“हाशिम नवाबजादे और जिल्ले हुमा: हवेली के राज़ और खामोश मोहब्बत की शुरुआत”




 तुम जानती नहीं हो हाशिम नवाबजादे के सामने कोई भी मुंह नहीं चला सकता।

और तुम्हारी जबान मेरे सामने कैसे चल रही थी?

हाशिम का गुस्सा किसी तरह से थामने में नहीं आ रहा था। 

उसने मिरर के सामने से कन्घी उठायी।

और अपने बालों में कंघी करने लगा।

बहुत सुन रखा था तुम्हारे बारे में कंदील जफर।

पर आज मैंने तुम्हें देख भी लिया।

पर तुम देखना, के अब तुम सारे हवेली वालो की आंखों में कैसे खटकती हो?

तुमने गलत इंसान को वॉर्न कर दिया है 

कंदील जफर। 

उसने अपने हाथ से कंघी को फेंकते हुए कहा।

फिर गुस्से मे ही शावर लेने की गरज से वॉशरूम मे घुस गया।

एक घंटा शावर के नीचे खड़े रहने के बाद भी उसका गुस्सा शांत नहीं हो रहा था।

उसके दिलों दिमाग में जंग जारी थी, और उसको ऐसा लग रहा था कि उसके अंदर आग लगी हो।

उसने शावर को बंद किया और खुद को रिलैक्स करने की कोशिश करने लगा।

अब उसे थोड़ा हल्का महसूस हो रहा था।

उसने लोअर पहना और टॉवल से अपने सर को रगड़ हुआ वॉशरूम से बाहर आ गया।

मिरर के सामने खड़ा होकर अपनी बॉडी का जायजा लेने लगा।

उसने शर्ट नहीं पहनी थी, जिससे उसके बॉडी का ऊपर ही हिस्सा, बिना कपड़ों के दिखाई पड़ रहा था।

वह एक बॉडीबिल्डर था उसका जिस्म बहुत उम्दा लग रहा था बिना शर्ट के।

वह हर चीज में परफेक्ट था, बॉडी में परफेक्ट गुड लुकिंग परफेक्ट, उसकी पर्सनालिटी का भी कोई जवाब नहीं था। अमेरिका जैसी बड़ी कंट्री में, लड़कियां उसकी दीवानी थी। 

वो लड़कियो  से बहुत दूर रहता था। 

उसे  इन सब  फालतू चीजो में कोई इंटरेस्ट नहीं था, स्पेशली लड़कियों को वह बिल्कुल भाव नहीं देता था।

कुछ मिनट अपनी की बॉडी का जाएगा उसने मिरर के सामने लिया।

और फिर कुछ सोचता हुआ, कमरे में रखे  फोन की तरफ बढ़ने लगा।

यह  फोन उनकी हवेली में हर कमरे में मौजूद था। 

जब उन लोगों को किसी भी मुलाजिम से किसी चीज की जरूरत होती थी।

तो वह इस फोन से फोन कर देते थे। 

और मुलाजिम उनके पास आ जाता था।

हाशिम ने भी इस वक्त यही किया, उसने फोन करके मुलाजिम से अपने लिए  नाश्ता मंगावाया।

https://indiapulsedaily24x7.blogspot.com/2025/11/%20haunted-tape-21-22-complete-story-horror-mystery.html

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जिल्ले हुमा जिल्ले हुमा।

रहमत बीवी ने नाश्ता तैयार करके जिल्ले हुमा को आवाज लगाना शुरू की।

चल लम्हों बाद ही जिल्ले हुमा रहमत बीवी के सामने हाजिर थी।

बड़ी-बड़ी सुनहरी आंखें जिसमे गहरा काजल लगा हुआ था। लंबी पतली नाक, और संगमरमर जैसा उसका रंग बहुत नाजुक और बहुत ही खूबसूरत थी जिल्ले हुमा।

कोई भी उसे देख कर यह नहीं कह सकता था ,कि वह इस हवेली की मुलाजिम है। 

वह तो इस हवेली की शहजादी लगती थी। 

मगर हाए रे किस्मत  के वो एक मुलाजिम थी?

वह किसी के सामने भी, अपना चेहरा नहीं दिखाती थी ।अपने चेहरे को ढक कर रखती थी।

चन्द  के मुलाजिमों के अलावा उसे हवेली के किसी शख्स ने देखा नहीं था।

जी अम्मी जान आपने मुझे बुलाया।

फरमा बरदार  बेटियों की तरह उनके आगे झुकते हुए बोली।

हां बेटा।

मैंने तुम्हें इसलिए बुलाया है, कि कंदील बीवी के बराबर वाला जो रूम है।

उस रूम में यह नाश्ता लेकर ले जाओ। 

रहमत बीवी ने जिल्ले हुमा से कहा।

जी ठीक है अम्मी जान मैं ले जाती हूं। 

उसने नाश्ते की भारी ट्रै, उठाते हुए रहमत बीवी से कहा।

बेटा जिल्ले हुमा 1 मिनट रुको। 

वह जब ट्रै लेकर पलटी थी, तो रहमत बीवी ने उसे पुकारा ।

  जिल्ले हुमा वहीं पर रुक गई।

रहमत बीवी उसके सामने आई और उन्होंने उसके। चादर नुमा  बड़े  दुपट्टे को, उसके सर पर ठीक से ओड़ाया।

और उसके मुंह को ढक  दिया था ,जिससे उसका मुंह दिखाई ना पड़े।

जिल्ला हुमा सीडीओ पर संभाल के चढ़ना।

जब उसने अपने कदम बढ़ाना शुरू किया, तो रहमत बीवी ने उससे कहा। 

उसने अपनी गर्दन को हां में हिला दिया। 

और सीडीओ पर चढ़ने लगी।

कोई भी नया शख्स उसे देखकर यह बोल सकता था कि इस तरह से वह गिर सकती है।

लेकिन यह उसका रोज का काम हो गया था, लगभग वह अपने मुंह को इसी तरह  ढक कर करके रखती थी।

जब वह कंदील के कमरे के बराबर वाले कमरे के पास पहुंच गई।

तो उसने दरवाजे पर अपने हाथ से दस्तक दी।

कौन है? 

एक तेज तर्रार आवाज जिल्ले हुमा के ,कानों में आई जिससे जिल्ले हुमा चौक गई।

ज जी मै हू जिल्ले हुमा की आवाज डरते हुए निकली

मै ,मै कौन 

हाशम ने फिर उसी लहजे में कहा।

मैं हवेली की मुलाजिमा हू साहब जी ,और आपके लिए नाश्ता लेकर आई हू। 

इस बार जिल्ले हुमा ने पूरी बात बताते हुए कहा।

ठीक है तो अंदर आ जाओ, हाशिम  ने अंदर से कहा।

जिल्ले हुमा के हाथ में नाश्ते से भारी ट्रै थी ।

उसने एक हाथ के सहारे से दरवाजे को खोला, और दरवाजे के अंदर आने के लिए आगे बढ़ी।

मगर दरवाजे के आगे बढ़ने से पहले ही वो सटपटा कर वहीं रुक गई।

क्योंकि सामने बैड पर? जो शख्स बैठा था। 

उसने शर्ट नहीं पहनी थी।

जिल्ले हुमा को  बड़ा अजीब लग रहा था उसकी बॉडी को  बिना कपड़ो के देखकर 

जिल्ले हुमा खामोश खड़ी रही, उसकी  समझ नहीं आ रहा था कि वह आगे बढ़कर, इस नाश्ते की ट्रै को उस शख्स के हाथ में किस तरह दे।

हाशिम ने दरवाजे की आवाज पर सामने देखा।

हाशिम के सामने दरवाजे में जो वजूद खड़ा हुआ था वह अपने आप को पूरी तरह से ढके हुए था।

उसके कपड़ों में से सिर्फ उसके, संगमरमर जैसे गोरे हाथ चमक रहे थे। 

और सारे जिस्म पर काले कपड़े मौजूद थे ,जो उसके वजूद को पूरी तरह छुपाए हुए थे।

व्हाट हैपन ,इस तरह दरवाजे में क्यों खड़ी हो तुम? 

हाशिम ने उसे देखते हुए कहा।

क्योंकि इतनी देर से वह दरवाजे में ही फिट थी?

वो, वो साहब मै नाश्ता लेकर आई थी ।

जिल्ले हुमा ने हढबढ़ाते हुए कहा ।

क्योंकि उसे नहीं समझ आ रहा था

कि वह क्या बोले?

तो यह कौन सा तरीका है नाश्ता पेश करने का ,अंदर आकर तमीज से? मेरे सामने नाश्ता रख कर जाओ। 

हाशिम ने अकड़ते हुए उससे कहा।

हाशिम के कहने पर 

वो खुद को संभालती हुई आगे बड़ी, और उसने नाश्ते की ट्रै  हाशिम के सामने, टेबल पर रख दिया।

और रूम से बाहर जाने के लिए मुड़ने लगी।

एक मिनट हाशिम ने जब जिल्ले हुमा को  दरवाजे का रुख करते हुए देखा तो बीच में ही कहा।

जिल्ले हुमा जहा खड़ी थी  वहीं पर रुक गई।

तुम अपने काम को अधूरा छोड़ कर जा रही हो, यह चाय कौन बनाएगा? 

हाशिम ने कहा।

जिल्ले हुमा ने अपना रूख दोबारा मोड़ा और चाय बनाने लगी ।

साहब जी चीनी  कितनी डालनी है उसने पूछा।

एक चम्मच हाशिम  ने जवाब दिया।

वह चीनी को चाय में मिलने लगी, न जाने क्यों हाशिम बहुत गौर से उसके हाथों को देख रहा था? 

क्योंकि जिस तरह से उसका लिबास था,वो पूरे काले कपड़ों में ढकी हुई थी? 

और उसमें से सिर्फ, खूबसूरत हाथ की नजर आ रहे थे।

साहब जी आपकी चाय 

उसने चाय बनाकर का  चाय का कप हाशिम के सामने बड़ाते हुए कहा।

हाशमी उसके हाथ से चाय का कप ले लिया, हाशिम की नजर अभी भी उसके हाथों पर ही थी।

थैंक्स,  हाशिम ने उसके हाथ से चाय लेते हुए कहा।

वह चाय बनाकर बाहर की तरफ जाने लगी।

सुनो,हाशिम ने  दोबारा उसे बीच में रोकते हुए कहा।

हाशिम की आवाज पर उसके पैर वहीं थम गए थे।

जी साहब जी, वो बोली।

तुम्हारा नाम क्या है? 

हाशिम चाय का सिप लेते हुए बोला।

मेरा नाम, जिल्ले हुमा बोली। 

वह जितनी जल्दी चाह रही थी कि इस रूम से बाहर निकल जाए। 

उतना ही यह शख्स उसे रोक रहा था।

इतना कठिन सवाल नहीं पूछा मैंने जो तुम इतना सोच रही हो। 

हाशिम ने कहा।

जिल्ले हुमा मेरा नाम है।

उसने कहा

जिल्ले हुमा  हाशिम ने अपने मुंह में नाम दोहराया।

ओके तुम जा सकती हो, हाशिम ने उससे कहा। 

और हाशिम के कहने की देर थी वह बिना देर किए जल्दी से उसके रूम से बाहर निकल गई।

शुक्र अल्लाह उसने रूम के बाहर निकलते ही अल्लाह का  शुक्र अदा किया।

और तेज तेज  कदम बढ़ाते हुए सीडीओ से नीचे उतरने लगी।


क्या होगा आगे इस कहानी मे क्या जिल्ले हुमा की सच्चाई को हाशिम जान पाएगा।

क्या हाशिम अलग कर देगा डॉक्टर बख्श और कंदील को 

जानने के लिए पढ़ाते रहिऐ 

            

      कंदील

https://timespeakestruth.blogspot.com/2025/11/%20tata-car-sales-breakup-number-1-suv-in-october.html

✅ कहानी का अगला छोटा लेकिन रोमांचक पैराग्राफ

(पढ़ने वालों को अगला पार्ट ज़रूर पढ़ने का मन हो जाएगा)

जिल्ले हुमा के कदम सीढ़ियों पर तेजी से उतर रहे थे,

मगर उसके दिल की धड़कन अभी भी उसी कमरे में अटकी हुई थी—

जहाँ हाशिम की तीखी नज़रें उसके हाथों पर ठहर गई थीं।

उसे क्या मालूम था कि उसी पल…

हाशिम के दिल में एक सवाल चुपके से जगह बना चुका है—


“ये मुलाजिमा है कौन…?

और क्यों इसके चेहरे के पीछे मुझे कोई अनजाना राज़ महसूस होता है…?”

उधर नीचे, कंदील जफर की नज़रें हवेली के हर कोने को पढ़ रही थीं।

उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि उसके पास वाला कमरा…

अब एक ऐसी तूफ़ानी शुरुआत की दस्तक सुन चुका है—

जो जल्द ही इस हवेली का पूरा खेल बदल देगी।


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