“कंदील और छोटे नवाब हाशिम – हवेली का अनकहा राज़ | Agha Jaan’s Hidden Truth Revealed”

 


Kandeel ka ghar me dakhil hona

उसने जैसे ही हवेली में कदम रखा।

तरह-तरह के खानों की खुशबू उसकी नाक मे घुस रही थी। वो उन खुशबू को सुन्गती हुई आगे बड़ी।

रहमत बीवी रहमत बीवी कंदील ने रहमत बीवी को आवाज लगाना शुरू किया।

जी बीबी जी। 

कुछ ही मिनट बाद रहमत बीबी, बोतल के जिन की तरह कंदील के सामने हाजिर होकर बोली।

आज घर में खाने की इतनी अच्छी-अच्छी खुशबू आ रही है। क्या कोई गेस्ट हमारी हवेली पर आ रहा है? 

कंदील ने रहमत बीवी से कहा।

नहीं कंदील बीबी  कोई गेस्ट नहीं आ रहा है।

बस सारे खाने छोटे नवाब की पसंद के बनाए जा रहे हैं। इसलिए कई तरह के खाने की खुशबू आ रही है।

रहमत बीबी ने जवाब दिया।

छोटे नवाब ,कौन छोटे नवाब? 

कंदील समझ नहीं पाई थी, कि वह किसके मुताल्लिक बात कर रही हैं।

वह बीबी जी हाशिम साहब आए ना, बाहर से मैं उनके बारे में बात कर रही हूं।

रहमत बीबी ने कहा।

हाशिम साहब ओहहहह कंदील के मुंह से निकला।

हवेली के सारे लोग कहां है इस वक्त?

कंदील ने पूछा। 

वह बीबी जी पीछे की तरफ गार्डन एरिया में सब लोग हैं। रहमत बीबी ने बताया।

ठीक है रहमत बीबी आप जाइए।

कंदील के कहने पर रहमत बीबी चली गई।

कंदील फ्रेश होने के इरादे से अपने रूम की तरफ बढ़ने लगी।

कंदील ने रूम में आकर वार्डरोब से अपने कपड़े निकाले। और फ्रेश होने के लिए वॉशरूम में घुस गई।

कुछ ही देर में, वह फ्रेश होकर वॉशरूम से बाहर आ चुकी थी।

कंदील अपने बालों को टॉवल से रगड  रही थी, अचानक से उसे कल रात का ख्याल आ गया। 

जब डॉक्टर बख्श कंदील के रूम में मौजूद थे। 

एकदम से ही कंदील के चेहरे पर हंसी आ गई ।

डॉक्टर बख्श के बारे में सोचकर।

कल की गुजरी हुई रात कंदील जिंदगी में कभी भूल नहीं सकती थी। 

जब डॉक्टर बख्श और वह दोनों एक साथ थे।

इस वक्त वह कॉटन सिल्क के स्काई ब्लू कपड़े पहने हुई थी जो कंदील के ऊपर बहुत जच रहे थे।

वह मुस्कुराते हुए मिरर में देखकर अपने बालों में कंघी कर रही थी। 

डॉक्टर बख्श की फीलिंग और खुशबू अभी भी कंदील के कमरे में मौजूद थी।

उसे डॉक्टर बख्श की कही हुई वह बात याद आ गई।

आगा जान से उसे अपने और डॉक्टर बख्श के लिए अपनी रूकस्ती की बात करनी थी। 

अभी वह यही सोच रही थी कि।

किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी।

कौन है कंदील ने आवाज लगाई?

मैं हूं बीबी जी घर की मुलाजिमा  बाहर से आवाज आई।

अंदर आ जाओ। 

कंदील  अपने बालों में कंघी कर रही थी।

कंदील बीबी आपको नवाब साहब नीचे बुला रहे हैं। 

उस मुलाजिमा ने आकर कहा।

ठीक है मैं अभी आता हूं।

कंदील ने मुलाजिमा से कहा।

कंदील ने अपने दुपट्टे को बहुत ही सलीके से सर पर ढाका। और नीचे जाने के लिए अपने रूम से बाहर निकल गई।

उसने आगा जान के रूम के बाहर खड़े होकर दरवाजा खटखटाया।

आगा जान क्या मैं अंदर आ सकती हूं।

कंदील ने कहा।

हां कंदील बेटा आ जाओ अंदर। 

आगा जान की आवाज अंदर से आई।

कंदील आगा जान के रूम के अंदर दाखिल हो गई।

कंदील जब अंदर दाखिल हुई तो उसने देखा आगा जान उसके वालिद की फोटो के पास खड़े हुए थे। 

आगा जान के हाथ पीछे बंधे हुए थे।

और चेहरे पर बहुत सीरियस  तासुरात थे। 

और आगा जान के जस्ट बराबर में ही वह शख्स। 

हां यह वही शख्स था। 

जिससे आज सुबह, कंदील की बहस हो गई थी। 

इस शख्स को आगा जान के बराबर में खड़ा हुआ देखकर कंदील के माथे पर बल पड़ गए।

उस शख्स ने भी अजीब नजरो से कंदील को देखा ,तो अपनी गर्दन को अकड़ाते हुए, अपने हाथों को सीने पर बांध लिया।

आगा जान को देखकर ऐसा लग रहा था ,कि आगा जान उस शख्स से कोई सीरियस बात कर रहे थे।

अस्सलाम वालेकुम, आगा जान। 

कंदील सलाम करके, आगा जान के कंधे से लिपट गई थी।

क्या ड्रामेबाज लड़ाकी है ये हाशिम कंदील को देखकर सोचने लगा।

वालेकुम अस्सलाम बेटा। 

आगा जान ने कन्दील के सर पर हाथ फेरा।

दोनों की मुलाकात आज पूरे तीन दिन बाद हो रही थी।

हाशिम अपनी आंखों को छोटा करके उन दोनों के दरमियान का यह प्यार देख रहा था।

आपने मुझे याद किया था आगा जान। 

कंदील ने आगा जान से पूछा।

जी बेटा, बैठिए।

उन्होंने सोफे की तरफ इशारा करते हुए कंदील को बैठने का इशारा किया। 

और साथ में हाशिम और आगा जान भी बैठ गए थे।

आगा जान बीच वाली कुर्सी पर बैठे हुए थे। 

और एक साइड वाली कुर्सी पर हाशिम बैठा था। 

दूसरे साइड वाले सोफा पर कंदील बैठी थी।

कंदील बेटा हमें आपसे बहुत जरूरी बात करनी है। 

आगा जान  सीरियस होते हुए बोले।

जी आगा जान बोलिए। 

कंदील ने कहा।

कंदील ने अपनी निगाह को तिरछा करके उस शख्स की तरफ देखा ।

वह बहुत गौर से कंदील की ही तरफ देख रहा था।

कंदील यह बात तो आप अच्छी तरह से जानती हैं, कि हमारी जितनी भी प्रॉपर्टी है उसके तीन हिस्से हैं।

एक हिस्से के मालिक हाशिम ,शफी और जैन है।

और दूसरे हिस्से की मालिक लाएबा और जेबा है।

और तीसरा हिस्सा आपका है कंदील। 

आगा जान ने कहा।

जी हां आगा जान यह बात मैं अच्छी तरह से जानती हूं। कंदील ने कहा। 

मगर आगा जान, यह हमारा पर्सनल मेटर है।

आप किसी के सामने इसका जिक्र मत कीजिए।

कंदील ने तिरछी नजर से, हाशिम की तरफ देखते हुए कहा।

कंदील यहां पर हवेली के तीन लोग मौजूद हैं, कोई बाहर का नहीं है।

इसलिए मैं आपसे यह बात कह रहा हूं। 

आगा जान बोले।

कंदील की समझ में नहीं आ रहा था, कि एक गैर शख्स के सामने आगा जान अपनी प्रॉपर्टी के हिस्से का जिक्र क्यों कर रहे थे?

आप और मैं तो हवेली के ही है मगर। 

कंदील ने हाशिम  की तरफ देखते हुए कहा था , उसने अपनी  बात को वही मगर पर रोक दिया था।

कंदील की इस हरकत से हाशिम के माथे पर बल पड़ गए थे।

जाने क्या समझती है खुद को यह लड़की? 

हाशिम सोचने लगा।

हाहाहाहाहाहा 

नवाब साहब ने एक जोर का थाहाका लगाया।

कंदील तुमने हाशिम को नहीं पहचाना। 

नवाब साहब ने कन्दील के रिएक्शन पर कंदील से कहा।

ओहहहह तो ये है हाशिम। 

कंदील का मुंह खुला का खुला रह गया।

आप कंदील को अपनी बेवकूफाना हरकत पर पछतावा करने का मन कर रहा था।

वह अपने सर पर हाथ रख कर बैठ गई और हाशिम को देखने लगी।

जब हाशिम ने उसका यह रिएक्शन देखा, तो हाशिम के होठों पर हल्की सी हंसी आ गई थी।

हाशिम ने अपने दोनों हाथों से अपने कॉलर को ठीक किया।

माफ कर दीजिएगा, मगर इतने साल बाद इन्हें देखा तो मैं बिल्कुल ही नहीं पहचान नहीं पाई। 

कंदील ने यह लफ्ज कहे तो आगा जान से थे ।

लेकिन वह देख हाशिम की तरफ रही थी।

  कोई बात नहीं बेटा हो जाता है ,ऐसा कभी-कभी हमसे। आगा जान ने कंदील से कहा।

हां तो कंदील हम कहां पर थे? 

हमारी प्रॉपर्टी का जो हिस्सा है उससे तो हवेली के सारे लोग ही वाकिफ हैं। 

लेकिन एक बहुत बड़ा राज, हमारे और हाशिम के दरमियान है सिर्फ। 

नवाब साहब ने कहा।

कौन सा राज में वाकिफ  नही हू उससे आगा जान? 

कंदील बोली।

बेटा इस राज से कोई भी वाकिफ नहीं है, कि आपके वालिद ने अपना एक अलग बिजनेस सेट किया था।

जो अमेरिका में था।

उन्होंने इस पर बहुत मेहनत की थी।

उनके जाने के बाद हम इसकी देखरेख, मुलाजिमो  से करवाते रहे थे।

मगर अब  पिछले कुछ साल से, यह बिजनेस हाशिम देख रहा था।

और हमें बताते हुए बहुत खुशी हो रही है।

की हाशिम ने इस बिजनेस को और आगे बढ़ाया है। 

नवाब साहब ने बहुत ही फक्र से मुस्कुराते हुए हाशिम की तरफ देखा। 

हाशिम भी उनके साथ मुस्कुराने लगा था।

कंदील को आज पहली बार इस बात का पता चला था।

कि उसके पापा का, हवेली से अलग हटकर भी कोई बिजनेस था।

लिहाजा आप इस कंपनी की मालिक है।

इन पेपर्स पर आपके साइन की बहुत ज्यादा जरूरत है। नवाब साहब ने अपने बराबर वाली मेज पर से, एक फाइल उठाकर कंदील को देते हुए कहा।

आगा जान इन सब की क्या जरूरत है जब ये बिजनेस हाशिम देख रहे हैं?

तो आप इस चीज में मुझे इंवॉल्व मत कीजिए। 

कंदील को बहुत बड़ा झंझट लग रहा था यह सब करना।

नहीं बेटा रूल्स इस रूल्स आपको इन पेपर्स पर साइन करने पड़ेंगे। 

आगा जान ने हुकूम देते हुए कहा।

कंदील एक दो पेज पढ़ना स्टार्ट किया। 

और साइन कर दिए।

काफी  सारे पेज पढ़ने के बाद। 

कंदील को बोर महसूस होने लगा था ,इतने सारे पेज पढ़ने पर। 

इसलिए वह बिना पड़े साइन करने लगी थी।

इस बात से बेखबर, की इन सारे पेपर्स के दरमियान एक पेपर्स ऐसा भी है। 

जोर उसे और डॉक्टर बख्श को अलग कर सकते हैं।

आगा जान के कहने पर कंदील ने लगभग सारे पेपर्स पर साइन कर दिए थे।

  और वो फाइल आगा जान को देदी।

आगा जान ने कंदील के हाथ से वह फाइल ली और सारे पेपर्स को चेक करने लगे। 

सारे पेपर चेक करने के बाद आगा जान के चेहरे पर एक अलग किस्म की खुशी में नजर आ रही थी।

आगा जान मुझे आपसे एक बहुत जरूरी बात करनी थी। कंदील ने कहा।

हां बेटा कहो?

नवाब साहब बोले।

वह वह आगा जान। 

कंदील कहते-कहते खामोश हो गई थी। 

उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह ,हाशिम की मौजूदगी में डॉक्टर बख्श का जिक्र आगा जान से किस तरह कर सकती है।

आगा जान मुझे सैफ के मुताल्लिक  आपसे कोई बात करनी थी। 

कंदील ने कहा।

सैफ का नाम सुनते ही, आगा जान के माथे पर बाल आ गए थे।

कंदील इस सिलसिले में हम बाद में बात करेंगे।

आगा जान ने कंदील को खामोश करते हुए कहा।

हाशिम बहुत गौर से कंदील की तरफ देख रहा था। 

स्काई ब्लू कलर के कपड़ों में सर के ऊपर से दुपट्टा उड़े हुए। बहुत हसीन लग रही थी।

कंदील खामोश बैठी थी, कि कंदील के फोन पर डॉक्टर बख्श का नाम फ्लैश होने लगा।

मैं भी आती हू आगा जान एक बहुत जरूरी कॉल है। 

कंदील कहकर आगाजान के रूम से बाहर चली गई।

हाशिम उसे जाते हुए देखने लगा।


आखिर क्यो आगा जान ने इतने सालो बाद कंदील को उसके पापा के बिजनेस के बारे मे बाताया था।

क्या चाहते थे आगा जान। 

जानने के लिए पढ़ते रहिऐ। 



                                    कंदील


✅ Next Part 


कंदील जैसे ही कमरे से निकली… उसके कदम तेजी से चलते तो थे,

मगर दिल में उठ रहे सवाल उसे चैन नहीं लेने दे रहे थे।

आगा जान की खामोशी, हाशिम की गहरी निगाहें,

और इन पेपर्स पर किए गए उसके जल्दबाज़ी वाले साइन…

क्या ये सब सिर्फ एक इत्तेफ़ाक था?

या फिर हवेली में कोई ऐसा खेल खेला जा रहा है,

जिसका अंदाज़ा कंदील को सबसे आख़िर में होगा?

आने वाले हिस्से में सच का पहला दरवाज़ा खुलने वाला है…

तैयार रहिए।


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