारी करना ही।
जिल्ले हुमा का फर्ज था।
हुमा पलट कर आहिस्ता आहिस्ता चलते हुए, उस वजूद के नजदीक आई।
और घुटनों के बल बैठ गई।
घुटनों के बल बैठकर, उसने उनका कर सहलाने शुरू किया। वह उन्हें बहुत गौर से देख रही थी।
कितना सुकून था उनके चेहरे पर, कितना बेफिक्र होकर सो रही थी वह।
जिल्ले हुमा को महसूस होता था, कि वो जब सोती हैं तो ऐसा लगता है जैसे मुस्कुरा रही है।
जिल्ले हूमा उनको देखकर मुस्कुराने लगी।
अम्मी जान अल्लाह ताला आपको इसी तरह मुस्कुराता रखे हमेशा।
जिल्ले हुमा ने अल्लाह से दुआ मांगी।
तभी उन्होंने अपनी आंखों को खोल दिया।
हम क्या हुआ रात के इस पहर तुम क्यों जाग रही हो?
उन्होंने हुमा की तरफ देखते हुए सवाल किया।
कुछ नहीं अम्मी जान चान्द की रौशनी बहुत तेज आ रही थी तो उस वजह से मैं सो नहीं पा रही थी।
जिल्ले हुमा ने उनसे सच बोला।
ओह मेरी चांद।
उन्होंने उसके सर पर प्यार से हाथ फेरा।
नजरअंदाज कर दो इस रौशनी को ,सोने की कोशिश करो।
उन्होंने उसके सर को चुमते हुए कहा।
जिल्ले हुमा ने मुस्कुरा कर अपनी गर्दन को हिलाया।
और अपनी खाट पर सोने के लिए दोबारा लेट गई।
मगर हाल अभी भी वही था, उसकी आंखों से नींद कोसो दूर थी।
फिर भी उसने अपनी वालिदा के सामने अपनी आंखों को बंद कर लिया।
जब उसकी वालिदा ने देखा, कि उसने अपनी आंखें बंद कर ली है वह सोने लगी है।
तो उन्होंने मुस्कुरा कर दूसरी तरफ करवट बदल ली।
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मे आई कमिंग।
उसने बाहर से दरवाजा खटखटाते हुए कहा।
यस कमिंग।
अंदर से डॉक्टर बख्श की आवाज आई।
कंदील बिना देर किए, डॉक्टर बख्श के केबिन में चली गई।
कंदील जैसे उनके कमरे में दाखिल हुई, तो कंदील ने देखा। डॉक्टर बख्श अपनी आंखों को बंद किए हुए, अपनी कुर्सी से टेक लगाए थे।
बहुत ज्यादा सीरियस नजर आ रहे थे।।
आपने मुझे बुलाया डॉक्टर बख्श
कंदील ने कहा।
प्लीज सिट डाउन कंदील।
डॉ बक्श ने आंखें नहीं खोली।
जिस पोजीशन में बैठे हुए थे ,इस पोजीशन में उन्होंने कंदील से बैठने के लिए कहा।
और कंदील खामोशी से बैठ गई।
आपने मुझे बुलाया था, डॉक्टर बख्श,कुछ देर जब कंदील खामोश बैठी थी ।
और उसने देखा कि डॉक्टर बख्श भी कुछ नहीं बोल रहे हैं तो कंदील नहीं पूछा।
कंदील मुझसे बर्दाश्त नहीं होता, कि कोई तुम्हारे बारे में गलत सोचे या गलत बोले।
डॉ बख्श ने आंखें खोलकर कंदील की तरफ देखते हुए कहा कंदील ने देखा कि डॉक्टर बख्श की आंखें लाल हो रही थी।
क्या हुआ डॉक्टर बख्श, कंदील समझ रही थी कि डॉक्टर समीर की बातों से? डॉक्टर बक्श हर्ट हो गए हैं।
कंदील आप डॉक्टर समीर को कब से जानती हो?
डॉक्टर बख्श ने यह सवाल किया।
डॉ बख्श जबसे मैं इस अस्पताल में आई हूं, तब से डॉक्टर समीर को जानती हूं।
कंदील ने सच बोलते हुए कहा।
आपके और डॉक्टर समीर के बीच में जो रिश्ता है, क्या उस रिश्ते से सब लोग वाकिफ हैं?
डॉक्टर बख्श के इस सवाल से, कंदील के माथे पर बल पड़ गए थे।
डॉ बख्श आपसे बेहतर कोई नहीं जानता, कि मेरा समीर से कोई रिश्ता नहीं है।
कंदील ने कहा।
बट कंदील ,डॉक्टर बख्श बोलते बोलते चुप गए थे ।
फिर उन्होंने दोबारा बोलने शुरू किया।
डॉक्टर समीर तो बोल रहा था।
के आप और वह दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं?
डॉ बख्श ने यह कहते हुए बहुत गौर से कंदील के चेहरे का जायजा लिया।
क्या बकवास कर रहा है वह डॉक्टर समीर?
अचानक से कंदील के चेहरे पर गुस्सा उभर आया था।
ना तो मेरा डॉक्टर समीर से कोई रिश्ता है।
और ना ही मैं उसे पसंद करती हूं।
कंदील बोली।
वह बोल रहा था ,कि यह उसका और आपका पर्सनल मैटर है।
और आप दोनों ही एक दूसरे को पसंद करते हैं।
इसलिए उस दिन जो कुछ भी कैंप में हुआ था, उसमें आप दोनों की रजामंदी शामिल थी।
डॉ बख्श बहुत गौर से कंदील के चेहरे को देख रहे थे।
यह बातें सुनकर कंदील के चेहरे के जो तास्सुरात बदल गए थे।
उससे डॉक्टर बख्श काफी हद तक पुरसुकून को नजर आने लगे थे।
झूठ ,वह शख्स बहुत झूठा है डॉक्टर बख्श।
मैं नहीं जानती थी उसने मुझे टेन्ट के बाहर क्यों बुलाया है? उसको क्या जरूरी बात करनी थी मुझसे?
उस रात जो उसने घिनौनी हरकत की थी।
मेरा तो मन कर रहा है, कि उसे गोली से उड़ा दू।
कंदील को अचानक बहुत तेज गुस्सा आ
गया था।
फिर जवाब मे डॉक्टर बख्श ने ,समीर के और उनके दरमियां जो भी बातें हुई थी वह सब क्लीयरली कंदील को बता दी। और कंदील को बड़ी हैरानी हो रही थी ,डॉक्टर समीर के इतना झूठ बोलने पर।
उसे नहीं पता था कि डॉक्टर समीर उसके और, अपने मुताल्लिक कितनी झूठी बातें करने लगेगा।
डॉ बख्श एक कैजुअल सी दोस्ती थी, मेरी उस शख्स के दरमियान वह भी इसलिए कि मुझे लगता था, कि वह एक नेक शरीफ इंसान है।
बट उस रात के बाद, मैं डॉक्टर समीर से सख्त नफरत करती हूं।
कंदील ने अपने दिल की बात डॉक्टर बख्श
को बताई।
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और डॉक्टर बख्श को यह बात सुनकर बहुत सुकून मिला था और खुशी मिली थी ।
वो अच्छी तरह से समझ चुके थे, कि कंदील के दिल में कहीं से कहीं तक डॉक्टर समीर के लिए कोई भी जगह मौजूद नहीं है।
यह सब डॉक्टर सामीर ने जितनी बातें बोली थी वह उसका एक-एक लफ्ज सिर्फ झूठ और झूठा था।
उसमें कहीं भी सच्चाई का कोई वजूद ही नहीं था।
कंदील उस वक्त में मजबूर था, मैं इतना मजबूर था कि मैं यह नहीं बोल सकता था ,के आप मेरी शारीयई बीवी हो? नहीं तो उस समीर की जाने में क्या हालत करता?
डॉक्टर बख्श ने कहा।
यह सुनकर कंदील ने अपनी निगाहों को झुका लिया।
ठीक है तो कह रहे थे डॉक्टर बख्श वो उनकी शरियाई बीवी थी, लेकिन वह सबके सामने इस बात को नहीं बोल सकते थे।
कंदील तुम्हें जल्द से जल्द हवेली में सब लोग से यह बात कहनी पड़ेगी।
के तुम्हें रुखसत करके मेरे साथ भेज दे?
डॉ बख्श ने कहा।
नहीं तो मैं अब खुद को रोक नहीं सकता।
अगर कोई तुम्हारे बारे में कुछ गलत बोलेगा या गलत कहेगा।
तो ये बातें मेरी बर्दाश्त से बाहर होगी।
डॉ बक्श बोले।
सैफ इंशाल्लाह बहुत जल्दी में यह बात मालूम करूंगी। और आपको बताऊंगी।
कंदील ने कहा।
डॉक्टर बख्श कंदील को देखकर मुस्कुराने लगे।
कंदील भी उन्हे देखकर मुस्कुराने लगी।
ओके डॉक्टर बख्श मैं चलती हूं।
मैं पेशेंट का ट्रीटमेंट कर रही थी, जब आपका एसएमएस मेरे पास पहुंचा।
कंदील ने कहा।
और वह पेशेंट मेरा इंतजार कर रहा होगा।
ठीक है डॉक्टर कंदील, आप जाकर अपने पेशेंट का ट्रीटमेंट कीजिए।
डॉक्टर बक्श ने कहा।
फिर कंदील उठकर रूम से बाहर चली गई।
जिल्ले हुमा की ज़िन्दगी का कौन सा एसा सच है जिसने जिल्ले हुमा को अपनी खूबसूरती छुपाने को मजबूर कर दिया है।
जानने का लिए पढ़ते रहिऐ।
कंदील
✅ Short Paragraph (Next Part Teaser / आगे की झलक)
जिल्ले हुमा अपनी ज़िन्दगी के उस सच के करीब पहुँचने वाली है, जिसे उसकी अम्मी जान सालों से छुपाती आई हैं। उसे यह मालूम नहीं कि उसकी खूबसूरती ही उसकी सबसे बड़ी मजबूरी थी या किसी काले साये से बचाने के लिए उसे पर्दे में रखा गया। दूसरी तरफ कंदील की ज़िंदगी एक नए मोड़ पर पहुँच चुकी है—डॉक्टर बख्श के दिल में उसके लिए जो इज़्ज़त और मोहब्बत है, अब वह खुलकर सामने आने वाली है। लेकिन क्या यह सब आसान होगा? या आने वाला वक्त दोनों की ज़िन्दगी में एक नया तूफ़ान लेकर आएगा?
जानने के लिए अगले पार्ट का इंतज़ार कीजिए…
✅ Readers Note (Afsana Wahid Style)
🌙✨ Readers Note — Stylish & Shayari Touch (Afsana Wahid Style)
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और बाहर के मुल्कों से मुझे पढ़ने वाले हर दिल का
मैं दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ।
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कंदील का हर नया पार्ट आपके तक पहुँचता है।
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