“कंदील और डॉक्टर बख्श: मोहब्बत की सुबह” (Kandeel aur Doctor Bakhsh: Mohabbat Ki Subah)

 



सुबह जब कंदील की ऑख खुली तो कंदील ने देखा वो डॉक्टर बख्श की बाहो मे बेफिक्र होकर सो रही थी।

कंदील ने आंख मसलते हुए मुस्कुरा कर डॉक्टर बख्श की तरफ देखा। 

जो अभी भी बहुत गहरी नींद में सो रहे थे।

सैफ उडठ जाइए सुबह हो चुकी है।

कंदील ने आहिस्ता से डॉक्टर बख्श के कानों में कहा।

हममममम डॉ बक्श ने सोते हुए कहा। 

और कंदील को फिर से अपनी बाहों में जकड़ लिया।

सैफ प्लीज उडठ जाइए सुबह हो गई है।

अगर लेट हो गए तो हवेली के सारे लोग वापस आ जाएंगे। कंदील ने कहा।

हममममम अरे यार ऊठ रहा हूं। 

डॉक्टर बख्श की गिरफ्त कमजोर हो गई थी ,कंदील के ऊपर।

आप अपनी पनिशमेंट के लिए मशहूर है ना डॉक्टर बख्श। तो मै वार्निंग दे रही हूं आपको अगर 10 मिनट में आप उठे नहीं तो पनिशमेंट में दूंगी आपको।

कंदील ने डॉक्टर बख्श को धमकाते हुए कहा।

क्या यार मिसेज बख्श  ,कोई ऐसा करता है अपने शौहर के साथ पहले ही दिन? 

डॉ बक्श अपनी आंखों को मसलने लगे थे।

और सामने कंदील का चेहरा देखकर उनका दिल खुश हो गया था।

उनकी नींद अब गायब हो चुकी थी।

डॉ बख्श बहुत गौर से कंदील को देख रहे थे।

उनके लिए आज की सुबह बहुत ही स्पेशल थी।

क्योंकि कंदील और डॉक्टर बक्श रात को एक साथ थे? 

और सुबह आंख खुलती ही डॉक्टर बख्श की नजर कंदील पर पड़ी।

जो उन की बगल में लेटी हुई थी।

क्या हुआ सैफ आप इस तरह क्यों देख रहा है मुझे?

कंदील ने डॉक्टर बॉक्स से पूछा।

कंदील मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तुम इस वक्त मेरे साथ हो। 

डॉ बक्श ने कंदील का हाथ पकड़ते हुए कहा।

ओके फाइन, मैं आपको रियालाइज करती हूं कि मैं आपके साथ हूं।

कंदील के मन में शरारत सुझी रही थी।

कंदील ने डॉक्टर बख्श का हाथ पकड़ कर उस पर तेज काट लिया।

आहहहहहहह  डॉ बख्श की की निकली थी। 

यार तुम बहुत तेज काटती हो। 

डॉक्टर बख्श अपना हाथ सहलाने लगे। 

और कंदील को इतनी तेज हंसी आ रही थी।

कि वह हंसते-हंसते। उठ कर बैठ गई।

सैफ आपको याद है ,मैंने एक बार पहले भी आपके हाथ पर कटा था। 

कंदील हंसते हुए बोली। 

जी हां मोहतरमा अच्छी तरह से याद है कैसे भूल सकता हूं आपका काटना? 

डॉ बख्श बोले। 

कंदील, तुम इस तरह हंसते हुए बहुत प्यारी लगती हो।

डॉ बख्श ने पहली बार कंदील को खिलखिला कर हुए हस्ते हुए देखा था।

अब आपको यकीन हो गया ना, कि आप मेरे साथ है। 

कंदील की हंसी रोकने में नहीं आ रही थी। 

जी हां मिसेज बख्श पक्का यकीन हो गया।

के मैं आपके साथ हूं? 

डॉ बक्श, सीधे होकर बेड पर बैठ गए थे। 

ठीक है तो आप 

अब 10 मिनट मेरा वेट कीजिए मैं  फ्रेश होकर आती हूं। कंदील बैड उतरने लगी।

रहने दो यार ऐसे ही बहुत प्यारी लगती हो तुम।

डॉ बक्श ने कंदील का हाथ पकड़ते हुए कहा।

सैफ  छोड़िए मेरा हाथ। लगता है अपने साथ-साथ मुझे भी। आगा जान से डाट लगवाएंगे। 

कंदील ने कहा।

और हाथ छुड़ाते हुए वॉशरूम के अंदर चली गई।

डॉ बख्श कंदील के रूम का जायजा लेने लगे।

काफी बड़ा था कंदील का रूम और बहुत ही पुराने, ढंग से सजाया हुआ बहुत खूबसूरत लग रहा था।

बेश कीमती फर्नीचर और बैड।

और पुरानी स्टाइल का ही बना हुआ लंबा चौड़ा मिरर।

डॉक्टर बॉक्स को कंदील का कमरा अच्छा लगा था।

कंदील का कमरा एक रॉयल रूम था।

डॉ बख्श अपने हाथ को देख  रहे थे क्योंकि कंदील ने उन्हें बहुत तेज काटा था।

जिससे उनके हाथ पर निशान पड़ गया था? वह मुस्कुराकर अपने हाथ को सहला रहे थे।


तेरे इश्क ने बेपनाह दर्द दिया है हमें।

अपनी मोहब्बत की क्या इंतिहान बताएं हम तुम्हें?


डॉ बक्श ने अपने मुंह में यह लव दौहराए और जिस हाथ पर कंदील ले उनके  कटा था उसको चूम लिया।


तभी वॉशरूम का दरवाजा खुलने की आवाज आई ।

डॉक्टर बख्श ने वॉशरूम के दरवाजे की तरफ देखा।


कंदील डार्क ग्रीन कलर के सलवार सूट पहने।

सलीके से दुपट्टा उड़े वॉशरूम से बाहर निकली थी। 

डॉक्टर बख्श पर नजर पढ़ते ही उसने इस्माइल किया।

डार्क ग्रीन कलर के कपड़े कंदील की गोरी रन्गत पर बहुत जच रहे थे। 

और उसके होंठ के पास का काला तिल। 

जो उसकी खूबसूरती पर चार चन्द लगा रहा है आता था।

इस वक्त वह डॉक्टर बख्श को बेइंतहा प्यारी लग रही थी।


  सैफ आप भी जाकर फ्रेश हो जाइए मैं आपके लिए नाश्ते का इंतजाम करके आती हूं। 

कंदील  ने कहा और दरवाजे की तरफ जाने का रुख किया। तभी डॉक्टर बख्श ने उस का हाथ पीछे से पकड़ लिया।

नहीं अभी नाश्ता नहीं करना है मुझे, इस वक्त तो मेरा मन कर रहा है। 

डॉक्टर बख्श बड़ी गहरी नजरों से कंदील की तरफ देख रहे थे उन्होंने बात बीच में अधूरी छोड़ते हुए कहा। 

क्या क्या मन कर रहा है आपका सैफ? 

कंदील ने पूछा।

पहले प्रॉमिस करो के आप नाराज नहीं होगी मिसेज बख्श । डॉक्टर बख्श ने कंदील का हाथ अपनी तरफ खींचते हुए कहा।

ऐसी भी क्या बात है जो मैं नाराज हो जाऊंगी कंदील बोली? नहीं इस तरह नहीं पहले प्रॉमिस करो आप नाराज नहीं होगी। डी बख्श ने अपना दूसरा हाथ कंदील की तरफ बढ़ते हुए कहा। 

ओके बाबा नाराज नहीं होंऊगी, बोलिए। 

कंदील बोली। 

डॉक्टर बख्श, ने कंदील गाल पर किस कर लिया।

डॉक्टर बख्श के किस करने से कंदील का मुंह खुल गया। और वह आंखें फाढ़ कर डॉक्टर बख्श की तरफ देखने लगी 

आपने कहा था मिसेज बख्श के आप नाराज नहीं होगी प्रॉमिस किया था आपने। 

डॉक्टर बख्श ने जब देखा कि कंदील ने अपनी आंखें फाड़कर  मुंह खोला है ,तो उन्होंने कंदील से कहा।

मैं नाराज नहीं हुई हू ,बट। 

कंदील ने बात को बीच में छोड़ते हुए कहा।

बट क्या मिसेज बख्श ? 

डॉक्टर बॉक्स ने कहा। 

बट यह डॉक्टर बख्श के मुझे उम्मीद नहीं थी, कि आप ऐसी हरकत कर सकते हैं अभी। 

कंदील ने पूरी बात, तफसील के डॉक्टर बख्श को बताते हुए कहा।

सॉरी यार मगर मैं अपने आप को किस-किस चीज के लिए रोकू। 

डॉक्टर बख्श बहुत गहरी नजर से कंदील को देख रहे थे।

ओके डॉक्टर बख्श,में आपके लिए नाश्ता लेकर आती हूं। कंदील ने उनकी बात को बीच में काटकर दरवाजे का रुख किया।

सॉरी कंदील मगर मैं इतनी जल्दी नाश्ता नहीं करता हूं। 

इस वक्त सिर्फ एक कप चाय पीने की आदत है मेरी।

डॉक्टर बख्श ने दिखा, के कंदील बाहर की तरफ जा रही है तो उन्होंने कहा।

ओके फिर मैं आपके लिए चाय बना लाती हूं। 

कंदील कहकर  दरवाजे से बाहर निकल गई।

डॉ बक्श भी फ्रेश होने के लिए वॉशरूम की तरफ चले गए।



🌙 Next Part Teaser 


कंदील जब चाय की ट्रे लेकर हवेली के गलियारे से गुज़र रही थी, तभी बाहर से किसी के तेज़ कदमों की आहट आई।

उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा — क्या कोई उन्हें साथ देख तो नहीं लिया?

डॉ बख्श अब अपने कमरे में नहीं थे…

कहानी का अगला हिस्सा बताएगा — क्या ये मोहब्बत अब राज़ रह पाएगी, या हवेली की दीवारें सब कुछ बयां कर देंगी?


Writer Afsana Wahid 

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