“छोटे नवाब हाशिम की वापसी: हवेली में उठते पुराने राज़ और एक नयी शुरुआत”

 



हवेली के सारे लोग वापस आ चुके थे। 

और हॉल में बैठकर उसका इंतजार कर रहे थे। 

सब उसके आने पर इतने एक्साइटेड थे, के खामोशी से बैठ कर उसका इंतजार कर रहे थे।

बूट की आवाज पर हवेली के सब लोगों की नजर सीडीओ पर गई। 

हैंडसम गुड लुकिंग डेशिंग सी पर्सनालिटी का मालिक शख्स। सीडीओ से नीचे उतर रहा था। 

हाशिम ने नार्मल ही मैरून शर्ट और ब्लैक टाऊजर पहन रखा था 

जिससे वो बहुत हैंडसम, स्मार्ट लग रहा था

उसको देखकर सबके चेहरे पर स्माइल आ चुकी थी। 

वह आहिस्ता आहिस्ता करके सीढीओ से नीचे उतर चुका था। 

और उतर कर सबसे पहले, आगा जान के नजदीक पहुंचा।

आगा जान अपनी छड़ी से टेक लगाते हुए खड़े हो गए।

और पुरुजोश होकर उन्होंने हाशिम को अपने गले लगा लिया। 

हाशिम भी बहुत खुशदिली से, आगा जान के गले लग गया।

ओहहह मेरे छोटे नवाब , बहुत वक्त लगा दिया आपने इंडिया वापस आने में।

आगा जान  उससे शिकवा

कर रहे थे।

आगा आप तो   जानते हैं, कि जिस मकसद के लिए हमें अपने बाहर भेजा था।

उस मकसद को पूरा करके ही हमें इंडिया वापस आना था। इस वक्त हाशिम एक फरमाबरदार, बेटे की तरह नवाब साहब से बात कर रहा था।

आगा जान आपने जिस मक्सद के लिए मुझे इंडिया से बाहर पढ़ने के लिए भेजा था उस मकसद को मैंने पूरा कर लिया है। अब इंशाल्लाह बहुत जल्दी मैं यहां पर, नया बिजनेस सेटल लगाऊंगा। 

वो आगा जान से जुदा होते हुए बोला। 

हां बिल्कुल ,बिल्कुल मेरा बेटा।

मेरी दुआएं तुम्हारे साथ है, आगा जान उसके  सर पर हाथ फेरने लगे।

और बेटा मैं उम्मीद करता हूं, कि जिस सिलसिले में मैं तुमसे बात कर रहा था। 

उसे पर भी तुम सोचा होगा। 

आगा जान ने कहा। 

जी हां बिल्कुल आगा जान ,आपका कहा हर लफ्ज मेरे लिए बहुत जरूरी है ,मैं जरूर सोचूंगा आपके उस एहम फैसले पर। 

अचानक से ही कंदील का चेहरा हाशिम के सामने आ गया था।

फिर हाशिम अपने वालिद के गले लग गया।

तुम्हें देखने के लिए मेरी आंखें तरस गई थी बेटा। 


उसके वालिद की आंखों में आंसू

आ गए।

ओहहहह  पापा आप तो इतना सीरियस हो गए।

देखिए ना अब आपके सामने ही हूं मैं। 

वह उनके गले से हटकर। 

अपनी तरफ इशारा करते हुए बोला।

फिर अपने वालिद की बराबर में खड़ी हुई अपनी वालिदा की तरफ तिरछी निगाह करके दिखा। 

क्योंकि  उनकी आंखों से? ऑसू बह रहे थे।

मॉम प्लीज इमोशनल मम्मीयों की तरह अपने  ऑसू ना बाहाइए ।

हाशिम ने अपने सर को।

अपनी वालिदा के आगे झुकते हुए कहा।

बेटा मेरी आंखें बहुत तरसती रही है ,तुझे एक नजर देखने के लिए। 

अब इतने दिन से खुद को रोका है मैंने आंसू बहाने से  आज उनको बहने दे। 

उसकी वालिदा ने कहा।

उसके बाद हाशिम बारी बारी हर शख्स से मिला।

और हवेली का हर शख्स है उसे देखकर बहुत खुश नजर आ रहा था।

सब हाशिम के वापस आने पर बहुत ज्यादा खुश हो गए थे।

सिर्फ एक वही शख्स था, जिसे देखकर हाशिम को चिढ़ हो गई थी।

और उस शख्स को हाशम को देखकर खुशी भी महसूस नहीं हुई थी।

कंदील जफर,  तुम पूरी हवेली में एक ऐसी शख्स हो, जो मुझे देखकर खुश नहीं हो।

मैं भी तुम्हें बात ही दूंगा।

कि मुझे मुझे वॉर्न करने वाले लोगों के साथ। 

मैं कैसा बिहेव करता हूं?

जो मेरे लिए अच्छा है, मैं उसके लिए बहुत अच्छा हूं। 

पर जो मेरे लिए गलत है।

उसके साथ, मैं बद से बदतर सलूक करता हूं। 

हाशिम सोच रहा था।

सबके साथ बहुत खुश भरे माहौल में हाशिम ने  लंच किया।

सभी बहुत खुश नजर आ रहे थे।


हवेली का हर एक शख्स हाशिम से मिलकर बहुत ही खुश था। 

एक तो हाशिम का नेचर बहुत अच्छा था। 

वह हर छोटे और बड़े को बहुत प्यार से रिस्पेक्ट दे रहा था।

अब हाशिम बेटा अपने घर आ गया है ,तो जल्दी से इसके लिए लड़की भी तलाश करनी चाहिए हमें।

बेगम साहिबा ने हाशिम की तरफ देखते हुए आगा जान से कहा।

आपने दुरूस्त  फरमाया बेगम साहिबा ,और हम इस काम को अंजाम भी बहुत जल्दी दे देंगे।

हम हाशिम के लिए लड़की लगभग देख चुके हैं, आगा जान कुछ सोचते हुए मुस्कुरा कर बोले।

हां आपने लड़की हाशिम के लिए देख ली है, लेकिन एक बार हाशिम से भी उसकी पसंद के बारे में जानना बहुत जरूरी है।

बेगम साहिबा भी तिरछी निगाह करके हाशिम की तरफ ही देख रही थी।

नहीं बेगम साहिबा इसकी कोई जरूरत नहीं, हम बहुत अच्छी तरह से जानते हैं अपने छोटे नवाब को।

आगा जान उससे बहुत लाड करते थे क्योकी वो उनका सबसे बड़ा पोता था ,इसलिए वो प्यार से उसे छोटे नवाब कहकर बुलाते थे।

हमने एक बार जो उसके लिए फैसला कर लिया, हमें पक्का यकीन है कि उसे पर वह आंखें  बंद कर, उस बात को मान जाएगा ।

आगा जान बहुत ही खुश नजर आ रहे थे।

क्यों छोटे नवाब   हमने ठीक कहा ना?

आगा जान  ने हाशिम की तरफ देखते हुए कहा।

आगा जान आपका हर हुकुम मेरे सर आंखों पर, आप जो भी मेरे लिए फैसला करोगे मेरे लिए वह बेहतर रहेगा। 

हाशिम ने मुस्कुराते हुए आगा जान की बात का जवाब दिया।

हाशिम की वालिदा को उस पर बहुत फर्क महसूस हो रहा था।

कि उसने अपनी बात से ज्यादा आगाजान की बात को अहमियत दी थी।

हमें आपसे यही उम्मीद थी छोटे नवाब ,की आप हमारी बात को आंखें मून्द कर मान लेंगे। 

आगा जान ने कहा।

हाशिम सब घरवालों के लिए गिफ्ट लेकर आया था।

उसने सबको गिफ्ट दे दिए तीन गिफ्ट को छोड़कर।

यहां हॉल में सब लोग बैठे हुए बातें कर रहे थे ।

सब लोग एक दूसरे से बातों में मगन हो गए। 

हाशिम ने देखा सामने सोफे पर लाएबा और जेबा बैठी सब लोगो को बहुत दिलचस्प नजरो से घूर कर देख रही थी ।

हाशिम मुस्कुराता हुआ चल कर उनके नजदीक आ गया।

हाशिम ने पैक  किया हुआ गिफ्ट निकला, और लाएबा की तरफ बड़ाया। 

हाशिम ने नोट किया के सारे बड़े लोगों के दरमियान लाएबा और जेबा खामोशी बैठी थी। 

बस कोई बड़ा कुछ पूछ रहा था तो जवाब दे रही थी ।

उसके अलावा इस्माइल कर रही थी, लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी।

एक्सक्यूज मी मिस।

हाशिम ने लाएबा और जेबा के नजदीक आते हुए कहा।

जी,  वह दोनों मुस्कुराकर हाशिम की तरफ ही देख रही थी। 

अगर आप दोनों ख्वातिन की इजाजत हो तो मैं यहां पर बैठ सकता हूं।

उसने उन दोनों के पास बैठने का इशारा करते हुए कहा।

वह दोनों एक बड़े से सोफे पर बैठी हुई थी।

और उनके आमने-सामने घर के बुजुर्ग लोग बैठे हुए थे। 

जो एक दूसरे से बातों में मगन हो चुके थे।

यह भी कोई पूछने की बाई बात है हाशिम भाई, यह  आपकी हवेली है  जब चाहे ,जहां चाहे बैठ सकते हैं। 

लाएबा की जगह जेबा ने जवाब दिया।

हाशिम उन दोनों के बीच में बैठ गया था।

यह लीजिए यह गिफ्टस आप दोनों ख्वातिन के लिए हैं। हाशिम ने दोनों को बारी-बारी गिफ्ट देते हुए कहा।

अरे वाह हाशिम भाई थैंक यू वेरी मच।

जेबा गिफ्ट पाकर बहुत खुश हो गई थी।

बहुत-बहुत शुक्रिया हाशिम भाई, लेकिन इसकी क्या जरूरत थी।

  आप आ गए आपके आने से हम सबको बहुत खुशी महसूस हुई? 

लाएबा ने कहा।

काफी सालों बाद आपको सामने देखकर कुछ देर के लिए तो मैं आपको पहचान ही नहीं थी।

लाएबा हाशिम से मुखातिब  थी।

ओहह रियली ,क्या मैं इतना बदल गया, कि आप लोगों को पहचानने में दिक्कत हुई?

हाशिम ने कहा। 

जी हां हाशिम भाई आप पूरी तरह से बदल चुके हैं। 10 साल पहले हमने जिस हाशिम भाई को देखा था उससे आप एकदम अलग हो।

लाएबा ने कहा।

वैसे मेरी जानकारी के हिसाब से, मेरी एक और कजिन यहा मौजूद थी।

कहां गायब है वह मोहतरमा? हाशिम ने कंदील का जिक्र किया।

आप कंदील के बारे में पूछ रहे हैं ना।

वह तो इस वक्त अस्पताल में होती है।

लाएबा की जगह  जेबा ने जवाब दिया था।

मुझे लगता है, जैसा मैं उसे छोड़ कर गया था वह अभी भी वैसी है।

बिल्कुल बदली नहीं है, कंदील का सरापा एकदम से हाशिम की आंखों के आगे लहराने लगा।

क्या मतलब हाशिम भाई?

लाएबा समझी नहीं थी, कि हाशिम क्या कहना चाह रहा है?

  कुछ नहीं हाशिम ने बात को टालते हुए कहा।

क्योंकि वह नहीं बताना चाहता था ,कि कंदील और उनके बीच में? सुबह जो कुछ भी हुआ था।

उससे वह दोनों वाकिफ  नही थी।


हाशिम के चेहरे पर एक इस्माइल आ गई थी।


✅ Next Short Paragraph 



हाशिम बातों में मुस्कुराता रहा, लेकिन अंदर ही अंदर उसका दिल एक ही नाम पर आकर ठहर गया था—कंदील जफ़र।

जिससे मिलने के लिए वह खुद भी नहीं जानता था… कि वो बेताब है, या बेचैन।


अचानक उसके फोन की स्क्रीन चमकी—

“Kandeel: ICU – Condition Critical.”


हाशिम की मुस्कान उसी पल गायब हो गई।

हवेली की रौनक जैसे उसकी आंखों के सामने धुंधली पड़ गई…



और पहली बार उसके चेहरے पर डर साफ झलक रहा था—


क्या वो देर तो नहीं कर चुका?


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