“कंदील : जख्म, रहस्य और आगा जान का छुपा सच | Kandeel Story Episode”





Kandeel ke ashk


 रोते-रोते कब उसकी आंख लग गई उसे एहसास नहीं हुआ? 

उसके जख्म इतने गहरे थे  जिन पर मरहम लगाने के बाद भी। 

उनका दर्द कम नहीं हो सकता था।

कुछ जख्म इतने गहरे थे जो उसके जिस्म के आलावा कंदील की रूह को भी लहुलुहान कर गए थे।

बे जान सी उसकी बॉडी मे  हरकत होने लगी। 

उसने कसमसाते हुए अपनी आंखों को खोला। 

आंखों को खोलने के बाद, उसकी नजर रूम के चारों तरफ गई। 

इस वक्त रूम में उसके अलावा दूसरा कोई मौजूद नहीं था।

आज वह शख्स उसे अकेला छोड़कर चला गया था। 

जिस शख्स से उसने बहुत उम्मीद लगाई थी।

कंदील ने बहुत हिम्मत जुटाते हुए, बेड से अपने कदमों को नीचे रखा।

और बाहर की तरफ जाने के लिए अपने कदमों को बढ़ाया।

उसने जैसे ही अपने कदमों को आगे बढ़ाया वह लड खडा कर नीचे गिर जाती। 

अगर बैड का सहारा ना लेती।

बैड के सहारे से उसने दीवार को पकड़ा।

और दीवार के सहारे से चलती हुई  रूम के बाहर तक आई।

उसके जिस्म में इस वक्त इतनी ताकत नहीं लग रही थी ।

कि वह खुद चलकर, गेस्ट हाउस से बाहर निकल सकती।

फिर भी उसने हिम्मत नहीं  हारी थी।

वह दीवार के सहारे से गेस्ट हाउस, के दरवाजे तक पहुंच गई थी।

कंदील गेस्ट हाउस के दरवाजे से जैसे ही बाहर निकली। पीछे से उसे किसी ने आवाज लगाई।

बीबी जी बीबी जी

यह वही बुजुर्ग शख्स थे, जिन्होंने अभी कुछ घन्टो पहले गेस्ट हाउस का दरवाजा खोला था।

उनकी आवाज पर कंदील के कदम वहीं रुक गए थे।

वह कंदील के बिल्कुल नजदीक आ चुके थे ।

कंदील ने सवालिया नजरों से उनकी तरफ देखा।

बीबी जी आप कहां जा रही हैं? 

उस पर शख्स ने कंदील से सवाल किया।

मैं अपने घर जाना चाहती हूं।

बामुश्किल कंदील के मुंह से यह आवाज निकली थी।

  वो बीबी जी साहब का हुक्म था, के आप अकेली नहीं जा सकती? 

वह बुजुर्ग शख्स अपने हाथों को बांधे हुए मुंह नीचे करके कह रहा था।

मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके साहब क्या कह रहे थे? 

मैं अकेले ही यहां से चली जाऊंगी। 

अचानक  रुके हुए आंसू फिर से बहने लगे थे।

नहीं बेबी जी ,आप मेहरबानी करके ऐसा मत कीजिए।

नहीं तो, साहब हमसे बहुत नाराज होंगे। 

उस बुजुर्ग शख्स ने हाथ जोड़ते हुए कहा।

ठीक है नहीं जा रही हूं मैं अकेले, कंदील वहीं दरवाजे से टिककर सीधी खड़े होते हुए बोली।

इतनी देर में वह शख्स दौड़ता हुआ गार्डन के पीछे की तरफ गया। 

और एक 27 28 साल के, शख्स को बुलाकर ले आया।

बीबी जी मेरा बेटा है यह, आपको आपके घर तक छोड़ देगा। 

उस बुजुर्ग शख्स ने कहा। 

तो 27 28 साल का शख्स अपने दांत दिखाने लगा।

ठीक है कंदील ने कहा।

कंदील आहिस्ता आहिस्ता चलते हुए गाड़ी के नजदीक आई।

और दरवाजा खोलकर गाड़ी के अंदर बैठ गई।

उस शख्स ने भी गाड़ी का दरवाजा खोला। 

और ड्राइवर वाली सीट पर बैठकर, कार स्टार्ट कर दी।



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वह अपने रूम के बाहर गैलरी में इधर से उधर टहल रहा था। 

अचानक से उसकी नजर कंदील के रूम से बाहर निकलती हुई, काला लिबास पहने उस लड़की पर पड़ी। 

जिसने पिछले दो दिन से हाशिम को, खुद को सोचने पर मजबूर कर दिया था।

वह टेरिस के नीचे की तरफ जा रही थी ,जब हाशिम ने उसे पीछे से आवाज लगाई।

जिल्ले हुमा।

अपने नाम को इस तरह से सुनकर उसके पैर वही जम गए थे। 

कोई उसका नाम इतनी बेबाकी से ले रहा था यह उसके लिए हैरानी का सबब था।

हाशिम उसके नजदीक आ गया।

मुझे एक सवाल करना है तुमसे। 

हाशिम उससे बोला।

जी साहब,

जिल्ले हुमा ने छोटा सा जवाब दिया।

तुम हर वक्त यह काला लिबास क्यों पहने रहती हो?

जिल्ले हुमा के दिल की धड़कनें तेज हो रही थी।

वो जितना चाह रही थी ,कि इस शख्स के सामने ना आए। उतना ही वह शख्स उसके नजदीक आ रहा था।

यह आगा जान  का हुक्म है।

और उनके हुकुम से ही मेरी किस्मत लिखी गई है।

मेरी किस्मत में ही लिखा है।

कि मैं काले लिबास के अलावा दूसरा कोई लिबास ईख्तियार नहीं कर सकती हूं।

जिल्ले हुमा ने जवाब दिया।

आगा जान का हुकुम है, के तुम काला लिबास पहनो? हाशिम को बहुत ताज्जुब हुआ था यह बात सुनकर।

जी हा

जिल्ले हुमा ने कहा।

मगर यह तुम्हारी जिंदगी है ,इसे जीने का तुम्हें अपनी तरफ  से पूरा ईख्तियार है। 

हाशिम ने कहा।

जी नहीं मेरी जिंदगी पर मेरा कोई हक नहीं।

मेरी जिंदगी का कलम चलाने का हक आगा जान का है।

वह जो भी लिखते हैं मेरी किस्मत में, वह मुझे करना पड़ेगा। 

जिल्ले हुमा ने कहां?

और कह कर आगे बढ़ गई।

हाशिम उसको जाते हुए देख रहा था। 

वह बड़ी ही उलझन में फंसा कर चली गई थी हाशिम को।

ऐसी कौन सी इसकी की जिंदगी की बात है?

जिनकी डोर को आगा जान ने थाम रखा है। 

आगा जान इसकी किस्मत का फैसला क्यों करने लगे? 

काफी सारे सवाल हाशिम के दिमाग में चल रहे थे।

और इसका जवाब सिर्फ, अगर जान हीं दे सकते थे।

                       

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आज आगा जान ने अपने रूम के दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया था।

हवेली  के सब लोग इन बात से वाकिफ थे। 

कि जब आगा जान गमजदा होते हैं।

तो अपने रूम को इसी तरह से अंदर से बंद कर लेते हैं। 

आज भी यही हुआ था।

  वह कंदील के वालिद की फोटो के सामने खड़े हुए थे।

आगा जान को आज शिद्दत से अपने बेटे की याद आ रही थी

आगा जान तीस साल पुरानी यादो मे खो चुके थे।



नही आग जान मै उसको धोका नही दे सकता।

आपके और आपकी हवेली के रूल्स आप जाने मैं इसमें इंवॉल्व नहीं होना चाहता हूं। 

मैंने उससे मोहब्बत की है।

मैं उसे धोखा किसी कीमत पर नहीं दे सकता।

नवाब साहब का बेटा ,नवाब साहब से बगावत कर रहा था।

और नवाब साहब अपनी कुर्सी पर बैठे उसकी बातों को खामोशी से सुन रहे थे।

जफर तुम हमारी शराफत का नाजायज फायदा उठा रहे हो। 

जितना हमने तुम्हें ढील दी थी, उसका भी तुमने फायदा उठाया है। 

नवाब साहब ने कहा।

जी नहीं नवाब साहब ,यह मेरी जिंदगी इसी जीने का अपने तरीके से मुझे पूरा हक है। 

जफर साहब बहुत जिद्दी थे,वो अपनी बात मनवा कर ही रहते थे।

और अपनी जिंदगी के फैसले मैं खुद बेहतर कर सकता हूं।

उन्होंने निडर होकर अपने वालिद के सामने यह बात कही।

हां बेशक अपनी जिंदगी के फैसले तुम खुद कर सकते हो। 

लेकिन हमने किसी को जुबान दी है। 

और हमारी जान जा सकती है, लेकिन हम अपनी जुबान से नहीं है फिर सकते है। 

आगा जान ने हुकुम सुनते हुए कहा।

मगर आगा जान में उस लड़की से हरगिज  शादी नहीं करूंगा जिनको आपने मेरे लिए चुना है।

वह अपने सीने पर हाथ बंधे हुए अपने वालिद की तरफ रुख मोड़ कर बोले।

और हमारी भी जिद्द जफर कि हम उस लड़की से तुम्हारी शादी करवाएंगे जिसको हमने तुम्हारे लिए चुना है। 

हमने उस लड़की  और उस लड़की के वालिदैन को अपनी जुबान दी है। 

वह हमारे रिश्तेदार हैं, हम नहीं चाहते कि तुम्हारी वजह से हमारी रिश्तेदारी में कोई हलल पड़े।

आगा जान अपनी छड़ी को जमीन पर टिकाते हुए।

गुस्से में खड़े होकर बोले।

मैं भी देखता हूं आगा जान, की आप किस तरह से उस लड़की से मेरी शादी करेंगे।

वह  वार्निंग देते हुए कमरे से बाहर निकल गए थे। 

आगा जान गुस्से से  अपने रूम में इधर-उधर टहलने लगे।


जफर क्या कर रहे हो तुम कहां जा रहे हो सब सामान लेकर? 

बेगम साहिबा जफर को अपना सामान पैक करते हुए देखकर बोली।

बेगम साहिबा में वापस अमेरिका जा रहा हूं।

मुझे आगा जान का फैसला मजदूर नहीं है। 

जफर ने अपने बैग की जीप लगाते हुए कहा?

जफर मेरे बेटे इस तरह मत जाओ। 

हम आगा जान को समझ कर देखते हैं। 

शायद वह हमारी बात मान जाए। 

नहीं बेगम साहिबा ,आप भी अच्छी तरह से जानती है ।

के आगा जान एक बार कोई फैसला कर ले, तो उसे को बदलते नहीं है?

उनका फैसला अटल फैसला होता है। 

लिहाजा  वो इस बात के लिए कभी नहीं मानेंगे।

जफर ने कहा।

  बेटा बहुत अच्छी लड़की है वह ,नूर ,तुम एक बार उसे देखोगे तो तुम्हें पसंद आ जाएगी वो।

बेगम साहिबा मैं जानता हूं ,कि वह लड़की बहुत अच्छी है। मगर मैं किसी और को अपनी जुबान दे चुका हूं। 

मैं उसके सिवा किसी और से शादी नहीं कर सकता। 

जफर ने कहा।

तो इसका यह मतलब है ,कि तुम हम सब को छोड़कर चले जाओगे। 

मेरी फिक्र भी नहीं है तुम्हें जरा सी भी। 

बेगम साहिबा की आंखों में आंसू आ गए।

उस लड़की की मोहब्बत में तुम अपनों को भूल गए हो जफर

बेगम साहिबा बोली।

नहीं बेगम साहिबा ऐसी बात नहीं ,मुझे आपकी बहुत फिक्र है। 

लेकिन आप जरा सोचिए मेरी जज्बातों की आगा जान को बिल्कुल परवाह नहीं है। 

मैं कैसे उस लड़की के साथ शादी कर लूं? 

जिसे मैं पसंद नहीं करता। 

जफर अपनी वालिदा के आंसुओं के सामने। 

कमजोर पढ़ने लगे थे।

जफर हमारे कहने पर एक बार रुक जाओ तुम ,हम नवाब साहब को समझ कर देखते हैं।

बेगम साहिबा जफर को कंधों से पकढ़ते हुए बोली।

जफर अपनी वालिदा की आंखों आंसुओं के सामने मजबूर थे। 

इसलिए वह रुक गया।


कौन सा ऐसा सच था,जो कंदील की जिन्दगी से जुड़ा हुआ था।

जो सिर्फ आगा जान जानते थे।

जानने के लिए पड़ते रहिए 


                                     कंदील





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⭐ — अगला हिस्सा ( गहरा, और Suspense से भरा)


कंदील को घर तक छोड़ने वाले उस अजनबी की निगाहों में एक अनजानी बेचैनी थी। रास्ते भर उसकी नज़रें शीशे में से कंदील को ऐसे टटोल रही थीं जैसे वह उसे किसी पुराने किस्से से पहचानता हो। कार की खिड़की के बाहर अँधेरा था, मगर कंदील के दिल में उससे भी गहरा अँधेरा उतरता जा रहा था।

उस अजनबी की हर हरकत, हर सांस उसे किसी अनकहे ख़तरे की तरफ इशारा कर रही थी।


उधर हवेली में हाशिम—जिल्ले हुम़ा की बातों से इतना उलझ चुका था कि उसके लिए अब खामोश रहना नामुमकिन हो गया था।

उसने उसी रात तय कर लिया कि चाहे जो हो जाए, वह आगा जान का सामना करेगा।

लेकिन हवेली में उस वक्त एक ऐसी चुप्पी पसरी हुई थी जो किसी बड़े तूफ़ान से पहले की निशानी लग रही थी।


आगा जान के अंदर तीस साल पुरानी यादों का दरवाज़ा फिर से खुल चुका था…

और जिस सच को उन्होंने इतने बरसों से दफ़्न कर रखा था,

वही सच अब पहली बार अपनी साँसें लेने वाला था।


एक ऐसा सच…

जो सिर्फ कंदील की ज़िंदगी नहीं बदलेगा,

बल्कि हवेली की हर दीवार, हर रिश्ता, हर वफ़ादारी को मिट्टी में मिला देगा।



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⭐ Readers के लिए Message


मेरे अज़ीज़ पाठकों,

अगर “कंदील” की ये दास्तान आपके दिल को छू रही है,

तो गुज़ारिश है के अपने क़ीमती कमेंट्स और शेयर के ज़रिये

मुझ जैसे तहरीर-निगार को हौसला अफ़ज़ाई देते रहें।

आपके हर बोल, हर अल्फ़ाज़ मुझे अगला हिस्सा और बेहतरीन अंदाज़ में लिखने की तावानाई देते हैं।

इस कहानी को हिन्दुस्तान ही नहीं, बल्कि 42 ममालिक के लोग पढ़ रहे हैं —

आप सबका तहे-दिल से शुक्रिया।

इंशा अल्लाह अगला हिस्सा बहुत जल्द,

और भी ज़्यादा गहराई, रहस्य और जज़्बात लिए सामने होगा।



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