"डॉ. कंदील की आख़िरी ड्यू. सामाजिक कहानी 2. महिला सशक्तिकरण 3. इंसानियत की मिसाल 4. दर्द और हिम्मत 5. डॉक्टर कंदील 6. भावनात्मक कथा 7. यथार्थ आधारित कहानी 8. प्रेरणादायक कहानीटी: जब एक पेशेंट ने उसकी सोच बदल दी"




 गरीबों के लिए लगाए गए कैंप का आज लास्ट डे था।

सभी डॉक्टर्स अपने काम को अंजाम दे रहे थे।

और सभी डॉक्टर्स ने अपना बेस्ट देने की पूरी पूरी कोशिश की थी।

डॉ बक्श ने सारे डॉक्टर्स के काम की तारीफ की थी।

अब यहां से चलने का वक्त आ चुका था।

सारे डॉक्टर्स बस में बैठ चुके थे।

और डॉक्टर बख्श अपनी गाड़ी में बैठे हुए थे।

सिर्फ कंदील का आना बाकी था , उसके टेन्ट में इस वक्त कई पेशेंट मौजूद थे।

लिहाजा वो उनको  ट्रीटमेंट कर रही थी।

तभी कंदील के फोन पर डॉक्टर इकरा की कॉल आई। कंदील ने फोन को रिसीव किया।

डॉक्टर कंदील कहां रह गई हैं ,आप सारे डॉक्टर्स आप का वेट कर रहे हैं?

जल्दी आईए नहीं तो हम लेट हो जाएंगे।

डॉ इकरा ने कहा।

बस डॉक्टर एक लास्ट पेशेंट  रह गया है उसका ट्रीटमेंट और कर दू।

ये कह कर कंदील ने फोन को कट कर दिया।

और वह अपने लास्ट पेशेंट को देखने लगी।

कंदील  लास्ट पेशेंट का ट्रीटमेंट करके,  उठी और बाहर की तरफ जाने के लिए आगे बड़ी।

तभी एक लेडिस रोते हुए अंदर आई साथ में एक जेंट्स भी था।

वह शायद उसका हस्बैंड था।

उसके रोने की आवाज से कंदील के पैर वहीं रुक गए थे।

उस लेडी के हाथ  और माथे से खून बह रहा था।

डॉ साहिबा जी मेरी घरवाली को देख लीजिए।

किचन  मे फिसल कर  गिरने से इसकी चोट लग गई तो खून बह रहा है।

जेंट्स ने कहा।

कंदील ने अपने जहन पर जोर डाला, तो उसे याद आया कि यह पेशंट परसों भी आई थी।

और परसों भी इसका हस्बैंड, यही बोल रहा था कि फिसल कर गिर गई है तो उसके चोट लग गई है।

ठीक है आप बाहर 2 मिनट वेट कीजिए मैं उनकी ड्रेसिंग करती हूं।

कंदील ने उस जेन्स से कहा।

नहीं नहीं डॉक्टर साहिबा आप मेरे सामने ही इसके पट्टी बंधिऐ ह मैं इसका हस्बैंड हूं।

उसे जेंट्स ने कहा।

आपके कुछ समझ नहीं आता क्या,मैने आपसे कहा  बाहर जाइए?

और मुझे इनका ट्रीटमेंट करने दीजिए।

उस जेंट्स की बातों  से कंदील को गुस्सा आ गया था।

ठीक है मैं बाहर जाता हूं।

लेकिन आप जल्दी ही इसको पट्टी कर देना।

उस  शख्स ने कहा ,और अपनी बीवी की तरफ घुर्राता हुआ  बाहर चला गया।

कंदील ने उस लेडी के जख्मों का साफ किया, हाथ और सर के अलावा भी उस लेडी के अंदरूनी चोट लगी हुई थी।

जो फिसल के गिरने से नहीं लग सकती थी।

ऐसा लग रहा था किसी ने उस लेडी को मारा है।

आपकी ये चोट कैसे लगी?

कंदील उसके सर पर ड्रेसिंग कर रही थी ।

तब उसने पूछा।

वह डॉक्टर साहिबा।

किचन में काम कर रही थी ,पानी पर पैर पड़ा ,तो फिसल कर गिर गई।

उस लेडी ने कहा।

प्लीज आप डरिए मत और झूठ बोलने की बिलकुल जरुरत नहीं  है ।

यह चोट जो आपके लगी हैं, यह गिरने से नहीं लगी है।

यह किसी के मारने से नही लगी है।

मैं डॉक्टर हूं और अच्छी तरह से जानती हूं।

कि गिरकर चोट कैसे लगती है।

और मारने से चोट किस तरह से लगती है।

ये अच्छी तरह जानती हू मै।

आप को अंदरुनी चोटे भी लगी है?

कंदील ने कहा, नहीं नहीं डॉक्टर साहिबा  मेरे शौहर ने मुझे नहीं मारा है।

अचानक से उस लेडी के मुंह से निकल गया।

अच्छा तो इसका मतलब आपके शौहर ने आपको मारा है।

कंदील के माथे पर बल पड़ गए थे।

नहीं डॉक्टर साहिबा मुझे किसी ने नहीं मारा।

खुदा के लिए आप यह लफ्ज अपने मुंह से मत कहिए।

अगर मेरे घर वाले को यह पता चल गया ,कि मैंने आपसे यह कहा है कि मेरे शौहर ने मुझे मारा है।

तो वो मुझे जान से मार देगा।

आपको खुदा का वास्तव डॉक्टर साहिबा , उनसे कुछ मत कहिएगा।

वह लेडिस कंदील के हाथ जोड़ने लगी।

रिलैक्स हो जाओ मैं कुछ नहीं कहूंगी।

कंदील को बहुत तरस आया था उस लेडी पर।

लेकिन अगर तुम्हारा शौहर तुम्हें मारता है, तो तुम उसकी पुलिस कंप्लेंट कर सकती हो।

कि वह तुम्हें क्यों मारता है?

कंदील  ने कहा।

नहीं नहीं डॉक्टर साहिबा मेरे शौहर  मुझे मारता है ,लेकिन मेरा सब कुछ वहीं है।

वह मेरा ख्याल भी रखता है।

और मेरे शौहर के अलावा मेरा कोई नहीं है।

उस लेडी ने कहा।

कंदील को उसकी बातों में बहुत बेबसी महसूस हो रही थी।

हो गई पट्टी डॉक्टर साहिबा।

अचानक से वह ,उसका शौहर अंदर आ गया था।

जी हां हो गई पट्टी कंदील ने कहा।

फिर ठीक है मैं अपनी घरवाली को अपने साथ ले जा रहा हूं। उस  शख्स ने कहा।


ठीक है इन्हे अपने साथ ले जाइए।

लेकिन इनका बहुत ख्याल रखिएगा।

क्योंकि इतनी जल्दी-जल्दी गिरने से इनको और दूसरी तकलीफ हो सकती है?

कंदील ने उस लेडी के शौहर से कहा।

हां डॉक्टर साहिबा ठीक है ,मुझे पता है इसका कितना ख्याल रखना है।

उसके शौहर ने कहा ,और उसे कंधों से पकड़ कर अपने साथ ले जाने लगा।

वह लेडी आगे बढ़ रही थी, उसने दो-तीन बार पीछे मुड़कर कंदील की तरफ देखा।

जैसे रिक्वेस्ट कर रही हो, कि किसी से कुछ कहने की कोई जरूरत नहीं है।

कंदील उसको जाते हुए देखने लगी ।

जब तक वो आंखों से ओझल नहीं हो गई?

बड़े अजीब सी बात है ना, कि इतना जुल्म सहने के बाद भी कंदील सोचने लगी इस बात पर।


एक लेडी बहुत कुछ सहती है, फिर भी अपने शौहर के ऊपर आच तक नहीं आने देती।

उसका शौहर उसके लिए सब कुछ होता है।

आज यह बात कंदील बहुत गहराई से सोचने लगी थी।

उसके जहन में बार-बार यही बात आ रही थी।

जो उस लेडी ने कही थी।

कि मेरा सब कुछ मेरे शौहर ही हैं।

भले वह मुझे मारते हैं ,लेकिन मेरा ख्याल भी वह वही रखते हैं।

और जाने क्या-क्या सोचने लगी थी।

  कंदील के फिर से उसका फोन बजने लगा।

उसने फोन उठाया तो डॉक्टर इकरा की ही कॉल थी।

जी डॉक्टर इकरा।

फोन रिसीव करते ही कंदील ने कहा।

कंदील यार कहां रह गई तुम ।

फिर से बस मिस करने का इरादा है क्या?

लगता है कि आज भी तुम डॉक्टर बख्श के साथ ही वापस जाओगी।

  इकरा उस को छेड़ रही थी।

नहीं नहीं डॉक्टर इकरा ऐसी कोई बात नहीं।

मैं बस आ ही रही हूं।

कंदील ने अपना बैग अपने कंधे पर डाला।

और जल्दी-जल्दी टेन्ट से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी।

  कंदील बहुत तेज चल रही थी, वह सोच रही थी ,कि कही इस बार भी ऐसा ना हो।

  उसकी बस मिस हो जाए।

और फिर से उसे डॉक्टर बख्श के साथ सफर करना पड़े डॉक्टर  बक्श का ख्याल आते ही कंदील के होठों पर मुस्कुराहट आ गई








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आगे की झलक:


टेन्ट से निकलते वक्त कंदील के दिल में एक अजीब बेचैनी थी।

वो लेडी की डरी हुई आँखें उसके जहन से निकल ही नहीं रही थीं।

कंदील बस की तरफ बढ़ तो रही थी, मगर उसके कदम रुक-रुक जा रहे थे —

जैसे उसका दिल उसे बार-बार वहीँ लौट जाने को कह रहा हो।


बस तक पहुँचते ही उसने दूर से देखा —

डॉ. बख्श गाड़ी में बैठे किसी रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ रहे थे।

उनकी नज़र जैसे ही कंदील पर पड़ी, वो हल्के से मुस्कुराए…

पर कंदील के चेहरे की गंभीरता देखकर उनका चेहरा भी बदल गया।




"सब ठीक तो है डॉ. कंदील?"

डॉ. बख्श ने पूछा।


कंदील कुछ पल चुप रही —

फिर धीमे स्वर में बोली,

“काश… हर औरत को ऐसा दर्द समझने वाला कोई होता, डॉ. बख्श।”


बस स्टार्ट हुई, लेकिन कंदील का दिल वहीं उस टेन्ट में अटका रह गया…

जहाँ एक औरत अपने ज़ुल्म को “फिसल कर गिरना” कहकर छुपा रही थी।



---jari



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