कंदील और डॉक्टर बख्श: हॉस्पिटल में उभरता तूफ़ान | Doctor Sameer का खतरनाक झूठ

 



कंदील जल्दी-जल्दी अपने कदमों को आगे बढ़ा रही थी हॉस्पिटल की लाबी में चलते हुए।

के अचानक से डॉक्टर समीर ने आकर बीच में उसका रास्ता रोक लिया?

आपको क्या प्रॉब्लम है, डॉक्टर समीर इस तरह से आपने मेरा रास्ता क्यों रोका है?

कंदील ने अपने माथे पर बल डालते हुए डॉक्टर समीर से कहा।

डॉ कंदील ,प्लीज आप एक बार मेरी पूरी बात सुन लीजिए। 

उसके बाद आपकी जो मर्जी है वह कीजिएगा।

डॉक्टर समीर ने कहा।

देखिए डॉक्टर समीर मैं आपकी कोई भी बात सुनने के लिए तैयार नहीं हूं। 

मुझे आपकी कोई बात में इंटरेस्ट ही नहीं है। 

और बहुत मेहरबानी होगी ,आपकी के आप मेरे रस्ते से हट जाए नहीं तो आपके लिए अच्छा नहीं होगा? 

कंदील ने डॉक्टर समीर को वार्निंग देते हुए कहा।

अच्छा आप मुझे धमका रही है।

डॉ समीर बोला।

जी नहीं डॉक्टर सामीर मैं आपको धमका नहीं रही हूं, मैं सिर्फ आपको आगाह कर रही हूं।

कंदील ने कहा। 

तो डॉक्टर कंदील अगर अभी मैं आपके रास्ते से नहीं हटू तो आप क्या कर लेंगी मेरा? 

डॉ समीर सीने पर हाथ बांध के कंदील के और नजदीक आता हुआ बोला।

देखिए डॉक्टर समीर। 

अस्पताल के सामने अपना मजाक बनवाने की कोशिश मत कीजिए।

मुझे आपकी इज्जत का ख्याल है इसीलिए मैं कह रही हूं। आपसे  ,आप मेरे रस्ते से हट जाइए। 

कंदील ने कहा।

कंदील ने  देखा के लॉबी में से कुछ लोग गुजरते हुए उन दोनों को  देख रहे थे।

डॉक्टर कंदील आपको मेरी कही हुई बात समझ में नहीं आती है ,सिर्फ एक बार मेरी बात को सुन लीजिए ।

उसके बाद आपकी जो मर्ज़ी  हो कीजिएगा।

डॉ समीर ने कन्दील का हाथ पकड़ते हुए कहा।

डॉ समीर ,हाउ डेयर यू डॉन'टी टच मी, कंदील को एकदम गुस्सा आने लगा।

डॉक्टर कंदील चलिए हॉस्पिटल की कैंटीन में चलकर बात करते हैं।

समीर उसका हाथ पकड़ कर उसको खींचता हुआ बोल।

डॉ समीर आप मेरा हाथ छोड़िए।

कंदील बोली।

आज आपको मेरी बात सुनाई पड़ेगी, वह चलते हुए लगभग उसे खींचता हुआ चल रहा था।

डॉ समीर देखिए हम लोगों को लोग देख रहे हैं, क्या सोचेंगे वह? 

कंदील ने कहा। 

मुझे लोगों की बात की कोई फिक्र नहीं मुझे बस आपको बात बतानी है तो बतानी है।

अजीब जिद्दी किस्म का इंसान था ,डॉक्टर समीर।

कंदील बहुत कोशिश कर रही थी, उसे अपना हाथ छुड़ाने के लिए लेकिन अपने कोशिश में नाकामयाब हो रही थी।

डॉ समीर कंदील को खींचता हुआ ,आगे बढ़ रहा था कि अचानक से किसी से टकरा गया।

डॉक्टर बख्श आप  ,वो अपने सामने डॉक्टर बख्श को देखकर शॉक्ड हो गया था।

डॉक्टर बख्श का मन कर रहा था ,कि आज डॉक्टर समीर को जान से मार डालें।

तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई कंदील को हाथ लगाने की?

डॉ बक्श ने समीर का गिरेबान पकढ़ते हुए कहा।

जब डॉक्टर बख्श ने समीर का गिरेबान पकड़ि तो आसपास जो लोग थे वह रूक उन दोनों को देखने लगे।

डॉक्टर बख्श, आप हम दोनों के बीच में आने की कोशिश मत कीजिए ।

या मेरा और कंदील का पर्सनल मेटर है।

डॉ समीर ने कहा।

उसके एक हाथ में अभी भी कंदील का हाथ था

डॉक्टर समीर अगर अपनी जिंदगी चाहते हो, तो डॉक्टर कंदील का हाथ अभी और इसी वक्त छोड़ दो। 

डॉक्टर बख्श की आंखें गुस्से से लाल हो चुकी थी।

डॉक्टर बख्श मैंने कहा ना, यह पर मेरा और कंदील का पर्सनल मेटर है।

तो इसमें आप बीच में ना आए तो बेहतर है। 

डॉक्टर समीर को आज डॉक्टर बख्श से भी डर नही लग रहा था।

डॉक्टर समीर कहा ना कंदील का हाथ छोड़ दो। 

डॉ बख्श ने एक झटके से ;समीर का गिरेबान अपनी तरफ खींचते हुए कहा।

जिससे कंदील का समीर के हाथ से हाथ चुका था। 

और डॉक्टर समीर आगे बढ़कर डॉक्टर बख्श की तरफ देख रहा था।

डॉ बख्श नहीं, क्या कर रहे हैं, आप देखिए सब लोग देख रहे हैं? 

यहां पर   तमाशा खड़ा हो रहा है।

कंदील डॉक्टर बख्श के पास आते हुए बोली।

कंदील, कंदील प्लीज कीप क्वाइट। 

डॉ बख्श ने  कंदील की तरफ देखते हुए कहा।

डॉ समीर की हिम्मत कैसे हुई तुम्हें हाथ लगाने की?

डॉक्टर बख्श को ऐसा लग रहा था, कि वह इस वक्त समीर की जान निकल ले।

डॉक्टर बख्श प्लीज आप समझने की कोशिश कीजिए यहां पर सब लोग जमा हो रहे है।

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  तमाशा खड़ा हो रहा है।

कंदील ने  उन्हें समझाने की कोशिश की।

डॉ बख्श,आप मेरे और कंदील के पर्सनल मैटर में आने की क्यों कोशिश कर रहे हैं।

यह हम दोनों का पर्सनल मेटर है, और इसे हम पर्सनल ही निपट लेंगे? 

समीर अपने गिरेबान पर से डॉक्टर बख्श के हाथों को हटाने की कोशिश कर रहा था।

अपनी बकवास को बंद करो, जो भी कंदील का पर्सनल मैटर होगा उसमें मेरा इंवॉल्व होना बहुत जरूरी है ।

डॉक्टर बख्श ने कहा।

डॉ बख्श प्लीज, प्लीज डॉक्टर बख्श मेरे लिए। 

आप इस वक्त डॉक्टर समीर को छोड़ दीजिए। 

कंदील रिक्वेस्ट करने लगी। 

कंदील को बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था ,कि डॉक्टर बख्श उसकी वजह से, इस वक्त समीर से लड़ाई कर रहे थे। 

आसपास के लोग भी। जमा होकर उन दोनों की लड़ाई को देख रहे थे।

तभी स्टाफ के कोई डॉक्टर आ गए ,और उन दोनों ने डॉक्टर समीर और डॉक्टर बख्श को एक दूसरे से जुदा किया।

डॉक्टर यह हॉस्पिटल आपका है ।

बेशक तो इसका यह मतलब नहीं, कि आप हर किसी के पर्सनल मैटर में इंटरफेयर करेंगे।

मैं देख लूंगा आपको।

समीर को बहुत बुरा लग रहा था ,डॉक्टर बख्श ने सबके सामने उसकी इंसल्ट की थी।

अस्पताल से रिलेटिव कोई भी मसाला मेरा खुद का पर्सनल ही मसला है।

यह समझ लीजिए आप डॉक्टर समीर।

डॉ बख्श से उंगली से डॉक्टर समीर को वोर्न करते हुए बोले।

कंदील ने सुकून का सांस लिया ।

जब डॉक्टर बख्श ने डॉक्टर समीर को छोड़ दिया।

डॉ समीर 10 मिनट बाद आप मुझे मेरे केबिन में मिलिए है।

डॉ बख्श गुस्से भरी नजरों से डॉक्टर समीर की तरफ देखते हुए बोले।

ओके सर।

डॉ समीर ने कहा।

और कंदील आप जाइए और अपना काम कीजिए। 

कंदिल ने महसूस किया ,कि डॉक्टर बख्श उससे भी गुस्से थे।

डॉक्टर बख्श कहकर आगे बढ़ गए थे ।

और कंदील उनको जाता हुआ देख रही थी। 

समीर भी वहां से चला गया था।

अपने केबिन में आते ही डॉक्टर बख्श ने अपने रूम के दरवाजे को बहुत तेज बंद किया। 

उन्हें शिद्दत से डॉक्टर समीर पर गुस्सा आ रहा था।

उस डॉक्टर समीर की इतनी हिम्मत कि उसने दोबारा कंदील को हाथ लगाया। 

वह क्या समझता है ,कि वह कंदील को बार-बार हाथ लगाएगा और कोई उसे कुछ भी नहीं कहेगा? 

डॉ बख्श रूम में इधर-उधर टहल रहे थे ,और गुस्सा उन्हे बेपनाह आ रहा था।

उनका मन कर रहा था, कि इस वक्त वह डॉक्टर समीर को जान से ही मार डालें।


जितना अच्छा आज सुबह डॉक्टर बख्श का मूड था। 

इस सारे मंजर को देखकर डॉक्टर बख्श का मूड बुरी तरह खराब हो चुका था।

वह घर जाकर भी सिर्फ उन्हीं बातों को याद कर रहे थे ।जो उसके उनके और कंदील के दरमियान हुई थी। 

और हॉस्पिटल थे में  आते ही ,उन्हें, इस मंजर का सामना करना पड़ा था।

मे आई कम इन सर।

दरवाजे पर दस्तक हुई। 

येस कमिंग।

डॉ बख्श ने कहा।

समीर दरवाजे से अंदर आ चुका था।

बेठिये डॉक्टर समीर डॉक्टर बख्श ने समीर से बैठने का इशारा किया।

और खुद भी सामने वाली कुर्सी पर बैठ गए।

डॉ समीर उस दिन भी आपने कंदील के साथ बहुत ज्यादा बदतमीजी और गिरी हुई हरकत की थी।

आज भी अपने कंदील को टच किया।

आप इस तरह से कंदील को क्यों परेशान कर रहे हैं।

इस अस्पताल के किसी भी इन्सान की कोई प्रॉब्लम और दिक्कत मेरी दिक्कत है।

अगर उन्हें कोई परेशान कर रहा है ,तो मुझे परेशान कर रहा है इसलिए मेरा फर्ज बनता है।

कि उस परेशानी से मैं उसे बाहर निकालू। 

डॉ समीर ने कहा ,क्योंकि वह यह नहीं चाहते थे  कंदील किसी तरह से बदनाम हो?

डॉक्टर बख्श ने समीर से कहा।

सॉरी डॉक्टर बख्श मुझे अच्छा नहीं लगा था, कि इस तरह से आप मुझसे बिहेव करेंगे।

बट मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं। 

डॉ समीर ने कहा, और कह कर खामोश हो गए।

डॉ बख्श मेरा और कंदील का अफेयर चल रहा है।

तो उस दिन जो हम लोग साथ थे, तो हम दोनों की  खुद की मर्जी थी।

इसलिए ही मैं बार-बार आपसे कह रहा था ,कि हम लोगों का पर्सनल मेटर है। 

डॉ समीर ने एक झूठी कहानी डॉक्टर बख्श को सुनते हुए कहा।

आप यह कहना चाहते हैं, कि उस दिन जो कुछ भी हुआ वह आप दोनों की मर्जी से हुआ ।

उसमें कंदील की मर्जी भी शामिल थी।

डॉक्टर बख्श को गुस्सा आ रहा था ।

इतनी झूठी बातों पर।

जी हां डॉक्टर बख्श,वह मेरी और कंदील की मर्जी थी।

  कंदील मुझे किसी बात से नाराज हो गई थी तो। 

बस उसे किसी बात पर गुस्सा आ गया। 

और फिर आप उस वक्त वहां पहुंच गए। 

समीर ने कहा।

इस वक्त डॉक्टर बख्श को बहुत तेज गुस्सा आ रहा था ,समीर की झूठी बातों पर। 

लेकिन यहां वह मजबूर थे ,इस वक्त वह कुछ कर नहीं सकते थे।

डॉ बख्श में कंदील को बहुत ज्यादा पसंद करता हूं ।

कंदील भी मुझे पसंद करती है ,और हम दोनों की इस बात में रजामंदी है।

और हम दोनों बहुत जल्द ही, समीर ने कुछ कहना चाहा था। 

डॉ समीर खामोशशश, हो जाओ।

डॉ बख्श ने उसे बीच में ही रोक दिया।

क्योंकि अब यह सारी बातें डॉक्टर बख्श की बर्दाश्त से बाहर थी?

मैं इस वक़्त खामोश हो जाता हूं ,डॉक्टर बख्श मगर हकीकत यही है। 

जो अभी मैने आपसे कहा है।

डॉ समीर बोला।

ओके आप इस रूम से बाहर जा सकते हैं। 

डॉ बख्श ने कहा। 

डॉ बख्श के कहने पर।

डॉ  समीर बिना देर किया रूम से बाहर चला गया।

उसके बाहर जाते ही ।

डॉक्टर बख्श ने फोन निकाल कर कंदील को एसएमएस किया।

कंदील बिना देर किए अभी के अभी मेरे रूम में आईए ।

डॉ बख्श में कंदील को एसएमएस किया था।

कंदील ने कुछ  मिनट बाद ही वह एसएमएस सीन कर लिया था।


इतना बड़ा झूठ बोल दिया था डॉक्टर समीर ने कन्दील को बदनाम करने के लिए। 

आखिर क्या चाहता था डॉक्टर समीर 

जानने के लिए पढ़ते रहिए।



                      कंदील


⭐ Next Part का Short Teaser Paragraph


कंदील डॉक्टर बख्श के केबिन की ओर बढ़ रही थी…

लेकिन उसके दिल की धड़कनें पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ थीं।

उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि समीर ने डॉक्टर बख्श के सामने क्या झूठ बोला है,

और यह झूठ उसकी ज़िंदगी को किस मोड़ पर ले जाने वाला है।

कमरे का दरवाज़ा आधा खुला था—जैसे कोई तूफ़ान उसे अंदर बुला रहा हो।

आख़िर डॉक्टर बख्श कंदील से क्या कहने वाले हैं?

और समीर इस झूठ से क्या हासिल करना चाहता है?

जानने के लिए अगला पार्ट मिस मत कीजिएगा…


https://timespeakestruth.blogspot.com/2025/11/blog-post.html

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