“जिल्ले हुमा और हाशिम: बारिश में जन्म लेती एक खौफनाक मोहब्बत”
Zille huma ka khuf
जिल्ले हुमा अपने कदमों को बहुत तेज बढ़ाते हुए सीडीओ पर चढ रही थी।
और वह चाह रही थी कि वह जल्द से जल्द हवेली के टेरिस पर पहुंच जाए।
क्योंकि बेगम साहिबा का हुकुम था, की हवेली के सारे? कपड़ों पर आज धूप लगाना है।
और ऊपर का हिस्सा धोबी घाट बन चुका था।
मगर इस वक्त आसमान को देखकर ऐसा लग रहा था।
कि बहुत तेज बारिश हो सकती है।
इसलिए जिल्ले हुमा चाह रही थी कि जल्द से जल्द वह टेरिस पर पहुंच जाए।
और जिल्ले हुमा अपनी कोशिश में कामयाब हो चुकी थी।
वह टेरिस पर पहुंच गई ।
उसने सारे कपड़ों को इकट्ठा करना शुरू कर दिउया।
क्योंकि अगर देर करती तो बारिश हो जाती और सारे कपड़े भीग जाते हैं?
अचानक से इतनी तेज हवा चलने लगी के जिल्ले हुमा का दुपट्टा सर से उतर कर नीचे आ गया था।
मगर इस वक्त जिल्ले हुमा को लगा कि इस छत पर कोई मौजूद नहीं है।
इसलिए उसने अपना दुपट्टा। ठीक करना मुनासिब नहीं समझा।
क्योंकि इस वक्त जो जरूरी काम था? उस काम को अंजाम दे रही थी।
जिल्ले हुमा ने वह सारे ही कपड़े इकट्ठे करके टेरिस पर बने रूम के अंदर रख दिए थे।
अब रूम को लॉक करके बाहर आ गई।
जिल्ले हुमा ने देखा की बारिश होना शुरू हो चुकी है।
उसको बहुत अच्छा लग रहा था ,उसकी जिस्म पर बारिश की बूंदे गिर रही थी।
इस वक्त वह खुद को भूलकर बारिश में नहाने में, गुम हो गई थी।
इस वक्त जिल्ले हुमा सब कुछ भूल चुकी थी।
उसे अपने वालिदा की कही हुई बातें भी याद नहीं थी।
और आज पहली बार उसे इतना अच्छा महसूस हो रहा था।
सबसे अनजान होकर वह इस बारिश को इंजॉय कर रही थी।
यही उसको देखकर किसी की सांस थमने लगी थी।
जिल्ले हुमा का खूबसूरत जिस्म काले लिबास में हीरे की तरह चमक रहा था।
उसकी आंखें इस वक्त बंद थी वह दोनों हाथों को फैला कर। बारिश में भीग रही थी।
उसका संग्गेमरमर जैसा जिस्म पर कपड़े भीग कर चिपक रहे थे ।
वह टेरिस की दीवार पर बड़े बड़े गमले लगे हुए थे ,वो उससे टेक लगाकर छुप कर जिल्ले हुमा को देख रहा था।
कौन है यह?
उसके मन ने सवाल किया।
जिल्ले हुमा के चेहरे पर एक प्यारी सी स्माइल थी।
जिससे वह और हसीन लग रही थी।
जिल्ले हुमा ने अचानक से अपनी आंखों को खोल दिया। और अपने चारों तरफ देखने लगी।
चारों तरफ देखने के बाद।
वह रोने लगी।
उसको रोता हुआ देखकर हाशिम अचानक से उसके सामने आ गया था।
क्या हुआ क्यों रो रही हो तुम?
हाशिम उसको गौर से देखते हुए सवाल कर रहा था।
हाशिम के इस तरह देखने पर जिल्ले हुमा की आंखें फट गई थी।
हुमा ने अपने मुंह का रुख मोड़ कर।
अपने कंधे पर पड़ा हुआ चादर नुमा दुपट्टा अपने सर से ढाका।
और खुद को छुपा लिया।
हुमा वहां से जाने के लिए आगे बड़ी।
वो जैसे ही वहां से जाने के लिए आगे बड़ी, हाशिम उसके सामने आ गया।
मेरे सवाल का जवाब दो क्यों रो रही थी तुम?
हाशिम उसके पास आ चुका था।
वह दो कदम उससे पीछे हटी।
जवाब दो।
वो जैसे पीछे हट रही थी, हाशिम आगे बढ़ रहा था।
हाशिम ने देखा उसकी खूबसूरत आंखों में बहुत डर था।
मेहरबानी करके आप मुझे जाने दीजिए यहां से।
जिल्ले हुमा ने कहा।
पहले मेरे सवाल का जवाब दो ।
तुम क्यों रो रही थी अभी?
हाशिम ने फिर कहा।
हाशिम को इतना कहना था कि जिल्ले हुमा की आंखों से पटपट आंसू बहने लगे।
अरे अरे प्लीज रोओ मत
हाशिम ने हाथ बढ़ाकर उसके मुंह से दुपट्टा हटाते हुए कहा।
हाशिम कुछ लम्हे बिना पलक के झपकाए उसको चेहरे को देखता रहा।
कौन हो तुम?
हाशिम ने फिर सवाल किया।
जिल्ले हुमा
उसने हिचकियों के दरमियान जवाब देते हुए कहा।
प्लीज इस तरह मत रोओ,जाने क्यों मुझे तुम्हारी आंखों में आंसू बर्दाश्त नहीं हो रहे हैं?
हाशिम उसके गालों पर से, बालों की लटों को हटाते हुए कहा।
वो ऑखे फाड़ कर हाशिम की तरफ देखने लगी।
जिल्ले हुमा ,जिल्ले हुमा किसी मुलाजिमा ने हाशिम को पीछे से आवाज़ लगाई।
हाशिम ने मुड़कर उस आवाज की तरफ देखा।
जैसे ही हाशिम ने मुड़कर, आवाज लगाने वाले की तरफ देखा।
जिल्ले हुमा को बहुत अच्छा मौका मिल गया था।
हाशिम की पनाह से बाहर निकलने का।
उसने बिना देर किए, अपने कदमों को आगे बढ़ाया और हाशिम के बिल्कुल पास से होते हुए, चली गई।
और हाशिम उसको जाते हुए देखने लगा।
किस तरह की लड़की थी हंसते-हंसते अचानक से रोने लगी? हाशिम सोचने लगा।
जिल्ले हुमा लगभग भागती हुई सीडीओ से नीचे उतर कर आई।
और किचन में आकर, किचन की दीवार से टेक लगाकर हाफने लगी।
उसकी सासे बहुत तेज तेज चल रही थी।
उसे वह मन्जर याद आने लगा।
जब हाशिम ने उसके बालों की लट को हटाया था।
उसके तो वहमो गुमान में भी यह बात नहीं थी।
कि उसे छुपाकर हाशिम देख रहा था।
और अगर यह बात उसकी वालिदा को पता चल जाती।
तो वह से बहुत ज्यादा नाराज होती।
अगर उसकी वालिदा ये जान जाती कि बिना दुपट्टे के। हाशिम ने उसे देखा है।
और वह अपने आप में मगन होकर बारिश को इंजॉय कर रही थी।
तो वो नाराज हो जाती , उनका नाराज होना ऐसा था।
जो जिल्ले हुमा पर बहुत भारी पड़ सकता था।
क्योंकि जिल्ले हुमा का उनके सिवा कोई दूसरा था ही नहीं?
ऐसा नहीं था कि वह उनसे डरती थी।
बस वह उनकी बहुत ज्यादा रिस्पेक्ट करती थी।
उनकी हर बात को वह आंखें बंद करके मान
लेती थी।
क्या हुआ जिल्ले हुमा तुम इस तरह से हाफ क्यों रहीं हो? उसके वालिदा जब किचन में आई तो उसको इस तरह से हफ्ते हुए देखकर बोली।
वो वो अम्मी जान मैं टेरेस पर से आ रही हूं कपड़ों को संभाल कर रखें। तो हाफने लगी।
उसने कहा।
और तुम्हारी यह कपड़े यह कैसे भीगी हैं? उन्होंने उसके कपड़ों को देखते हुए कहा।
कपड़े इकट्ठा करते वक्त। मैं बारिश के पानी में भीग गई थी। उसे वजह से यह कपड़े भी मेरे भीग गए।
दिल्ली घूमने अपने कपड़ों को अपने हाथ से ठीक करते हुए कहा।
ओहहहहहो
जोओ और कॉव्टर में जाकर अपने कपड़े चेंज करो बहुत खराब लग रहा है इस तरह तुम्हारे जिस्म पर तुम्हारे कपड़े चिपके हुए हैं।
आगा जान तुम्हें इस तरह देख लिया तो वह बहुत नाराज हो जाएंगे तुम्हारे साथ-साथ वह मुझ पर भी गुस्सा करेंगे।
उन्होंने जिल्ले हुआ से कहा और उसे अपने रूम की तरफ भेज दिया।
जिल्ले हुमा हवेली से जाते वक्त पीछे मुड़कर देख रही थी ।
कि कहीं वह शख्स उसे कहीं से देखा
तो नहीं रहा है।
उसने अपने रूम में आकर अपने दरवाजा बंद किया।
कपड़े चेंज करने के लिए अपने कपड़ों को तलाश करने लगी।
पुराने जमाने की लकड़ी की अलमारी खोलकर उसने अपने। दूसरे कल निवास को निकाल।
और तब्दील कर लिया।
हम उसका मन नहीं कर रहा था कि वह इस वक्त दोबारा हवेली में जाए।
उसको डर था कि कहीं उसे शख्स से दोबारा उसका सामना ना हो जाए।
कपड़े तब्दील करके वह अपने खाट पर करवट बदल कर ले गई थी।
हाशिम का उसके सामने आना और उसको गौर से देखना। और फिर उसके गालों पर से बालों की लटो को हटाना।
बार-बार यह मंजर उसकी आंखों के सामने लहरा रहे थे। वह अपने जहन को, इस बात से हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसका जहन उसे ,यही सोचने पर मजबूर कर रहा था।
यह सब कुछ मुझे नहीं सोचना चाहिए ,यह सब कुछ गलत है।
मेरी सोच के बारे में अगर मेरी वालिदा जान गई।
यह आगा जान को पता चल गया।
तो आगा जान मेरी जान ले लेंगे।
वह अपने दिलों दिमाग को समझने की कोशिश कर रही थी।
जैसे ही आगा जान का ख्याल उसके जहान में आया।
वह अंदर तक आप गई।
उसे अपने बचपन की वह बात याद आ गई जब वह अपने वालिद और वालिदा के साथ थी।
और आगा जान हवेली के कुछ लोगों के साथ आए थे।
उन लोगों के हाथों में बड़ी-बड़ी बंदूक थी।
जिल्ले हुमा को अच्छी तरह याद है ।
कि उस वक्त उसके वालिद घर पर नहीं थे।
वह उसकी वालिदा घर पर अकेले थे।
आगा जान ने उसकी वालिदा को धक्का देकर, जिल्ले हुमा को अपनी गोद में उठा लिया।
और उसके घर से बाहर निकल गए।
उसकी वालिदा रोती हुई उसके पीछे आई थी।
लेकिन तब तक आगा जान उसकी गोद में लेकर अपनी गाड़ी में रवाना हो चुके थे।
जिल्ले हुमा छोटी थी इसलिए अपने वालिदा के पास जाने के लिए रो रही थी।
लेकिन आगा जान का दिल इस बात पर नही पसीजा वह उस जगह से उसे लेकर आ गए थे।
जैसे ही आगा जान का जिक्र आता था।
बचपन का यह मंजर जिल्ले हुमा के आंखों के सामने कभ भी लहराता रहता था।
इसके अलावा उसे कुछ याद नहीं था।
वह नहीं जानती थी फिर वह दोबारा
किस तरह से अपने वालिदा के साथ रहने लगी थी।
लेकिन बचपन के इस मंजर ने उसे अंदर तक हिला कर रख दिया था।
वह आगा जान से बेइंतहा डरती थी।
उस हादसे के बाद दोबारा कभी वो आगा जान के सामने हाजिर नहीं हुई थी।
और आगा जान के हुकुम पर ही वह इस तरह का लिबास पहनती थी।
वह अपनी छोटी थी टूटी खिड़की के पास आकर।
उस बड़ी सी हवेली को देख रही थी।
इस हवेली से उसका कोई ताल्लुक नहीं था ।
फिर भी वह यहां मौजूद थी।
इस हवेली के मालिक की हुकुम से जीती थी।
और उनके हुकुम से ही कपड़े पहनती थी।
बड़ी ही अजीब किस्म की जिंदगी थी उसकी।
वह अपने हाथों की लकीरों को देखने लगी।
जेने क्या लिखा था उसके हाथों की लकीरों में?
उसकी समझ ही नहीं आता था।
इस वक्त बहुत खूबसूरत मौसम हो रहा था। उसकी खिड़की पर ठंडी ठंडी हवा चलती हुई महसूस हो रही थी। जो इस मौसम को और खूबसूरत बना रही थी।
वह कुछ देर यूं ही खिड़की के पास खड़ी रही।
फिर अपने किचन में आकर खाना बनाने की तैयारी करने लगी।
✅ Short Next Part
बारिश थम चुकी थी…
मगर जिल्ले हुमा के दिल में उठी हलचल अभी भी नहीं थमी थी।
वह किचन के चूल्हे के सामने खड़ी थी, मगर उसकी उंगलियाँ काँप रही थीं।
हर लम्हा उसे लग रहा था कि कोई… कहीं से उसे देख रहा है।
उसी वक्त हवेली के आंगन से भारी जूतों की आवाज़ गूँजी।
जिल्ले हुमा का दिल जैसे हलक तक आ गया—
क्योंकि ये आवाज़ वही थी…
जो उसने सालों पहले सुनी थी।
आगा जान…!!
वह घबराकर एक कदम पीछे हट गई।
कहीं यह बारिश में उसका भीग जाना…
और हाशिम का उसे देख लेना…
सबकुछ किसी तूफ़ान की शुरुआत तो नहीं?
✨ Readers के लिए खास Message
Hello dosto,
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तो प्लीज़ अपने कीमती
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आपकी राय मुझे और बेहतर लिखने की हिम्मत देती है।
और हाँ,
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और हमारा यह छोटा-सा कहानी परिवार और बड़ा हो जाए।
Shukriya dosto,
आपका साथ ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। ❤️🖋️
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