“डॉ बख्श और कंदील की अधूरी मोहब्बत — जब इज़हार ने सब कुछ बदल दिया”
ओ के ,सर डॉ खान ने डॉक्टर बख्श के हाथ से पर्चा लिया और गर्दन को हां में हिलाया।
और दरवाजे की तरफ जाने के लिए आगे बढ़े।
कंदील ने जैसे ही डॉक्टर खान को देखा, तो उसने उन्हें देखकर स्माइल किया।
डॉ खान ने भी जवाब में कंदील को देखकर स्माइल किया। और बाहर की तरफ चले गए।
वह बुजुर्ग पेशेंट भी डॉक्टर खान के पीछे-पीछे ही चला गया। अब डॉक्टर बख्श फारिग हो चुके थे, डॉ बख्श की निगाह कंदील की तरफ गई।
कंदील ने भी डॉक्टर बख्श की तरफ देखा, और अपने पेपर्स लेकर डॉक्टर बख्श के पास जाने लगी।
डॉक्टर बख्श,सर इसमें सारे पेशेंट की डिटेल मौजूद है।
कंदील ने फाइल डॉक्टर बख्श की तरफ बढ़ते हुए कहा। डॉक्टर बख्श ने खामोशी से कंदील के हाथों से वह फाइल ले ली, और उसे चेक करने लगे।
डॉ बख्श बहुत ही ध्यान से उस फाइल को पढ़ रहे थे।
वेरी गुड कंदील ,आपकी रिपोर्ट्स परफेक्ट है।
मुझे उम्मीद नहीं थी, कि आप इतनी अच्छी तरह से सारे पेशेंट का ट्रीटमेंट करेंगी।
डॉ बख्श कंदील को देखकर मुस्कुराए रहे थे।
कंदील की समझ में नहीं आया, डॉक्टर बख्श ने उसकी बेइज्जती की है या तारीफ की है।
लगता है सबसे ज्यादा आप पर मेरी पनिशमेंट का असर हुआ है कंदील।
मेरी पनिशमेंट के डर से आप सुधरती जा रही हैं।
डॉक्टर बख्श बहुत गौर से कंदील को देख रहे थे।
कंदील ने कुछ नहीं कहा बस खामोश बैठकर।
डॉक्टर बख्श को देखने लगी।
कंदील एक सवाल करूं आपसे मैं।
अचानक से डॉक्टर बख्श ने कहा।
जी सर , कंदील बोली।
रात को आपकी जो हालत थी ,उस वक्त मुझे ठीक नहीं लगा आपसे पूछना।
क्योकी उस वक्त आप बहुत बुरी तरह डर गई थी।
मगर मैं आपसे यह पूछना चाहता हूं।
क्योंकि यह पूछने का मेरा पूरा-पूरा हक है?
और मेरा हक आप पर क्यों है वो आप अच्छी तरह जानती हैं?
डॉ बक्श ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा।
क्लियर बात कहीए डॉक्टर बख्श,जो आपको पूछना है। कंदील को उनकी बात समझ नहीं आ रही थी।
कि वह क्या कहना चाह रहे हैं?
आप इतनी रात में डॉक्टर समीर ,के साथ टेन्ट के बाहर क्यों थी?
इस बात का जवाब चाहिए मुझे।
डॉक्टर बख्श बहुत गौर से कंदील को देख रहे थे।
डॉ बख्श,डॉ समीर ने मुझसे कहा था ,कि उन्हें बहुत जरूरी कोई बात करनी है।
इसलिए मैं अभी के अभी टेन्ट के बाहर आ जाऊं, कंदील बोली।
वह यार कंदील, डॉक्टर समीर ने तुमसे कहा ,कि अभी के अभी कोई जरूरी बात करनी है ,तुमसे।
तो तुम उनके कहने पर आधी रात को अपने टेंट से बाहर चली गई।
डॉक्टर बख्श ने थोड़ा तेज आवाज में कहा था।
क्योंकि उन्हें कंदील की बेवकूफी पर गुस्सा आ रहा था?
क्या डॉक्टर समीर को सुबह होने का इंतजार नहीं था? या आपने उनसे यह नहीं कही थी।
सुबह तक वेट करो मेरा,हमें जरूरी बात सुबह को कर सकते हैं।
डॉ बख्श ने कहा।
सैफ
मैने डॉक्टर समीर को कहा था, कि जो जरूरी बात है हम कल सुबह भी कर सकते हैं।
इस वक्त मेरा आपसे टेन्ट के बाहर मिलना मुनासिब नहीं है।
मगर डॉक्टर समीर ,ने मुझे रिक्वेस्ट की तो मजबूरन मुझे टेन्ट के बाहर आना पड़ा।
कंदील ने अपनी नजरों को नीचे करते हुए कहा।
इस वक्त वह खुद को डॉक्टर बख्श के आगे मुजरिम समझ रही थी।
तो मिसेज बख्श,मुझे बताइए क्या थी ,वह जरूरी बात थी।
जो डॉक्टर समीर, को आधी रात को आपको टेंट से बाहर बुलाकर करनी थी।
मुझे इस बात का जवाब चाहिए?
डॉ बख्श अपनी जगह से उठ चुके थे।
कंदील ने देखा कि उन्हें बहुत तेज गुस्सा आ रहा था।
वो वो, डॉक्टर बख्श कंदील, के समझ नही आ रहा था वो डॉक्टर समीर, के प्रपोज वाली बात डॉक्टर बख्श को कैसे बताए।
जवाब दीजिए मुझे मिसेज बख्श, डॉक्टर बख्श दोबारा बोले।
डॉ समीर ने मुझे प्रपोज किया था।
कंदील ने यह कहकर अपनी गर्दन को बिल्कुल नीचे झुका लिया था।
डॉ समीर की हिम्मत कैसे हुई, मेरी बीवी को प्रपोज करने की?
डॉक्टर बख्श ने अपनी मेज पर तेज गुस्से में हाथ मारते हुए कहा।
एक जेंट्स कैसे बर्दाश्त कर सकता है।
उसकी बीवी को कोई दूसरा शख्स प्रपोज करें?
आई एम सॉरी सैफ, लेकिन मैं नहीं जानती थी।
उनके मन में क्या चल रहा है, और वह क्या कहने वाले हैं?
हम दोनों में तो बस एक कैजुअल सी दोस्ती थी।
तो उन्होंने दोस्ती को क्या नाम दे दिया ,मैं नहीं समझ सकती इस बात को?
कंदील बोली।
कंदील को इस वक्त डॉक्टर बख्श के गुस्से से बहुत डर लग रहा था।
डॉक्टर बख्श, अपनी जगह से उठकर आए और कंदील के बिल्कुल सामने खड़े हो गए।
उन्होंने कंदील को कंधों से पड़कर उठाया।
मिसेज बख्श ,आप मेरी कोई गर्लफ्रेंड या मंगेतर नहीं हो।
मेरी लीगल वाइफ और मेरे घर की इज्जत हो।
तो अगर मेरे घर की इज्जत के साथ ,मेरी वाइफ के साथ कोई इतनी घिनौनी हरकत करेगा।
तो मुझसे कैसे बर्दाश्त होगा यह सब कुछ?
डॉक्टर बख्श , अब थोड़ा नरम पड़ चुके थे।
अगर कल मैं ठीक वक्त पर नहीं पहुंच जाता।
कंदील, मेरी तो ये सोच कर ही जान निकल रही।
है तुम्हारे साथ क्या हो सकता था?
डॉक्टर बख्श बोले।
तुम मेरी रिस्पांसिबिलिटी हो कंदील मेरी मोहब्बत हो तुम। तुम खुद भी इस बात को नहीं जानती हो, कि मैं तुमसे कितनी मोहब्बत करता हूं।
डॉ बक्श ने कंदील, को अपने थोड़ा नजदीक करते हुए कहा।
और यह लफ्ज सुनकर कंदील खुद में सिमटने लगी थी।
उसे इस वक्त डॉक्टर बख्श से बहुत ही शर्म महसूस हो रही थी।
कंदील कब तक मुझे यूं ही सजा देती रहोगी?
जो एग्रीमेंट तुम्हारी मर्जी से हुआ था उसकी भी मेआद पूरे हो चुकी है।
अब तो रुखसत होकर मेरे घर आ जाओ मेरी दुल्हन बनाकर।
डॉक्टर बख्श ने कन्दील की थोड़ी को थोड़ा ऊपर करते हुए कहा।
मैं अधूरा हूं तुम्हारे बगैर कंदील।
कुछ मायने नहीं मेरी जिंदगी के तुम्हारे बिना।
डॉ बक्श ने अपने माथे को कंदील के माथे से जोड़ते हुए कहा।
ईजाजत चाहता हूं मैं तुमसे कंदील।
डॉक्टर बख्श के लफ्ज इस वक्त कंदील के कानों में। जादू। जैसा काम कर रहे थे।
किस चीज की ईजाजत, कंदील की आवाज बहुत ही धीमी निकली थी।
बहुत कन्फ्यूज हो रही थी कंदील डॉक्टर बख्श को इतने नजदीक पाकर।
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