“कंदील और डॉक्टर बख्श: एक अनकही रात की कहानी | दिल की बात जो लफ़्ज़ों से आगे थी”

 


अच्छा इतनी फिक्र हो रही थी आपको मेरी।
कंदील को बहुत सुकून महसूस हो रहा था ,डॉक्टर बख्श के सीने पर सर रखकर।
जी हां मोहतरमा आपकी बहुत फिक्र हो रही थी, मुझे क्योंकि ना तो आपकी कॉल रिसीव हो रही थी ना ही एसएमएस रिसीव हो रहे थे?
डॉक्टर बख्श ने कहा।

ठीक है अब देख लिया ना अपने ,कि मैं सही सलामत हूं। अब जाइए अपने घर वापस जाइए।
कंदील ने डॉक्टर बख्श को धक्का देते हुए कहा।
ओहहहह ये बात है।
तो मै सारी रात आपकी हवेली में आपके रूम में ही रहूंगा और कहीं नहीं जाऊंगा।
डॉ बख्श  आराम से कंदील के बेड पर लेटे हुए बोले।
चाहे आपकी फैमिली का एक-एक मेंबर भी आ जाए ना आपके रूम में, तो भी वह मुझे बाहर नहीं निकाल सकते।
डॉ बख्श अकड़ते हुए बोले।
कंदील को उन की हरकत पर हंसी आ गई?
अच्छा तो आपके दिल में जरा भी  खौफ नहीं है मेरे घर वालों का।
कंदील ने कहा।
जी मोहतरमा, बिल्कुल भी नहीं है।
डॉक्टर बख्श ने अपनी गर्दन को ना मे हिलाया।
अच्छा और अगर मैंने पुलिस को कॉल कर दिया तो। कंदील डॉक्टर बख्श के करीब आकर खड़े  बोली।
भूल से भी आप ऐसी गलती मत कर देना ।
मिसेज बख्श नहीं तो।
डॉ बख्श ने कंदील का हाथ अपनी तरफ खींचते हुए कहा।
और कंदील का हाथ खींचने से कंदील, डॉक्टर बख्श के ऊपर आकर गिर गई।
नहीं तो आप क्या कर लेंगे सैफ?
उसने नाराजगी  भरी नजरों से डॉक्टर बख्श की  तरफ देखते हुए कहा।
ऊफफफफफ कंदील ,बस  तुम्हारी यह हरकतें ही ना।
मेरा सुकून बरबाद कर देती है।
डॉक्टर बख्श ने अपनी बहो का घेरा कंदील के ऊपर डालते हुए कहा।
कंदील डॉक्टर बख्श के सीने पर अपनी कोनी को टिकाते हुए डॉक्टर बख्श को बहुत गौर से देख रही थी।
कंदील आप जानती हो, जब आप मुझे सैफ कह कर बुलाती हो होना।
तो मेरा मन करता है।
डॉ बख्श बेपनाह मोहब्बत लिए कंदील को देख रहे थे।
क्या सैफ,आपका मन क्या करता है?
कंदील ने कहा।
  उस वक्त मेरा मन करता है, कि तुम्हें अपने दिल में कहीं छुपा कर रख लू।
जिससे मेरे अलावा तुम्हें कोई और ना देख सके।
डॉक्टर बख्श की निगाहों में बेपनाह प्यार देखकर।
कंदील ढगमगाने लगी थी।
वह करवट लेते हुए डॉक्टर बख्श के ऊपर से बैड के नीचे  उतर गई थी।
और सीधी होकर रूम की छत को घूरने लगी।
क्या हुआ मिसेज बख्श,क्या सोचने लगी आप?
डॉक्टर बख्श ने करवट लेकर, अपने सर को अपने हाथ से टिकाते हुए कहा।
कंदील की आंखों से आंसुओं के दो कतरे बहकर बैड पर गिरे।
कंदील क्या हुआ यार, तुम्हारी आंखों में आंसू क्यों है?
डॉक्टर बख्श कंदील की तरफ झुकते हुए बोले।
कुछ नहीं सैफ बस ऐसे ही, आंखों में ऑसू आ गए।
कंदील ने मुस्कुरा कर अपनी आंखों  को साफ किया।
फिर भी कंदील इस वक्त तुम्हारी आंखों में आंसू आने की क्या वजह है ।
क्या मेरी किसी बात से हर्ट हुई हो तुम?
डॉक्टर बख्श अपना हाथ कंदील के गालों पर फिराते हुए बोले।
नहीं सैफ ऐसा कुछ नहीं है।
कंदील ने कहा।
बस आपकी आंखों में देखकर यकीन नहीं हो रहा है ।
कि, कंदील ने यह बात अधूरी छोड़ दी थी।
की ,क्या  कंदील?क्या यकीन नहीं हो रहा है तुम्हें।
डॉक्टर बख्श ने कहा।
कुछ नहीं आप जाइए इस वक्त यहां से ओके।
कंदील ने डॉक्टर बख्श को फिर से धक्का दिया।
क्या यार बार-बार ,अपने शौहर को धक्का देकर भागा रही हो अपने रूम से?
जितना तुम्हारा है ये रूम उतना मेरा भी है।
डॉ बख्श अपने सर के नीचे हाथ रखकर अपने एक पैर पर दूसरे पर को रखते हुए कहा।
डॉक्टर बख्श, आपके लिए यही बेहतर है।
कि आप इस वक्त यहां से चले जाइए।
क्योंकि अगर सब लोग आ गए?
तो आप समझदार हैं कि क्या हो सकता है?
कंदील डॉक्टर बख्श को डराने वाले लहजे में बोली।
अच्छा मिसेज बख्श आप मुझे डरने की कोशिश कर रही है।
ठीक है।
सिर्फ मैं आपकी वजह से जा रहा हूं।
इतना तो आप भी जानती हैं, कि डरता मैं किसी से भी नहीं।
सैफ बिस्तर पर से उठते  हुए मुस्कुरा कर बोला।
वो  कंदिल के रूम से बाहर जाने के लिए खिड़की की तरफ बड़े।
जिससे डॉक्टर बख्श अंदर आए थे।
1 मिनट सैफ।
कंदील ने पीछे से आवाज लगाते हुए कहा।
कंदील का मन कर रहा था, कि आज वह डॉक्टर बख्श को कहीं ना जाने दे।
उसकी एक वजह यह भी थी,  उसकी हवेली में दूसरा कोई मौजूद नहीं था ।
मुलाजिमों के अलावा।
और फिर उसका दिल कर रहा था, कि डॉक्टर बख्श उसके साथ रहे।
डॉक्टर बख्श  रूक गए, और उन्होंने मुड़कर कंदील की तरफ देखा।
अब क्या हुआ मिसेज बख्श?
डॉक्टर बख्श ने कहा।
क्या आज आप रात यहां रूक सकते हैं ।
मेरी सिक्योरिटी के लिए?
कंदील ने डॉक्टर बख्श की तरफ देखते हुए कहां?
मैं समझा नहीं ,तुम्हारी सिक्योरिटी के लिए मतलब।
डॉ बख्श ने कहा।
मतलब यह की इस वक्त हवेली में कोई भी मौजूद नहीं है। मुलाजिमों के अलावा।
सब लोग सिटी से बाहर शादी अटेंड करने गए हैं।
और सब सुबह के बाद ही आएंगे।
कंदील ने सारी बात तफसील से बताते हुए कहा।
डॉक्टर बख्श के चेहरे पर स्माइल आ गई थी ।
कंदील की बात को सुनकर।
डॉक्टर बख्श चलते हुए ,कंदील के नजदीक आ गए।
मतलब आप ये चाहती हैं, कि मैं आपकी सिक्योरिटी के लिए यहां पर रूक कर।
आपकी पहरेदारी करूं।
डॉ बख्श ने कहा।
पहरेदारी नहीं ,रिस्पांसिबिलिटी हू ना मैं आपकी।
तो अपनी रिस्पांसिबिलिटी निभाईए ।
मुझे बहुत तेज नींद आ रही है।
तो आपको ध्यान रखना है, कि मुझे कोई डिस्टर्ब ना करें। कंदील आराम से अपने बिस्तर पर लेटे हुए हुकुम भरे लहजे मे बोली।
डॉक्टर बख्श ने मुस्कुराते हुए अपनी गर्दन को हिलाया।
और जाकर कंदील के बराबर लेट गए।
और हां डॉक्टर बख्श एक बात का ध्यान रखिएगा।
कि मुझे सोते हुए बिल्कुल डिस्टर्ब करने की कोई जरूरत नहीं है।
कंदील, डॉक्टर बख्श की तरफ उंगली दिखाते हुए कहा।
अच्छा और अगर मैने ऐसा ना किया, फिर क्या करोगी आप
डॉक्टर बख्श ने बनावटी गुस्से से,कंदील  की तरफ देखते हुए कहा।
  सैफ सोने दीजिए मुझे ,मैं बहुत थकी हुई हूं नींद आ रही है मुझे बहुत।
कंदील पूरे हक़ से डॉक्टर बख्श के हाथ पर अपना सर रखकर लेते हुए बोली।
इस वक्त डॉक्टर बख्श से कोई जवाब नहीं बन पाया।
कि वह कंदील से क्या बोलें?
क्योंकि सच में कंदील बहुत थकी हुई थी ,और उसके साथ-साथ डॉक्टर बख्श भी बहुत थके हुए थे?
डॉक्टर बख्श ने कन्दील की तरफ देखा।
थोड़ी देर में ही कंदील को नींद आ गई थी।
डॉक्टर बख्श उसके चेहरे को बहुत गौर से देखने लगे।
कंदील बेखबर सो चुकी थी।
डॉ बख्श ने अपने हाथ को मोड़कर कंदील का सर अपने सीने पर रख लिया।
और उसके सर पर हाथ फिराते फिराते।
डॉक्टर बख्श   कब नींद की आगोश में आ गए उन्हें पता ही नहीं चला?


🔹 Next Part Hook Paragraph:


सुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर झांक रही थी।

कंदील की पलकों पर सोए हुए ख्वाब अब भी ठहरे हुए थे,

जबकि डॉक्टर बख्श की नजरें उसी पर टिकी थीं —

मानो वो हर सांस में उसे महसूस कर रहे हों।

लेकिन इस सुकून भरी सुबह के पीछे कुछ ऐसा था,

जिसने दोनों की जिंदगी का रुख बदल देना था...

एक ऐसा राज़ जो ना कंदील जानती थी, ना डॉक्टर बख्श सोच सकते थे।


Writer Afsana Wahid 


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