कंदील जफ़र और डॉक्टर बख्श का टूटता रिश्ता – हाशिम की उलझनें और एक नया मोड़

 



वह इस वक्त अपने बैड पर लेट  कर उसके बारे में सोच रहा था।

बहुत अजीब तरह की लड़की थी वह।

हाशिम की समझ में नहीं आ रहा था।

के वो इस तरह से रिएक्ट क्यों कर रही थी?

मगर उसके चेहरे को देखकर उसके हुस्न को देखकर आज हाशिम कुछ बेचैन सा होने लगा था?

ऐसा नहीं था कि उसने खूबसूरत लड़कियों को नहीं देखा था। 

खूबसूरत लड़कियां हाशिम के आगे पीछे फिरती थी।

वजह ये थी  एक तो हाशिम बहुत खूबसूरत और हैंडसम था। उस पर उसके पास बेशुमार पैसा भी था।

वह एक नवाब का पोता था।

मगर हाशिम ने कभी इस तरह से किसी लड़की को नहीं देखा था।

पर जिल्ले हुमा में कुछ ऐसी बात थी। 

जो हाशिम को उसकी तरफ खींचने पर मजबूर कर रही थी। 

और आज जिस हालत में उसने जिल्ले हुमा को देखा था। उसके बाद तो उसको भूलना ना मुमकिन सी बात थी।

वह करवट बदलकर पलो को दबाकर अपने सीने फर रखा हुआ उसके बारे में सोचने लगा।

आखिर कौन है वह लड़की?

काफी सारे सवाल हशिम के जहन में भटक रहे थे। 

और अपने हर सवाल का हाशिम को जवाब चाहिए था।

और उसका जवाब ,सिर्फ उसे जिल्ले हुमा ही दे सकती थी।

हाशिम ये बात  सोचता हुआ अपने रूम से बाहर आया। हाशिम ने देखा उसके जस्ट बराबर वाले रूम का दरवाजा खुला हुआ था।

कुछ सोच कर हाशिम उस दरवाजे के पास आ गया।

हाशिम ने देखा बिल्कुल उसके रूम जैसा रूम था यह 

हाशिम ने दरवाजे के अंदर  अपने कदमों को बढ़ाया।

नहीं हाशिम इस तरह से किसी के रूम में उसके बगैर इजाजत के जाना बहुत गलत बात है।

हाशिम के मन मे जैसे की ख्याल आया उसने अपने कदमों को पीछे कर लिया।

वह जैसे ही पीछे मोडा किसी से टकरा गया।

आप यहां। 

कंदील उसको अपने दरवाजे के बाहर देखकर शॉक्ड हो गई थी।

क्या आप यह नहीं जानते हो, कि किसी के कमरे में बिना इसकी इजाजत कि नहीं जाना चाहिए? 

कंदील ने उनसे कहा।

ओ, ओ हेलो मैडम। 

मैं आपके रूम में नहीं जा रहा था।

बल्कि आपको खुद ही अपनी प्राइवेसी का ख्याल नहीं है।

अगर ऐसा कुछ होता तो आप अपने रूम को लॉक करके रखती ।

इस तरहा रूम खुला हुआ था।

मै सिर्फ आपके दरवाजे तक आया था।

यह जानने के लिए की यह रूम क्यों खुला हुआ है?

आपके रूम के अंदर मैंने कदम नहीं रखा। 

हाशिम ने कहा।

वाह तो अगर आप,रूम खुला हुआ देखेंगे तो अंदर जाने के बारे में सोचेंगे। 

कंदील ने अपनी आईब्रो को ऊपर करते हुए कहा।

जी नहीं मोहतरमा यह आपकी गलतफहमी है।

ऐसा कुछ भी नहीं है।

हाशिम को अच्छा नहीं लग रहा था,कंदील उससे इस तरह की बात कर रही थी।

हाशमी कंदील की तरफ देखा ,और अपने रूम की तरफ जाने लगा।

कल के लिए सॉरी हाशिम साहब। 

कंदील ने पीछे से आवाज लगाते हुए कहा।

और कंदील की आवाज लगाने पर, हाशिम के पैर वहीं रुक गए थे।

इट्स ओके।

हाशिम ने स्माइल करते हुए कंदील की तरफ देखकर कहा।

कंदील के चेहरे पर भी अब इस्माइल आ चुकी

थी।

माफी का हकदार तो मैं भी हूं, मैंने भी आपके साथ कल बहुत गलत सलूक किया। 

हाशिम ने कहा।

कोई बात नहीं हाशिम साहब हम दोनों ही गलतफहमी में गिरफ्तार थे।

तो दोनों से ही गलती हो गई।

कंदील मुस्कुराने लगी।

आप इतने सालों के बाद वापस आए थे।

और इस दरमियान हमने  आपका कोई फोटो वगैरा भी नहीं देखा था। 

इसलिए मैं आपको नहीं पहचान पाई।

और शायद यही दिक्कत आपके साथ भी होगी।

इसलिए आप भी नहीं मुझे पहचान पाए। 

कंदील ने कहा।

जी नहीं डॉक्टर कंदील ,मैं आपसे अच्छी तरह से बाकीफ हूं।

मैंने आपका फेस देख रखा था। 

हाशिम ने बहुत गहरी नजरों से उसकी तरफ देखते हुए कहा।

अच्छा आपने मेरा फेस देख रखा था।

कैसे? 

कंदील को ताज्जुब हो रहा था ,हाशिम की बात पर। 

आगा जान ने सारी फैमिली वालों की पिक मुझे सेंड किए थे।

उसमें आपकी भी पिक थी। 

तो मै सब लोगों से पहले से ही वाकिफ था। 

हाशिम ने कहा।

अब वो उसे  यह कैसे बतता  के स्पेशल ही आगा जान ने कंदील की फोटो सेंड की थी हाशिम को?

कंदील हाशिम से बात कर रही थी ,के अचानक से उसके फोन पर?

डॉक्टर बख्श बक्श का एसएमएस आया।

उसके फेस की स्माइल और गहरी हो चुकी थी।

एक्सक्यूज मी। 

कंदील कहकर अपने रूम के अंदर चली गई।

हाशिम सोचने लगा ,इसके चेहरे पर इतनी गहरी स्माइल। किसी खास इंसान का एसएमएस है यह।

जिस से कंदील के चेहरे की स्माइल और गहरी हो गई है।

हाशिम भी अपनी रूम की तरफ बढ़ गया था।


इस वक्त जो पेपर डॉक्टर बख्श के हाथ में थे।

उनको देखकर डॉक्टर बख्श को हैरानी के साथ- बहुत तेज गुस्सा आ रहा था।

उन्होंने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था ।

कि कंदील उनके साथ ऐसा कर सकती है।

वह कंदील जिसे वो हद से ज्यादा प्यार करते हैं।

और खुद से ज्यादा भरोसा करते हैं। 

उसने आज डॉक्टर बख्श के भरोसे को तोड़ कर रख दिया था।

डॉक्टर बख्श के भरोसे को टूटने के साथ-साथ।

डॉ बख्श  भी पूरी तरह टूट चुके थे।

डॉ बक्श अपने केबिन में बैठे हुए दोनों हाथों से अपने सर को जकड़े हुए थे।

कंदील जफर किस चीज की सजा दी तुमने मुझे। 

ऐसा क्यों किया तुमने? 

डॉ बख्श के मन में बस यही सवाल बार-बार गूंज रहे थे।

डॉक्टर बख्श खुद को संभालते हुए एक झटके से अपने केबिन से उठे।

वह पेपर्स डॉक्टर बख्श के हाथ में थे।

वह गुस्से में चलते हुए कंदील के केबिन में आए।

व्हाट इस दिस कंदील जफर।

उन्होंने वह पेपर्स कंदील की तरफ फेंकते हुए बहुत तेज आवाज में कहा था।

कंदील  जो इस वक्त बुक पढ़ कर किसी केस को स्टडी कर रही थी। 

डॉक्टर बख्श की इस हरकत पर चौक कर, डॉक्टर बख्श की तरफ देखने लगी। 

वह पेपर्स लगभग डॉक्टर बख्श ने कन्दील के मुंह पर मरे थे।

क्या हुआ सैफ? 

कंदील की समझ में नहीं आ रहा था ,कि क्या माजरा है?

यही तो मैं आपसे जानना चाहता हूं

कंदील जफर की क्या है यह सब? 

डॉक्टर बख्श ने पेपर्स की तरफ इशारा करते हुए कहा।

कंदील ने उन पेपर्स को अपने हाथ में लिया, और पढ़ना शुरू किया।

तालाक के पेपर, जिस पर कंदील के साइन थे।

कंदील का मुंह और ऑखे फटी के फटी रह गई।

डॉक्टर बख्श, कंदील ने कुछ कहने के लिए अपना मुंह खोला था ।

कि डॉक्टर बख्श ने उसे बीच में ही रोक दिया।

कह दो कंदील जफर के ये तुम्हारे साइन नहीं है।

या फिर धोखे से तुम्हारे आगा जान ने इस पर तुम्हारे साइन करवाए हैं।

डॉक्टर बख्श की आंखों में इतना गुस्सा था।

कि कंदील उनकी आंखों को देखकर काप कर  रह गई थी।

नहीं डॉक्टर बख्श यह साइन तो मेरे ही है।

मगर मै इस बात से वाकिफ नहीं हूं ,कि इन पेपरो पर किस तरह से मेरे साइन लिए गए।

और किसने यह साइन लिए हैं।

कंदील ने सच बोलते हुए कहा।

प्लीज कंदील इतनी भोली बनने की कोशिश मत करो तुम। 

तुम्हारे इस भोले पन ने हीं, मेरा सब कुछ छीन लिया है। डॉक्टर बख्श ने कंदील को हाथ के ईशारे से बोलना से रोकते हुए कहा।

डॉक्टर बख्श आप मेरी बात का यकीन कीजिए ।

मैं सच में नहीं जानती यह किस तरह से यह मेरे साइन लिए गए हैं। 

कंदील की आंखों में आंसू आ गए थे।

कंदील जफर यह रोने का ड्रामा मेरे सामने मत करो।

अब मैं तुम्हें अच्छी तरीके से जान चुका हूं। 

तुम क्या हो ,और तुम्हारे दिल में मेरे लिए क्या जज्बात है? 

डॉ बक्श ने कहा।

कंदील अपनी जगह से उठकर डॉक्टर बख्श के नजदीक आई। 

डॉक्टर बख्श प्लीज मेरी बात तो सुनने की कोशिश कीजिए। कंदील ने उनसे रिक्वेस्ट की।

प्लीज कंदील जफर कीप क्वाइट। 

डॉ बख्श ने अपने होठों पर उंगली रखते हुए, कंदील से कहा। उनकी आंखें बेताशा लाल हो रही थी।

सैफ मेरी बात सुनिए। 

कंदील ने उनके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

कंदील के दिल की अजीब हालत हो रही थी 

डॉक्टर बख्श तो उसकी कोई बात सुनने के लिए तैयार ही नही थे।

डॉ बख्श ने अपने कंधे पर से कंदील के हाथ हटाए।

और बहुत सख्ती से उसके हाथ को पकड़ लिया। 

लगभग कंदील को खींचते हुए उसके केबिन से बाहर ले जाने लगे।

डॉक्टर बख्श कहां ले जा रहे हैं आप मुझे?

कंदील ने कहा।

डॉ बख्श ने कन्दील की बात का कोई जवाब नहीं दिया ।

वह बस उसको लगभग खींचते हुए अपने साथ लेकर जा रहे थे।

डॉक्टर बख्श पूरे अस्पताल से खींचते हुए उसे, कार स्टैंड तक लेकर आ गए। 

उन्होंने अपनी कर के पास लाकर, एक झटके से कर का दरवाजा खोला। 

और कंदील को लगभग धकेलते हुए उसे  के अंदर किया।

डॉ बख्श क्या कर रहे हैं ,आप कहां लेकर जा रहे हैं मुझे? कंदील बोली।

डॉ बख्श ने अभी कोई जवाब नहीं दिया। 

और दूसरी तरफ का गेट खोलकर ड्राइवर वाली सीट पर आकर बैठ गए। 

गाड़ी को स्टार्ट कर दिया।

डॉक्टर बख्श गाड़ी की स्पीड बहुत तेज किए हुए थे।

कंदील को ऐसा लग रहा था, वह गाड़ी को किसी ट्रक में टकरा कर एक्सीडेंट करवा देंगे।

डॉक्टर बख्श गाड़ी संभाल कर चलाइए। 

नहीं तो हम दोनों का एक्सीडेंट हो जाएगा। 

कंदील ने कहा।

ठीक है ना हो जाए एक्सीडेंट मर जाए हम दोनों साथ मे। जिंदगी में साथ नहीं, तो कम से कम मर तो एक साथ सकते हैं ना। 

दो बख्श ने तिरछी निगाह करके कंदील की तरफ देखते हुए कहा।


अब आगे क्या होने वाला है,डॉक्टर बख्श कंदील को कहा लेकर जा रहे थे।

जानने के लिए पढ़ते रहिऐ 


                                       कंदील


✅ Next Part 


गाड़ी अँधेरी सड़क पर पागल रफ़्तार से भागती जा रही थी, और हर मोड़ पर ऐसा लगता था जैसे किसी खाई में गिर सकती है। कंदील सीट पकड़े हुए काँप रही थी—डर से नहीं, बल्कि डॉक्टर बख्श की आँखों में जलते हुए उस अजीब से जुनून को देखकर। यह वही सैफ था जो उसकी मुस्कान पर फिदा हो जाया करता था… आज वही आदमी अपना दिल टूटने का बदला उससे, खुद से, और दुनिया से लेने पर उतारू था। उसके हाथ स्टीयरिंग पर काँप रहे थे, साँस तेज़ हो चुकी थी, और चेहरे पर गुस्से की लकीरें उभर आई थीं।


उधर हवेली में हाशिम बेचैनी से अपने कमरे के पर्दे के पास खड़ा था। हवा में एक अनजानी सी उदासी थी… जैसे कोई तूफ़ान पास आ रहा हो। उसे समझ नहीं आ रहा था कि ये बेचैनी जिल्ले हुमा के चेहरे की वजह से है या कंदील की अचानक बदली हुई मुस्कान की वजह से। मगर मन के किसी कोने में उसे अहसास हो चुका था—आज की रात उनके रिश्तों की नींव हिला देगी।

दूर कहीं, एक फोन की स्क्रीन बार-बार जल-बुझ रही थी… कोई ऐसी खबर के साथ, जो तीनों की ज़ंदगियों में आग लगाने वाली थी।


कहानी अब उस मोड़ पर पहुँच चुकी थी, जहाँ मोहब्बत, भरोसा, जुनून और बदले—सब एक साथ टकराने वाले थे।

और इस टकराहट का अंजाम… कोई भी नहीं जानता।




 



"Hello dosto! ❤️

Aap sabka shukriya jo meri story ko itna pyaar dete ho.

Agar aaj ka part pasand aaye, to please comment karna, share karna aur bataana ki next part me kya dekhna chahte ho.

Aapka support hi mera hausla hai!


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