Kandeel and Dr. Bakhsh: A Tale of Realization, Love & Betrayal
कंदील को अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि डॉक्टर समीर ऐसा कर सकता है।
कंदील ने कभी नहीं सोचा था कि डॉक्टर समीर उसके बारे में इस तरह से सोचता है ।
वह तो सिर्फ उसको अपना एक अच्छा दोस्त मानती थी। लेकिन वह तो हकीकत से उल्टा ही निकला ,उसने तो जाने क्या-क्या सोच लिया था?
कंदील को इस वक्त डॉक्टर समीर से बहुत नफरत महसूस हो रही थी।
कंदील को अपनी गलती का भी शिद्दत से एहसास हो रहा था।
इस वक्त डॉक्टर समीर के बुलाने पर कंदील बाहर चली गई थी।
कंदील की इन सोचो ने हीं उसे रात भर नहीं सोने दिया था।
टेन्ट में से हल्की-हल्की रोशनी दिखाई पड़ रही थी।
कंदील अपने बिस्तर से उठकर, टेन्ट के बहार जाने वाली रास्ते की तरफ आ गई।
जैसे वह टेन्ट थोड़ा सा बाहर निकली।
उसने देखा कि डॉक्टर बख्श कुर्सी से टेक लगाकर सो रहे थे।
उनकी गर्दन उनके कंधे पर ही टिकी हुई थी।
डॉक्टर बख्श को देखकर कंदील के होठों पर हल्की सी हंसी आ गई।
बहुत खूबसूरत मौसम हो रहा था, हल्की-हल्की सर्दी के साथ सुबह का।
कंदील को ठंड का एहसास हुआ तो, एक सेकंड की देरी किए बिना वह टेन्ट के अंदर गई।
और चादर उठा कर ले आई।
और वह चादर उसने, डॉक्टर बख्श को उड़ा दी।
क्योंकि डॉक्टर बख्श ऐसे ही सो रहे थे?
कंदील कुछ लम्हे अपने शौहर को यूं ही बिना पलक झपकाए देखती रही।
क्योंकि डॉक्टर बख्श पर कंदील का पूरा-पूरा हक था? वह शौहर थे कंदील के, इस बात का एहसास आज कंदील को हो रहा था।
कंदील के कानों में डॉक्टर बख्श की कही हुई रात की बात गूंजने लगी।
लोगों ने हमें यहां इस तरह देखा तो 10 तरह की बातें बनाएंगे लोग।
जो मेरे और तुम्हारे दोनों लिए के लिए बेहतर नहीं है।
हम दोनों ही ऐसी बातों को बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे।
कंदील ने उस चादर को फिर से डॉक्टर बख्श के सर पर उढा दिया।
फिर अपने टेंट की तरफ जाने लगी।
थोड़ी दूर आकर कंदील ने पीछे मुड़कर देखा।
डॉ बख्श अभी भी इस पोजीशन में बैठे हुए सो रहे थे।
वह अपने सर को झटक कर आगे बढ़ गई।
डॉ बख्श की आंख खुली तो वह हड़बड़ा कर उठे।
उन्होंने चारों तरफ देखा सुबह हो चुकी थी।
डॉक्टर बख्श को एहसास हुआ कि वह चादर ओढ़े हुए हैं।
उन्होंने चादर को दिखा, वो चादर को समेट कर चेयर से उठ गए।
और कंदील का ख्याल आते ही, अपने टेन्ट के अंदर गए। लेकिन टेन्ट में कंदील नहीं थी।
वह समझ चुके थे कि कंदील जा चुकी है।
और वह चादर को देखकर मुस्कुराने लगे ।
क्योंकि वह समझ चुके थे, ये चादर उन्हें कंदील ही उड़ा कर गई है?
कंदील जब 10th के अंदर दाखिल हुई। तो सबसे पहले उसने अपना मोबाइल उठा कर देखा।
उस मोबाइल में, कॉफी मिस्ड कॉल थी डॉक्टर समीर की।
कंदील ने बिना देर किए डॉक्टर समीर के फोन को ब्लैकलिस्टेड कर दिया।
और फ्रेश होने के लिए चली गई। क्योंकि 10:00 बजे तक सबको?
कैंप के बाहर अपनी ड्यूटी ज्वाइन करनी थी।
अगर 1 मिनट भी लेट हो जाते, तो डॉक्टर बख्श बहुत नाराज हो जाते हैं।
सारे ही डॉक्टर्स अपने टाइम से पहले ही अपनी ड्यूटी पर आ गए थे।
सब डॉक्टर्स ने नोट किया कि आज डॉक्टर बख्श का मूड काफी अच्छा था।
वह सबसे ही मुस्कुरा कर बात कर रहे थे।
आमतौर पर ऐसा बहुत कम होता है ,के डॉक्टर बख्श सबसे मुस्कुरा कर बात करते हो।
लिहाजा सबके लिए शॉक्ड करने वाली बात थी।
के डॉक्टर बख्श सबसे मुस्कुरा कर बात कर रहे थे।
कैंप मे सारे मरीजों को बहुत अच्छे से चेक किया जा रहा था? और उन मरीजों का ट्रीटमेंट भी अच्छी तरीके से किया जा रहा था।
सभी डॉक्टर अपने-अपने काम में बिजी थे।
बहुत गहरी चोट लगी है आपको, कैसी लगी इतनी गहरी चोट।
कंदील उस लेडी का जख्म साफ कर रही थी, जिसके सर पर गहरी चोट लगी थी।
वह डॉक्टर साहिबा मै।
यह बर्तन धोते में पानी पर पैर पड़ने से फिसल गई थी। जिससे इसके माथे पर गहरा जख्म हो गया।
वह लेडी कुछ बोलना चाह रही थी उससे पहले ही उसके हस्बैंड ने उसको रोकते हुए कहा।
यह बहुत गहरा जख्म है ,यह किसी चीज के मरने से लगा है गिरने से इतना गहरा जख्म नहीं होता है।
कंदील ने उसके शौहर से कहा।
अरे मैडम आप अपना काम कीजिए ,ना मैंने कहा ना यह गिर गई थी ।
जिसकी वजह से इस चोट लग गई ,अब जख्म हमे बाता कर गहरा तो नही लगता है?
उसके शौहर ने कहा।
कंदील ने निगाह बिगड़ते हुए उसके शौहर को दिखा।
फिर एक नजर उस लेडी पर डाली।
उस लेडी के माथे के अलावा भी चेहरे पर कई नील पड़े हुए थे।
जो गिरने की वजह से हरगिज़ नहीं पढ़ सकते थे।
कंदील ने उसकी ड्रेसिंग की, पर्चे पर कुछ दवाइयां लिखकर उसके शौहर को दे दिया।
यह दवाइयां से इनको देते रहिएगा, इससे इनका जख्म सूख जाएगा।
कंदील ने मुस्कुरा कर कहा।
उसका शौहर उस लेडी को पकड़ के ले जाने लगा।
वह लेडी बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी।
ऐसा लग रहा था कि वह कंदील को कुछ कहना चाहती हो।
कंदील सर को झटक कर सारे पेशेंट की रिपोर्ट तैयार करने लगी।
क्योंकि जितने पेशेंट का ट्रीटमेंट हुआ था वह सब डॉक्टर बख्श को दिखाना बहुत जरूरी था?
और लगभग कंदील का काम पूरा हो चुका था।
वह सारे पेपर्स को फाइल में रखकर डॉक्टर बख्श की तरफ जाने लगी।
एक खुले हुए मैदान में 10th लगाकर पेशेंट का ट्रीटमेंट चल रहा सारे पेशेंट का ट्रीटमेंट चल रहा था और पेशेंट को दवाई वगैरह दी जा रही थी।
सॉरी डॉक्टर की केबिन भी अलग-अलग बने हुए थे। जो भी जिस चीज का स्पेशलिस्ट था।
कंदील जब डॉक्टर बख्श के केबिन में गई, तो डॉक्टर बख्श पेशेंट का ट्रीटमेंट कर रहे थे।
कुछ पेशेंट उनके केबिन में मौजूद थे।
कंदील ने बाहर से ही आवाज लगाकर कहा ।
मैं आई कम इन सर
यस कमिंग
कुछ सेकेंड के बाद आवाज आई।
कंदील अंदर की तरफ आ गई, डॉक्टर बख्श पेशेंट को देखने में और उनका ट्रीटमेंट करने में मसरूफ थे।
कंदील खामोश खड़ी होकर, उनके फ्री होने का इंतजार करने लगी।
डॉ खान उनकी यह सारी जाचे अभी की अभी करना बहुत जरूरी है।
डॉ बक्श ने डॉ खान से कहा।
ओ के सर डॉ खान ने डॉक्टर बॉक्स के हाथ से पर्चा लिया और गर्दन को हां में हिलाया।



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