"डॉ. बख्श और कंदील: हवेली में लौटे रिश्तों की परछाइयाँ"

 


वह कभी तिरछी हो के अपने कपड़ों को चेक कर रही थी और कभी सीधी होकर। 

कभी मुस्कुराहा कर खुद को देख रही थी।

इस बात से बेखबर के कोई  उसकी सारी हरकतों को नोट कर रहा है। 

और उसको देखकर मुस्कुरा रहा है।

और कंदील की यह हरकतें देखकर किसी को अपने आप को संभालना। 

मुश्किल पढ़ रहा था।

इस वक्त कंदील वाइन कलर के नाइट सूट में थी कंदील की सन्गेमरमर जैसी रन्गत उस पर खुले हुए  गीले बाल  से वो बहुत ही हसीन लग रही थी। 

और उस पर वह खुद को मिरर में ऐसी देख रही थी।

जो किसी को भी पागल बना सकता था।

कंदील इस वक्त काफी थकान महसूस कर रही थी। 

वह बैड पर लेटने की इरादे से, मिरर की तरफ से पलटी।

और बैड की चादर का कोना ठीक करने लगी।

तभी अचानक से उसकी नजर बैड पर लेटे हुए शख्स पर गई। 

आप यहां पर इस वक्त। 

कंदील हैरान हो गई थी इस वक्त डॉक्टर बख्श को अपने बैड पर आराम से लेटा हुआ देखकर। 

जी हां मिसेज बख्श,मैं यहां इस वक्त आपके सामने।

डॉ बख्श आराम से, सीधे लेटकर बोले।

कंदील जो झुक कर अपनी चादर को ठीक कर रही थी।

   जैसे ही इस बात का ख्याल हुआ कि वह डॉक्टर बख्श के सामने झुकी हुई है उसने खुद को ठीक किया।

कंदील को बड़ा ही अजीब महसूस हो रहा था।

डॉक्टर बख्श के सामने इस वक्त नाइट कपड़ों में।

उसने जैसे ही वॉशरूम में जाने के लिए अपने कदमों को आगे बढ़ाया। 

डॉ बख्श एक स्पीड से उठकर बैड से एकदम कंदील के नजदीक सामने आकर खड़े हो गए।

कंदील अपने दोनों हाथों से। खुद को ढकने की कोशिश करने लगी।

सर प्लीज सामने से हट जाइए मुझे वॉशरूम जाकर अपने कपड़े चेंज करना है। 

कंदील को इस वक्त डॉक्टर बख्श से बहुत शर्म महसूस हो रही थी।

रहने दीजिए मिसेज बख्श आप इन कपड़ों में बहुत अच्छी लग रही है। 

डॉ बख्श अपना मुंह बिल्कुल  कंदील के मुंह के नजदीक। लाकर कहां?

सैफ ,कंदील ने अपना रुख दूसरी तरफ मोड़ लिया अब डॉक्टर बख्श की तरफ कंदील की पीठ थी।

कंदील को इस वक्त डॉक्टर बख्श से बहुत शर्म महसूस हो रही थी।

जी मिसेज बख्श  आपको मेरे सामने इतना शर्माने की कोई जरूरत नहीं है। 

और वैसे भी आप इन कपड़ो में बहुत ज्यादा अच्छी लग रही हो।

या यू कहू आप से के आप बहुत सेक्सी लग रही हो। 

डॉक्टर बख्श ने अपनी गर्दन को कंदील के कंधे पर टिकाते हुए कहा।

कंदील ने अपनी आंखों को बंद कर लिया।

कंदील की धड़कनें उथल-पुथल हो रही थी डॉक्टर बख्श को इतने नजदीक पाकर।


कंदील अभी भी अपने दोनों हाथों से अपने सीने को कवर किए हुए थे।

कुछ लम्हे दोनों ही तरफ खामोशी का मंजर 

जारी रहा।

कंदील, डॉक्टर बख्श ने बहुत आहिस्ता से लफ्ज कहे थे।

हममममम कंदील ने भी जवाब मे कहा।

इस वक्त कंदील की आवाज  बहुत धीमी निकल रही थी।

डॉ बख्श को महसूस हो रहा था जैसे 

कंदील कही खो गई है ,और उसकी आवाज दूर से आ रही है कही।

डॉक्टर बख्श ने कंदील को दोनों कांधो से पकड़ कर उसका रूख अपनी तरफ किया।

वह अपने इधर-उधर दोनों हाथों से, खुद को कबर करने की कोशिश कर रही थी।

और कंदील की आंखें भी बंद थी।

डॉक्टर बख्श कुछ लम्हे कंदील कोई यूं ही देखते रहे।

आज डॉक्टर बस का दिल कर रहा था कि वह अपनी हदों को भूल जाए।

कंदील की आमद, और यह तन्हाई। खुद को रोकना बहुत मुश्किल बात थी।

और कंदील डॉक्टर बख्श की बीवी थी ,वह कुछ गलत नहीं सोच रहे थे उसके मुत्तालिक।

डॉक्टर बख्श ने कंदील के माथे पर किस कर लिया।

कंदील ने ऑखे खोलकर डॉक्टर बख्श की आंखों में देखा। डॉक्टर बख्श की आंखों में जो कुछ भी था आज।

वो सब कंदील समझ रही थी। 

कुछ लम्हे हैरान होकर कंदील  ने डॉक्टर बख्श को देखा, फिर कंदील ने अपनी नजरों को झुका दिया।

डॉक्टर बख्श ने कंदील के दोनों हाथों को।

हटाया जो उसने अपने सीने के इधर-उधर रखकर खुद को कवर किया हुआ था।

सैफ प्लीज।

कंदील ने डॉक्टर बख्श की तरफ रिक्वेस्ट भरी नजर से  देखते हुए कहा ,और अपनी गर्दन को ना मे हिलाया।

कंदील प्लीज डॉक्टर बख्श  ने कहा उनकी नजरो मे रिक्वेस्ट थी।

कंदील की समझ में नहीं आ रहा था ,कि वह क्या करें इस वक्त, डॉक्टर बख्श की पनाह से निकलने ना मुमकिन सी बात थी? 

और खुद भी कंदील उनकी आगोश में खुद को, पिघलता हुआ महसूस कर रही थी।

मिसेज बख्श इधर देखिए मेरी तरफ।

डॉ बख्श ने कंदील थोड़ी पकड़ के उसका मुंह अपनी तरफ किया।

मैं शौहर हूं तुम्हारा ,सारे हक और हुकूक है मेरे तुम पर।

मैं जो भी चाहू कर सकता हूं ,तुम्हारे साथ। 

डॉ बख्श कंदील की आंखों में देखकर उससे कह रहे थे। कंदील अपनी आंखें फाड़ कर डॉक्टर बख्श की बातों को सुन रही थी।

बट कन्दील मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा।

कितने साल मैंने तुम्हारा इंतजार किया , तुम्हारी रजामंदी के लिए।

अब मैं इतना कमजोर भी नहीं की एक लम्हे में ही, सब कुछ भूल जाऊं। 

डॉ बख्श,कंदील से कह रहे थे।

कंदील ने फिर अपनी नजरों को झुका लिया।

ओहहहह मिसेज बख्श 

आप इतना डरती हो मुझसे की बार-बार अपनी नजर झुका रही हूं। 

डॉ बक्श बोले।

नहीं सर मैं आपसे डरती नहीं हूं।

बस ज्यादा देर आपकी आंखों में नहीं देख सकती। 

कंदील ने कहा। 

क्यों मुझसे नजरे मिलाने की हिम्मत नहीं है आपने? डॉक्टर बख्श कंदील को छेड़ने लगे थे।

ऐसा कुछ नहीं है, बस वक्त आने पर मैं आपका डाउट क्लियर कर दूंगी।

जितनी भी देर आप चाहेंगे मैं आपसे नजरे मिलाऊगी। कंदील ने कहा।

अच्छा और वह वक्त कब आएगा? 

डॉक्टर बख्श  बोले।

जल्दी ही वह वक्त भी आएगा।

कंदील ने कहा।

डॉ बख्श ने कन्दील का हाथ खींचकर उसे अपने सीने से लगा लिया। 

और कंदील को उम्मीद भी नही थी, के डॉक्टर बख्श इस वक्त ऐसी हरकत कर सकते हैं।

कंदील मुझसे अब तुम्हारी जुदाई बर्दाश्त नहीं होती है।

प्लीज कंदील मेरे हाल पर रहम करो।

डॉक्टर बख्श उसको सीने से लगाकर कह रहे थे।

और कंदील इस वक़्त खामोश थी।

डॉक्टर बख्श को महसूस हुआ, कि डॉक्टर बख्श ने कंदील को गले से लगाया, तो कंदील अनकंफरटेबल फील कर रही थी।

डॉ बख्श ने कंदील के ऊपर अपनी गिरफत ढीली कर दी। और कंदील को छोड़ दिया।

कंदील जैसे तुम सोच रही हो, वैसा कुछ नहीं है।

ओके

मेरा मन सिर्फ तुम्हें गले लगाने का कर रहा था। 

डॉक्टर बख्श ने कंदील को के दोनों कंधों पर हाथ रखते हुए कहा।

कंदील ने फिर अपने सर को डॉक्टर बख्श के सीने में छुपा लिया।

डॉक्टर बख्श उसके सर पर हाथ फिराने लगे।

सैफ मुझे नहीं पता था ,कि आप सच में हवेली पर आ जाएंगे।

कंदील ने कहा।

अच्छा जब बार-बार भी आप मेरे मुझे कॉल नहीं कर रही थी। और मुझे फिक्र हो रही थी आपकी।

तो मुझे मजबूर अपने ही किया हवेली पर आने को।

डॉक्टर बख्श का हाथ अभी भी कंदील के सर पर था।

वो आहिस्ता आहिस्ता कंदील के सर को थपक रहे थे।



✍️ Next Part (Teaser Paragraph)


रात अब और गहरी हो चुकी थी… हवेली की दीवारों पर पड़ती परछाइयाँ जैसे कुछ कह रही थीं।

कंदील अपने कमरे में खामोश बैठी थी — वो सैफ की बातों में छुपे दर्द को समझ चुकी थी, लेकिन कुछ तो ऐसा था जो उसे बेचैन कर रहा था।

क्या सैफ वाक़ई बदल चुका है? या उसके लौटने के पीछे कोई और वजह है?

हवेली की खिड़की से आती ठंडी हवा अब किसी नए तूफ़ान की आहट दे रही थी…

Writer Afsana Wahid 



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