“Kandeel: Ek Mohabbat, Ek Ghalatfehmi – A Psychological Romance Thriller”

 



डॉक्टर बख्शशशशशश 

सामने देखिए कंदील चीखी क्योंकि सामने से एक ट्रक आ रहा था?

और डॉक्टर बख्श की गाड़ी की तेज स्पीड देखकर ऐसा लग रहा था ।

कि डॉक्टर बख्श अपनी गाड़ी को ट्रक से टक्कर मार देंगे।

कंदील ने अपनी आंखों पर हाथ रख लिया था ।

उसे लग रहा था,कि अब उन दोनों का बचना नामुमकिन है।

डॉक्टर बख्श ने गाड़ी को तिरछा घूमा कर ट्रक के बिल्कुल नजदीक से निकाल लिया।

जब कंदील को एहसास हुआ कि ट्रक बिल्कुल हमारे नजदीक से निकल चुका है। 

उसने डरते डरते अपने आंखों पर से हाथ हटाए।

और अल्लाह का शुक्र अदा किया।

डॉक्टर बख्श क्या हो गया आपको,क्या  आप पागल हो गए हैं?

कंदील ने उन की तरफ देखते हुए कहा।

हां कंदील जफर मैं पागल हो गया हूं।

तुम्हारी वजह से आज मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा। 

मुझे लग रहा है आज मैं खुद को खत्म कर दू। 

डॉ बक्श ने गाड़ी को और तेज स्पीड में चला दिया।

डॉक्टर बख्श प्लीज ,प्लीज गाड़ी को रोकिए और मेरी बात समझने की कोशिश कीजिए।

कंदील उनसे मिन्नत कर रही थी।

लेकिन आज डॉक्टर बख्श कंदील की एक नहीं सुनना चाह रहे थे।

फुल स्पीड में गाड़ी को चलते हुए डॉक्टर बख्श जाने कहां कंदील को लेकर जा रहे थे?

कंदील दुआ मांग रही थी ,कि डॉक्टर बख्श इस गाड़ी को रोक ले।

  कंदील की दुआ कबूल हो गई थी, डॉक्टर बख्श ने गाड़ी को रोक लिया था?

डॉ बख्श ने गाड़ी एक फार्म हाउस के आगे रोक ली ।

  कंदील को यह पहचान में बिल्कुल भी टाइम नहीं लगा कि यह वही फार्म हाउस है। 

जहां पर डॉक्टर बख्श कुछ सालों पहले कंदील को लेकर आए थे। 

यहीं पर उन्होंने कंदील से शादी की थी।

डॉक्टर बख्श गाड़ी से उतरे ,उनका गुस्सा अभी भी पूरे अबो ताब पर था।

चलो गाड़ी से नीचे उतरो।

उन्होंने कंदील की तरफ का दरवाजा खोलते हुए ।

कंदील को हुक्म दिया।

डॉ बख्श आप यहां क्यों लेकर आए हैं मुझे?

इस वक्त  कंदील को डॉक्टर बख्श से बहुत डर लग रहा था।

गाड़ी से नीचे उतरो कंदील, नहीं तो मैं तुम्हें उठाकर गाड़ी से बाहर ले जाऊंगा।

डॉ बख्श ने कन्दील को धमकी देते हुए कहा।

नहीं डॉक्टर बख्श मै गाड़ी से नीचे नहीं उतरूंगी। 

कंदील भी अपनी जिद्द पर आ गई थी।

डॉ बख्श ने गुस्से में पूरी जान से गाड़ी पर एक मुक्का मारा।

और एक झटके से कंदील को अपनी बाहों में उठा कर ले जाने लगे।

डॉ बख्श प्लीज नीचे उतारिए  मुझे। 

कंदील ने कहा। 

लेकिन इस वक्त डॉक्टर बख्श पर, कंदील की किसी बात का कोई असर नहीं हो रहा था। 

वह उसे किसी बच्चे की तरह उठाकर।

गेस्ट रूम के अंदर ले जा रहे थे।

डॉक्टर बख्श उतारिए मुझे नीचे। 

कंदील उनकी बाहों में फड़फड़ा रही थी।

वह उसकी बात का कोई जवाब नहीं दे रहे थे। 

वो खामोशी से उसे अपनी बाहों में लेकर चल रहे थे।

कोई और वक्त होता तो कंदील शायद इस लम्हे में बहुत खुश नजर आती है। 

लेकिन इस वक्त डॉक्टर बख्श बहुत गुस्से में थे।

डॉक्टर बख्श का गुस्सा देखकर ऐसा लग रहा था।

कि जाने वह कंदील का क्या हाल करेंगे?

रहीम बाबा, रहीम बाबा। 

डॉक्टर बख्श जब गेस्ट रूम के दरवाजे पर आ गए थे।

तो उन्होंने आवाज लगाना शुरू की।

एक 70 साल के बुजुर्ग हल्के हल्के चलते हुए। 

डॉक्टर बख्श के नजदीक आ गए। 

उनको देखकर ऐसा लग रहा था कि, शायद बहुत पुराने। मुलाजिम है। 

गेस्ट हाउस की देखभाल करते हैं।

उन्होंने आंखें फाढ़ते हुए पहले डॉक्टर बख्श। और फिर उनकी बाहों में कंदील को देखा।

कंदील जिस तरह से फड़फड़ा रही थी उसको देखकर वह बुजुर्ग अंदाजा लगा सकते थे।

कि डॉक्टर बख्श जबरदस्ती, कंदील को उठाकर यहां लेकर आए हैं।


जी साहब वह बुजुर्ग अदब से खड़े होते हुए डॉक्टर बख्श से बोले।

रहीम बाबा गेस्ट हाउस का दरवाजा खोलिए।

डॉ बख्श ने उस बुजुर्ग शख्स से कहा।

उस बुजुर्ग शख्स ने बिना टाइम खराब किया ,अपनी जेब से चाबी निकाल कर गेस्ट हाउस का दरवाजा खोला। 

और दरवाजे की एक तरफ खड़े हो गए।

दरवाजा खुलते ही डॉक्टर बख्श कंदील को, लेकर गेस्ट हाउस के अंदर चले गए।

काफी बड़ा और खूबसूरत गेस्ट हाउस था  गार्डन के बीचो-बीच बना हुआ था।

  इस गेस्ट हाउस में हर तरफ मिरर वाली विंडोज थी। 

जिससे हाल में बैठकर भी। 

मिरर से आप गार्डन का नजारा कर सकते थे।

हाल से गुजरते हुए डॉक्टर बख्श कंदील को, बेडरूम की तरफ ले गए।

बेडरूम के पास आते ही उन्होंने बेडरूम के दरवाजे को। अपनी एक लात मार कर, खोला।

डॉक्टर बख्श की एक लात में ही वह बेडरूम खुल चुका था।

डॉ बख्श  कन्दील को लेकर दरवाजे से अंदर

घुसे।

और कंदील को लगभग बेड पर फेंकते हुए।

उन्होंने रूम का दरवाजा बंद किया।

कंदील की तरफ एक गुस्से भरी नजर डालते हुए 

गुस्से में अपनी शर्ट को उतार कर जमीन

पर फेंका।

मैंने जितनी तुमसे मोहब्बत की उसका तुमने नाजायज फायदा उठाया कंदील जफर।

लेकिन आज मैं तुम्हें तुम्हारे किए की सजा दूंगा। 

और ऐसी सजा दूंगा ।

कि तुम्हें ताहा उम्र याद रहेगी।

वह बैड पर चढ़ते हुए कंदील के नजदीक आकर बोले।

डॉ बख्श क्या हुआ है आपको ,क्या करने जा रहा है आप?

कंदील बैड पर पीछे  खिसकते हुए बोली।

वही कंदील जफर जो मुझे बहुत पहले करना चाहिए था।

इस वक्त डॉक्टर बख्श अपने होश में नहीं थे।

डॉक्टर बख्श प्लीज ,प्लीज दूर रहिए मुझसे।

कंदील की आंखों में आंसू थे।

नहीं कंदील अब मैं तुमसे दूर नहीं रह सकता।

तुमने मुझे यह घिनौनी हरकत करने पर मजबूर कर दिया है।

डॉक्टर बख्श कंदील के बिल्कुल नजदीक आ चुके थे।

इतने नजदीक के दोनों को सिर्फ एक दूसरे की सांसों की आवाज सुनाई पड़ रही थी।

डॉक्टर बख्श प्लीज एक बार ,मेरी बात सुनने की कोशिश कीजिए। 

ऐसा कुछ मत कीजिए जिसे करने के बाद आपको बाद में पछताना पड़े।

कंदील ने कहा।

अब मैं तुम्हारी कोई बात नहीं सुनूंगा। 

जो मेरे मन में आएगा मैं वह करूंगा।

और वैसे भी यह कुछ गलत नहीं है।

शौहर हूं मैं तुम्हारा।

डॉ बख्श ने कहा।

डॉक्टर बख्श जाने दीजिए मुझे।

कंदील में बैड से उतरने की कोशिश की।

लेकिन उसकी यह कोशिश नाकामयाब रही।

डॉक्टर बख्श ने एक झटके से कंदील का हाथ खीचा। 

जिससे वह लगभग बैड पर लेट गई।

और अब पोजिशन ऐसी थी।

की डॉक्टर बख्श कंदील के ऊपर थे।

और कंदील उनके नीचे थी।

नहीं डॉक्टर बख्श प्लीज ऐसा मत कीजिए।

कंदील के लहजे में बहुत मिन्नतें थे।

लेकिन डॉक्टर बख्श ने उसकी एक नहीं सुनी। 

कंदील के होटो को उन्होंने अपने होठों से बंद कर दिया।

कंदील काफी कोशिश कर रही थी डॉक्टर बख्श की  गिरफ्त से बाहर निकालने की। 


  मगर कंदील की यह कोशिश सिर्फ कोशिश ही थी।

उसका नाजुक वुजूद डॉक्टर बख्श के वुजूद से कैसे मुकाबला कर सकता था?

वो टूट कर बिखर रही थी ।

और उसको तोड़ने वाला कोई और नही था।

उसका अपना उसका शौहर था।

अब उसके जिस्म ने हरकत करना बन्द कर दी थी।

डॉक्टर बख्श अपनी मनमानी कर रहे थे।

कुछ देर बाद डॉक्टर बख्श कंदील के ऊपर से हट गए 

कंदील ने उनकी तरफ से रूख मोड़ लिया और सिसक सिसक कर रोने लगी।

कंदील को महसूस हो रहा था ,आज उस हर पल मे कंदील हजार मौत मरी है। 

जिस पल मे डॉक्टर बख्श ने उससे जबरदस्ती की थी

उनकी घिनौनी हरकत से कंदील को लग रहा था।

आज वो जिन्दा ही नही है।


आज डॉक्टर बख्श ने वो कर दिया था।

जो कंदील ने कभी ख्वाब मे भी नही सोचा था।

एक गलत फहमी की सजा कन्दील को मिली थी।

क्या होगा अब कंदील का फैसला।

जानने के लिए पड़ते रहिए 



                              कंदील




✅ Next Short Part 


कंदील धीरे-धीरे उठकर बैठ गई। उसकी आँखें सूज चुकी थीं, मगर उसकी आवाज़ अब पहले जैसी काँप नहीं रही थी।

वो चुपचाप दरवाज़े की तरफ देखने लगी… जैसे उसके अंदर एक फैसला जन्म ले चुका हो।

उधर डॉक्टर बख्श कमरे के कोने में खड़े थे।

उनके हाथ काँप रहे थे… शायद गुस्से से नहीं— पछतावे से।

कुछ पल तक कमरे में सिर्फ खामोशी थी।

फिर कंदील ने धीमी आवाज़ में कहा—

“डॉक्टर बख्श… आज के बाद सब कुछ बदल जाएगा।”

डॉक्टर बख्श ने उसकी तरफ देखा।

उसके चेहरे पर मजबूती, डर, और टूटन—तीनों एक साथ थे।

“क्या मतलब?”

बख्श की आवाज़ भर्रा गई।

कंदील ने आँसू पोंछे।

वो अब पहले वाली मासूम, डरती हुई कंदील नहीं थी।

उसके चेहरे पर एक अजीब सा सुकून और दृढ़ता थी।

“मैं इस रात का फैसला खुद करूँगी…

आप नहीं।”

डॉक्टर बख्श एक कदम उसकी तरफ बढ़े—

मगर कंदील ने हाथ उठा दिया।

“बस। बहुत हो गया।”

कमरे में एक बार फिर खामोशी फैल गई।

लेकिन इस बार इस खामोशी में तूफ़ान छिपा था।

अब सवाल था—

क्या कंदील डॉक्टर बख्श को माफ करेगी?

या एक नया मोड़ उसकी और डॉक्टर बख्श की जिंदगी बदल देगा?

जाने के लिए पढ़ते रहिए… “कंदील – अगला फैसला”



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